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सीएमओ ने सीएचसी का किया निरीक्षण, दिया निर्देश
सीएमओ को दिया पत्रक : सीएचसी पर आए सीएमओ को चिल्लूपार संघर्ष समिति के अध्यक्ष बबलू राय ने पत्रक देकर सुविधाओं को सुधार की मांग किया है।
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बेहतरीन सुविधाओं से मजबूत होती है शहर की पहचान : मुख्यमंत्री
“सीएम योगी ने किया तिलक पैथोलॉजी के नवीन प्रकल्प स्किन, लेजर एंड हेयर क्लिनिक का उद्घाटन”
“जीरो टॉलरेंस की नीति से विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा उत्तर प्रदेश : मुख्यमंत्री”
गोरखपुर, 5 अप्रैल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम जुबिली कॉलेज रोड स्थित तिलक पैथोलॉजी के नवीन प्रकल्प स्किन, लेजर एंड हेयर क्लिनिक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य विकास के दो महत्वपूर्ण आयाम हैं। इन दोनों से जुड़ी बेहतरीन सुविधाएं किसी भी शहर की पहचान को मजबूत करती हैं।
सीएम योगी ने इस स्वास्थ्य सेवा संस्थान के सूत्रधार महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और संचालकद्वय डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव (पैथोलॉजिस्ट) व डॉ. दिव्यांशु श्रीवास्तव (डर्मेटोलॉजिस्ट) को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जब विकास और नई सेवा सुविधाओं का शुभारंभ होता है तो उसके माध्यम से निवेश और रोजगार सृजन भी होता है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। पूर्व की सरकारों में न तो सुरक्षा का माहौल था और न ही लोगों को कुछ अच्छा और नया करने के लिए प्रोत्साहन था। गौरवशाली इतिहास वाले इस प्रदेश की पहचान पर ही संकट खड़ा हो गया था। पर, 2017 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन वाली डबल इंजन सरकार के आने के बाद यूपी में सुरक्षा का उत्कृष्ट वातावरण बन चुका है तो साथ ही लोगों को आगे बढ़ने के लिए भरपूर प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो उत्तर प्रदेश आजादी के बाद सात दशक तक विकास के पैमाने पर कहीं ठहरता नहीं था, वही प्रदेश बदले माहौल में विरासत का संरक्षण करते हुए, सुरक्षा का माहौल देकर, अपराध और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज यूपी का नाम पूरे देश में सम्मान के साथ लिया जाता है। लोग आज के उत्तर प्रदेश पर गर्व की अनुभूति करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व बदलाव आया है। स्वास्थ्य सुविधाओं हर व्यक्ति तक सुलभ हो रही हैं। सीएम ने कहा कि गोरखपुर ने आठ वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। इसमें निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
संबोधन से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्लिनिक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध जांच और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी ली। उन्होंने तिलक पैथोलॉजी के प्रमुख एवं महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव की मंच से मुक्तकंठ सराहना की। उद्घाटन समारोह को सांसद रविकिशन ने भी संबोधित किया। स्वागत संबोधन महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और संचालन रूपेश श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, विधायक फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, भाजपा के महानगर अध्यक्ष देवेश श्रीवास्तव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में एडवांस पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी का कैंप
गोरखपुर। हर बार की तरह इस बार भी दिल्ली फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर तथा पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के विभाग अध्यक्ष डॉ नीरज अवस्थी ने 93 बच्चों का विधिवत ह्रदय जांच किया जिसमें 19 बच्चे ऐसे पाए गए, जिन्हें ऑपरेशन की आवश्यकता है. ज्यादातर बच्चे जिनका ऑपरेशन हो चुका है वह अपना चेकअप कराने आए थे और सभी बच्चे स्वस्थ पाए गए हैं.
इन सभी बच्चों का जो आज हृदय संबंधित चिकित्सा की परामर्श लेने के लिए आए थे इनका इकोकार्डियोग्राफी के साथ हृदय से संबंधित अन्य जांचे भी की गई . जिन बच्चों की बीमारी केवल दवा से ठीक हो सकती थी उन्हें दवा लेकर दे दिया गया जिन बच्चों को ऑपरेशन की आवश्यकता है उनके ऑपरेशन की तैयारी चालू हो गई है .
इस समय नवरात्र चल रहा है मां दुर्गा किसी भी रूप में कब आ जाएं यह कहा नहीं जा सकता है इसलिए कुछ बच्चियों का ऑपरेशन की तिथि दे दी गई है इन बच्चियों का निशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा शाही ग्लोबल हॉस्पिटल की तरफ से नवरात्र के समय इन बच्चियों के माता-पिता तथा इन बच्चों को भी निशुल्क ऑपरेशन का गिफ्ट दिया गया है.
बच्चों में हृदय की बीमारी का ऑपरेशन काफी महंगा पड़ता है अतः इसकी मदद के लिए मुख्यमंत्री निधि ,संसध निधि ,के साथ अन्य सामाजिक संगठन के सहयोग से किया जाता है . पुज्य योगी आदित्य नाथ जी महाराज माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के जनता दरबार में अभी तक जो भी गया है उसे कुछ न कुछ सहायता मिला है , पैसे के अभाव मे अभी तक किसी का इलाज नहीं रुका है.
अभी तक 626 से ज्यादा बच्चों के हृदय का ऑपरेशन हो चुका है. सबसे आश्चर्य की बात है की बाबा गोरखनाथ के आशीर्वाद से अभी तक सभी बच्चे ठीक रहे, 100% इलाज सफल रहा .एक भी कैजुअल्टी या मृत्यु नहीं हुई .बच्चों के हृदय का ऑपरेशन इतना जटिल होने के बाद भी इस तरह के सफलता मिली .
जिसमें जो गरीब, निर्धन असहाय हैं उनकी मदद शाही ग्लोबल हॉस्पिटल किसी न किसी के सहयोग से खुद करता है .शाही ग्लोबल अस्पताल के निदेशक डॉ शिव शंकर शाही का मानना है कि जब तक संभव है बच्चों को दिल का दर्द नहीं होने दिया जाएगा बच्चों में दिल की बीमारी उनके खान-पान या रहन सहन से नहीं होता है यह बीमारी माता-पिता के द्वारा या तो अनुसांगिक के रूप में आता है या जब बच्चा मां के गर्भ होता है तब कुछ कुदरत का करिश्मा, गलत दवा के सेवन या माता पिता के गलत खानपान से होता है .इस बीमारी में बच्चों का कोई दोष नहीं है. इन नन्हे मुन्ने बच्चों को यह दिल का दर्द गिफ्ट के रूप में प्राकृतिक या समाज द्वारा दिया जाता है आज समाज में प्रदूषण इतना फैल चुका है कि हमको फ्री में मिलने वाला पानी और हवा भी दूषित है खान-पान की किसी भी वस्तु पर विश्वास नहीं किया जा सकता है लोग आगे बढ़ाने तथा समाज में अच्छा दिखने के चक्कर में समय से शादी विवाह नहीं करते हैं स्वास्थ पर ध्यान नहीं देते हैं जिसका प्रतिफल कई बार इन बच्चों को भुगतना पड़ता है. -

ग्यारह विभागों की मदद से चलेगा संचारी रोग नियंत्रण अभियान, दस अप्रैल से होगी घर घर दस्तक
“महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव करेंगे अभियान का शुभारंभ, सभी ब्लॉकों पर जनप्रतिनिधि होंगे शामिल”
“दिमागी बुखार से बचाव के साथ साथ सभी प्रकार के संचारी रोगों की रोकथाम के होंगे प्रयास”
गोरखपुर। जिले में एक अप्रैल से लेकर तीस अप्रैल तक ग्यारह विभागों की मदद से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जाएगा । इस दौरान दिमागी बुखार से बचाव के साथ साथ सभी प्रकार के संचारी रोगों जैसे मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, टीबी, कुष्ठ आदि से बचाव के प्रयास होंगे। दस अप्रैल से स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर दस्तक देकर लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक करेंगी और संभावित लक्षण वाले रोगियों की सूची भी तैयार करेंगे। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने दी। उन्होंने बताया कि जनपद स्तरीय अभियान का शुभारंभ महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से करेंगे। सभी ब्लॉकों पर अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण शामिल होंगे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एक माह तक चलने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास विभाग, पंचायती राज विभाग या ग्राम विकास विभाग, पशुपालन विभाग, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, कृषि एवं सिंचाई विभाग, सूचना विभाग और उद्यान विभाग समन्वय बना कर काम करेंगे। इस दौरान संचारी रोगों के वाहक नियंत्रण गतिविधियों, जनजागरूकता, साफ सफाई, शुद्ध पेयजल के इंतजाम, हीट वेव के प्रबंधन की गतिविधियां आदि संचालित की जाएंगी। इस संबंध में जिलाधिकारी कृष्णा करूणेश और सीडीओ संजय कुमार मीणा के दिशा निर्देशन में आवश्यक बैठकें सम्पन्न हो चुकी हैं। पूरे माह अग्रिपंक्ति कार्यकर्ता आभा आईडी भी बनाएंगी।
डॉ दूबे ने बताया कि दस अप्रैल से तीस अप्रैल के बीच दस्तक अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमे घर घर जाएंगी और लोगों को बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करेंगी। साथ ही बुखार के रोगियों, इंफ्लुएंजा लाइक इलनेस, संभावित क्षय रोगियों, कुष्ठ, फाइलेरिया एवं कालाजार के संभावित रोगियों और कुपोषित रोगियों की सूची तैयार करेंगी। साथ ही क्षेत्रवार ऐसे मकानों की सूची भी तैयार की जाएगी जहां घरों के भीतर मच्छरों का प्रजनन अधिक पाया गया हो। इस कार्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को पूरा सहयोग करने का दिशा निर्देश है।
*लगाए जाएंगे स्टीकर*
सीएमओ ने बताया कि जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ राजेश और डीएमओ अंगद सिंह स्वास्थ्य विभाग के तरफ से अभियान का नेतृत्व करेंगे। स्वास्थ्य टीमों को निर्देश दिया गया है कि जिन घरों में पंद्रह वर्ष से कम आयु के बच्चे हों या फिर संभावित क्षय रोगी हों, वहां घर के बाहर स्टीकर अवश्य लगाएं। ऐसे परिवारों के सदस्यों को प्रेरित करना है कि किसी भी प्रकार का बुखार होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
*ये गतिविधियां होंगी प्रमुख*
• नालियों की साफ सफाई और एंट लार्वल का छिड़काव।
• छिछले हैंडपम्पों का चिन्हीकरण और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता।
• स्कूलों में जनजागरूकता की गतिविधियां।
• मच्छररोधी गतिविधियां।
• चूहा और छछूंदर एवं अन्य कृतक नियंत्रण गतिविधियां
• बुखार के रोगियों को एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल भिजवाना।
• सार्वजनिक उद्यानों और विद्यालयों में मच्छर विकर्षी पौधों का रोपण।
• इंसेफेलाइटिस से दिव्यांग बच्चों का चिन्हीकरण और सरकारी सहयोग।
• स्कूली बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करना।
• कुपोषित बच्चों का चिन्हीकरण और समुदाय को हीट रिलेटेड बीमारियों के प्रति जागरूक करना।
• पशुओं के मल मूत्र की साफ सफाई के लिए जागरूकता और सुकरबाड़ों को आबादी से दूर ले जाना। -

आयुर्वेद और बायोटेक्नोलॉजी से चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहा वैश्विक नवाचार : प्रो. भार्गव
*एमजीयूजी में ‘आयुर्वेद एवं बायोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ*

*नई वैश्विक चुनौतियों को संकल्पों के साथ स्वीकार करना होगा : प्रो. डीपी सिंह*
*प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और प्रो. रमेश शर्मा डीएस पाउले ओरेशन अवार्ड से हुए सम्मानित*
*कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के महाकुंभ पुस्तक और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शोध संदर्भ पुस्तिका का हुआ विमोचन*
गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के अंतर्गत संचालित संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के तत्वावधान में सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजिस्ट इंडिया (एसबीटीआई) के सहयोग से ‘आयुर्वेद एवं बायोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ रविवार, 30 मार्च को हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. बलराम भार्गव का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ जबकि अध्यक्षता यूपी के मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रो डीपी सिंह ने की।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. भार्गव ने कहा कि आयुर्वेद और बायोटेक्नोलॉजी से चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नवाचार हो रहा है। आयुर्वेद की प्राचीन वैदिक चिकित्सा पद्धति और जैव चिकित्सा के समन्वय से स्वास्थ सेवा समृद्ध और सशक्त हो रहा है। इससे मानवता के लिए एक उज्जवल भविष्य का मार्गदर्शन प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के विकास में जैव प्रौद्योगिकी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है। जैव प्रौद्योगिकी ने न केवल स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, बल्कि आयुर्वेद में भी इसके अनुप्रयोग ने नई संभावनाओं का द्वार खोला है। आयुर्वेद जीवन और स्वास्थ्य के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है, अपनी जड़ों से जुड़े हुए प्राकृतिक उपचारों को महत्वपूर्ण मानता है। वहीं, जैव प्रौद्योगिकी, जीवों और उनके घटकों का उपयोग करके विभिन्न चिकित्सा उत्पादों का विकास करती है।
प्रो. भार्गव ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि भारत ने अन्न उत्पादन, दूध उत्पादन, आईटी, मोबाइल, हेल्थकेयर और अंतरिक्ष के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। अब बारी जैव प्रौद्योगिकी एवं आयुर्वेद को नई ऊंचाई पर ले जाने की है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोविड 19 के प्रकोप के दौरान भारत ने इंडीजिनस वैक्सीन बनाकर दुनिया की स्वास्थ सेवा को संजीवनी दी।सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से संस्कार और राष्ट्र सेवा का भाव जागृत होता है। 21वीं सदी में स्वास्थ सेवा में प्राचीन आयुर्वेद, यूनानी और जैव प्रौद्योगिकी ने पुरातन और नए नवाचारों से मानव सेवा का पवित्र संकल्प पूरा किया है। उन्होंने कहा कि पुरातन स्वास्थ्य सेवा का अध्ययन कर नई चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद, योग, यूनानी का गहन अध्ययन कर भारतीय शिक्षा पद्धति को समृद्ध करने का प्रयास होना चाहिए। प्रो. सिंह ने कहा कि बाटेक्नोलॉजी में नए शोध, नवाचार और सृजन से अन्वेषकीय कार्य हो रहे है। इस सम्मलेन में जैव प्रौद्योगिकी चिकित्सा और आयुर्वेद के संभावनाओं को तलाशने का अवसर मिलेगा। पर, वैश्विक समय में जो नई चुनौतियां हमारे सामने आएंगी, उन्हें नए संकल्पों के साथ स्वीकार करना होगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति व्यक्तित्व विकास के संकल्पों को विकसित करता है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति प्रो. (डॉ.) सुरिंदर सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन उभरते वैज्ञानिक रुझानों और नवाचारों को समझने तथा शोधकर्ताओं को आपस में संवाद का मंच प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह सम्मेलन जैव प्रौद्योगिकी, औद्योगिक सूक्ष्म जीवविज्ञान, पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी, नैनो बायोटेक्नोलॉजी और बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन जैव प्रौद्योगिकी और सूक्ष्म जीवविज्ञान अनुसंधान में नए आयाम स्थापित करेगा। उद्घाटन सत्र में प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया, प्रो. चंचाई बूनला, प्रो. एडाथिल विजयन ने भी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।
सम्मेलन में अतिथियों ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के महाकुंभपर केंद्रित पुस्तक और प्रो. सुनील कुमार सिंह द्वारा संपादित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शोध संदर्भ पुस्तिका का विमोचन किया। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के रामचंद्र रेड्डी ने पुस्तकों के सार को व्याख्यायित किया ।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजिस्ट इंडिया की तरफ से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ जूलोजी के एमेरिटस प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और स्कूल ऑफ लाइफ साइंस नार्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी शिलांग के पूर्व अधिष्ठाता प्रो .रमेश शर्मा को पद्मश्री बलराम भार्गव और प्रो. (डॉ.) धीरेंद्र पाल सिंह ने डीएस पाउले ओरेशन अवार्ड से सम्मानित किया। सोसाइटी अवॉर्ड की घोषणा एसबीटीआई के अध्यक्ष प्रो. एडथिल विजयन ने ने किया। स्वागत संबोधन सम्मेलन के संयोजक प्रो सुनील कुमार सिंह और आभार ज्ञापन आयोजन सचिव अमित कुमार दुबे ने किया।
*आयुर्वेद के प्रभावी पहलुओं को अपनाने की जरूरत : प्रो. लखोटिया*
सम्मेलन के प्रथम तकनीकी सत्र से पूर्व मुख्य उद्बोधन में आयुर्वेद एवं जैव विज्ञान के अंतर्संबंधों पर मार्गदर्शन करते हुए प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया ने कहा कि आयुर्वेद को वैज्ञानिक पद्धति से सत्यापित करके इसके प्रभावी पहलुओं को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक ढंग से समझने के लिए एक अग्रगामी, निष्पक्ष और समावेशी दृष्टिकोण आवश्यक है। सम्मेलन में उपस्थित शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने इन महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए और जैव प्रौद्योगिकी में नए अवसरों को लेकर गहन चर्चा की।*तकनीकी सत्रों में हुई विशद चर्चा*
सम्मेलन के तकनीकी सत्र के पहले व्याख्यान में चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय बैंकाक में चिकित्सा संकाय के प्रो. चांचाई बूनला ने आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग से नई औषधियों के विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. दिनेश यादव, सह-अध्यक्षता डॉ. रामवंत गुप्ता ने की एवं प्रतिवेदन डॉ. अंकिता मिश्रा ने प्रस्तुत किया। द्वितीय व्याख्यान में कोलंबो विश्वविद्यालय की प्रो. सुमादी डी सिल्वा ने विज्ञान के रहस्य और उसके उपयोगिता पर जानकारी दी। तृतीय व्याख्यान आयुर्वेद और औषधीय पौधों के अनुसंधान के बीच अंतर प्रबंधन विषय पर केंद्रित रहा। इसमें काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रो. जनार्दन लामिछाने ने अन्वेषकीय दृष्टि से अपनी बात रखी। चतुर्थ व्याख्यान आणविक जीव विज्ञान केंद्र, हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जनेश दुबे ने दिया। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी चिकित्सा पद्धति पर विस्तार से शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. एडाथिल विजयन, सह-अध्यक्षता डॉ. राजीव सिंह ने की जबकि प्रतिवेदन डॉ. पवन कुमार कन्नौजिया ने प्रस्तुत किया। आयोजन समिति की डॉ. अनुपमा ओझा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के कई राज्यों के विशेषज्ञों के साथ इजरायल, नेपाल, श्रीलंका, कोरिया, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी आदि से भी विषय विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ अनुकृति राज, और तकनीकी सत्र का संचालन जिज्ञासा सिंह एवं प्रशांत गुप्ता ने किया। आज के आयोजन में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर के पूर्व कुलपति प्रो. एके सिंह, प्रो शशिकांत सिंह, डॉ विमल दुबे, डॉ रोहित श्रीवास्तव, डाॅ. धीरेंद्रकुमार सिंह, डॉ. अवेधनाथ सिंह, डाॅ. संदीप कुमार श्रीवास्तव, डाॅ.अंकिता मिश्रा, डॉ.कीर्ति कुमार यादव, डाॅ. अखिलेश कुमार दूबे, डाॅ. प्रेरणा अदिती, डाॅ. किरन कुमार ए., डाॅ.आशुतोष श्रीवास्तव आदि की प्रमुख सहभागिता रही। -

299 ग्राम पंचायतें हुई टीबी मुक्त, जनप्रतिनिधियों से सम्मान पाकर निहाल हुए ग्राम प्रधान
“शासन के निर्देश पर एनेक्सी भवन सभागार में सम्पन्न हुआ विश्व टीबी दिवस का आयोजन”
“महापौर, ग्रामीण विधायक और बांसगांव के विधायक हुए शामिल”
गोरखपुर। जिले में 299 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, ग्रामीण विधायक विपिन सिंह और बांसगांव के विधायक डॉ विमलेश पासवान के हाथों सम्मान पाकर इन गांवों के प्रधान शनिवार को उत्साह से लवरेज दिखे। एडी हेल्थ डॉ बीएम राव, सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दूबे और डीटीओ डॉ गणेश यादव समेत राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम प्रधानों ने संकल्प लिया कि वह गोरखपुर को टीबी मुक्त बनाने में योगदान देंगे। शासन के निर्देश पर 24 मार्च को पड़ने वाले विश्व टीबी दिवस संबंधी यह आयोजन एनेक्सी भवन सभागार में शनिवार को आयोजित किया गया।
इस मौके पर महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि हमे यह सुनिश्चित करना होगा कि टीबी मरीज की दवा बीच में बंद न होने पाए। एक बार दवा बंद होने पर टीबी मरीजों में दवाओं के प्रति रेसिस्टेंट पैदा हो जाता है और उनका इलाज जटिल हो जाता है। हमारे आसपास कोई भी नया मरीज निकलता है तो उसे निरंतर दवा लेने के लिए प्रेरित करें, जब तक कि वह ठीक न हो जाए।
गोरखपुर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने कहा कि टीबी एक ऐसी बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। केंद्र और राज्य सरकार टीबी उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। इस मुहिम को सफल बनाने में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका है। हमे संकल्प लेना होगा कि जिले की सभी 1350 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाएंगे।
बांसगांव के विधायक डॉ विमलेश पासवान ने कहा कि अगर किसी को लगातार खांसी आ रही है तो उसे टीबी जांच और पूरा इलाज करवाने के लिए प्रेरित करना होगा। जांच और इलाज की पूरी सुविधा निःशुल्क है। टीबी के बारे में लोगों तक सम्पूर्ण जानकारी पहुंच सके, इसके लिए सभी ग्राम सचिवालयों पर टोल फ्री नंबर अंकित कराया जाए।
अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि पिछले वर्ष नौ ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई थीं। उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि इस वर्ष अधिकाधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त करवाने में सहयोग करें। मरीजों तक यह जानकारी पहुंचाएं कि जांच के बाद बीमारी की पहचान होते ही मरीज को निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है। पंजीकरण के पंद्रह दिनों के भीतर तीन हजार रुपये और उपचार के 84 दिन के पश्चात तीन हजार रुपये मरीज के खाते में दिये जाते हैं ताकि वह इलाज के दौरान सुपोषण से भरपूर खानपान रख सके। टीबी की जांच और इलाज निःशुल्क है।
डीटीओ डॉ गणेश यादव ने बताया कि जिलाधिकारी, सीडीओ और सीएमओ के नेतृत्व में सौ दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान चलाया गया जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस दौरान करीब चार हजार से अधिक नये टीबी मरीज खोजे गये। उन्होंने अपील की कि लोग जरूरतमंद टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए सामने आए। मरीजों को गोद लेकर पोषण में सहयोग और मानसिक संबल देने से वह जल्दी ठीक होते हैं । जांच और सम्पूर्ण उपचार से टीबी ठीक हो जाती है।
*सम्मानित हुए कर्मचारी*
इस मौके पर राष्ट्रीय टीबी उन्मलून कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों को भी सम्मानित किया गया। जनप्रतिनिधिगण ने सेवानृत्त हो रहे मुख्य चिकित्सा अधिकारी की प्रशंसा की और उन्हें भी कार्यक्रम के दौरान सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष, आरटीपीएयू प्रतिनिधि डॉ एनके द्विवेद्वी, डॉ एएन त्रिगुण, डीएमओ अंगद सिंह, एसटीडीसी की प्रतिनिधि डॉ अभिलाषा, डीडीटीओ डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, डीएचईआईओ केएन बरनवाल, पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्र, मिर्जा आफताब बेग, डीपीसी धर्मवीर प्रताप सिंह, वरिष्ठ कर्मी उपेंद्र, विनय, कवियित्री सरिता सिंह, विभाग से जुड़े राजेश सिंह, गोबिंद, मयंक, कमलेश गुप्ता, पवन, महेंद्र, इंद्रनील, अभिनंदन समेत टीबी और कुष्ठ विभाग के अधिकारी और कर्मचारीगण मौजूद रहे।
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सरहदों की रक्षा करने वाले एसएसबी के जवान लोगों की आंखों की कर रहे सुरक्षा
“एसएसबी आईजी रतन संजय के दिशा निर्देश पर डीआईजी डीके मिश्रा ने नेत्र शिविर में आए 25 मरीज का राज आई हॉस्पिटल के सहयोग से कराया निशुल्क मोतियाबिंद का ऑपरेशन”

गोरखपुर। सरहदों की रक्षा जब जवान करते हैं तो हम सुकून के साथ अपने वतन में चैन की नींद सोते हैं यही जवान सरहदों की रक्षा के साथ आंखों की भी सुरक्षा के लिए ग्रामीण इलाकों में नेत्र शिविर लगाकर लोगों की आंखों की जांच की जा रही है। ऐसे ही शिविर में आए 25 लोगों को मोतियाबिंद की शिकायत मिली जिसको लेकर एसएसबी के आईजी रतन संजय के दिशा निर्देशन में कार्य करते हुए डी आई जी डी के मिश्रा ने नेत्र शिविर में मोतियाबिंद के मरीजों के ऑपरेशन के लिए राज आई हॉस्पिटल के सहयोग से आज उनका निशुल्क ऑपरेशन कराया गया। इस मौके पर राज आई हॉस्पिटल के डॉ अनिल कुमार श्रीवास्तव व डीआईजी डीके मिश्रा भी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि संयुक्त चिकित्सालय एसएसबी व राज आई हास्पिटल के तत्वाधान में मंगलवार को मानीराम के आर एस पब्लिक स्कूल में आयोजित निशुल्क मोतियाबिंद जांच शिविर में एसएसबी के डीआईजी मेडिकल डॉ डी के मिश्र ने के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों के नेत्र परीक्षण किया गया जिसमें से 25 लोग मोतियाबिंद की शिकायत मिली। जिनका निशुल्क ऑपरेशन राज आई हॉस्पिटल में आज बुधवार को राज आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के मरीजों का निशुल्क ऑपरेशन कराया गया।
शिविर में कमाडेंट डॉ आइएच काजमी व आई सर्जन डॉ श्रीनिवास गौड़ा ने लोगों के सेहत व आंखों की जांच की। राज हास्पिटल डॉ अनिल कुमार श्रीवास्तव के डॉ सूरज गौड़, डॉ राजदीप, डीडी द्विवेदी व अंकित दुबे ने लोगों को परामर्श दिए। शिविर में 125 लोगों के आंखों की जांच की गई और 25 लोगों में मोतियाबिंद की समस्या मिली जिनका निशुल्क ऑपरेशन बुधवार को किया गया।
इस मौके पर इंस्पेक्टर मनीष कुमार, सब इंस्पेक्टर कुशम, हेड कांस्टेबल भीम सिंह बबीता कुंवर, एन पूजा एस, रजनीश कुमार डी के चौरसिया बीके यादव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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आइडिए गोरखपुर द्वारा खराब हुए दांतों को ठीक करने की फुल डे कार्यशाला आयोजन
इंडियन डेंटल एसोसिएशन गोरखपुर ब्रांच द्वारा 22 मार्च दिन शनिवार दिन को , फुल डे सीडीई प्रोग्राम का आयोजन होटल सरोवर पोर्टिको विजय चौराहा गोरखपुर में किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन , प्रेसिडेंट डॉ प्रशांत माथुर , स्पीकर डॉ मोनिका टंडन,सचिव डॉ ए एन शर्मा द्वारा के साथ सभी एग्जीक्यूटिव मेंबर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सीडीइ कन्वेयर डॉ तैयब सुल्तान खान व डॉक्टर अरुण प्रताप मल द्वारा द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम मे स्पीकर डॉ मोनिका टंडन ने बताया कि बहुत ज्यादा खराब हुए दांतो को हम रूट कैनाल ट्रीटमेंट द्वारा कैसे ठीक कर सकते हैं। साथ में इन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी दांत में रूट कैनाल पहले से हुआ है और उसमें समस्या हो जा रही है दोबारा उसको दोबारा कैसे इलाज किया जा सके, बहुत सारे कंडिशनों में इस तरह के दांतों को निकाल दिया जाता है, लेकिन इन्होंने नई तकनीकी के द्वारा इस प्रकार के दांतों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है और इसका कैसे रि- ट्रीटमेंट करके इन्हें बचाया जा सकता है। इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी और साथ में कार्यशाला का आयोजन करके गोरखपुर के डॉक्टर को नई तकनीकी के बारे मे इस प्रक्रिया को करके दिखाया, जिससे गोरखपुर के बहुत सारे डॉक्टर जो लाभान्वित हुए।
कार्यक्रम में प्रेसिडेंट डॉक्टर प्रशांत माथुर, सेक्रेटरी डॉक्टर ए एन शर्मा , डॉ संजीव कुमार डॉ संजीव श्रीवास्तव , डॉ आशीष शाही,डॉक्टर तैयब सुल्तान खान , डॉ अरुण प्रताप मल डॉ शिवाशीष गुप्ता, डॉ शुभम श्रीवास्तव , डॉ विक्रांत सिन्हा, डॉ अतुल यादव , डॉ शिप्रा शाही, कुमार, डॉक्टर मुदित गुप्ता, डा प्रनव मनहोत्रा , डा शालिनी शर्मा , डॉ मिहिर कुमार, डॉ अंकित जायसवाल, डॉ अरविंद यादव, डा निशांत , डॉ अभिषेक मिश्रा, डॉ ममता आनंद, डाॅ संदर्भ सिंहा , डॉ सुगंध श्रीवास्तव, डॉ नीतीश वर्मा , डॉक्टर सूरज गुप्ता, अरुणिमा सिंह, डॉ रितिका, डॉ अहमद उमर , डॉ अभिषेक मिश्रा, डॉ प्रशांत चतुर्वेदी , डॉ सीमा सिंह तथा आई.डी.ए. के सभी सम्मानित मेंबर्स उपस्थित थे।
इस शानदार प्रोग्राम के सभी एक्सक्यूटिव मेम्बर व सीडीएच डॉक्टर तैयब सुल्तान खान और आईडीए गोरखपुर ब्रांच के सभी मेंबर को बहुत बहुत धन्यवाद्।
News courtesy: Dr A N SHARMA,
HON. SECRETARY IDA, GORAKHPUR BRANCH -
गर्मी में निर्जलीकरण से बचाव के लिए ओआरएस जीवन रक्षक: डॉ. आनंद मोहन दीक्षित
“डुमरी खास में स्वास्थ्य जागरूकता सत्र का आयोजन, ओआरएस के महत्व पर दी गई जानकारी”
गोरखपुर। मार्च 2025: गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होने से लोग अक्सर निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) का शिकार हो जाते हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इस समस्या से बचाव के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का सेवन एक प्रभावी उपाय है। इसी उद्देश्य से आज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, डुमरी खास में एक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सभी लाभार्थियों को निर्जलीकरण से बचाव और ओआरएस के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष, डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने अपने संदेश में कहा, “ओआरएस को जीवन रक्षक घोल कहा जाता है। यह केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। दस्त, उल्टी या अत्यधिक पसीना आने की स्थिति में ओआरएस का सेवन शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है। गर्मी के मौसम में इसका विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है।”
निर्जलीकरण के प्रमुख लक्षण:
1. मुंह और गला सूखना
2. आंखों का धंस जाना
3. शरीर में कमजोरी महसूस होना
4. त्वचा ठंडी और निस्तेज लगना
5. पेशाब कम होना या गहरा पीला रंग होना
“बच्चों के लिए विशेष रूप से जरूरी है ओआरएस: डॉ. प्रदीप खरया”
सामुदायिक चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ. प्रदीप खरया ने बताया कि, बच्चों में दस्त और उल्टी के कारण निर्जलीकरण का खतरा अधिक होता है। कई बार खानपान में गड़बड़ी या संक्रमण के कारण **बच्चों को पतले दस्त होने लगते हैं, जो अगर एक-दो दिन से अधिक जारी रहे तो यह चिंता का विषय बन सकता है। उन्होंने कहा,”अगर बच्चे को बार-बार दस्त आ रहे हैं, तो तुरंत ओआरएस देना शुरू कर देना चाहिए। यदि इसके बावजूद सुधार नहीं होता है, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।”
“ओआरएस का वितरण और जागरूकता अभियान”
कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य केंद्र के फार्मासिस्ट, जय शंकर मिश्र ने सभी लाभार्थियों को ओआरएस के पैकेट वितरित किए और इसके सही उपयोग के बारे में जानकारी दी।
“गर्मी में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी सावधानियां”
– पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।
– बिना जरूरत के धूप में निकलने से बचें।
– हल्के और सूती कपड़े पहनें।
– बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।“एम्स निदेशक एवं ED डॉ. विभा दत्ता ने की सराहना”
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल (प्रो.) डॉ. विभा दत्ता ने ओआरएस जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि “गर्मी के मौसम में ओआरएस के महत्व को समझाना और इसे आम जनता तक पहुंचाना एक महत्वपूर्ण पहल है। यह जागरूकता अभियान हजारों लोगों की जान बचाने में सहायक होगा। एम्स गोरखपुर का यह प्रयास न केवल संस्थान के चिकित्सा सेवा क्षेत्र में योगदान को दर्शाता है, बल्कि जनस्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।”








