ड्यूटी टाइम में अधीक्षक गायब! बड़हलगंज सीएचसी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
हफ्ते में तीन दिन ही अस्पताल आने का आरोप, बाकी दिनों में मरीजों को कौन देगा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं? ओटी के समय ही दिखाई देने की चर्चा, सीएमओ ने मांगी हाजिरी रजिस्टर की छायाप्रति, जांच के बाद कार्रवाई का दिया आश्वासन
बड़हलगंज/गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे)।बड़हलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीण क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ताजा मामला अस्पताल के अधीक्षक की कथित अनुपस्थिति से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि अस्पताल की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधीक्षक नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं रहते। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अधीक्षक सप्ताह में महज तीन दिन ही अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि शेष दिनों में उनकी अनुपस्थिति के कारण अस्पताल की प्रशासनिक और चिकित्सकीय व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब कुछ सूत्रों की ओर से यह दावा किया गया कि अधीक्षक सामान्य दिनों में अस्पताल में कम ही दिखाई देते हैं और विशेष रूप से ऑपरेशन थिएटर (ओटी) से संबंधित कार्यों के समय ही उनकी मौजूदगी देखने को मिलती है। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किसी भी ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होता है। आसपास के गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार, परामर्श, जांच और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यहां पहुंचते हैं। कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें तत्काल चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए अस्पताल की नियमित कार्यप्रणाली बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि अस्पताल के प्रशासनिक प्रमुख की उपस्थिति को लेकर सवाल उठते हैं, तो स्वाभाविक रूप से पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है।
सप्ताह में तीन दिन उपस्थिति का आरोप, बाकी दिनों की व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बड़हलगंज सीएचसी के अधीक्षक की नियमित उपस्थिति को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। आरोप है कि अधीक्षक सप्ताह में केवल तीन दिन ही अस्पताल में उपस्थित रहते हैं। बाकी दिनों में अस्पताल की जिम्मेदारियां किस प्रकार संचालित होती हैं और प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया कौन संभालता है, इसे लेकर लोगों के मन में सवाल हैं।
अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए अधीक्षक केवल एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य केंद्र की संपूर्ण कार्यप्रणाली के प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी होते हैं। चिकित्सकों और कर्मचारियों की उपस्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी, अस्पताल की साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सा उपकरणों की स्थिति तथा आपातकालीन सेवाओं के संचालन जैसे अनेक विषयों पर उनकी प्रशासनिक भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
यदि किसी सरकारी कार्य अथवा विभागीय बैठक के कारण अधीक्षक को अस्पताल से बाहर जाना पड़ता है, तो यह अपने आप में असामान्य बात नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर सीएमओ कार्यालय, विभागीय बैठकों और अन्य सरकारी कार्यों में शामिल होना पड़ सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना और अस्पताल में वैकल्पिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करना आवश्यक होता है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
इसी बिंदु पर बड़हलगंज सीएचसी की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि अधीक्षक की अनुपस्थिति निर्धारित सरकारी कार्यों के कारण है, तो उसका रिकॉर्ड और संबंधित अनुमति स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं यदि बिना किसी उचित व्यवस्था के लंबे समय तक अनुपस्थिति रहती है, तो यह विभागीय जवाबदेही का विषय बन सकता है।
ओटी के समय ही नजर आने की चर्चा
इस पूरे मामले में एक और चर्चा सामने आई है। कुछ सूत्रों का दावा है कि अधीक्षक की मौजूदगी अस्पताल में मुख्य रूप से ऑपरेशन थिएटर से जुड़े कार्यों के दौरान ही दिखाई देती है। हालांकि इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने अस्पताल की नियमित प्रशासनिक निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑपरेशन थिएटर किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संवेदनशील विभाग होता है। यहां मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सकीय मानकों, आवश्यक उपकरणों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ओटी से जुड़े कार्यों में संबंधित चिकित्सकीय अधिकारियों की भूमिका आवश्यक होती है। लेकिन अस्पताल की जिम्मेदारी केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं होती।
ओपीडी में मरीजों की जांच, आपातकालीन चिकित्सा, दवा वितरण, प्रसव संबंधी सेवाएं, टीकाकरण, पैथोलॉजी जांच और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का नियमित संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि अधीक्षक की मौजूदगी को लेकर ऐसी शिकायतें हैं, तो अन्य विभागों की निगरानी किसके जिम्मे है?
अस्पताल में आने वाले मरीजों को यह जानकारी होना भी आवश्यक है कि उनकी शिकायत सुनने और समस्याओं का समाधान कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन है। किसी स्वास्थ्य केंद्र की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है, जब वहां मरीजों को समय पर उपचार के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी उचित सहयोग मिले।
मरीजों की परेशानी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल
बड़हलगंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल में उपचार की सुविधा काफी मायने रखती है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले अनेक मरीज निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर पाते। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की नियमित उपलब्धता और बेहतर कार्यप्रणाली उनकी सबसे बड़ी जरूरत होती है।
यदि किसी मरीज को अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकीय परामर्श, जांच अथवा आवश्यक सुविधा समय पर नहीं मिलती, तो उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई बार मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अधीक्षक की कथित अनुपस्थिति के कारण किसी विशेष मरीज की सेवा प्रभावित हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित अभिलेखों और मरीजों की शिकायतों की जांच के बाद ही हो सकती है। लेकिन अस्पताल के प्रमुख अधिकारी की उपस्थिति को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल अस्पताल भवन और संसाधनों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। उनका वास्तविक महत्व तभी है, जब मरीजों को निर्धारित समय पर चिकित्सक, दवाएं, जांच और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
अस्पताल की व्यवस्थाओं की समग्र जांच की जरूरत
स्थानीय स्तर पर अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल केवल अधीक्षक की उपस्थिति तक सीमित नहीं रहने चाहिए। विभागीय स्तर पर अस्पताल की संपूर्ण व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए। इसमें चिकित्सकों और कर्मचारियों की उपस्थिति, ड्यूटी रोस्टर, ओपीडी संचालन, ओटी की कार्यप्रणाली, दवाओं की उपलब्धता, मरीजों की शिकायतों और अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति शामिल हो सकती है।
अस्पताल में किस दिन कौन चिकित्सक उपस्थित रहता है, किस कर्मचारी की क्या जिम्मेदारी है और अधीक्षक की अनुपस्थिति में प्रशासनिक कार्य किस अधिकारी को सौंपे जाते हैं, इसकी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए।
इसके साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से मिल रही हैं या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उपस्थिति पंजिका और ड्यूटी रोस्टर का नियमित सत्यापन भी महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर संबंधित अवधि के सरकारी कार्यों, बैठकों और अस्पताल से बाहर रहने के कारणों का भी परीक्षण किया जा सकता है।
- अधीक्षक ने आरोपों को किया खारिज
इस संबंध में जब बड़हलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक से उनका पक्ष जानने के लिए सवाल किया गया, तो उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “ऐसी कोई बात नहीं है। हम सीएमओ कार्यालय आए हैं, कुछ काम से।”
अधीक्षक के इस बयान से स्पष्ट है कि उनके अनुसार अस्पताल से बाहर रहने की वजह सरकारी कार्य था। सरकारी कार्यों के लिए सीएमओ कार्यालय जाना विभागीय जिम्मेदारी का हिस्सा हो सकता है। लेकिन इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या संबंधित अवधि में उनकी अनुपस्थिति की सूचना अस्पताल प्रशासन को दी गई थी? क्या निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति ली गई थी? क्या उनके अस्पताल से बाहर रहने के दौरान किसी अन्य जिम्मेदार अधिकारी को प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभागीय अभिलेखों की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
अधीक्षक का पक्ष सामने आने के बाद अब यह भी जरूरी हो गया है कि स्वास्थ्य विभाग आरोपों और स्पष्टीकरण दोनों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच कराए। केवल मौखिक दावों के आधार पर किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। उसी तरह शिकायतों को बिना जांच के खारिज कर देना भी मरीजों के हित में नहीं होगा।
सीएमओ ने लिया संज्ञान, हाजिरी रजिस्टर की छायाप्रति तलब
मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी गोरखपुर से भी प्रतिक्रिया ली गई। सीएमओ ने प्रकरण को संज्ञान में लेने की बात कही है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधीक्षक की उपस्थिति पंजिका यानी हाजिरी रजिस्टर की छायाप्रति मंगाई गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि अधीक्षक से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जांच में यदि कोई अनियमितता या लापरवाही सामने आती है और संबंधित अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ के इस बयान के बाद मामले में विभागीय जांच की उम्मीद बढ़ गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाजिरी रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति और वास्तविक परिस्थितियों के बीच कोई अंतर सामने आता है या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि जिन दिनों अधीक्षक अस्पताल में उपस्थित नहीं थे, उन दिनों उनकी अनुपस्थिति का कारण क्या था और क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
यदि अधीक्षक विभागीय कार्य से सीएमओ कार्यालय या किसी अन्य स्थान पर गए थे, तो संबंधित सरकारी कार्यों का रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनुपस्थिति ड्यूटी से बचने के कारण थी या विभागीय जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए।
उपस्थिति पंजिका और ड्यूटी रोस्टर से खुलेगा मामला
इस पूरे प्रकरण में उपस्थिति पंजिका महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है। हाजिरी रजिस्टर से यह जानकारी मिल सकती है कि संबंधित अवधि में अधीक्षक की उपस्थिति किन-किन दिनों दर्ज की गई है। इसके अलावा ड्यूटी रोस्टर और विभागीय आदेशों की जांच से यह भी पता लगाया जा सकता है कि उनकी अनुपस्थिति के दौरान अस्पताल का संचालन किसके जिम्मे था।
जांच के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए—
अधीक्षक की निर्धारित ड्यूटी और वास्तविक उपस्थिति का मिलान।
संबंधित अवधि की उपस्थिति पंजिका का सत्यापन।
सीएमओ कार्यालय अथवा अन्य विभागीय कार्यों से संबंधित आदेश और अभिलेख।
अधीक्षक की अनुपस्थिति में वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था।
ओपीडी, ओटी और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित संचालन।
मरीजों की शिकायतों और अस्पताल की कार्यप्रणाली का परीक्षण।
चिकित्सकों तथा अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति की समीक्षा।
इन बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच होने से न केवल अधीक्षक की उपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर भी सामने आ सकेगी।
ग्रामीण मरीजों को जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था की दरकार
बड़हलगंज सीएचसी केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का महत्वपूर्ण आधार है। यहां आने वाले मरीजों को उम्मीद रहती है कि उन्हें समय पर उपचार मिलेगा और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित समय पर अपनी सेवाएं दें। प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका अस्पताल की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनकी नियमित उपस्थिति और अनुपस्थिति की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर निरीक्षण और समीक्षा बैठकों का आयोजन भी इसी उद्देश्य से किया जाता है कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग हो और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
यदि बड़हलगंज सीएचसी में अधीक्षक की अनुपस्थिति को लेकर लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं, तो विभाग को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी अधिकारी की छवि अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो
जवाबदेही तय होने से ही सुधरेगी व्यवस्था
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकारियों की जवाबदेही और नियमित निगरानी की आवश्यकता को सामने ला दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। इसके लिए जरूरी है कि अस्पतालों में तैनात प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करे।
बड़हलगंज सीएचसी में अधीक्षक की कथित अनुपस्थिति को लेकर उठे सवालों का समाधान अब विभागीय जांच पर निर्भर है। सीएमओ द्वारा हाजिरी रजिस्टर की छायाप्रति मंगाए जाने और स्पष्टीकरण लेने की बात से उम्मीद है कि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
अब देखना यह होगा कि जांच कितनी निष्पक्षता और गंभीरता से पूरी होती है। क्या सप्ताह में तीन दिन उपस्थिति के आरोपों में कोई सच्चाई सामने आती है? क्या ओटी के समय ही अधीक्षक के दिखाई देने की चर्चा सही साबित होती है? क्या अस्पताल में उनकी अनुपस्थिति के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी? इन सभी सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही मिल सकेगा।
फिलहाल बड़हलगंज क्षेत्र के लोगों की निगाहें मुख्य चिकित्सा अधिकारी गोरखपुर और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। मरीजों को उम्मीद है कि जांच केवल कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि अस्पताल की वास्तविक व्यवस्था में सुधार का माध्यम बनेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बड़हलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए विभाग क्या ठोस कदम उठाता है? हाजिरी रजिस्टर की जांच और अधीक्षक के स्पष्टीकरण के बाद ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
प्रकाशन से पहले सुझाव: अधीक्षक की वास्तविक उपस्थिति, संबंधित दिनों के ड्यूटी रोस्टर और मरीजों की शिकायतों का दस्तावेजी सत्यापन जोड़ने से खबर और अधिक मजबूत तथा संतुलित बनेगी।
ब्यूरो प्रभारी – विनय तिवारी
