Tag: #gorakhpur #gorakhnath

  • गोरक्षपीठाधीश्वर आज अर्पित करेंगे गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग

    गोरक्षपीठाधीश्वर आज अर्पित करेंगे गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग

    गोरक्षपीठाधीश्वर आज अर्पित करेंगे गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग
    लाखों की संख्या में जुटेंगे श्रद्धालु, खिचड़ी चढ़ाने के लिए सोमवार से श्रद्धालुओं ने डाला डेरा
    खिचड़ी मेले की हर व्यवस्था पर खुद नजर बनाए हुए हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    गोरखपुर, 13 जनवरी। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार मंगलवार को ब्रह्म मुहूर्त में शिवावतार गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख-समृद्धि की मंगलकामना करेंगे। हालांकि बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सोमवार से ही शुरू हो गया। मंगलवार को यहां आस्था का जन ज्वार नजर आएगा,

    पूरी प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर खिचड़ी चढ़ाने की यह अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। मान्यता है कि बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। अरुणोदय काल में मकर संक्रान्ति का महापर्व मंगलवार को मनाया जायेगा। इस दिन उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाएंगे। आनुष्ठानिक कार्यक्रमों का शंखनाद भोर में ही हो जाएगा। सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करेंगे। इसके बाद नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी बाबा को चढ़ेगी। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाएगी,

    मंदिर व प्रशासन की ओर से खिचड़ी महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा का पूर्ण इंतजाम किया गया है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्रखुद सभी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मकर संक्रांति पर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर पूरी तरह तैयार है। समूचा मंदिर क्षेत्र सतरंगी रोशनी में नहाया हुआ है। यहां श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सोमवार से ही प्रारम्भ हो गया है। मंदिर प्रबंधन की तरफ से उनके ठहरने और अन्य सुविधाओं का पूरा इंतज़ाम किया गया है। प्रशासन की तरफ से रैन बसेरों में भी पूरी व्यवस्था की गई है।

  • महायोगी गोरखनाथ विवि के दो आचार्यों को 21.36 लाख रुपये का शोध अनुदान

    महायोगी गोरखनाथ विवि के दो आचार्यों को 21.36 लाख रुपये का शोध अनुदान

    महायोगी गोरखनाथ विवि के दो आचार्यों को 21.36 लाख रुपये का शोध अनुदान
    डॉ शशिकांत सिंह को 15.36 लाख और डॉ. अमित दूबे को 6 लाख का ग्रांट.
    जन स्वास्थ्य से जुड़े हैं दोनों आचार्यों के चयनित रिसर्च प्रोजेक्ट गोरखपुर, 4 सितंबर। वर्तमान अकादमिक सत्र में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। विश्वविद्यालय के दो आचार्यों डॉ. शशिकांत सिंह और डॉ. अमित दूबे को शोध और अनुसंधान कार्य के लिए उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूपीसीएसटी) की ओर से कुल 21.36 लाख रुपये का अनुदान अनुशंसित हुआ है। ग्रांट के लिए चयनित इन दोनों ही आचार्यों के रिसर्च प्रोजेक्ट किताबी न होकर, जन स्वास्थ्य से जुड़े हैं।
    डॉ. शशिकांत सिंह महायोगी गोरखननाथ विश्वविद्यालय में संचालित फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य हैं जबकि डॉ. अमित दूबे संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष। यूपीसीएसटी ने डॉ. शशिकांत सिंह को 15.36 लाख रुपये और डॉ. अमित दूबे को 6 लाख रुपये का शोध-अनुसंधान अनुदान देने का ग्रांट दिया है। दोनों आचार्यों को यूपीसीएसटी की ओर से मिले ग्रांट पर बधाई देते हुए विश्विद्यालय के कुलपति मेजर जनरल (डॉ.) अतुल वाजपेयी ने कहा है कि यह असाधारण उपलब्धि है। इससे शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और भविष्य में शोध अन्वेषण के लिए नए नवाचारों के मार्ग प्रशस्त होंगे। कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने कहा की यूपीसीएसटी के शोध अनुदान से विश्वविद्यालय की ख्याति वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित होगी।
    डॉ. शशिकांत सिंह का शोध विषय ‘संभावित एंटीएम्नेसिक एजेंट के रूप में मैंगिफेरिन के नए मैनिच एनालॉग्स के डिजाइन, संश्लेषण और एंजाइम गतिकी अध्ययन’ है। शोध विषय वस्तु की व्यावहारिक जानकारी देते हुए डॉ. शशिकांत ने बताया कि 65 वर्ष की आयु के लोगो में यादाश्त की कमजोरी आ जाती है। इसके लिए पूरे विश्व में मात्र 4 दवाएं हैं जो अभी भी शत प्रतिशत कारगर नहीं है। इसलिए अब समय आ गया है कि हम उन लोगों के लिए कुछ करें जो खुद को याद नहीं रख सकते। उनका रिसर्च प्रोजेक्ट इसी पर केंद्रित है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉ. शशिकांत सिंह के 12 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
    डॉ. अमित कुमार दूबे को सितोपलादि चूर्ण में उपयोग किये जाने वाले पौधों में पाए जाने वाले पदार्थों की कंप्यूटर जनित प्रोफाइलिंग विषय पर शोध अनुदान अनुशंसित हुआ है। डॉ. अमित ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में औषधीय पौधों पर अन्वेषकीय कार्य से जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध से नवाचार होगा। डॉ.अमित के दो दर्जन से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इजराइल के एग्रीकल्चर रिसर्च ऑर्गनाइजेशन से तीन वर्ष का शोध कार्य किया है।