निषाद पार्टी की संवैधानिक अधिकार यात्रा का जनपद गोरखपुर में भव्य स्वागत,
निषाद पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष कर रहे हैं यात्रा का नेतृत्व
निषाद समाज के विभीषण “अपनी ढपली-अपना राग” अलापते हैं,
आरक्षण के मुद्दे पर निषाद पार्टी अड़िग है,
गोरखपुर : आज दिनांक 04 जनवरी 2025 दिन शनिवार को निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल “निषाद पार्टी” द्वारा निकाली जा रही संवैधानिक अधिकार यात्रा 35वें दिन जनपद गोरखपुर में प्रवेश किया, निषाद पार्टी-राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मा० कैबिनेट मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद जी के नेतृत्व में यात्रा ने कम्ह्ररिया घाट से जनपद की सीमा में प्रवेश कर नरगड़ाजंगा से नरगड़ासिंह से रापतपुर से भभया से बेलघाट थाना से गौरगंज से राईपुर से बेईली से कटया से शाहपुर से धुरियापारपुल से धुरियापार से बनकटी से रतनपुरा से दुरुई से बारानगर से गोपालपुर से देवकली (जनसभा) से गोला में यात्रा ने रात्रि विश्राम किया। जनपद गोरखपुर में यात्रा पहुँचने पर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के अध्यक्ष डॉ अमित निषाद एवं मा० विधायक चौरी-चौरा ई० सरवन निषाद जी के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया।
श्री निषाद जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि निषाद समाज के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक मछुआ एससी आरक्षण के मुद्दे को लेकर 30 नवंबर 2024 को माँ० शाहकुंभरी देवी शक्तिपीठ, जनपद सहारनपुर से संवैधानिक अधिकार यात्रा प्रारंभ हुई थी। संवैधानिक अधिकार यात्रा के आज 35वें दिन मत्स्येंद्रनाथ जी की तपोभूमि, गुरु गोरखनाथ जी की पवन भूमि एवं सिंघानु निषाद जी राजधानी की पावनधरा पर यात्रा के पहुँचने पर हुए भव्य स्वागत से अभिभूत हैं। श्री निषाद जी ने कहा की गोरखपुर उनका गृहजनपद तो है ही किंतु मछुआरों के कल्याण के लिए गये संकल्प और निषाद पार्टी बनाने की प्रेरणा भी उन्हें यही से मिली हैं।
उन्होंने यात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि आज कल सोशल मीडिया पर गोरखपुर के मछुआ समाज के विभीषणो को निषाद पार्टी के लिए नये-नये भ्रम फैलाने की ज़िम्मेदारी मिली हुई है, उन्होंने कहा कि हाल ही में वो एक पोस्ट पढ़ रहे थे “वो कहते हैं कि निषाद पार्टी आरक्षण के मुद्दे से भटक गई है, डॉ संजय निषाद सत्ता का सुख भोग रहे है” श्री निषाद जी ने विभीषणो पर कहा कि मछुआ समाज और निषाद पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता जानता है की वो सत्ता का सुख भोग रहे हैं कि नहीं, आज भी उम्र के इस पड़ाव पर वो निषाद/मछुआ समाज के हक़ अधिकार की लड़ाई के लिए सहारनपुर संवैधानिक अधिकार यात्रा निकाले हुए है, इतने दिनों में समाज के नेता जो किसी भी पार्टी में हैं उन्होंने यात्रा से जुड़ने की कोशिश नहीं की है, किंतु ये बात भी सच है असुरों की भाँति यात्रा में व्यवधान डालने की कोशिश ज़रूर की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुद्दा हल करवाने के लिए समाज को एकजुट करने के लिए निकाली गई यात्रा में सभी निषाद समाज के नेताओं से अपील करते हैं, आइये आप सभी यात्रा से जुड़िये एक साथ आरक्षण के मुद्दे पर यात्रा में चलते हैं क्योंकि एकता में विजय है किंतु मछुआ समाज के नेता पूर्व की सरकारों और वर्तमान सरकार को लगातार भ्रमित करते रहते हैं कि अगर आरक्षण का मुद्दा हल हो गया तो डॉ संजय निषाद और निषाद पार्टी इसका श्रेय ले लेगी। श्री निषाद जी ने कहा कि जबकि इसके विपरीत पूज्य महाराज मा० मुख्यमंत्री जी मछुआ एससी आरक्षण के मुद्दे को लेकर हमेशा से चिंतित रहे है, उन्होंने कहा कि मा० मुख्यमंत्री जी की पहल पर ही आरजीआई ने स्वीकार किया है कि मछुआ समाज एससी आरक्षण का हक़दार है। किंतु ये जो मछुआ समाज के विभीषण श्रेय का खेल खेल रहे है वो ना खेले आइये सभी लोग एक साथ आरक्षण के मुद्दे पर एकजुटता दिखाकर मछुआ समाज को आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सुरक्षा दिलाने के लिए मछुआ एससी आरक्षण की माँग को एकसाथ रखे किंतु निषाद पार्टी जानती है कि वो ऐसा नहीं करने वाले क्योंकि “अपनी ढपली और अपना राग” इन लोगो का बंद हो जाएगा। इन लोगो का सुबह शाम और रात का खाना ही निषाद पार्टी का विरोध करने से मिलता है। श्री निषाद जी ने कहा कि निषाद पार्टी मछुआ समाज के प्रत्येक मुद्दे पर अडिग है।
इस अवसर पर पूर्व सांसद ई० प्रवीण निषाद, डॉ अमित निषाद, मा० विधायक सरवन निषाद, रवींद्र मणि निषाद, श्रवण निषाद, जयहिंद निषाद, विजय निषाद, राजू निषाद, राम सिंह, योगेश मणि, मालती देवी निषाद, जनकनंदनी निषाद, राहुल निषाद, इंद्रपाल निषाद, सुग्रीव निषाद, रणजीत निषाद, राज कुमार निषाद, प्रकाश निषाद आदि मौजूद रहे।
गोरखपुर: भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन मॉरीशस की पूर्व अध्यक्ष डॉ. सरिता बुधु ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने डॉ. बुधु को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
मुलाकात के दौरान भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भोजपुरी भाषा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में डॉ. सरिता बुधु के योगदान की सराहना की।
मुलाकात में भारतीय संस्कृति और भाषा के अंतरराष्ट्रीय महत्व पर भी चर्चा की गई।