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  • बरेली के डॉ सत्य पाल आर्य बने भारतीय वन सेवा अधिकारी: संघर्ष और अटूट संकल्प की मिसाल

    बरेली के डॉ सत्य पाल आर्य बने भारतीय वन सेवा अधिकारी: संघर्ष और अटूट संकल्प की मिसाल

    बरेली। कठिन परिश्रम, लगन और वर्षों के संघर्ष का परिणाम आखिरकार बरेली के सत्य पाल आर्य को मिला। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 129 प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।

    पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रेरणा
    सत्य पाल आर्य मूल रूप से बरेली के निवासी हैं। एक साधारण परिवार से आने वाले सत्य पाल के पिता एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। उनके बड़े भाई वर्तमान में मेरठ में आईपीएस (IPS) अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। तैयारी के कठिन दौर में, वर्ष 2021 में उनकी माता का निधन हो गया। इस व्यक्तिगत क्षति ने उन्हें झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने अपनी माँ के सपनों को अपना संकल्प बनाकर हार नहीं मानी।
    एक मेधावी शैक्षणिक सफर
    सत्य पाल बचपन से ही मेधावी रहे हैं। उनकी सफलता की यात्रा उपलब्धियों से भरी है:
    प्रारंभिक शिक्षा: जय नारायण सरस्वती विद्या मंदिर, बरेली से इंटरमीडिएट में स्कूल टॉपर।
    स्नातक: दिल्ली विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान (B.Sc. Hons) में गोल्ड मेडल विजेता।
    स्नातकोत्तर: दिल्ली विश्वविद्यालय (दक्षिण परिसर) से आनुवंशिकी (Genetics) में एमएससी।
    उच्च शिक्षा: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पीएचडी पूर्ण की।
    राष्ट्रीय पात्रता: उन्होंने CSIR-JRF और ICAR-NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएँ भी उत्तीर्ण कीं।

    वैज्ञानिक से सिविल सेवक तक का सफर
    पीएचडी के बाद, सत्य पाल ने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में लगभग तीन वर्षों तक वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। एक सफल वैज्ञानिक करियर होने के बावजूद, समाज और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके लगाव ने उन्हें सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया।
    चुनौतियाँ और अंतिम सफलता
    सत्य पाल की सफलता का मार्ग आसान नहीं था। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में पाँच प्रयास किए और तीन बार प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की। हालांकि, उन्होंने अपना ध्यान भारतीय वन सेवा (IFS) पर केंद्रित किया और अपने पहले ही प्रयास में मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार उत्तीर्ण कर अंतिम चयन प्राप्त किया।
    “सत्य पाल की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।”

    उनकी इस उपलब्धि से परिवार, शिक्षकों और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है, और वे युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बनकर उभरे हैं।