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  • पूर्वांचल में मस्तिष्क और नसों के उपचार में नई मजबूती

    पूर्वांचल में मस्तिष्क और नसों के उपचार में नई मजबूती

    “रीजेंसी हॉस्पिटल में अत्याधुनिक ब्रेन और स्पाइन की सर्जरी और न्यूरो आईसीयू की सुविधा”

    • रीजेंसी हॉस्पिटल में स्पाइन सर्जरी से मरीज को कमर दर्द और पैरों के सुन्नपन से मिली राहत
    • गंभीर ब्रेन इंजरी के एक मरीज की सफल न्यूरोसर्जरी, रीजेंसी हॉस्पिटल में बची जान
    • 250 से अधिक सफल न्यूरोसर्जरी के साथ पूर्वांचल में रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर पर बढ़ा भरोसा
    • स्ट्रोक क्लिनिक के लिए समर्पित विशेषज्ञ टीम और आधुनिक उपचार सुविधाएँ

    संवाददाता: शिशिर श्रीवास्तव।

    गोरखपुर, 10 जुलाई 2026। रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी सेवाओं का विस्तार किया है। अस्पताल अब तक 250 से अधिक सफल न्यूरोसर्जरी कर चुका है। यहां 24×7 न्यूरो इमरजेंसी, समर्पित स्ट्रोक क्लिनिक, आधुनिक जांच सुविधाएं तथा ब्रेन और स्पाइन की जटिल बीमारियों के इलाज और माइक्रोस्कोपिक और एंडोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है। इससे अब पूर्वांचल के मरीजों को बेहतर न्यूरो उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

    हाल ही में अस्पताल में लंबे समय से कमर दर्द और पैरों में सुन्नपन से परेशान 40 वर्षीय एक मरीज का सफल उपचार किया गया। मरीज कई महीनों से कमर दर्द, पैरों में फैलते दर्द, झुनझुनी और सुन्नपन से परेशान थे। चलने-फिरने और लंबे समय तक खड़े रहने में भी कठिनाई होने लगी थी। कई जगह इलाज के बाद भी आराम नहीं मिलने पर उन्होंने रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. त्रिपुरारी पाण्डेय से परामर्श लिया। जांच में मरीज को एल4-एल5 पीआईवीडी (स्लिप डिस्क), ग्रेड-1 लिस्थेसिस (रीढ़ की हड्डी का हल्का खिसकना) और लम्बर कैनाल स्टेनोसिस (कमर की नसों की नली का संकरा होना) की समस्या पाई गई। इसके बाद मरीज की एल4-एल5 पीएलआईएफ (पोस्टेरियर लम्बर इंटरबॉडी फ्यूजन) सर्जरी की गई। इस प्रक्रिया में नसों पर दबाव कम कर रीढ़ की हड्डी को स्थिर किया गया। सर्जरी सफल रही और मरीज के कमर व पैरों के दर्द में काफी राहत मिली। स्वास्थ्य में सुधार होने पर मरीज को आवश्यक दवाइयों, लम्बोसैक्रल बेल्ट और नियमित फॉलो-अप की सलाह के साथ सिर्फ 1 दिन में छुट्टी दे दी गई। मरीज और उनके परिजनों ने सफल उपचार के लिए डॉ. त्रिपुरारी पाण्डेय एवं रीजेंसी हॉस्पिटल की टीम का आभार व्यक्त किया।

    इसी तरह सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 30 वर्षीय मरीज को नाजुक हालत में रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया। सीटी स्कैन में सामने वाले हिस्से की खोपड़ी की हड्डी धंसी हुई मिली। दिमाग के आसपास दो जगह खून जमा था, जिससे दिमाग पर दबाव बढ़ गया था और वह अपनी जगह से थोड़ा खिसक गया था। इसके अलावा खोपड़ी के निचले हिस्से की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई। स्थिति गंभीर होने के कारण तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया गया। वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. त्रिपुरारी पाण्डेय और उनकी टीम ने आधुनिक तकनीक से सफल ऑपरेशन कर मस्तिष्क में जमा रक्त निकाला और बढ़े हुए दबाव को कम किया। इसके बाद मरीज को न्यूरो क्रिटिकल केयर यूनिट में वेंटिलेटर सपोर्ट, दवाइयों और 24 घंटे विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया। इलाज के दौरान संक्रमण सहित अन्य जटिलताओं का भी सफलतापूर्वक प्रबंधन किया गया। नियमित सीटी स्कैन और विशेषज्ञों की लगातार निगरानी से मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। स्वास्थ्य स्थिर होने पर उन्हें आवश्यक दवाइयों, देखभाल और नियमित फॉलो-अप की सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    डॉ. त्रिपुरारी पाण्डेय, कंसल्टेंट, न्यूरोसर्जरी ने कहा, “ब्रेन और स्पाइन से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों में समय पर सही इलाज मरीज की जिंदगी बदल सकता है। लगातार कमर दर्द, पैरों में सुन्नपन, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, सिर में गंभीर चोट या अचानक स्ट्रोक के लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आधुनिक न्यूरोसर्जरी तकनीकों और समय पर हस्तक्षेप से आज कई जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव है। हमारा प्रयास है कि मरीजों को पूर्वांचल में ही विश्वस्तरीय न्यूरोसर्जरी सेवाएं उपलब्ध हों, ताकि उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।”

    डॉ. मुकुंद अग्रवाल, कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी ने कहा, “स्ट्रोक, मिर्गी, पार्किंसन, लगातार सिरदर्द, नसों की कमजोरी और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में समय पर पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से स्ट्रोक के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे मरीज की जान बचाने और स्थायी विकलांगता से बचाने के लिए सबसे अहम होते हैं। रीजेंसी हॉस्पिटल में समर्पित स्ट्रोक क्लिनिक, 24×7 इमरजेंसी न्यूरो सेवाएं और आधुनिक जांच सुविधाओं के माध्यम से मरीजों को तेज, सटीक और समग्र उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है औरअब तक कई मरीज की जान बचाई जा चुकी है।

    डॉ. आशुतोष एवं डॉ. आनंद कुमार सिंह ने बताया कि न्यूरो सर्जरी एवं स्ट्रोक के गंभीर मरीजों के उपचार में अनुभवी न्यूरोसर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट तथा प्रशिक्षित क्रिटिकल केयर नर्सों की समर्पित टीम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह टीम मरीज की स्थिति पर 24×7 सतत निगरानी रखते हुए आवश्यकतानुसार त्वरित एवं समन्वित उपचार प्रदान करती है। इस समग्र देखभाल से जटिलताओं का जोखिम कम होता है, रिकवरी की प्रक्रिया बेहतर होती है तथा मरीज के शीघ्र एवं सुरक्षित स्वास्थ्य लाभ की संभावना बढ़ जाती है।

    रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर के प्रवक्ता संदीप शर्मा (वाइस प्रेसिडेंट – ऑपरेशन्स) ने कहा, “पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को विश्वस्तरीय न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी सेवाएं उनके अपने क्षेत्र में उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर में अब तक 250 से अधिक सफल न्यूरोसर्जरी की जा चुकी हैं, जो मरीजों के बढ़ते विश्वास और हमारी विशेषज्ञ टीम की दक्षता को दर्शाती हैं। आधुनिक तकनीक, अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन, 24×7 न्यूरो इमरजेंसी, समर्पित स्ट्रोक क्लिनिक और उन्नत न्यूरो क्रिटिकल केयर सुविधाओं की मदद से हम ब्रेन और स्पाइन से जुड़ी जटिल बीमारियों का भी सफल उपचार कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए महानगरों की ओर न जाना पड़े और उन्हें अपने ही क्षेत्र में समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।”

    अस्पताल में ब्रेन और स्पाइन रोगों की जांच, न्यूरोसर्जरी, स्ट्रोक मैनेजमेंट, न्यूरो क्रिटिकल केयर, इमरजेंसी न्यूरो सेवाएं और सर्जरी के बाद की समग्र देखभाल जैसी सभी महत्वपूर्ण सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। इन आधुनिक सुविधाओं और सफल उपचारों के साथ रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश में न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी उपचार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान लगातार मजबूत कर रहा है। इससे उन मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है, जिन्हें पहले जटिल ब्रेन और स्पाइन उपचार के लिए लखनऊ, दिल्ली या अन्य महानगरों का रुख करना पड़ता था।

  • संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ, सांसद रवि किशन ने दिखाई हरी झंडी

    संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ, सांसद रवि किशन ने दिखाई हरी झंडी

    “गाँव, वार्ड और मोहल्लों को रोगमुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे दिलाई शपथ”

    गोरखपुर। कलेक्ट्रेट स्थित पर्यटन भवन से रविवार को विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान (5 से 31 अक्टूबर) का शुभारंभ किया गया। सदर सांसद रवि किशन शुक्ला ने अभियान की शुरुआत करते हुए संचारी रोग निवारण वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संचारी रोगों से बचाव के लिए जनजागरूकता और स्वच्छता ही सबसे प्रभावी उपाय है।

    कार्यक्रम से पहले जिलाधिकारी सभागार में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सांसद ने उपस्थित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, नगर निगम, पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग के वर्करों को शपथ दिलाई। उन्होंने सभी को यह संकल्प कराया कि वे अपने गाँव, वार्ड और मोहल्लों को रोगमुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे और साफ-सफाई एवं स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाएंगे।

    सांसद ने कहा कि “घर-घर दस्तक अभियान—स्वस्थ व्यवहार अपनाना है, संचारी रोग को हराना है” को सफल बनाने के लिए हर नागरिक को आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और ग्रामीण विभाग मिलकर इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देंगे।

    मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि जिले में संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2025 में अब तक सिर्फ 21 इंसेफलाइटिस के मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम हैं। यह प्रशासनिक प्रयासों और जन-सहयोग का परिणाम है।
    दस्तक अभियान 11 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बुखार, डेंगू, मलेरिया, जापानी इंसेफलाइटिस, चिकनगुनिया और अन्य संचारी रोगों से बचाव की जानकारी देंगी तथा बीमार लोगों को तुरंत सरकारी अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रेरित करेंगी।
    कार्यक्रम में विधायक विपिन सिंह, जिलाधिकारी दीपक मीणा, एसीएमओ डॉ. राजेश कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पांडेय, बीएसए रामेंद्र सिंह, डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह, पार्षद अजय राय, पार्षद रणंजय सिंह जुगनू सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

    सांसद रवि किशन ने अंत में कहा कि यह अभियान तभी सफल होगा जब प्रत्येक व्यक्ति अपने घर और आसपास की स्वच्छता की जिम्मेदारी खुद उठाए। उन्होंने कहा, “अगर जनता और प्रशासन एकजुट होकर काम करें तो गोरखपुर को पूरी तरह रोगमुक्त बनाया जा सकता है।