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  • मेडिसिन एवं फार्मेसी से युवा रोजगार एवं स्वव्यवसाय के प्रति जागरूक होंगे – जेपी चन्द्र

    मेडिसिन एवं फार्मेसी से युवा रोजगार एवं स्वव्यवसाय के प्रति जागरूक होंगे – जेपी चन्द्र

    “राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम”

    गोला । उपनगर गोला के बनकटा में स्थित बाबा जीत नारायण चंद फार्मेसी कॉलेज में राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय फार्मेसी क्षेत्र में उद्यमिता और नवाचार – नवाचार केंद्रों और औषधीय स्टार्टअप को बढ़ावा देना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्षता कर रहे कालेज के प्रबंधक जे पी चंद ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को फार्मेसी उद्योग में नए व्यवसाय शुरू करने और नवाचार के अवसरों के बारे में जानकारी दी गई। कॉलेज के प्रबंधक श्री चंद ने अध्यनरत फार्मासिस्ट छात्र छात्रों की उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि जनपद के दक्षिणांचल में मेडिसिन एवं फार्मेसी जैसे कोर्स लाने के लिए हम प्रयासरत है।जिससे यहा का युवा रोजगार एवं स्वव्यवसाय कर सके और आम जनता को अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था व उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त हो सके।
    कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ मनीष त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने दवा के डॉक्टर नाम से एक नवाचार शुरू किया है। जिसे उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार समाज को अच्छे चिकित्सकों की जरूरत होती है। उसी तरह योग्य फार्मेसी विशेषज्ञों की भी आवश्यकता है। उन्होंने फार्मेसी कानून 2015 और फार्मेसी प्रथा संशोधन 2021 के बारे में जानकारी दी और बताया कि यह कानून फार्मासिस्टों के कार्यों को और प्रभावी बनाने में मदद करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को फार्मेसी क्षेत्र में स्टार्टअप और रोजगार के नए अवसरों के बारे में जागरूक किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को फार्मेसी के क्षेत्र में आगे बढ़ने और नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना था।इस अवसर पर नंदलाल जायसवाल शंकर पांडे विनोद उमेश कुमार गुप्ता अजीत सिंह दुर्गेश यादव अभिषेक सहित अधिक संख्या में शिक्षक शिक्षिकाएं व छात्र छात्राएं मौजूद रहे ‌

  • एम्स गोरखपुर में हुआ 8 किलो के दुर्लभ ट्यूमर (सारकोमा) का सफल ऑपरेशन

    एम्स गोरखपुर में हुआ 8 किलो के दुर्लभ ट्यूमर (सारकोमा) का सफल ऑपरेशन

    गोरखपुर,  एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभाग ने एक और जटिल और हाई-रिस्क सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर अपनी चिकित्सीय दक्षता साबित की है। 75 वर्षीय मरीज, जिसकी पीठ पर 8 किलो का विशालकाय ट्यूमर (सारकोमा) था, का सफल ऑपरेशन किया गया। यह ट्यूमर पहले 2022 में लखनऊ में हटाया जा चुका था, लेकिन तीन वर्षों में यह फिर से उभर आया और अत्यधिक बड़ा हो गया। मरीज को कई अस्पतालों ने ऑपरेशन के लिए अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि उसकी उम्र, हृदय रोग और संभावित रक्तस्राव के चलते यह एक अत्यंत जोखिम भरा मामला था।

    एम्स गोरखपुर बना मरीज की आखिरी उम्मीद,

    जब अन्य अस्पतालों में ऑपरेशन संभव नहीं हो पाया, तो मरीज एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभाग में पहुंचा, जहां विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. गौरव गुप्ता ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे भर्ती कर लिया और हाई-रिस्क सर्जरी की योजना बनाई। मरीज की आयु और चिकित्सीय जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए, पहले एनेस्थीसिया विभाग की टीम से व्यापक परामर्श किया गया।

    तीन घंटे चले ऑपरेशन में चिकित्सकों ने रचा नया कीर्तिमान,

    बीते कल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों की टीम—प्रो. डॉ. गौरव गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र पीपल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजनीश, सीनियर रेसिडेंट डॉ. शालिनी, तथा जूनियर रेसिडेंट डॉ. आदित्य और डॉ. तनुश्री—ने मिलकर इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सर्जरी के दौरान मरीज को अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना थी, इसलिए उसे सेंट्रल लाइन डालकर 2 यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
    इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही, क्योंकि मरीज की उम्र और हृदय संबंधी समस्याओं के कारण एनेस्थीसिया देना बेहद चुनौतीपूर्ण था। एचओडी प्रो. डॉ. विक्रम वर्धन, प्रो. डॉ. संतोष शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सीमा यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोनल और जूनियर रेसिडेंट डॉ. अरुंधति ने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ मरीज को एनेस्थीसिया दिया।

    मरीज की हालत स्थिर, शीघ्र स्वस्थ होने की उम्मीद,

    करीब तीन घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव एनेस्थीसिया आईसीयू में रखा गया, जहां उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पूरी तरह होश में आने के बाद उसे सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया जाएगा।

    एम्स गोरखपुर में उच्चस्तरीय जटिल सर्जरी संभव,

    इस सफल ऑपरेशन के बाद एम्स गोरखपुर में उन्नत और जटिल सर्जरी के लिए विश्वास और आशा की एक नई किरण जगी है। इस उपलब्धि पर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मेजर जनरल प्रो. विभा दत्ता ने सर्जरी और एनेस्थीसिया विभागों की टीम को बधाई दी और इसे संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    मरीज के परिजन भी इस सफलता से अत्यंत खुश और आभारी हैं, क्योंकि यह ऑपरेशन उनके लिए उम्मीद की आखिरी किरण था। एम्स गोरखपुर अब न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों के लिए जटिल सर्जरी का एक विश्वसनीय केंद्र बनता जा रहा है।

  • दवाओं के अन्वेषण में हो रहे हैं नए प्रयोग : डॉ. रामा द्विवेदी

    दवाओं के अन्वेषण में हो रहे हैं नए प्रयोग : डॉ. रामा द्विवेदी

    दवाओं के अन्वेषण में हो रहे हैं नए प्रयोग : डॉ. रामा द्विवेदी

    महायोगी गोरखनाथ विवि में दवा अनुमोदन प्रक्रिया और कैंसर के बचाव पर हुआ विशेष व्याख्यान,

    जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं में होते हैं समान तत्व : डॉ. रामा द्विवेदी,

    गोरखपुर। जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डीसी, यूएसए के प्रो. (डॉ.) रामा एस. द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान दौर में दवाओं के अन्वेषण में नए प्रयोग हो रहे हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की तरफ से इस पर खासा जोर दिया जा रहा है।

    डॉ. रामा गत बुधवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचकर्म सभागार में ‘दवा अनुमोदन प्रक्रिया और कैंसर’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। दवा अनुमोदन प्रकिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में अन्वेषकीय दृष्टि से अनंत चुनौतियां और संभावनाएं हैं। उच्च स्तरीय गुणवत्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में दवाओं पर शोध कार्य किया गया है जिससे दवाओं और वैक्सीन के अच्छे परिणाम आए हैं। यूएस एफडीए के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रामा ने दवा विकास के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के बारे महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों प्रकार की दवाओं में समान तत्व होते हैं और वे समान औषधीय प्रभाव दिखाते हैं। हालांकि, जेनेरिक दवाएं ब्रांड नाम वाली दवाओं की तुलना में सस्ती होती हैं।

    डॉ. रामा ने एफडीए द्वारा दवा अनुमोदन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि एफडीए कर्मचारी दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। व्याख्यान में डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने सामान्य कैंसर, स्तन कैंसर, मुंह के कैंसर और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का परिचय दिया। डॉ. अनुराग ने कैंसर के प्रभाव उसके उपचार और रोकधाम पर सभी का मार्गदर्शन किया। अतिथि स्वागत फार्मेसी संकाय के प्राचार्य डॉ. शशिकांत सिंह, संचालन सहायक आचार्य पीयूष आनंद व धन्यवाद ज्ञापन आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरिधर वेदान्तम ने किया।

    इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद सिंह कुशवाहा, संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो . सुनील कुमार सिंह, कृषि विज्ञान के अधिष्ठाता डाॅ. विमल कुमार दुबे, पैरामेडिकल संकाय के प्राचार्य डॉ रोहित श्रीवास्तव, बीबीए लॉजिस्टिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण श्याम, डॉ अमित दुबे, डॉ अनुपमा ओझा, डॉ संदीप कुमार श्रीवास्तव, डॉ.आशुतोष श्रीवास्तव, धनंजय पाण्डेय, डॉ अमित उपाध्याय, डॉ अभिषेक कुमार सिंह, प्रवीण कुमार सिंह समेत सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता पूर्ति को भारत की ओर देख रही दुनिया : डॉ. भावतोष

    नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता पूर्ति को भारत की ओर देख रही दुनिया : डॉ. भावतोष

    नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता पूर्ति को भारत की ओर देख रही दुनिया : डॉ. भावतोष

     

    महायोगी गोरखनाथ विवि के फैकल्टी ऑफ नर्सिंग और पैरामेडिकल की तरफ से दीप प्रज्ज्वलन एवं सेवा शपथ ग्रहण समारोह,

    देश के उत्कृष्ट संस्थानों में से एक है महायोगी गोरखनाथ विवि का नर्सिंग कॉलेज : डॉ. भावतोष,

    स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को समृद्ध करने को संकल्पित हैं सीएम योगी : डॉ. जीएन सिंह,

    नर्सिंग सेवा क्षेत्र में छात्रों को भी आगे आना चाहिए : प्रो. सुरिंदर सिंह,

    गोरखपुर, 3 फरवरी। दी वेस्ट बंगाल विश्वविद्यालय ऑफ हेल्थ साइंसेज के पूर्व कुलपति और सिस्टर निवेदिता विश्वविद्यालय कोलकाता के एमेरिटस प्रोफेसर प्रो. भावतोष विश्वास ने कहा कि स्वास्थ सेवा दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्षेत्र है। इस स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में दुनिया में 45 लाख नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता है। पूरी दुनिया इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए भारत की तरफ देख रही है।

    डॉ. भावतोष विश्वास सोमवार को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ नर्सिंग और पैरामेडिकल की तरफ से आयोजित ‘दीप प्रज्वलन एवं सेवा शपथ ग्रहण समारोह’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। नर्सेज को चिकित्सा में समर्पण, सेवा और कर्तव्य निष्ठा का संकल्प दिलाते हुए डॉ. भावतोष ने कहा कि भारत पूरे विश्व को नर्स की आवश्यकता को पूरा करता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में नर्सिंग सेवा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सीएम के प्रयासों का सार्थक रूप आज इस विश्वविद्यालय में दिख रहा है। यहां का नर्सिंग कॉलेज देश के सर्वश्रेष्ठ नर्सिंग संस्थानों में से एक है। यहां नवाचारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राचीन वैदिक चिकित्सा में महर्षि चरक ने विश्व को चिकित्सा सेवा का अनमोल ज्ञान दिया जिसका पूरा विश्व अनुकरण कर रहा है।

    नर्सिंग सेवा को समृद्ध प्रोफेशन बताते हुए डॉ. भावतोष ने कहा कि इसमें मरीज की सेवा प्यार और समर्पण के भाव से की जाएगी तो यह उत्कृष्टता के शिखर को छूता रहेगा। उन्होंने कहा कि नर्सिंग सेवा में बहुत तेजी से बदलाव और चुनौती आई है। नर्सिंग में संभावनाओं के असीम द्वार खुले हैं। यहां शोध की दृष्टि से भी अनंत संभावनाएं हैं।

    समारोह के विशिष्ट अतिथि भारत सरकार के पूर्व ड्रग कंट्रोलर और मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय नई ऊर्जा और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। यहां का नर्सिंग कॉलेज उत्तर प्रदेश में उत्तम सेवा के लिए प्रेरणादायक संस्थान बना है। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में साधना के साथ सामंजस्य, संतुलन बना कर चलना होगा। स्वास्थ के क्षेत्र में नए संकल्पों के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिबद्ध हैं। उनके मार्गदर्शन में चिकित्सा और शिक्षा के उत्तरोत्तर विकास के लिए यूरोप, जापान और इजरायल के साथ समझौता पत्र के द्वारा यहां के प्रोफेशनल विद्यार्थियों को शत प्रतिशत रोजगार के लिए प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नर्सेज के सेवा योगदान से यह विश्वविद्यालय सर्वोच्च संस्थान बनकर विश्व का प्रतिनिधत्व करेगा।

    समारोह की अध्यक्षता करते हुए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरिंदर सिंह ने नर्सिंग छात्राओं का दीक्षा मार्गदर्शन करते हुए कहा कि नर्सेज, सेवा संकल्प भाव से इस क्षेत्र में स्वयं को उतारे जिससे चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सके। समाज और पीड़ित व्यक्ति आपके प्रति आशान्वित रहता है की नर्स दीदी हैं तो उसे जीवन का वरदान मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि नर्सिंग में छात्रों को भी आना चाहिए। कारण, प्रोफेशनल नर्स की विश्व स्तर पर भारी मांग है। नए मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं वर्तमान में नए रोजगार सृजित हुए हैं। अपने कदम बाहर निकालिए आपके लिए विश्व स्तर पर जॉब है।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय में स्थित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुशवाहा ने कहा कि नर्सिंग में सभी को स्वस्थ रखना आपकी नई चुनौती होगी। कोविड में आपने महत्वपूर्ण चुनौती को स्वीकार किया, नर्सिंग में जीवन को समर्पित करने का भाव जागृत हुआ। नर्सिंग उच्चतम सेवा कार्य है। नर्स मां जैसी होती है। जैसे छोटे-छोटे पौधे की नर्सरी होती है उसी निष्ठा, समर्पण से इस व्यवसाय में अपनी सेवा करें। कार्यक्रम में नर्सिंग संकाय की प्रमुख डॉ. डीएस अजीथा ने संकल्प प्रेरणा दिलाते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान पद्धति में नर्सेज की भूमिका प्राचीनकाल से चली आ रही है। समय और काल के बदलाव में दाई मां अब प्रोफेशनल नर्सेज के रूप में प्रतिष्ठित हो रही है। आज प्रोफेशनल कोर्स से नर्सेज का आत्मविश्वास समृद्ध हुआ है। अब नर्सेज हर विपरीत परिस्थितियों का सामना करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि लैंप लाइटिंग नर्सिंग कॉलेज की दीक्षा का एक अहम हिस्सा है जो नर्सिंग पेशे की गरिमा, जिम्मेदारी और उसके उद्देश्यों को दर्शाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव व डॉ. डीएस अजीथा ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
    मंच संचालन निधि वर्मा, रोमा, आकांक्षा ने किया। कुलगीत की प्रस्तुति संध्या, जाह्नवी, समीक्षा, रिया और शिवांगी ने की। आयोजन में प्रमुख रूप से मीना सिंह, डॉ. रोहित श्रीवास्तव, ममता रावत, श्वेता अलबर्ट, कविता साहनी, नैंसी मिश्रा, इंदु चौधरी, हर्षिता, सुप्रिया श्रीवास्तव, सौम्या, सारिका, दीपांजलि, ज्योति वर्मा, ममता चौरसिया, गरिमा पाण्डेय,कुंवर अभिनव सिंह राठौड़, अनूप कुमार मिश्रा, शुभम कुमार मौर्य, कुलदीप यादव, संदीप शर्मा, अंकिता दीक्षित, माधुरी चौरसिया, आदर्श मिश्रा, आकांक्षा दीक्षित,आयुषी राज, धीरज कुमार, जय शंकर पांडेय, सुप्रिया गुप्ता, विशालदीप, संजीव विश्वकर्मा, अर्पणा प्रजापति, ज्योति गुप्ता, ख़ुशी चौधरी, आकाश वर्मा सहित सभी विद्यार्थी, शिक्षक एवं अभिभावक उपस्थित रहे।

  • समय से कुष्ठ की पहचान और उपचार से रुकता है प्रसार, दिव्यांगता से भी होता है बचाव

    समय से कुष्ठ की पहचान और उपचार से रुकता है प्रसार, दिव्यांगता से भी होता है बचाव

    ‘‘समय से कुष्ठ की पहचान और उपचार से रुकता है प्रसार, दिव्यांगता से भी होता है बचाव’’,

    महात्मा गांधी की पुण्यतिथि से जिले में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान का शुभारंभ,

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सहित अन्य संगठनों ने भी लिया हिस्सा,

    गोरखपुर । अगर समय से कुष्ठ की पहचान कर उपचार शुरू कर दिया जाए तो इसके संक्रमण की आशंका कम हो जाती है। साथ ही मरीज के दिव्यांग होने का खतरा भी नहीं रहता है । इसके विपरीत गैर उपचाराधीन कुष्ठ रोगी खुद के लिए और समाज के लिए जटिलताएं बढ़ा सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि हम किसी भी कुष्ठ रोगी से भेदभाव न करें और कुष्ठ के लक्षण वाले लोगों को शीघ्र जांच और इलाज के लिए प्रेरित करें। यह संदेश जिला कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की तरफ से स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान के शुभारंभ के मौके पर गुरूवार को दिया गया।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे और जिला कुष्ठ निवारण अधिकारी डॉ गणेश यादव की देखरेख में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर हुए इस कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सहित कई अन्य सामाजिक संगठनों ने भी हिस्सा लिया। सभी लोगों को जिलाधिकारी का संदेश पढ़ कर सुनाया गया और एक स्वर से नारा दिया गया-कुष्ठ पूर्व जन्म का पाप नहीं, यह कोई अभिशाप नहीं।

    इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विकास सिंह ने कुष्ठ रोगियों को सहयोगी सामग्री का वितरण किया । सिद्धांत चौधरी के मैजिक शो के जरिये भी कुष्ठ के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया और बताया गया कि शरीर पर कोई भी सुन्न दाग धब्बा जो चमड़ी के रंग से हल्का हो, कुष्ठ भी हो सकता है। ऐसा लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर तुरंत जांच कराएं। जांच और सम्पूर्ण इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। इस मौके पर सीआरसी और प्रधानमंत्री दिव्य आशा केंद्र की टीम के सहयोग से कुष्ठ रोगियों को एडीएल किट और बटन वाला फोन भी वितरित किया गया। लेप्रोसी चैंपियन जय प्रकाश ने भी अपना अनुभव साझा किया।

    जिला कुष्ठ निवारण अधिकारी डॉ गणेश यादव ने बताया कि कुष्ठ रोग माइक्रो बैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु के कारण होता है । यह अनुवांशिक रोग नहीं है और न ही पूर्व जन्म के पापों का फल, न कोई भूत-पिशाच व टोना – टोटका । कुष्ठ रोगी से भेदभाव करने की बजाय उसे प्रेरित करें कि वह इलाज कराए । नया कुष्ठ रोगी मिलने पर आसपास के दस घरों में बचाव की दवा खिलाई जाती है । नया बाल कुष्ठ व दिव्यांग कुष्ठ रोगी मिलने पर शहरी क्षेत्र में तीन सौ घरों में जबकि ग्रामीण क्षेत्र में पूरे गांव को बचाव की दवा खिलाने का प्रावधान है।

    इस मौके पर जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता डॉ भोला गुप्ता ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में कुष्ठ के 1234 नये रोगी खोजे गए । इनमें से 1195 लोग इलाज के बाद इस बीमारी से मुक्त हो चुके हैं। इस समय 325 दिव्यांग कुष्ठ रोगियों को पेंशन मिल रहा है। पिछले पांच वर्षों के भीतर पच्चीस कुष्ठ रोगियों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी कराई गई, 210 को फिंगर स्प्लिंट लगे, 368 सेल्फ केयर किट और 1076 एमसीआर किट बांटे गए हैं।

    इस अवसर पर जिला कुष्ठ कार्यालय समेत सभी अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों में कुष्ठ उन्मूलन की शपथ दिलाई गई।

    सभी प्रतिभागियों ने महात्मा गांधी की फोटो पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में सीआरसी निदेशक जितेंद्र यादव, प्रधानमंत्री दिव्य आशा केंद्र की कंचन चौधरी, डीप्टी सीएमओ डॉ अनिल कुमार सिंह, मंडलीय कीट विशेषज्ञ वीके श्रीवास्तव, पीपीएम समन्वयक एएन मिश्रा, जिला कुष्ठ कार्यालय से डॉ आसिफ, महेंद्र चौहान, पवन श्रीवास्तव, रतनलाल, सुजीत कुमार सिंह, विनय समेत जिला कुष्ठ कार्यालय समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन राजेश सिंह ने किया।