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  • धर्म और अध्यात्म पर अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव का समापन

    धर्म और अध्यात्म पर अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव का समापन

    संवाददाता: रोहित श्रीवास्तव

    गोरखपुर। मेला लगता है, मेला खत्म भी हो जाता है पर कुछ आनन्दायक यादें छोड़ जाता है। ऐसा ही रहा गोरखपुर में हुआ ‘धर्म और अध्यात्म पर अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव – प्रथम संस्करण’, जिसमें दर्जनों फिल्में दिखाई गईं और फिल्मकारों व फिल्मी हस्तियों का जमावड़ा हुआ। फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन जहां विवेक रंजन अग्निहोत्री जैसे दिग्गज फिल्ममेकर अपनी ‘मास्टर क्लास’ के साथ घंटों छात्रों और दर्शकों के बीच रहें , वहीं सेलीब्रिटी जूरी पूरे दिन प्रतिस्पर्धा में शामिल फिल्मों को देखते रहे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक और निर्माता मधुर भंडारकर थे, जो बॉलीवुड में अपने सार्थक सिनेमा के लिए खूब जाने जाते हैं। चांदनी बार, पेज थ्री, कोर्पोरेट, ट्रैफिक सिग्नल आदि फिल्मों के लिए खूब सराहे गए हैं। उनके काम ने उन्हें कई पुरस्कार दिलाए हैं, जिसमें राष्ट्रीय पुरुस्कार भी शामिल है। लगभग तीन दशकों के करियर में, मधुर भंडारकर ने खुद को भारतीय फ़िल्म उद्योग में एक सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है।

    मंच पर उनके साथ रहे सेलीब्रिटी जूरी जिसमें जूरी प्रमुख थे; श्री धरम गुलाटी, इंडस्ट्री के नामचीन सिनेमैटोग्राफर, राजेश खट्टर, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता, अरुण शंकर, अभिनेता, गायक, निर्देशक और लेखक जिन्हें 2016 का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है, पुंडलिक यशोधा लक्ष्मण धूमल, मराठी फिल्म उद्योग के पुरस्कार विजेता फिल्म लेखक और निर्देशक और सुधीर मिश्रा की इस रात की सुबह नहीं (1996) फिल्म से ख्याति प्राप्त फिल्म नायिका स्मृति मिश्रा।

    आज के दिन की शुरुआत अभिनय की मास्टर क्लास से हुई जिसे मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री के सुप्रसिद्ध कास्टिंग डायरेक्टर पराग मेहता ने कंडक्ट किया, जिसमें छः सौ से ऊपर छात्रों और अन्य अभिनय के क्षेत्र में काम करने वाले लड़के लड़कियों ने भाग लिया। विवेक अग्निहोत्री की मास्टर क्लास की तरह ही ये भी इंटर्रेक्टिव क्लास थी, सवा घंटे की इस क्लास में पराग ने अभिनय के चंद गुर छात्रों को बताए, जो एक्टिंग में रुचि रखते हैं। मज़े की बात ये रही कि दर्शकों में कुछ मुम्बई फिल्मों में काम खोजते कुछ यू पी के कलाकार, जो गोरखपुर से बाहर से भी आए, उनमें से एक कलाकार तो इस मास्टर क्लास का सोशल मीडिया पर एड देखकर स्पेशली वाराणसी से ही सीधा क्लास अटेंड करने चला आया था। इस बात से आप समझ सकते हैं कि फिल्मों में काम करने का लोगों में कितना चाव रहता है। पराग ने एस्पायरिंग एक्टर को आगाह किया कि काम के लिए वे किसी भी स्कैम्स्टर को पैसा न दें, क्योंकि कोई भी सही कास्टिंग डायरेक्टर किसी से पैसे की मांग नहीं करता, बल्कि वह तो उस एक्टर को उसके काम के लिए पैसे ही दिलाता है। किसी फिल्म की कास्टिंग किस तरह की जाती है ? छात्रों के इस सवाल पर पराग ने सबको फिल्म कास्टिंग का पूरा विधी विधान बताया। सबसे खास सलाह छात्रों को पराग ने ये भी दी कि वे पढ़़ना लिखना खूब करें, क्योंकि एक अभिनेता के लिए पढ़ना लिखना और अपने पाठ को लाईन बाई लाईन बाय हार्ट करना बहुत जरूरी होता है।

    मास्टर क्लास के बाद एक शो में कोई 13 फिल्में दिखाई गईं, जिनमें छः तो पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की ही उत्तर प्रदेश के धर्म और अध्यात्म से जुड़े पर्यटन या यूं कहें कि तीर्थ स्थलों पर आधारित इन्फो कमर्शल फिल्में थीं, जिनमें एक विशेष फिल्म काशी की ‘मसान होली’ पर थी। इस पूरे शो में सबसे लम्बी फिल्म थी यू पी की ही – ‘बग्वाल – The Stone War’ जो वास्तव में उत्तराखंड के चंपावत जिले में मनाए जाने वाले एक ऐसे त्योहार पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जिसे शराब के नशे में चूर ब्रिटिश साम्राज्य भी बंद नहीं करा पाया था। चंपावत के देवीधुरा में मनाए जाने वाले बग्वाल त्योहार की कहानी, दरअसल, स्थानीय निवासियों की अपनी परंपराओं और धार्मिक आस्था की निरंतरता को बनाए रखने के संघर्ष की कहानी है।

    अब चूंकि यह एक पुरस्कार वितरण समारोह था, तो चलिए पहले विजेताओं के बारे में जान लेते हैं। सभी अलग-अलग श्रेणियों में छः के करीब पुरस्कार दिए गए…
    सबसे पहला धर्म/आध्यात्म पर सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म का पुरुस्कार बांगलादेश की फिल्म ‘शोल्ते; द लैम्प विक’ को दिया गया। ये फिल्म बंगलादेश में रहने वाले एक हिन्दु युवक की कोरोना काल की कहानी है, जब वह अपने पिता का श्राद्ध करना चाहता है और उसे अनगिनत परेशानियों का सामना करना पड़ता है और आखिरकार उसे जेल में डाल दिया जाता है।
    धर्म/आध्यात्म पर सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय फिल्म का पुरुस्कार महाराष्ट्र की फिल्म ‘इंडिया’स ग्रैंड फेस्टीवल दुर्गा पूजा’ को दिया गया। ये डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रसिद्ध अभिनेता गोविंद नामदेव की कम्पेरिंग में बंगाल में मनाई जाने वाली दुर्गा पूजा की विशालता को देखते हैं।
    धर्म/आध्यात्म पर सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म उत्तराखण्ड की ‘फूल देई’ को मिला जिसमें एक छोटी सी बच्ची की फूलों को लेकर कल्पना देखने को मिलती है।
    उत्तर प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरुस्कार जीता फिल्म ‘अघोरी’ ने। “अघोरी” एक डॉक्यूमेंट्री है जो उन रहस्यमयी और रहस्यमय साधुओं की दुनिया में गहरी झलक देती है, जिन्हें समाज अजीब, डरावना और अलौकिक मानता है। यह फिल्म अघोर संप्रदाय की परंपराओं, रहन-सहन, साधना, और दर्शन को उजागर करती है, जिन्हें आमतौर पर गलतफहमी और अंधविश्वासों के नजरिए से देखा जाता है।
    सर्वश्रेष्ठ जूरी पुरस्कार महाराष्ट्र के एक ही डि

    डायरेक्टर की दो फिल्मों को मिला; फिल्में हैं ‘शाईस्त्या’ एवं ‘व्हेअर डू आई फाईंड गॉड’ और इन दोनो ही फिल्मों के निर्देशक हैं – अक्षय प्रकाश वस्कर।

    सर्वश्रेष्ठ छात्र जूरी पुरस्कार चूंकि स्थानीय संस्थान, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र के लिए होता है, तो ये पुरुस्कार डीडीयू गोरखपुर की संध्या को प्राप्त हुआ।
    स्टार फिल्म डिरेक्टर मधुर भंडारकर ने सभी विजेताओं को पुरुस्कार बांटे और बधाईयां दी। अपने सम्भाषण में उन्होंने कहा – ऐसे विशेष फिल्मोत्सव होते रहने चाहिए। मुझे इस फिल्मोत्सव में उपस्थित होकर बहुत आनन्द आया और फिल्मोत्सव के भविष्य के एडीशन्स के लिए ढेरों शुभकामनाएं दीं। धर्म और अध्यात्म पर अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव को उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने प्रायोजित किया था और इसके आयोजक थे इन्डियन इन्फोटेन्मेंट मीडिया कॉर्पोरेशन। आयोजन कमेटी की हेड मिस केतकी कपाड़िया और फिल्मोत्सव के निदेशक हैं श्रीवास नायडू ने अपने विशेष आभार वक्तव्य में गोरखपुर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के डिप्टी डिरेक्टर श्री रविन्द्र मिश्रा का पुरजोर नाम लिया।

  • मशहूर फिल्म मेकर 3 महीने की सजा

    मशहूर फिल्म मेकर 3 महीने की सजा

    फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा को मुंबई की अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में तीन महीने की सजा सुनाई है. कोर्ट ने कहा- ‘रामगोपाल वर्मा को शिकायतकर्ता को 90 दिन के भीतर 3.72 लाख रुपए देना होगा. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें तीन महीने की सजा और भुगतनी होगी.’ यह मामला पिछले 7 सालों से चल रहा था. सुनवाई के दौरान रामगोपाल वर्मा कोर्ट में मौजूद नहीं थे. इसके चलते उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है. इस मामले पर रामगोपाल वर्मा ने X पर लिखा- ‘मेरे और अंधेरी कोर्ट के बारे में जो खबरें आई हैं, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह 7 साल पुराना मामला है. इसमें 2.38 लाख रुपए का विवाद है, जो मेरे पूर्व कर्मचारी से संबंधित है. मेरे वकील इस मामले को देख रहे हैं. फिलहाल यह मामला कोर्ट में है, इसलिए मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता.’