राष्ट्रीय कैंसर इंस्टीट्यूट आफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआइसीपीआर) के मुताबिक सभी प्रकार के तंबाकू उत्पाद जैसे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी आदि से प्रतिवर्ष 1.7 लाख टन कचरे का उत्पादन होता है जो बढ़कर इस वर्ष तक 2 लाख टन से भी ज्यादा संभावित है। इसमें अकेले उत्तर प्रदेश की भागीदारी सर्वाधिक 22 प्रतिशत है।
इस रिपोर्ट को ‘द एनवायरनमेंटल बर्डन आफ टोबैको प्रोडक्ट्स वेस्टेज इन इंडिया’ ने तैयार किया। इसके मुताबिक सिगरेट के 70 ब्रांड, बीड़ी के 94 ब्रांड और धुंआ रहित तंबाकू के 58 ब्रांड को परखा गया। इसमें प्लास्टिक, कागज, रैपर और फिल्टर के अलग-अलग वजन को ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया डाटा के साथ मिलाया गया। इससे पता चला कि तंबाकू उत्पादों द्वारा उत्पन्न कुल कचरे में 73,500 टन प्लास्टिक है।
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