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  • AIIMS गोरखपुर में प्रथम वर्ष एमबीबीएस छात्रों हेतु मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का आयोजन

    AIIMS गोरखपुर में प्रथम वर्ष एमबीबीएस छात्रों हेतु मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का आयोजन

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे ;-

    भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) की संस्तुतियों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने हेतु जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन में, एआईआईएमएस गोरखपुर के मनोरोग विभाग द्वारा SAATHI नामक एक विशेष मॉड्यूल विकसित किया गया है,जिसका पूर्ण रूप “Student Awareness And Training for Holistic Intervention” है।

    इस मॉड्यूल का उद्देश्य चिकित्सा छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता, पीयर सपोर्ट तथा गेटकीपर प्रशिक्षण को सुदृढ़ करना है।गेटकीपर प्रशिक्षण के अंतर्गत छात्रों को यह सिखाया गया कि वे अपने सहपाठियों में मानसिक तनाव या जोखिम के शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय रहते उचित सहायता एवं विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुँचाने में सेतु की भूमिका निभा सकें।

    इसी क्रम में, 07 फरवरी 2026 को, एआईआईएमएस गोरखपुर के प्रथम वर्ष एमबीबीएस छात्रों (एमबीबीएस बैच 2025) के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

    यह कार्यक्रम निदेशक, मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता के सक्षम एवं प्रेरणादायी नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत मनोरोग विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया मॉड्यूल अत्यंत जीवंत, सहभागितापूर्ण एवं संवादात्मक रहा, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    इस अवसर पर

    कार्यकारी निदेशक ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को शैक्षणिक उत्कृष्टता का अभिन्न अंग बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।

    डीन (शैक्षणिक) ने कहा कि मानसिक रूप से सशक्त विद्यार्थी ही भविष्य के सक्षम और संवेदनशील चिकित्सक बन सकते हैं।
    डीन (छात्र कल्याण) ने छात्रों को समय रहते सहायता लेने, एक-दूसरे का सहयोग करने तथा मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

    कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे सत्रों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। यह SAATHI मॉड्यूल एआईआईएमएस गोरखपुर के मनोरोग विभाग की समर्पित टीम द्वारा विकसित किया गया है, जिसका नेतृत्व डॉ. मनोज पृथ्वीराज द्वारा किया गया।

    इस मॉड्यूल के विकास एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण में डॉ. समन्त तथा डॉ. रिचा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। टीम द्वारा तैयार यह मॉड्यूल वैज्ञानिक, व्यावहारिक एवं संवादात्मक दृष्टिकोण पर आधारित है, जो छात्रों से सहज रूप से जुड़ने में सफल रहा।

    इस अवसर पर डॉ. मनोज पृथ्वीराज ने जानकारी दी कि SAATHI मॉड्यूल को वर्ष के दौरान चरणबद्ध रूप से न विभिन्न एमबीबीएस बैचों के लिए, नर्सिंग छात्रों, रेज़िडेंट डॉक्टर्स तथा पैरामेडिकल छात्रों के लिए भी लागू किया जाएगा, जिससे संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं सहयोगात्मक वातावरण को व्यापक रूप से सुदृढ़ किया जा सके।

  • आधुनिक रीजनल एनेस्थीसिया व एनाल्जीसिया से सर्जरी हुई अधिक सुरक्षित और दर्द-मुक्त

    आधुनिक रीजनल एनेस्थीसिया व एनाल्जीसिया से सर्जरी हुई अधिक सुरक्षित और दर्द-मुक्त

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    GRACE-1.0 में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की अहम भूमिका पर विशेषज्ञों की विस्तृत चर्चा

    आज के दौर में सर्जरी की सफलता केवल ऑपरेशन टेबल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मरीज की संपूर्ण सुरक्षा, ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत और शीघ्र सामान्य जीवन में वापसी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। इन सभी पहलुओं में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत केंद्रीय और निर्णायक होती है।

    इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के एनेस्थीसियोलॉजी, पेन मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर विभाग द्वारा GRACE-1.0 (Gorakhpur Regional Anaesthesia Continuing Education 2026) का आयोजन किया गया।

    यह शैक्षणिक कार्यक्रम संस्थान की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता, (सेवानिवृत्त) के सक्रिय एवं दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित, वैज्ञानिक तथा दर्द-मुक्त एनेस्थीसिया एवं पेन मैनेजमेंट सेवाएं प्रदान करना है।

    कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि रीजनल एनेस्थीसिया केवल सर्जरी के दौरान शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक दर्द से राहत (एनाल्जीसिया) प्रदान करना भी है।

    अनेक सर्जरी में जनरल एनेस्थीसिया के साथ-साथ अल्ट्रासाउंड की सहायता से नर्व ब्लॉक्स दिए जाते हैं, जिससे सर्जरी के बाद होने वाला दर्द काफी हद तक कम हो जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में केवल रीजनल एनेस्थीसिया से ही सर्जरी संभव होती है, जबकि कई जटिल मामलों में एक से अधिक नर्व ब्लॉक्स का संयोजन भी किया जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक रीजनल एनेस्थीसिया तकनीकों से मरीजों को कई लाभ मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं—

    * जनरल एनेस्थीसिया की दवाओं की आवश्यकता में कमी
    * ऑपरेशन के बाद तेज दर्द की संभावना कम होना
    * ओपिऑइड एवं तीव्र दर्द निवारक दवाओं पर निर्भरता घटना
    * उल्टी, चक्कर, अत्यधिक सुस्ती और सांस संबंधी जटिलताओं में कमी
    * मरीज का जल्दी बैठना, चलना और फिजियोथेरेपी शुरू कर पाना

    GRACE-1.0 में विशेषज्ञों ने बताया कि—

    * कंधे और हाथ की सर्जरी में नर्व ब्लॉक्स से लंबे समय तक प्रभावी दर्द राहत मिलती है
    * घुटने और हिप सर्जरी के बाद मरीज जल्दी चलने-फिरने में सक्षम हो जाता है
    * पेट और छाती की सर्जरी में विशेष ब्लॉक्स से ऑपरेशन के बाद कई घंटों तक आराम मिलता है

    इन सभी तकनीकों का उद्देश्य केवल सर्जरी कराना नहीं, बल्कि सर्जरी के बाद मरीज को अधिकतम आराम और शीघ्र रिकवरी प्रदान करना है।

    मल्टीमोडल एनाल्जीसिया: दर्द प्रबंधन का आधुनिक दृष्टिकोण

    कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आज दर्द नियंत्रण के लिए एक ही दवा पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न तरीकों का संयोजन अपनाया जाता है, जिसे मल्टीमोडल एनाल्जीसिया कहा जाता है।

    इसमें नर्व ब्लॉक्स, हल्की दर्द निवारक दवाएं और अन्य सहायक उपाय शामिल होते हैं, जिससे मरीज अधिक सुरक्षित रहता है और गंभीर दवाओं की आवश्यकता कम पड़ती है।
    कार्यक्रम के दौरान अल्ट्रासाउंड मशीन की सहायता से नसों को प्रत्यक्ष देखकर दवा देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इससे दवा सही स्थान पर पहुंचती है और जटिलताओं की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

    विशेषज्ञों ने बताया कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट—
    * सर्जरी से पहले मरीज का संपूर्ण मूल्यांकन करते हैं
    * ऑपरेशन के दौरान जीवन-रक्षक निगरानी रखते हैं
    * ऑपरेशन के बाद दर्द नियंत्रण और रिकवरी की जिम्मेदारी निभाते हैं
    * आईसीयू और इमरजेंसी सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाते हैं
    इस कार्यक्रम का आयोजन प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार शर्मा,
    प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसियोलॉजी, पेन मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर, एम्स गोरखपुर
    के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. प्रियंका द्विवेदी रहीं।
    मरीजों के लिए महत्वपूर्ण संदेश

    डॉक्टरों ने मरीजों को सलाह दी कि सर्जरी से पहले वे—
    * ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत के उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी लें
    * अपनी सभी बीमारियों और दवाओं की सही जानकारी दें
    * एनेस्थीसियोलॉजिस्ट से खुलकर संवाद करें
    इससे उपचार अधिक सुरक्षित, दर्द-मुक्त और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ देने वाला बनता है।

  • AIIMS गोरखपुर ने उन्नत स्पाइन सर्जरी में रचा इतिहास

    AIIMS गोरखपुर ने उन्नत स्पाइन सर्जरी में रचा इतिहास

    • हेल्थ डेस्क गोरखपुर: निष्पक्ष टुडे 

    • गोरखपुर, 19 दिसंबर 2025 — अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर ने रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) के उन्नत उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

    • संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पहली बार मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी के माध्यम से बलिया, उत्तर प्रदेश की एक 51 वर्षीय महिला रोगी का सफल ऑपरेशन किया। रोगी को कमर की दूसरी कशेरुका (L2) में गंभीर फ्रैक्चर होने के साथ मल और मूत्र पर नियंत्रण खोने जैसी जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या थी।

    • एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने इस जटिल स्थिति में मिनिमली इनवेसिव पोस्टीरियर लॉन्ग-सेगमेंट पेडिकल स्क्रू फिक्सेशन, इंडेक्स लेवल स्क्रू ऑगमेंटेशन तथा पोस्टीरियर डिकम्प्रेशन (हेमीलैमिनेक्टॉमी) तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक तकनीक से रीढ़ की हड्डी को स्थिर किया जाता है, जिसमें बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे ऑपरेशन में कम रक्तस्राव होता है, दर्द कम रहता है और रोगी जल्दी स्वस्थ होता है।यह जटिल सर्जरी प्रो. अजय भारती, विभागाध्यक्ष, आर्थोपेडिक्स विभाग, AIIMS गोरखपुर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।इस सर्जरी की सफलता में एनेस्थीसिया टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसका नेतृत्व डॉ. प्रियंका द्विवेदी (एसोसिएट प्रोफेसर) एवं उनकी टीम ने कियाऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और रोगी की स्थिति में सुधार होना शुरू हो गया है। इलाज के बाद उनका न्यूरोलॉजिकल नियंत्रण भी धीरे-धीरे वापस आ रहा है। यह सफलता एम्स गोरखपुर के लिए गर्व का क्षण है।प्रो. अजय भारती का वक्तव्य:

    • मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी जटिल फ्रैक्चर के मामलों में अत्यंत प्रभावी है और मरीज की रिकवरी को तेज़ बनाती है।” मेजर जनरल (Retd.) डॉ. विभा दत्ता का वक्तव्य

    • “AIIMS गोरखपुर की टीम ने जो उत्कृष्ट कार्य किया है, वह संस्थान की क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस तरह की उन्नत सर्जरी पूर्वांचल के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर होने से बचाती है और विश्वस्तरीय इलाज यहीं उपलब्ध कराती है। मैं प्रो. अजय भारती और पूरी टीम को उनकी समर्पण भावना और उत्कृष्ट प्रयास के लिए हार्दिक बधाई देती हूँ।”

    • संस्थान की सर्जरी टीम ने बताया कि इस तरह की जटिल सर्जरी पहले केवल बड़े महानगरों के उन्नत अस्पतालों में ही संभव थी। अब एम्स गोरखपुर ने यह साबित कर दिया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी अत्याधुनिक स्पाइनल सर्जरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।यह उपलब्धि एम्स गोरखपुर की बढ़ती चिकित्सा क्षमता और गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।