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  • अस्पताल संचालक की शिकायत पर कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज, फेसबुक पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

    अस्पताल संचालक की शिकायत पर कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज, फेसबुक पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

    अस्पताल संचालक की शिकायत पर कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज, फेसबुक पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

     

    सोशल मीडिया पर दुर्गावती हॉस्पिटल और उसके संचालक के खिलाफ कथित आपत्तिजनक एवं भ्रामक सामग्री प्रसारित करने का आरोप, पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत दर्ज की प्राथमिकी, मामले की जांच शुरू

     

    ब्यूरो प्रभारी – विनय तिवारी

     

    बड़हलगंज/गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे)।सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच फेसबुक पर की गई पोस्ट को लेकर बड़हलगंज क्षेत्र में एक नया विवाद सामने आया है। दुर्गावती हॉस्पिटल बड़हलगंज और उसके संचालक डॉ. मनोज यादव के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक एवं अपमानजनक सामग्री प्रसारित करने के मामले में बड़हलगंज पुलिस ने कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष अवधेश मणि त्रिपाठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अस्पताल संचालक की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।

    इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में सोशल मीडिया पर की जाने वाली टिप्पणियों, अस्पतालों की प्रतिष्ठा और किसी संस्थान के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फेसबुक के माध्यम से अस्पताल और उसके संचालक की छवि खराब करने की कोशिश की गई है। वहीं, इस पूरे प्रकरण में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    फेसबुक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़हलगंज निवासी मनोज यादव पुत्र स्वर्गीय श्रीपति यादव दुर्गावती हॉस्पिटल के संचालक हैं। उन्होंने बड़हलगंज पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष अवधेश मणि त्रिपाठी ने अपनी फेसबुक आईडी के माध्यम से उनके अस्पताल और उनके व्यक्तिगत नाम के विरुद्ध कथित रूप से आपत्तिजनक एवं अपमानजनक टिप्पणियां प्रकाशित कीं।

    शिकायत में कहा गया है कि फेसबुक पर प्रसारित की गई पोस्टों में अस्पताल में मरीजों के उपचार और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतने सहित अन्य आरोप शामिल बताए गए हैं। अस्पताल संचालक का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार की सामग्री प्रकाशित किए जाने से आम लोगों के बीच अस्पताल को लेकर गलत संदेश जा रहा है।

    उनका आरोप है कि बिना तथ्यों की उचित पुष्टि किए अस्पताल के खिलाफ इस तरह की सामग्री प्रसारित करने से संस्थान की सामाजिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

    अस्पताल संचालक ने पुलिस को दी लिखित शिकायत

    डॉ. मनोज यादव की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया है कि दुर्गावती हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र एवं जरूरतमंद मरीजों का उपचार किया जाता है। अस्पताल संचालक के अनुसार, इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

    उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर अस्पताल के उपचार संबंधी कार्यों को लेकर नकारात्मक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इससे अस्पताल की छवि को नुकसान पहुंचने की आशंका है। संचालक का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विषयों पर यदि किसी व्यक्ति को कोई शिकायत या आपत्ति है तो उसे संबंधित विभाग अथवा प्रशासन के समक्ष तथ्यों और प्रमाणों के साथ उठाया जा सकता है।

    उनके मुताबिक, सोशल मीडिया पर कथित तौर पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना उचित तरीका नहीं है। इस तरह की पोस्टों से न केवल किसी संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है, बल्कि आम लोगों के मन में भी भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

    आयुष्मान भारत योजना के उपचार का भी किया उल्लेख

    शिकायत में अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को उपचार उपलब्ध कराए जाने का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना से जुड़े अस्पतालों के बारे में सोशल मीडिया पर सामने आने वाली शिकायतें और आरोप आम लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं।

    डॉ. मनोज यादव का कहना है कि उनके अस्पताल में योजना के पात्र लाभार्थियों का उपचार किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि फेसबुक पर प्रसारित कथित आपत्तिजनक सामग्री से अस्पताल के कामकाज को लेकर लोगों के बीच गलत धारणा बन सकती है।

    हालांकि, अस्पताल की उपचार व्यवस्था, मरीजों से संबंधित शिकायतों और सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल पुलिस के समक्ष मामला शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ है और विवेचना जारी है।

    प्रतिष्ठा प्रभावित होने का लगाया आरोप

    अस्पताल संचालक ने अपनी शिकायत में कहा है कि किसी भी अस्पताल की पहचान उसके उपचार, चिकित्सकीय सेवाओं और मरीजों के विश्वास से जुड़ी होती है। ऐसे में सोशल मीडिया पर अस्पताल के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक और भ्रामक सामग्री प्रसारित होने से उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

    उनका आरोप है कि फेसबुक पोस्ट के कारण अस्पताल की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन से शिकायत पर संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को लेकर उन्हें आपत्ति है और इसी कारण उन्होंने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया। पुलिस को दी गई तहरीर के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

    अस्पताल संचालक की लिखित शिकायत मिलने के बाद बड़हलगंज पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया। पुलिस ने उपलब्ध शिकायत के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

    मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। जांच के दौरान संबंधित फेसबुक पोस्ट, उनके प्रकाशन से जुड़े तथ्यों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जा सकती है। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं या नहीं।

    कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम रूप से प्रमाणित होना नहीं है। विवेचना के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस प्रकरण में भी पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी।

    कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष का नाम आया सामने

    इस मामले में जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनकी पहचान अवधेश मणि त्रिपाठी के रूप में हुई है। वह कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रह चुके हैं। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति का नाम सामने आने के कारण यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

    हालांकि, इस प्रकरण को फिलहाल अस्पताल संचालक की शिकायत और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े विवाद के रूप में देखा जा रहा है। मामले में राजनीतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख होने के बावजूद पुलिस की जांच का केंद्र शिकायत में लगाए गए आरोप और उनसे संबंधित साक्ष्य होंगे।

    अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अस्पताल संचालक की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस ने उसी के आधार पर प्राथमिकी लिखी है। मामले में आरोपित पक्ष का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आने तथा पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे विवाद की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

    सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से पोस्ट करने की जरूरत

    इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के इस्तेमाल और उसकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फेसबुक, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल मंचों के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपनी बात बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा सकता है। इन माध्यमों ने आम नागरिकों को अपनी राय रखने और सार्वजनिक मुद्दों को उठाने का अवसर दिया है। लेकिन इनके इस्तेमाल के साथ तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदार व्यवहार भी जरूरी है।

    विशेष रूप से अस्पताल, चिकित्सक और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में लोगों की भावनाएं और जरूरतें सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं। किसी मरीज या परिजन को उपचार से संबंधित शिकायत हो तो उसे उचित मंच पर उठाना महत्वपूर्ण है। वहीं, अस्पतालों और चिकित्सकों के लिए भी मरीजों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान करना आवश्यक है।

    यदि किसी अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही या अन्य अनियमितता की शिकायत है तो संबंधित स्वास्थ्य विभाग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय अथवा सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की जा सकती है। ऐसे मामलों में उपलब्ध दस्तावेज, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जांच को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

    इसी तरह सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ सामग्री प्रकाशित करते समय भी तथ्यों की पुष्टि और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना जरूरी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन उसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।

    जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरे मामले की स्थिति

    बड़हलगंज में सामने आया यह मामला अब पुलिस विवेचना के अधीन है। शिकायतकर्ता डॉ. मनोज यादव ने फेसबुक पर कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने से अस्पताल और अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा प्रभावित होने का आरोप लगाया है। वहीं, अवधेश मणि त्रिपाठी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

    जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाना आवश्यक होगा। इसके आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पोस्ट में प्रकाशित सामग्री किस प्रकृति की थी और क्या उसमें किसी कानून का उल्लंघन हुआ है।

    फिलहाल बड़हलगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं।