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  • एनक्वास के लिए तैयार हुईं मंडल की 466 चिकित्सा इकाइयां

    एनक्वास के लिए तैयार हुईं मंडल की 466 चिकित्सा इकाइयां

    अभी तक 27 चिकित्सा इकाइयों को मिल चुका है एनक्वास

    पीएचसी, यूपीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी में मंडल ने प्रदेश में सबसे पहले जीता पुरस्कार

    गोरखपुर मंडल की 466 चिकित्सा इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन (एनक्वास) के लिए तैयार किया गया है। इन इकाइयों का राज्य स्तरीय मूल्यांकन हो चुका है और नेशनल टीम के मूल्यांकन के बाद इन्हें सर्टिफिकेशन मिल सकेगा । एडी हेल्थ डॉ नरेंद्र प्रसाद गुप्ता के दिशा निर्देशन में मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस टीम सभी जिलों की क्वालिटी टीम से कोआर्डिनेट कर निरंतर इन इकाइयों के गैप्स को दूर करवाने में जुटी है। मंडल में अभी तक 27 चिकित्सा इकाइयों को एनक्वास मिल चुका है। पीएचसी, यूपीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी में गोरखपुर मंडल की स्वास्थ्य इकाइयां पूरे प्रदेश में सबसे पहले यह पुरस्कार जीत चुकी हैं।

    मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम के प्रभारी डॉ जसवंत मल्ल ने बताया कि पीएचसी श्रेणी में प्रदेश में सबसे पहले गोरखपुर की डेरवा पीएचसी, यूपीएचसी श्रेणी में गोरखपुर की बसंतपुर यूपीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी में महराजगंज जिले के पिपरा रसूलपुर केंद्र को यह पुरस्कार मिला है। इसके तहत जिला स्तरीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को प्रति बेड 10000 रुपये का पुरस्कार तीन वर्षों तक मिलता है। पीएचसी को तीन लाख और अर्बन पीएचसी को दो लाख रुपये तीन वर्षों तक पुरस्कार के तौर पर मिलते हैं। सात पैकेज में सर्टिफिकेशन होने पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर को 1.26 लाख और बारह पैकेज में 2.16 लाख रुपये का पुरस्कार तीन वर्षों तक दिया जाता है।

    डॉ मल्ल ने बताया कि एनक्वास सर्टिफाइड होने के बाद मिलने वाली पुरस्कार की रकम से स्वास्थ्य इकाइयों में गुणात्मक सुधार संबंधित कार्य कराए जाते हैं। इससे मरीजों को और गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलती है। गैप्स दूर करने में भी पुरस्कार की रकम मददगार होती है। पुरस्कार से कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन राशि और गिफ्ट दिये जाते हैं और कुछ स्थानों पर उनका एक्सपोजर विजिट भी कराया जाता है। गोरखपुर जिले में 11 इकाइयां, देवरिया जिले में पांच इकाइयां, कुशीनगर जिले में चार इकाइयां और महराजगंज जिले में सात इकाइयां यह सर्टिफिकेशन हासिल कर चुकी हैं।

    तैयार हुईं इकाइयां

    जिला इकाइयों की संख्या
    देवरिया 75
    गोरखपुर 217
    कुशीनगर 94
    महराजगंज 80

    इन इकाइयों को मिल चुका है पुरस्कार

    गोरखपुर में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, भटहट सीएचसी, डेरवा पीएचसी, बसंतपुर अर्बन पीएचसी, गोरखनाथ अर्बन पीएचसी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैनपुर, राजधानी, राघोपट्टी,कालेसरऔर लहसड़ी का सर्टिफिकेशन हो चुका है। इनमें जिला महिला अस्पताल को लक्ष्य और मुस्कान, जबकि भटहट सीएचसी को लक्ष्य का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त हुआ है। देवरिया जिले में सीएचसी लार को लक्ष्य और एनक्वास, पीएचसी भागलपुर को एनक्वास और आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंझरिया, लवकनी और बरियारपुर को एनक्वास का सर्टिफिकेट मिला है। कुशीनगर जिले में अर्बन पीएचसी गायत्रीनगर और आयुष्मान आरोग्य मंदिर डांडोपुर, बलकुड़िया और चकदेइया को यह सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। महराजगंज जिले में जिला संयुक्त अस्पताल को एनक्वास, लक्ष्य और मुस्कान का सर्टिफिकेशन मिल चुका है। सीएचसी फरेंदा को एनक्वास और लक्ष्य का सर्टिफिकेशन मिला है। सीएचसी परतावल को सिर्फ लक्ष्य का सर्टिफिकेशन मिला है । वहीं आयुष्मान आरोग्य मंदिर पिपरा रसूलपुर, गिरगिटिया, चिउटहा, सिंदुरिया और बौलियाराजा को भी एनक्वास सर्टिफिकेट प्राप्त हो चुका है।

    https://youtu.be/TfMTAK9Yg68?si=ASkKeSoe3GWe74my

  • मिलेगा सेहत का वरदान, मेले में स्वास्थ्य जांच के साथ पाएंगे बीमारियों से बचाव का ज्ञान

    मिलेगा सेहत का वरदान, मेले में स्वास्थ्य जांच के साथ पाएंगे बीमारियों से बचाव का ज्ञान

    चरगांवा के जनता इंटर कॉलेज में सोमवार को लगेगा बाल स्वास्थ्य मेला

    गोरखपुर चरगांवा के जनता इंटर कॉलेज में तेईस दिसम्बर यानि सोमवार को बाल स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया जाएगा । इसमें बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के साथ साथ उन्हें विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी । जिले के कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य लोग, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी और समाजसेवी संगठनों के लोग भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे।

    बाल स्वास्थ्य मेले में छात्र छात्राओं समेत करीब एक हजार बच्चे प्रतिभाग करेंगे। आयोजक संस्था सेफ सोसाइटी के निदेशक विश्व वैभव शर्मा ने बताया कि मेला सुबह दस बजे से शाम साढ़े तीन बजे तक चलेगा। इसमें कुशल चिकित्सकों द्वारा बच्चों के खून की जांच, दांतों की जांच, आंखों की जांच, वजन, लम्बाई आदि की जांच कर मौके पर ही दवा भी दी जाएगी। साथ ही संचारी रोगों की पहचान और कुपोषण के बारे में बच्चों और उनके अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा।

    संस्था के वरिष्ठ कार्यकारी शैलेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि इस मौके पर पहेली और मनोरंजन के माध्यम से खेलकूद व नियमित योगाभ्यास का महत्व बताया जाएगा। बाल सुरक्षा और संरक्षण संबंधी इकाइयां भी इसमें हिस्सा लेंगी। सदर सांसद रवि किशन शुक्ला, पिपराईच विधायक महेंद्र पाल सिंह, सहजनवां विधायक प्रदीप शुक्ला, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी और दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पुष्पदंत जैन की मौजूदगी में मेले का शुभारंभ किया जाएगा।

  • मेडिकल कॉलेज में दवा संकट: मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर

    मेडिकल कॉलेज में दवा संकट: मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर

    गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में नेपाल और बिहार से लेकर पूर्वांचल के मरीज इलाज कराने आते हैं। यहां रोजाना करीब चार हजार  ओपीडी में परामर्श लेते हैं, लेकिन इलाज के लिए जरूरी दवाएं अस्पताल से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

    मरीजों को मजबूरन बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। सबसे अधिक परेशानी त्वचा रोग के मरीजों को हो रही है, क्योंकि सफेद दाग जैसे रोगों में उपयोग होने वाली टैक्रोलिम्नस क्रीम अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।

    बदलते मौसम के चलते खांसी के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, लेकिन खांसी के सिरप की कमी से मरीज बाहर से दवाएं खरीदने को विवश हैं। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग की है।

  • सर्जरी में एआई का बढ़ता उपयोग, छात्रों को दी जा रही जानकारी

    सर्जरी में एआई का बढ़ता उपयोग, छात्रों को दी जा रही जानकारी

    एम्स गोरखपुर में एमबीबीएस और पीजी के छात्रों को सर्जरी के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जल्द ही इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। एम्स के सर्जरी विभाग के अनुसार, एआई का सर्जरी में उपयोग बढ़ने से ऑपरेशन की प्रक्रिया में सुधार होगा और मरीजों के उपचार में नई संभावनाएं खुलेंगी।

    एआई की मदद से एम्स में हाल ही में दंत रोग विभाग ने बिना चीरे और टांका लगाए एक बच्ची की सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इसके अलावा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग भी एआई की मदद से गर्भावस्था के दौरान शुगर का पता लगाने पर काम कर रहा है।

    सर्जरी में एआई के इस्तेमाल के कई फायदे हैं। यह ऑपरेशन के लिए सही उपकरणों और तकनीकों की सलाह देता है, साथ ही सीटी स्कैन, एमआरआई या एक्स-रे से मेडिकल इमेज तैयार कर ऑपरेशन की योजना को और अधिक सटीक बनाता है। एआई सर्जरी में मशीन लर्निंग आधारित एल्गोरिदम का उपयोग कर सर्जनों को ऑपरेशन के दौरान मदद करता है।

    एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा कि एआई के इस प्रयोग से सर्जरी की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है। इसके माध्यम से न केवल सर्जरी की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों के इलाज में भी सुधार होगा।

     

    https://youtu.be/uNms6UNSRPM?si=dwCfG9ZyQHSVHPhB

  • पूर्वी यूपी के अंधेरे में जी रहे मरीजों को मिल रही नई रोशनी, बनारस से आ रहा है कॉर्निया

    पूर्वी यूपी के अंधेरे में जी रहे मरीजों को मिल रही नई रोशनी, बनारस से आ रहा है कॉर्निया

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग खराब कार्निया के कारण अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। गोरखपुर और बस्ती मंडल के बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स में करीब 1400 मरीज कार्निया के इंतजार में हैं, जबकि निजी अस्पतालों में भी कई मरीज पंजीकृत हैं।

    लेकिन, बनारस से मिल रही मदद से इन मरीजों को उम्मीद की किरण मिल रही है। पिछले दो साल में लायंस क्लब की मदद से पूर्वी यूपी के 28 मरीजों को कार्निया का प्रत्यारोपण किया गया है। हाल ही में तीन मरीजों को कार्निया प्रत्यारोपण की सुविधा मिली है। इनमें से संगीता (31) और बिंदावती (51) को अपनी आंखों में नई रोशनी मिली है, जबकि आलोक कुमार राय (52) के लिए भी यह ऑपरेशन सफल रहा।

    बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2018 से कार्निया प्रत्यारोपण और आई बैंक की शुरुआत हुई थी। अब तक 46 मरीजों को कार्निया लगाया जा चुका है, जिसमें से 28 मरीजों को कार्निया बनारस से प्राप्त हुआ है। विभागाध्यक्ष प्रो. रामयश यादव ने बताया कि इन ऑपरेशनों में लायंस क्लब की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो गोरखपुर के मरीजों के लिए बनारस से कार्निया उपलब्ध करा रहा है।

    इस तरह से गोरखपुर के लोग बनारस की मदद से अपनी खोई हुई रोशनी को फिर से पा रहे हैं।

  • टाइटेनियम अस्पताल को फर्जी कागजात पर हड़पने का मामला, पुलिस ने दर्ज किया केस

    टाइटेनियम अस्पताल को फर्जी कागजात पर हड़पने का मामला, पुलिस ने दर्ज किया केस

    तारामंडल स्थित टाइटेनियम अस्पताल को फर्जी कागजात पर अपना बताकर हड़पने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर रामगढ़ताल पुलिस ने बिहार निवासी उमेश कुमार चौधरी और शशि शेखर के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    अस्पताल के संचालक डॉ. विवेक शर्मा ने आरोप लगाया कि शुरुआत में इन लोगों ने अस्पताल में निवेश किया था, लेकिन 10 लाख रुपये वापस लेने के बाद इन दोनों ने 50 लाख रुपये और मांगे और फिर फर्जी तरीके से अस्पताल को अपना बताने लगे।

    डॉ. विवेक शर्मा ने बताया कि अस्पताल की शुरुआत में उन्होंने 50-60 लाख रुपये लगाए थे। इसके अलावा, बिहार के गोपालगंज निवासी उमेश कुमार चौधरी ने 20 लाख रुपये और अंबिका नगर मोतिहारी के शशि शेखर ने ढाई लाख रुपये का निवेश किया था। लेकिन बाद में इन लोगों ने अस्पताल के बारे में कभी कोई सवाल नहीं पूछा और तय शेयर के अनुसार उन्हें समय-समय पर रुपये भी दिए गए थे।

    पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है और मामले की छानबीन जारी है।

     

  • नवजात शिशुओं को मिलेगा शीघ्र इलाज का वरदान, खुलेंगे ग्यारह नये एनबीएसयू

    नवजात शिशुओं को मिलेगा शीघ्र इलाज का वरदान, खुलेंगे ग्यारह नये एनबीएसयू

    स्वास्थ्य विभाग ने उपकरणों की खरीद पूरी की, स्थान चिन्हित करने को कहा गया

    शिशु की तबीयत बिगड़ने पर स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा त्वरित इलाज

    गोरखपुर, 13 दिसम्बर 2024

    जिले मे ग्यारह नये न्यू बार्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे नवजात शिशुओं की तबीयत बिगड़ने पर उनके इलाज में स्थानीय स्तर पर ही त्वरित हस्तक्षेप हो सकेगा। शीघ्र इलाज से दूरस्थ अस्पतालों में ले जाने वाला समय बचेगा, जिससे नवजात शिशु के जीवन के जोखिम को कम किया जा सकेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने उपकरणों की खरीद पूरी कर ली है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने संबंधित अधीक्षक को प्रसव कक्ष के पास एनबीएसयू के लिए स्थान चिन्हित कर तैयारी करने को कहा है।

    सीएमओ ने बताया कि यह सभी एनबीएसयू ब्लॉक स्तर के सीएचसी पर खोले जाएंगे। वर्तमान समय में बेलघाट, चौरीचौरा, जंगल कौड़िया, बांसगांव, कैम्पियरगंज, सहजनवां और पिपराईच सीएचसी पर एनबीएसयू कार्य कर रहे हैं। बड़हलगंज सीएचसी पर भी एनबीएसयू स्थापित है, जिसे शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इनके अलावा अन्य ग्यारह ब्लॉक में नये एनबीएसयू बनाये जाएंगे। इन एनबीएसयू वाले ब्लॉक क्षेत्र के अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात शिशु या फिर डिस्चार्ज होकर घर जा चुके नवजात शिशु का स्वास्थ्य खराब होने पर 102 नंबर एम्बुलेंस की मदद से उन्हें एनबीएसयू तक लाया जा सकेगा। इस तरह सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए नवजात को जिला महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    डॉ दूबे ने बताया कि नये एनबीएसयू के लिए स्थान चिन्हित करने के बाद उपकरणों को स्थापित किया जाएगा। राज्य स्तर से प्रशिक्षित स्टॉफ नर्स मिलते ही उन्हें सक्रिय कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जन्म से लेकर 28 दिन तक बच्चे की अवस्था को नवजात कहा जाता है और बीमारियों व संक्रमण की दृष्टि से यह अवस्था बेहद संवेदनशील होती है । इस अवस्था में अगर बच्चे में किसी भी प्रकार की बीमारी हो और त्वरित चिकित्सा मिल जाए तो उसके जीवन की रक्षा हो जाती है । इससे शिशु मृत्यु दर में भी कमी आती है । इस कार्य में एनबीएसयू अहम भूमिका निभा रहे हैं।

    सीएमओ ने बताया कि जिले में वर्तमान समय में संचालित एनबीएसयू पर प्रशिक्षित स्टॉफ नर्स तैनात की गयी हैं जो अलग-अलग शिफ्ट में बीमार नवजात की देखभाल करती हैं । समय-समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक भी इन नवजात शिशु के स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं । अगर एनबीएसयू से कोई बच्चा रेफर किया जा रहा है तो उसके अभिभावकों को 102 नम्बर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। नवजात शिशु में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर दिक्कत होने पर जिला महिला अस्पताल में बने विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में रेफर किया जाता है । अति गंभीर स्वास्थ्य संकट की स्थिति में चिकित्सक द्वारा नवजात शिशु को बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्थित नवजात शिशु गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) में रेफर किया जाता है।

    534 नवजात हुए भर्ती

    सीएमओ ने बताया कि इस वर्ष अप्रैल से लेकर नवम्बर माह तक जिले के सात एनबीएसयू पर कुल 534 नवजात शिशुओं को भर्ती कर उनका इलाज किया गया। इनमें सर्वाधिक नवजात शिशु पिपराईच सीएचसी पर भर्ती किये गये। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु में स्वास्थ्य संबंधी कोई भी दिक्कत होने पर सीधे बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने की आवश्यकता नहीं है। बेहतर है कि पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर एम्बुलेंस की सहायता से पहुंचे। शीघ्र उपचार शुरू होने से नवजात के स्वास्थ्य में जल्दी सुधार होने की संभावना होती है। सिर्फ उन्हीं बच्चों को एसएनसीयू या एनआईसीयू भेजा जाता है जिन्हें चिकित्सक के परामर्श के अनुसार वहां भेजना आवश्यक है।

    https://youtu.be/We_pV0n4KwY?si=PywEDNv25dmRbcpg

  • दक्षिणांचल में अवैध दवा और जांच के धंधे पर प्रशासन का दबाव

    दक्षिणांचल में अवैध दवा और जांच के धंधे पर प्रशासन का दबाव

    गोरखपुर: जिले के दक्षिणांचल में अवैध दवा और जांच के धंधे की जड़ें गहरी होती जा रही हैं, और प्रशासन का इन पर प्रहार करने का प्रयास असफल हो रहा है। बुधवार को डीएम कृष्णा करुणेश के निर्देश पर ड्रग इंस्पेक्टर राहुल कुमार की अगुवाई में एक टीम का गठन किया गया।

    टीम के पहुंचने से पहले ही अवैध दवा की दुकानों, पैथोलॉजी सेंटर और जांच केंद्रों के शटर गिरा दिए गए थे। कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए टीम ने एक दवा की दुकान से दो एंटीबायोटिक के नमूने जांच के लिए लिए। अब इन सभी को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया जाएगा और पूछा जाएगा कि बिना सूचना के दुकान क्यों बंद की गई।

    उरुवा में छापेमारी की सूचना मिलते ही अन्य प्रमुख बाजारों जैसे माल्हनपार, सिकरीगंज, कुईं, बेलघाट, गोला आदि में दुकानों और पैथोलॉजी सेंटर के शटर गिरा दिए गए थे। यहां पर अवैध पैथोलॉजी सेंटर खोलने, गलत जांच रिपोर्ट देने और बिना डॉक्टर के पर्चे पर दवाएं बेचने की शिकायतें सामने आई हैं।

    टीम ने बताया कि सभी पैथोलॉजी सेंटर और ज्यादातर मेडिकल स्टोर बंद मिले। टीम ने इन दुकानों और सेंटर का वीडियो बनाया है और अब सभी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा। जल्द ही एक और औचक जांच की जाएगी।

    https://youtu.be/We_pV0n4KwY?si=EhAzp-WvcL8newt_