- 30 सूत्रीय मांगों को लेकर साकेत महाविद्यालय के शिक्षकों का दूसरे दिन भी प्रदर्शन, 5 नवंबर को जिलाधिकारी को सौंपेंगे ज्ञाप
अयोध्या। शिक्षकों के अधिकारों, सम्मान, सेवा शर्तों और हितों से जुड़ी 30 सूत्रीय मांगों को लेकर साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या के शिक्षकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। फुपुक्टा के आह्वान एवं ऑक्टा के दिशा-निर्देश पर महाविद्यालय के शिक्षकों द्वारा शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन के तहत महाविद्यालय के स्थायी एवं अस्थायी शिक्षकों ने अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया और शांतिपूर्ण तरीके से शासन के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी मांगें केवल व्यक्तिगत हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की गरिमा, शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली और शिक्षा के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
शिक्षक संगठनों की ओर से चलाया जा रहा यह आंदोलन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों के समाधान की अपेक्षा की जा रही है, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आने के कारण उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित करना नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन का ध्यान उन मुद्दों की ओर आकर्षित करना है, जिनका सीधा संबंध शिक्षकों के अधिकारों, सम्मान और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से है। इसी उद्देश्य से शिक्षक काली पट्टी बांधकर अपने नियमित शिक्षण कार्य के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
**दूसरे दिन भी शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध**
मंगलवार को साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में सुबह से ही विरोध प्रदर्शन का माहौल दिखाई दिया। महाविद्यालय के शिक्षकों ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार काली पट्टी बांधकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। इस दौरान शिक्षकों ने अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए विरोध दर्ज कराया। स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता ने आंदोलन को व्यापक समर्थन प्रदान किया। शिक्षकों का कहना था कि जब तक उनकी 30 सूत्रीय मांगों पर शासन की ओर से गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक किसी भी समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला होते हैं। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और बेहतर भविष्य की दिशा प्रदान करने का महत्वपूर्ण दायित्व शिक्षकों के कंधों पर होता है। ऐसे में शिक्षकों के अधिकारों, सेवा संबंधी सुविधाओं और सम्मान से जुड़े विषयों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यदि शिक्षक स्वयं विभिन्न समस्याओं से जूझते रहेंगे, तो उसका प्रभाव शैक्षणिक वातावरण और उच्च शिक्षा संस्थानों की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है। इसलिए शिक्षकों की जायज मांगों का समाधान करना शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराना उनकी एकजुटता और असंतोष का प्रतीक है। यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित किया जा रहा है। शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हुए शासन तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं। उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों और शिक्षकों को अपनी समस्याएं तथा मांगें संबंधित अधिकारियों एवं शासन के समक्ष रखने का अधिकार है। इसी अधिकार का प्रयोग करते हुए शिक्षक संगठन प्रदेश स्तर पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
4 नवंबर को भी जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन
आंदोलन के निर्धारित कार्यक्रम के तहत 4 नवंबर को भी साकेत महाविद्यालय के शिक्षक सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इस दौरान शिक्षक नियमित शिक्षण कार्य करते हुए आंदोलन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। संगठन की ओर से सभी शिक्षकों से निर्धारित समय पर उपस्थित रहकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की गई है।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने का उद्देश्य शिक्षकों की एकजुटता को मजबूत करना और उनकी मांगों को व्यवस्थित ढंग से शासन तथा प्रशासन तक पहुंचाना है। लगातार दो दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षकों ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वे अपने अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर हैं तथा उनके समाधान के लिए संगठित प्रयास जारी रखेंगे।
शिक्षकों के अनुसार, 30 सूत्रीय मांगों के सभी बिंदुओं पर सकारात्मक पहल होना आवश्यक है। इन मांगों को लेकर प्रदेश स्तर पर शिक्षक संगठनों की ओर से आवाज उठाई जा रही है। साकेत महाविद्यालय के शिक्षकों ने भी इस अभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए आंदोलन को मजबूती प्रदान करने का संकल्प जताया है। उनका कहना है कि जब तक संबंधित मांगों पर ठोस निर्णय की दिशा में पहल नहीं होती, तब तक संगठन की ओर से निर्धारित कार्यक्रमों में सहभागिता जारी रखी जाएगी।
5 नवंबर को तीनों अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षक होंगे एकजुट
आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण 5 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इस दिन अयोध्या जनपद के तीनों अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षक एक मंच पर एकत्रित होकर अपनी 30 सूत्रीय मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ढोढेराम पीजी कॉलेज, सेवरा तथा मनूचा गर्ल्स डिग्री कॉलेज के शिक्षक साकेत महाविद्यालय परिसर में एकत्रित होंगे। यहां से सभी शिक्षक सामूहिक रूप से अपनी मांगों को लेकर आगे की कार्रवाई करेंगे।
इस कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के शिक्षकों की समस्याओं, अधिकारों और 30 सूत्रीय मांगों को शासन के समक्ष रखा जाएगा। शिक्षक संगठनों का मानना है कि सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपने से उनकी मांगों को प्रभावी ढंग से प्रशासन तक पहुंचाया जा सकेगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षक अपने अधिकारों और हितों को लेकर एकजुट हैं।
शिक्षकों का कहना है कि अलग-अलग महाविद्यालयों में कार्यरत होने के बावजूद उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं में व्यापक समानता है। इसलिए इन मुद्दों के समाधान के लिए अलग-अलग प्रयास करने के बजाय सामूहिक रूप से आवाज उठाना अधिक प्रभावी होगा। तीनों अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों का एक मंच पर आना इसी एकजुटता का परिचायक होगा। शिक्षकों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाला ज्ञापन उनकी मांगों पर शासन का ध्यान आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
5 नवंबर के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शिक्षक संगठनों की ओर से व्यापक स्तर पर संपर्क और संवाद किया जा रहा है। शिक्षकों से अपील की जा रही है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि आंदोलन की सफलता के लिए सदस्यों की सक्रियता और सामूहिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
30 सूत्रीय मांगें उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय
मंगलवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने 30 सूत्रीय मांगों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों एवं हितों से संबंधित ये मांगें केवल किसी एक महाविद्यालय, एक शिक्षक या किसी एक संगठन तक सीमित नहीं हैं। इनका संबंध प्रदेश की संपूर्ण उच्च शिक्षा व्यवस्था और उसमें कार्यरत शिक्षकों के भविष्य से है। इसलिए इन मांगों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने और उनके समाधान के लिए गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा का स्तर तभी बेहतर बनाया जा सकता है, जब शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों को उचित सम्मान, अधिकार और बेहतर कार्य वातावरण मिले। शिक्षक विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनके हितों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज हमेशा अपने दायित्वों के प्रति सजग रहा है। सीमित संसाधनों और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद शिक्षक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले बदलावों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना, विद्यार्थियों की शैक्षणिक समस्याओं का समाधान करना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए मार्गदर्शन देना शिक्षकों की जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसके बावजूद यदि शिक्षकों की अपनी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो यह चिंता का विषय है।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक व्यवस्था की मजबूती केवल भवनों, संसाधनों और योजनाओं से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे कार्य करने वाले शिक्षकों की स्थिति और संतुष्टि भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। शिक्षकों को यदि उनके अधिकारों और हितों के अनुरूप सुविधाएं मिलती हैं, तो वे अधिक सकारात्मक वातावरण में अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं। इसलिए 30 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार करना प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में आवश्यक है।T
शिक्षक संगठनों ने एकजुटता को बताया आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत
विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने शिक्षकों से संगठनात्मक एकता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी एकजुटता, अनुशासन और निरंतरता पर निर्भर करती है। यदि शिक्षक अपने अधिकारों और हितों के लिए एक मंच पर एकत्रित होकर संगठित तरीके से आवाज उठाते हैं, तो उनकी समस्याओं को शासन और प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रखा जा सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। 30 सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए सभी शिक्षकों की सहभागिता जरूरी है। चाहे कोई शिक्षक स्थायी पद पर कार्यरत हो या अस्थायी रूप से अपनी सेवाएं दे रहा हो, शिक्षा व्यवस्था में प्रत्येक शिक्षक का योगदान महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी को इस आंदोलन में अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठनों की मजबूती केवल पदाधिकारियों या नेतृत्व से नहीं होती, बल्कि संगठन से जुड़े प्रत्येक सदस्य की सक्रियता और विश्वास से होती है। जब सदस्य किसी साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं, तो उनकी आवाज अधिक प्रभावी बनती है। यही कारण है कि वर्तमान आंदोलन को व्यापक समर्थन देने और निर्धारित कार्यक्रमों में अधिक से अधिक शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान अनुशासन और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। विरोध का उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति के विरुद्ध वातावरण तैयार करना नहीं, बल्कि शिक्षकों की जायज मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से शासन तक पहुंचाना है। काली पट्टी बांधकर विरोध जताना इसी शांतिपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा है।
लोकतांत्रिक तरीके से शासन तक पहुंचाई जा रही मांगें
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार तक पहुंचाने के अनेक संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध हैं। ज्ञापन देना, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और संगठित तरीके से अपनी बात रखना इन्हीं माध्यमों का हिस्सा है। शिक्षक संगठन भी इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन का उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि संवाद और सकारात्मक पहल के माध्यम से समस्याओं का समाधान प्राप्त करना होना चाहिए। शिक्षकों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर शासन की ओर से गंभीरता से विचार किया जाएगा और संबंधित विषयों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान और उनके अधिकारों की सुरक्षा किसी भी सभ्य समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात तभी सार्थक होगी, जब शिक्षकों की समस्याओं और अपेक्षाओं को भी समान महत्व दिया जाएगा। शिक्षकों के हितों की रक्षा से न केवल उनका मनोबल मजबूत होगा, बल्कि विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
प्रमुख शिक्षक पदाधिकारियों ने रखे विचार
मंगलवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान शिक्षक संगठनों के कई प्रमुख पदाधिकारियों ने शिक्षकों को संबोधित किया। इस अवसर पर फुपुक्टा के संयुक्त मंत्री डॉ. रवि कुमार चौरसिया ने शिक्षकों की एकजुटता और संगठनात्मक सक्रियता को आंदोलन की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारों और हितों से जुड़े विषयों पर सामूहिक प्रयास ही प्रभावी परिणाम की दिशा तैयार कर सकते हैं।
ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. जनमेजय तिवारी ने भी आंदोलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षकों की 30 सूत्रीय मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे निर्धारित कार्यक्रमों में पूरी सक्रियता के साथ शामिल हों और संगठन की एकजुटता को मजबूत बनाए रखें।
ऑक्टा महामंत्री प्रो. अमूल्य कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सभी को एक साथ आकर अपनी बात रखनी होगी। उन्होंने सामूहिक सहभागिता को आंदोलन की सफलता का आधार बताया।
विश्वविद्यालय प्रतिनिधि डॉ. वेद प्रकाश वेदी ने भी शिक्षकों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। शिक्षक संघ अध्यक्ष प्रो. आशीष प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी शिक्षकों से आंदोलन के आगामी चरणों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
- शिक्षक संघ महामंत्री डॉ. संत लाल ने संगठनात्मक एकता और अनुशासन पर जोर दिया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने भी शिक्षकों की सामूहिक शक्ति को महत्वपूर्ण बताते हुए निर्धारित कार्यक्रमों में सहभागिता की अपील की। वहीं संरक्षक प्रो. मनोज कुमार छापड़िया ने शिक्षकों के हितों से जुड़े विषयों पर सकारात्मक संवाद और गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता बताई।
