ललित कला एवं संगीत विभाग में लोक चित्रकला विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग में लोक चित्रकला विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमे भारत के जानेमाने लोक चित्रकार प्रोफेसर राम शबद सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए । कार्यक्रम के आरम्भ में विभागाध्यक्ष प्रोफसर उषा सिंह ने मुख्य अतिथि का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया । प्रोफेसर शबद ने लोक कला की बारीकियों से छात्र, छात्राओं को अगवगत कराते हुए कहा कि हमारे देश की लोक कला कि परंपरा अत्यंत ही प्राचीन हैं लोक कला हमारे देश का गौरव रहा है । अपने जीवन की चित्रकला यात्रा को साझा करते हुए बताया कि लोक कला की प्रेरणा उन्हें मधुबनी कला से मिली । मधुबनी चित्रकला में उपयोग होने वाली छोटे-छोटे चिन्ह उनके महत्व, उनमें प्रयुक्त होने वाले रंग अत्यंत ही मनमोहक है । मधुबनी के साथ-साथ सांझी,मंडाना, चौका पूरना एवं उत्तर प्रदेश की अन्य लोक कलाओं का भी उनपर गहरा प्रभाव पड़ा। इन सभी लोक कलाओं का सम्मिश्न करते हुए उन्होंने अपनी नई कला शैली को विकसित किया। उन्होंने कहा कि कलाकार को अपनी शैली का विकास करना अत्यंत आवश्यक है जिससे कलाकार की अपनी पहचान बनती है । विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उषा सिंह ने प्रोफेसर राम शबद जी का धन्यवाद देते हुए कहा कि लोक चित्रकला पर आधारित यह कार्यशाला छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत ही उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध होगा इससे निश्चित रूप से कला के विद्यार्थियों को लोक चित्रकला की बारीकियों को समझने और देखने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है जिससे वह अपनी कला को और भी बेहतर बना सकते हैं । कार्यक्रम का संचालन डॉ गौरीशंकर चौहान ने किया। इस अवसर पर इस अवसर पर डॉ प्रदीप कुमार साहनी, डॉक्टर प्रदीप राजोरिया तथा शोध छात्र विष्णु देव शर्मा, देवानंद गुप्ता, प्रगति चौधरी, कीर्ति वर्मा, जैनेंद्र सिंह तथा अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे ।

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