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  • शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में गर्भस्थ शिशु के हृदय रोग का सफल उपचार, जन्म के बाद पूरी तरह स्वस्थ मिला बच्चा

    शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में गर्भस्थ शिशु के हृदय रोग का सफल उपचार, जन्म के बाद पूरी तरह स्वस्थ मिला बच्चा

    •एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी कैंप ने गोरखपुर में आधुनिक चिकित्सा की नई उम्मीद जगाई

    •डॉ. नीरज अवस्थी की देखरेख में 18 माह तक नियमित जांच और उपचार से मिली बड़ी सफलता

    गोरखपुर।बाबा गुरु गोरखनाथ की पावन नगरी गोरखपुर अब आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रही है। शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में आयोजित एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी कैंप के माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चे के हृदय रोग का सफल उपचार शुरू किया गया। जन्म के बाद लगातार निगरानी और आधुनिक जांचों के परिणामस्वरूप आज बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।
    पीपीगंज निवासी गर्भवती महिला प्रियंका सिंह के गर्भ में पल रहे शिशु की जांच के दौरान हृदय की मुख्य धमनी एओर्टिक आर्च में गंभीर समस्या का पता चला था। इस जानकारी के बाद परिजन अत्यंत चिंतित हो उठे। ऐसे कठिन समय में शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में उपलब्ध उन्नत सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श ने परिवार को नई आशा दी।
    मामले की देखरेख *डॉ. नीरज अवस्थी* ने की, जो स्कॉट फोर्टिस इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी डायरेक्टर एवं *पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट* हैं। डॉ. अवस्थी वर्ष 2017 से प्रत्येक माह शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि नियमित निगरानी, समयबद्ध जांच और उचित उपचार से बच्चे को सुरक्षित रखा जा सकता है।
    जन्म के बाद बच्चे की प्रत्येक छह माह पर *इकोकार्डियोग्राफी* द्वारा जांच की गई। वर्तमान में बच्चा लगभग 18 माह का हो चुका है। नवीनतम जांच में उसकी हृदय संबंधी समस्या लगभग पूरी तरह ठीक पाई गई है। यह सफलता न केवल परिजनों के लिए राहत का संदेश है, बल्कि पूर्वांचल में बाल हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
    शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के अनुसार डॉ. नीरज अवस्थी के मार्गदर्शन में *अब तक लगभग 650 बच्चों के हृदय का निःशुल्क ऑपरेशन* सफलतापूर्वक कराया जा चुका है और सभी बच्चे स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। यह सेवा उन परिवारों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है, जो बड़े शहरों में महंगा उपचार कराने में असमर्थ होते हैं।
    अस्पताल में अब लेज़र तकनीक, रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और उन्नत कार्डियक सेवाओं जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थानीय मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गोरखपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े महानगरों की ओर जाने की मजबूरी काफी हद तक कम हो रही है।
    अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के माध्यम से अब ब्रेन स्ट्रोक, फेफड़ों और किडनी की जटिल समस्याओं, अत्यधिक ब्लीडिंग तथा ऐसे कैंसर जिनका ऑपरेशन संभव नहीं होता, उनके उपचार की सुविधा भी उपलब्ध है। यह चिकित्सा व्यवस्था गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
    शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में गर्भस्थ शिशु के हृदय रोग की पहचान, समय रहते उपचार की शुरुआत और जन्म के बाद बच्चे का स्वस्थ होना यह साबित करता है कि सही समय पर जांच, विशेषज्ञ चिकित्सक और आधुनिक तकनीक मिलकर असंभव प्रतीत होने वाली स्थितियों को भी आशा में बदल सकते हैं।
    आज के कार्डियोलॉजी कैंप में कुल 86 बच्चों का परीक्षण हुआ। इतने बच्चे देखे गए जिसमें 19 बच्चों को हृदय के आपरेशन की आवश्यकता है जिनका निश्शुल्क आपरेशन कराने के लिए प्रयास चालू कर दिया गया है। अगले कुछ महीनों में इन सभी बच्चों का आपरेशन करा दिया जाएगा।

  • बिना रिप्लेसमेंट ब्लड डोनेशन की पहल तेज, जिला अस्पताल से रक्तदाताओं ने भी दिया संदेश

    बिना रिप्लेसमेंट ब्लड डोनेशन की पहल तेज, जिला अस्पताल से रक्तदाताओं ने भी दिया संदेश

    महापौर, सीएमओ और जिला अस्पताल ने विभिन्न संगठनों से कैलेंडर का हिस्सा बनने की अपील की

    हिंदुस्तान रसायन उर्वरक लिमिटेड के एमडी ने रक्तदान कर लोगों को प्रेरित किया

    जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब 32 यूनिट ब्लड डोनेट किया गया

    गोरखपुर। जिला अस्पताल में मरीजों को बिना रिप्लेसमेंट खून मिल सके, इसकी पहल शनिवार को विश्व रक्तदाता दिवस से ही तेज हो गई। इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, सीएमओ डॉ राजेश झा, जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ बीके सुमन और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ प्रशांत अस्थाना सहित रक्तदाताओं ने भी लोगों से कैलेंडर का हिस्सा बन कर रक्तदान करने की अपील की। साथ ही हिंदुस्तान रसायन उर्वरक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शिवा प्रसाद मोहंती ने रक्तदान कर लोगों के बीच नजीर पेश की और अधिकाधिक लोगों से रक्तदान की अपील की। इस मौके पर कुल 32 यूनिट ब्लड डोनेट किया गया।

    इस अवसर पर महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि रक्तदान स्वास्थ्य के दृष्टि से फायदेमंद है। यह न सिर्फ लोगों को जीवनदान देता है, बल्कि रक्तदाता को भी कई प्रकार के विकारों से बचाता है। इससे न तो शारीरिक कमजोरी आती है और न ही शरीर में खून की कमी होती है। हम सभी को स्वेच्छा से रक्तदान करना चाहिए ताकि जिला अस्पताल का ब्लड बैंक समृद्ध रहे और बिना डोनर के भी लोगों को ब्लड मिल सके।

    हिंदुस्तान रसायन उर्वरक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शिवा प्रसाद मोहंती ने कहा कि उन्होंने खुद रक्तदान किया और उनके लिए यह एक अच्छा अनुभव रहा। देश और समाज के सभी नागरिकों को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए। इससे शरीर पर कोई भी बुरा असर नहीं पड़ता है।

    सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि विश्व रक्तदाता दिवस पर रक्तदान करने वालों को रेडक्रॉस सोसाइटी की तरफ से सम्मानित भी किया गया। सोसाइटी के पदाधिकारियों ने आगे भी रक्तदाताओं को सम्मानित कर बिना रिप्लेसमेंट ब्लड डोनेशन की मुहिम में भरपूर मदद का आश्वासन दिया। जिला अस्पताल ने रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र भी दिया है।

    सीएमओ ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को प्रत्येक सप्ताह कम से कम अस्सी यूनिट ब्लड डोनेट करवाना है ताकि किसी भी मरीज को खून की आवश्यकता पड़ने पर तुरंत डोनर की जरूरत न पड़े। इस दिशा में जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ संजय कुमार के दिशा निर्देशन में विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की मदद से आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ प्रशांत अस्थाना ने बताया कि प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ संजय कुमार और सीएमओ डॉ राजेश झा के दिशा निर्देशन में स्वतंत्र रक्तदाता समूहों, स्वयंसेवी संगठनों और स्कूल कॉलेज का एक कैलेंडर तैयार किया जा रहा है ताकि उनकी मदद से रक्तदान करवा कर प्रत्येक सप्ताह डिमांड के अनुसार ब्लड की उपलब्धता सुनिश्चित रहे। इस कार्य में कोई भी संगठन और व्यक्ति स्वेच्छा से आगे आकर जुड़ सकता है। ऐसे संगठनों से सम्पर्क भी किया जा रहा है।

    इस अवसर पर रेडक्रॉस सोसाइटी से पदाधिकारी अजय प्रताप सिंह, शिवेंद्र सिंह, दिनेश मणि त्रिपाठी, जिला अस्पताल से डॉ राजेंद्र ठाकुर, डॉ जेपी सिंह, एनएचएम से आदिल फखर सहित कई संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

    ब्लड बैंक का किया निरीक्षण

    सीएमओ डॉ झा ने विश्व रक्तदाता दिवस पर जिला अस्पताल के पूरे ब्लड बैंक का निरीक्षण किया और वहां की पूरी प्रक्रिया को समझा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि ब्लड बैंक हमेशा समृद्ध रहे और किसी भी मरीज का परिजन ब्लड के मामले में निराश न लौटे।

  • स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में जन आरोग्य समितियों की अहम भूमिका

    स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में जन आरोग्य समितियों की अहम भूमिका

    “जिले भर की जन आरोग्य समितियों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित की अभिमुखीकरण कार्यशाला”

    “सीएमओ ने शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए धन खर्च करने को कहा”

    “समिति के पदाधिकारियों ने आसपास के ग्राम पंचायतों के सहयोग से चिकित्सा इकाइयों के विकास आश्वासन दिया”

    “तीन माह बाद फिर से होगी बैठक”

    गोरखपुर। जिले की अट्ठावन जन आरोग्य समितियों के पदाधिकारियों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने कहा कि समितियों को शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए ही धन खर्च करना है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में जन आरोग्य समितियों की अहम भूमिका है। समिति के माध्यम से न केवल स्वास्थ्य इकाइयों के आधारभूत संरचना में आमूलचूल परिवर्तन संभव है, बल्कि जनजागरूकता का स्तर बढ़ा कर स्वस्थ समाज का निर्माण भी किया जा सकता है।

    इस मौके पर समिति के पदाधिकारियों ने आसपास के ग्राम पंचायतों के सहयोग से चिकित्सा इकाइयों के विकास आश्वासन दिया। कार्यशाला का स्वागत करते हुए पदाधिकारियों ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। तय हुआ कि तीन माह बाद पुन: बैठक कर सकारात्मक प्रयासों को बढ़ाया जाएगा।

    सीएमओ डॉ झा ने समिति के पदाधिकारियों को विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शीघ्र जांच और इलाज से किसी भी बीमारी को जटिल होने से बचाया जा सकता है। खासतौर से कैंसर की चर्चा करते हुए सीएमओ ने कहा कि समय से पहचान कर इस बीमारी का भी इलाज संभव है। इस दिशा में आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की अहम भूमिका है। इन केंद्रों पर सभी प्रमुख बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जन जन तक यह संदेश पहुंचाना होगा कि किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जांच व परामर्श के लिए पहुंच सकते हैं।

    सीएमओ ने बताया कि जन आरोग्य समिति में जिला पंचायत सदस्य या ब्लॉक पंचायत सदस्य अध्यक्ष होते हैं, जबकि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सचिव होते हैं। स्वास्थ्य इकाई पर आधारभूत विकास कार्य व अन्य आवश्यक काम के लिए दोनों लोगों के हस्ताक्षर से पैसे खर्च किये जा सकते हैं। जिले में इस समय क्रियाशील अट्ठावन समिति में से प्रत्येक समिति को करीब सतासी हजार रूपये जारी किये जा रहे हैं। समितियों से कहा गया है कि वह इस धन से मानकों का पालन करते हुए चिकित्सा इकाइयों पर मरीजों की प्राथमिक सुविधा के लिए काम कराएं।

    कार्यक्रम में डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय और मंडलीय कम्युनिटी प्रासेस कंसल्टेंट राजीव रंजन ने विशेष सहयोग किया। इस अवसर पर मंडलीय क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ जसवंत मल्ल और डीपीएम पंकज आनंद भी मौजूद रहे।

  • डबल इंजन सरकार के स्वस्थ भारत के सपने को साकार करने में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका

    डबल इंजन सरकार के स्वस्थ भारत के सपने को साकार करने में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका

    “डिजिटल हेल्थ मास्टर क्लास में शामिल हुए गोरखपुर के सदर सांसद रवि किशन”

    “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को गति देने के लिए हॉस्पिटल लीडर्स से की गई चर्चा”

    “एक ही मंच पर बैठे सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र के प्रतिनिधिगण”

    “एएचपीआई के यूपी चैप्टर और रिजेन्सी हेल्थ ग्रुप की मदद से हुआ आयोजन”

    गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार जनस्वास्थ्य के प्रति बेहद संवेदनशील और सतर्क है। लोगों को सही से और सम्पूर्ण इलाज मिल सके, इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मदद से करोड़ो रुपये लोगों को अकेले गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में मिले हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को निजी क्षेत्र का भी भरपूर सहयोग मिलने से डबल इंजन सरकार के स्वस्थ भारत के सपने को साकार करना और भी आसान हो जाएगा। यह बातें गोरखपुर जिले के सदर सीट से सांसद रवि किशन शुक्ल ने रविवार को एक निजी होटल में आयोजित डिजिटल हेल्थ मास्टर क्लास को संबोधित करते हुए कहीं।

    एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया-एएचपीआई के यूपी चैप्टर और रिजेन्सी हेल्थ ग्रुप के सहयोग से हुए इस आयोजन में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को गति देने के लिए हॉस्पिटल लीडर्स से चर्चा की गई। डिजिटल हेल्थ मास्टर क्लास को कोइटा फाउंडेशन और एएचपीआई ने मिल कर तैयार किया है। सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र के प्रतिनिधिगण पहली बार इस मुद्दे पर एक साथ बैठे और डिजिटल मिशन को सफल बनाने के लिए भावी रणनीति को लेकर संवाद किया।

    कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सदर सांसद ने कहा कि यह बेहद सकारात्मक सोच है कि भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने का जो स्वप्न देखा गया उसे पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र खुद आगे आ रहा है। इसके लिए आयोजक संगठन और सभी चिकित्सक बधाई के पात्र है। सदर सांसद ने आश्वस्त किया कि इस मुहिम में वह हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे। साथ ही अपील की कि ज्यादा से ज्यादा अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से सूचीबद्ध होकर आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराएं और डबल इंजन सरकार के लोकहित के अभियान को मजबूती दें।

    कार्यशाला को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद पांडेय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ गगन गुप्ता, एएचपीआई के निदेशक डॉ सुनील खेत्रपाल, विषय विशेषज्ञ और सैनिक हॉस्पिटल नई दिल्ली के वरिष्ठ परामर्शदाता लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ एमएम रामशंकर, एएचपीआई की सचिव डॉ जैनब जैदी, रिजेन्सी हेल्थ ग्रुप से डॉ विजय लक्ष्मी गोपाकुमार, डॉ.संदीप शर्मा और संजीव सिंह आदि ने संबोधित किया और अपनी प्रस्तुति भी दी। कार्यक्रम का कोऑडिˈनेश्‌न्‌ एवं संचालन डॉ मुस्तफा खान और वेद प्रकाश पाठक ने किया। इस अवसर पर फरहान आलम, साफिया खान, पुष्पेश पाठक, चंदन जोशी समेत सैकड़ों हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के प्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

    *एबीडीएम, ईएमआर और एचएमआईएस पर हुई चर्चा*

    कार्यशाला के दौरान एबीडीएम, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (ईएमआर) और एचएमआईएस के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। एबीडीएम के बारे में बताया गया कि एक बार जब यह मिशन अपनी पूर्णता को प्राप्त कर लेगा तो मरीज कागज रहित रिकॉर्ड्स और पर्चियों से सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। प्रत्येक नागरिक के पास चौदह अंकों का एक यूनिक हेल्थ आईडी होगा जिसके जरिये वह सेवाएं प्राप्त कर पाएगा।

    आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत मिलने वाला आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड का सुरक्षित और सहमति आधारित उपयोग सुनिश्चित करता है। यह आजीवन मान्य, स्वैच्छिक एवं निःशुल्क है। यह अस्पतालों, लैब्स और क्लिनिक्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा देता है। यह बेहतर डॉयग्नोसिस और उपचार में सहायक है। इसके जरिये स्वास्थ्य बीमा से सीमलेस इंटीग्रेशन भी हो रहा है।

    वक्ताओं ने कहा कि यह मिशन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एकीकृत मंच प्रदान कर रहा है। यह भारत सरकार की एक ऐसी पहल है जो स्वास्थ्य प्रणाली के डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखती है। इसमें हेल्थ आईडी, हेल्थ फैसिलिसिटी रजिस्ट्री और हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री जैसे घटक शामिल हैं।

    यह भी बताया गया कि आने वाला समय इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और मैनेजमेंट का है। ऐसे में ईएमआर और एचएमआईएस न सिर्फ मरीज के लिए उपयोगी है, बल्कि यह अस्पताल के व्यवसाय को गुणवत्ता से परिपूर्ण बनाएंगे और संस्थानों के प्रति लोगों में विश्वसनीयता भी बढ़ाने का काम करेंगे।

     

  • नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी शुरू होगी बायोमैट्रिक हाजिरी, लापरवाही करने पर होगी सख्त कार्रवाई

    नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी शुरू होगी बायोमैट्रिक हाजिरी, लापरवाही करने पर होगी सख्त कार्रवाई

    “सीएमओ के निरीक्षण में इस्लामचक नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर समय से उपस्थित नहीं मिले चिकित्सक और कर्मचारी, वेतन रोका गया”

    “बसंतपुर में सबकुछ ठीकठाक मिला, तुर्कमानपुर नगरीय स्वास्थ्य केंद्र के लिए नया भवन खोजने का सुझाव”

    “बेतियाहाता में चिकित्सक की होगी नियुक्ति”

    गोरखपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने रविवार को नगरीय स्वास्थ्य केंद्र इस्लामचक, बसंतपुर, बेतियाहाता और तुर्कमानपुर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान इस्लामचक के मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में चिकित्सक और कई स्टॉफ समय से नहीं पहुंचे। सीएमओ ने नाराजगी जताते हुए कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने संतोषजनक उत्तर मिलने तक सभी संबंधित का वेतन रोकने का भी निर्देश दिया। सीएमओ को बसंतपुर और तुर्कमानपुर मेले में सभी स्टॉफ मौजूद मिले। तुर्कमानपुर में भवन की खराब स्थिति को देखते हुए नया भवन खोजने का सीएमओ द्वारा सुझाव दिया गया। बेतियाहाता नगरीय स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण में चिकित्सक का पद खाली मिलने पर सीएमओ ने भर्ती का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि यथाशीघ्र नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू होगी। जो लोग इस हाजिरी और काम में लापरवाही करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    सीएमओं ने बताया कि सीएमओ कार्यालय और ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू कर दी गई है। इसकी निगरानी वरिष्ठ अधिकारी और वह स्वयं कर रहे हैं। इस व्यवस्था को नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लागू किया जाएगी। सभी केंद्रों पर सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक उपस्थिति अनिवार्य है। इस्लामचक के समय से न पहुंचने वाले चिकित्सक और कर्मियों से जवाब मांगा गया है और उत्तर मिलने तक वेतन रोक दिया गया है। बसंतपुर में सभी व्यवस्थाएं मुकम्मल मिलीं। मरीजों से अच्छा फीडबैक मिला। तुर्कमानपुर में सेवाएं अच्छी मिलीं, लेकिन भवन बदलने की आवश्यकता है। नया भवन खोजा जाएगा। बेतियाहाता में चिकित्सक के खाली पद पर नियमानुसार आवेदन कर भर्ती होगी।

    सीएमओं ने कहा कि पर्यवेक्षण से जुड़े सभी संबंधित अधिकारीगण से कहा गया है कि मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में चिकित्सक, स्टॉफ और दवाओं की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। समय पर सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक और स्टॉफ मौजूद रहें। केंद्र पर आते और ड्यूटी पूरी कर जाते समय बायोमैट्रिक हाजिरी अवश्य लगाएं।

    इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी और शहरी स्वास्थ्य मिशन समन्वयक सुरेश सिंह चौहान भी मौजूद रहें।

  • वनटांगिया गांव में बनेगा स्वास्थ्य उपकेंद्र

    वनटांगिया गांव में बनेगा स्वास्थ्य उपकेंद्र

    “सीएमओ ने गांव में एम्स गोरखपुर और चरगांवा पीएचसी के संयुक्त स्वास्थ्य शिविर में दी जानकारी”

    गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर और चरगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तरफ से जंगल तिकोनिया नंबर तीन (वनटांगिया गांव) में बुधवार को स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे जनपद के सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि गांव में शीघ्र ही एक स्वास्थ्य उपकेंद्र खोला जाएगा। आगे चल कर इस उपकेंद्र को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में भी अपग्रेड किया जाएगा। सीएमओ ने कहा कि किराये का भवन मिलते ही गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र शुरू करा दिया जाएगा। गांव के प्रधान ने केंद्र के लिए किराये का भवन दिलवाने में मदद का आश्वासन दिया है।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि स्वास्थ्य उपकेंद्र खुलने से वनटांगिया समुदाय को अपने नजदीक ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलने लगेंगी। केंद्र के जरिये बीमारियों की स्क्रिनिंग, दवाएं, नियमित टीकाकरण और अन्य कई सेवाएं वनटांगिया समुदाय को मिलेंगी। गांव में उपकेंद्र खुल जाने से एम्स गोरखपुर और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय समय पर लगाए जाने वाले स्वास्थ्य शिविर को भी मजबूती मिलेगी।

    सीएमओ ने बताया कि एम्स गोरखपुर के साथ मिल कर स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में वनटांगिया गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। शिविर के जरिये जहां एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श मिला वहीं जांच व दवाओं में चरगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने सहयोग दिया। शिविर में स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान वनटांगिया गांव के मुखिया रामगनेश द्वारा मिनी स्वास्थ्य केंद्र की मांग की गई थी।

    इस अवसर पर एम्स के चिकित्सक डॉ आनंद मोहन दीक्षित, डॉ प्रदीप खारया, डॉ यू वैंकेटश, डॉ लालमणि सिंह, डॉ दिव्यांशु कुमार, डॉ फैसल अंसारी, डॉ सुरभि नेगी और डॉ घोष ने सेवाएं दीं। शिविर में डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा, एचईओ मनोज कुमार, बीसीपीएम चंद्रशेखर यादव, अजीत रमन और सीएचओ यशवंत सिंह मौजूद रहे।

    *लोगों को किया गया जागरूक*

    शिविर के माध्यम से वनटांगियां गांव में संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार का बुखार होने पर चिकित्सक से ही इलाज कराएं। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर हर प्रकार के बुखार के जांच और इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। बुखार के रोगी सरकारी अस्पताल जाने के लिए 108 नंबर एम्बुलेंस का इस्तेमाल कर सकते हैं। गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए भी सभी अस्पतालों पर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं। वह अस्पताल जाने और वापस घर लौटने के लिए 102 नंबर एम्बुलेंस की सुविधा का इस्तेमाल कर सकती हैं।