यात्रियों से संवाद, पौधारोपण और उत्कृष्ट कर्मियों का सम्मान; पर्यटन किट भी होगी वितरित
गोरखपुर। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की ओर से 15 जून 2026 को गोरखपुर हवाई अड्डे पर “यात्री सुविधा दिवस” का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना तथा हवाई यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है।
इस अवसर पर भारतीय नागर विमानन क्षेत्र और गोरखपुर हवाई अड्डे की विकास यात्रा एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। यात्रियों के आकर्षण के लिए एयरपोर्ट परिसर में विशेष सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है। साथ ही यात्रियों से संवाद स्थापित कर उनके सुझाव और अपेक्षाएं भी जानी जाएंगी, ताकि भविष्य में सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देश के नागर विमानन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। केंद्र सरकार की उड़ान योजना के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है, जिससे आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में यात्रा करे” का संकल्प अब व्यापक जनभागीदारी का रूप ले चुका है।
गोरखपुर हवाई अड्डे ने भी इस दौरान महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2014 तक यहां सप्ताह में केवल तीन दिन एक विमान का संचालन होता था, जबकि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 24 उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। पूर्वांचल के यात्री अब दिल्ली, मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता सहित कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानों की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं।
“यात्री सुविधा दिवस” के दौरान पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा यात्री सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले हवाई अड्डा कर्मियों को सम्मानित किया जाएगा। यात्रियों को पर्यटन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विशेष पर्यटन किट भी वितरित की जाएगी।
गोरखपुर हवाई अड्डे के विस्तार और विकास में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के योगदान का भी उल्लेख किया गया है। राज्य सरकार द्वारा नए हवाई अड्डे के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे भविष्य में गोरखपुर को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नया टर्मिनल और विस्तारित हवाई अड्डा अवसंरचना प्राप्त होगी।
गोरखपुर हवाई अड्डे के निदेशक संजय कुमार ने बताया कि “यात्री सुविधा दिवस” का आयोजन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा देशभर के हवाई अड्डों पर किया जा रहा है। गोरखपुर में इसे जनसहभागिता, यात्री सुविधा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ विशेष रूप से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट यात्री सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी हवाई अड्डा प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सहजनवां क्षेत्र के सेहुडी ताल के पास घायल अवस्था में मिला सारस, सूचना के बावजूद देर तक नहीं पहुंचा वन विभाग का कोई अधिकारी
सहजनवां रेंज क्षेत्र के नगर पंचायत घघसरा अंतर्गत ग्राम सेहुडा के पास स्थित सेहुडी ताल में रविवार को एक दुर्लभ सारस पक्षी घायल अवस्था में मिला। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि किसी कुत्ते या अन्य जंगली जानवर के हमले में यह पक्षी घायल हुआ होगा।
घायल पक्षी को असुरक्षित स्थान पर छोड़ने के बजाय स्थानीय ग्रामीणों ने मानवता का परिचय देते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। ग्रामीणों ने सारस को उठाकर भुलेश्वर नाथ मंदिर, शाहपुर ताल के पास सुरक्षित जगह पर रखा और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी।
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना दिए जाने के काफी समय बाद तक वन विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उपचार और संरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई, तो इस दुर्लभ पक्षी की जान को खतरा हो सकता है।
बताते चलें कि सारस पक्षी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही प्रजातियों में शामिल माना जाता है और इसके संरक्षण के लिए समय-समय पर गणना अभियान भी चलाए जाते हैं। ऐसे में वन विभाग की त्वरित कार्रवाई अपेक्षित थी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि घायल सारस का तत्काल उपचार कराया जाए तथा उसके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि इस दुर्लभ पक्षी को सुरक्षित बचाया जा सके।
महत्वपूर्ण बिंदु:
सेहुडी ताल के पास घायल मिला सारस पक्षी।
कुत्ते या अन्य जानवर के हमले की आशंका।
ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर बचाई जान।
वन विभाग को दी गई सूचना, लेकिन कार्रवाई में देरी का आरोप।
सारस के संरक्षण को लेकर ग्रामीणों ने जताई चिंता।
घायल पक्षी के शीघ्र उपचार और सुरक्षा की उठी मांग।
इको क्लब के तत्वावधान में विद्यार्थियों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प, पौधरोपण और जागरूकता गतिविधियों से दिया हरित भविष्य का संदेश
सूरजकुंड, गोरखपुर। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर नवल्स नेशनल एकेडमी, सूरजकुंड के इको क्लब द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना रहा।
विद्यालय के माननीय निदेशक शैक्षिक श्री घनश्याम पाण्डेय के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्री पाण्डेय ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल एक दिवस का अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सतत दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में पार्षद श्री जुबैर अहमद, श्री शिवम पाण्डेय, प्रशासनिक अधिकारी श्री पंकज त्रिपाठी, वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती फातिमा खातून, शिक्षक श्री दीपक पाण्डेय, श्री उज्ज्वल जायसवाल, लेखाकार श्री मुजाहिद हसन एवं कार्यालय सहायक श्री पुनीत श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
प्रमुख बिंदु
✔ विश्व पर्यावरण दिवस पर इको क्लब द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
✔ निदेशक शैक्षिक श्री घनश्याम पाण्डेय ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित।
✔ पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण का लिया गया संकल्प।
✔ विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से दिया जागरूकता संदेश।
✔ स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण पर दिया गया विशेष बल।
“पेड़ लगाएं, पर्यावरण बचाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित बनाएं।”
बदहाल था चिलुआताल, योगी सरकार ने बना दिया पर्यटन स्थल
गोरखपुर, 2 जून। शहर के उत्तरी छोर पर स्थित चिलुआताल, जो वर्षों तक उपेक्षा और बदहाली का शिकार रहा, अब एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को 20 करोड़ 39 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए चिलुआताल पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण परियोजना का लोकार्पण करेंगे।
रामगढ़ताल की तर्ज पर विकसित किए गए चिलुआताल घाट का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। परियोजना के तहत सात कियोस्क का निर्माण कराया गया है, जहां पर्यटक खानपान और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव के अनुसार चिलुआताल के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास कार्यों पर 20.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कार्य पूर्ण होने के बाद से ही बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य और विकसित सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं। मुख्यमंत्री के लोकार्पण के बाद यह परियोजना औपचारिक रूप से जनता को समर्पित हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि रामगढ़ताल की तरह चिलुआताल भी लंबे समय तक उपेक्षित रहा था। योगी सरकार ने पहले रामगढ़ताल को विकसित कर पूर्वांचल के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया और अब उसी मॉडल पर चिलुआताल को भी संवारा गया है। आने वाले समय में यह क्षेत्र पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां पर्यटकों को बोटिंग की सुविधा के साथ प्राकृतिक वातावरण में मनोरंजन का अवसर भी मिलेगा।
परियोजना के प्रमुख कार्य
570 मीटर लंबे पाथवे का निर्माण
घाट की सीढ़ियों का निर्माण एवं पत्थर लगाने का कार्य
इंटरलॉकिंग एवं रेलिंग का निर्माण
स्टोन पिचिंग एवं कैरेट बोल्डर कार्य
सात कियोस्क का निर्माण
आधुनिक टॉयलेट ब्लॉक की स्थापना
मुख्य प्रवेश द्वार का सुपर स्ट्रक्चर निर्माण
400 मीटर एप्रोच रोड का निर्माण
विद्युतीकरण, पोल एवं सोलर लाइट की व्यवस्था
500 मीटर साइड वॉल एवं नाली निर्माण
चिलुआताल के विकास से गोरखपुर के उत्तरी क्षेत्र को नया पर्यटन केंद्र मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
3 लाख टन कचरे का निस्तारण, सिटी फॉरेस्ट और ईको पार्क के रूप में हुआ विकास
कभी कूड़े का ढेर रहा एकला बांध, अब हरियाली और रिवर व्यू के साथ पिकनिक स्पॉट में तब्दील
कभी कूड़े के पहाड़ के रूप में बदनाम रहा गोरखपुर का एकला बांध अब शहर के प्रमुख पिकनिक स्पॉट के रूप में उभर कर सामने आया है। स्वच्छता अभियान के तहत इस क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे एक सुंदर ईको पार्क में बदल दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नगर निगम ने वर्षों से जमा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया।
नगर निगम के अनुसार, यहां लगभग 3 लाख टन लिगेसी वेस्ट को हटाया गया। इसके बाद खाली भूमि पर मियावाकी पद्धति से सिटी फॉरेस्ट विकसित किया गया।
इस परियोजना पर अब तक करीब 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
अब यह क्षेत्र हरियाली, स्वच्छ हवा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाएगा।
एकला बांध को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है।
यहां वॉकिंग ट्रैक, योग स्थल, किड्स जोन और रिवर व्यू पॉइंट बनाए गए हैं।
भविष्य में यहां पैडल बोटिंग की सुविधा भी शुरू की जाएगी, जिससे यह पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सके।
एक नजर में बदलाव:
❌ पहले: कूड़े का पहाड़
✅ अब: सिटी फॉरेस्ट + ईको पार्क
🌳 3 लाख टन कचरा साफ
🚶 वॉकिंग ट्रैक व ग्रीन जोन
🌊 राप्ती नदी का शानदार व्यू
🗨️ “एकला बांध का कायाकल्प ‘स्वच्छ गोरखपुर’ अभियान की बड़ी सफलता है।” — महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव
“वेस्ट टू वेल्थ का बेहतरीन उदाहरण बना एकला बांध, गोरखपुर की नई पहचान”
राकेश कुमार भट्ट डेवलपमेंट शहरी स्वच्छता बंधन विशेषज्ञ)
भारत के शहरीकरण की रफ्तार ने शहरों को चमकदार ऊंची इमारतों से सजा दिया है, लेकिन इसी के साथ जल निकासी की व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ गया है। नाले, जो शहरों की जीवनरेखा हैं, आज प्रदूषण, जलभराव और बाढ़ के कारण अभिशाप बन चुके हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में शहरी क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 61948 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल लगभग 40 प्रतिशत ही उपचारित होता है। शेष लगभग 60 प्रतिशत सीधे नालों में बह जाता है, जो नदियों को विषैला बना देता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हाल ही में लुधियाना के बुद्धा नाला मामले में सख्ती दिखाई है, जहां डाइंग इकाइयों के सीईटीपी से अनुपचारित जल नाले में छोड़ा जा रहा है। यह समस्या केवल एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे महानगरों में आम है।
स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन (एसबीएम यू) के तहत 2024 तक 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए, जिससे खुले में शौच लगभग 11 प्रतिशत रह गया। लेकिन कचरा प्रबंधन अभी भी चुनौती है। मिशन के आंकड़ों के मुताबिक, 86284 वार्डों में से लगभग 17 प्रतिशत में द्वार-द्वार कचरा संग्रहण हो रहा है, लेकिन स्रोत पृथक्करण केवल लगभग 78 प्रतिशत है। नाले इसी असंगठित कचरे से अवरुद्ध हो जाते हैं। अमृत 2.0 मिशन, जो अक्टूबर 2021 से चल रहा है, ने 500 अमृत शहरों में सार्वजनिक सीवरेज को प्राथमिकता दी है। इसके तहत 3571 जल आपूर्ति, परियोजनाओं को 118421 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली, जिसमें 178 लाख नई टैप कनेक्शन शामिल हैं। फिर भी, नालों का पुनरुद्धार पिछड़ रहा है, जिससे मानसून में बाढ़ आम हो गई है।
जल जीवन मिशन (जेजेएम) के ‘नल से जल’ अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में 19.22 करोड़ घरों में से लगभग 45.10 प्रतिशत को नल जल दिया है, लेकिन शहरी नालों का प्रबंधन इससे जुड़ा है। मिशन की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीणों की आय में वृद्धि के साथ जल संरक्षण की मांग बढ़ी है, जो शहरी नालों के प्रदूषण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार, अमृत 2.0 ने जल पुनर्चक्रण, हरित पार्क और जलाशय पुनरुद्धार पर जोर दिया है। फिर भी, 2025-26 के आंकड़े चिंताजनक हैं, देश की 4000 से अधिक शहरों में नालों से निकलने वाला लगभग 30 प्रतिशत जल अनुपचारित नदियों में मिलता है। मुंबई में, ब्रिम्सटन नाला और दिल्ली के नजफगढ़ ड्रेन जैसे उदाहरण एनजीटी में हैं, जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई है।
नाला प्रबंधन की आवश्कता इसलिए अनिवार्य हो गई है क्योंकि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। प्रदूषित नाले जलजनित रोगों का कारण बनते हैं इझ कोविड के बाद 2025 में डेंगू मलेरिया के 10 लाख मामले नालों से जुड़े पाए गए। आर्थिक नुकसान अरबों में है; 2023 की मुंबई बाढ़ से 5000 करोड़ का नुकसान हुआ। सरकार ने 2026 तक सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को जल सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा है। अमृत मित्र और जल ही अमृत जैसे कार्यक्रम मौजूदा नालों को पुनः उपयोगी बनाने पर केंद्रित हैं। स्वच्छ भारत 2.0 में नाला सफाई को प्राथमिकता दी गई, जिसमें 83435 वार्डों में कचरा संग्रहण 17 प्रतिशत पहुंचा। हैं।
समाधान के उपाय सरकारी योजनाओं से, आगे बढ़कर तकनीकी नवाचारों पर निर्भर हैं। इन-सीटू उपचार प्रणालियां, जैसे पारिस्थितिक इकाइयों से नाला पुनर्स्थापन (आरईएनईयू), प्रदूषण को स्रोत पर ही रोकती हैं। सीएसआईआर-एनईईआरआई जैसी संस्थाओं ने सिद्ध किया कि ये शून्य ऊर्जा वाली प्रणालियां लगभग 70-85 प्रतिशत प्रदूषण कम करती हैं। नगर निगमों को जीआईएस मैपिंग से नालों की निगरानी करनी चाहिए। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल अमृत 2.0 में सफल रहा, जहां 118000 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत हुई। जन जागरूकता अभियान, जैसे जल शक्ति अभियान, स्रोत पृथक्करण को 90 प्रतिशत तक ले गए।
हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। अवैध कनेक्शन, औद्योगिक अपशिष्ट और मानसून की अनियमितता नालों को जाम कर देते हैं। एनजीटी ने 2024-25 में 546 ओए में सीपीसीबी को नाला प्रदूषण पर रिपोर्ट मांगी। पंजाब में बुद्धा नाला के लिए उच्च स्तरीय समिति बनी, जिसमें आईआईटी रोपड़ शामिल है। है। केंद्र सरकार ने 2026 तक आय वितरण सर्वेक्षण के साथ जल प्रबंधन को जोड़ा, ताकि गरीब इलाकों में नाले सुधरें।
नाला प्रबंधन केवल सफाई नहीं, बल्कि समग्र शहरी योजना है। स्वच्छ भारत, अमृत और जेजेएम जैसे मिशनों ने आधार दिया है अब अमल की जरूरत। नगर निगम, पीएसयू और नागरिक मिलकर इसे अनिवार्य बनाएं। स्वच्छ नाले स्वच्छ शहर बनाएंगे, जो वर्तमान सरकार के ‘स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ विजन को साकार करेंगे। यदि नाले सुधरे, तो बाढ़-प्रदूषण की मार कम होगी और जल सुरक्षा सुनिश्चित। समय आ गया है कार्रवाई का, क्योंकि नाला प्रबंधन अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
नववर्ष के शुभ अवसर पर डॉ. अवधेशकुमार राय स्मृति फाउंडेशन के तत्वावधान में श्रीनेत ग्लोबल स्कूल के प्रांगण में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और हरित भविष्य का संदेश देना रहा।
इस अवसर पर फाउंडेशन के चेयरमैन एवं शिक्षाविद् अनुपम राय, समाजसेवी प्रभाकर शाही, आर्चरी के राष्ट्रीय कोच, अर्जुन एवं द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित तथा टाटा ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट संजीव सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ उमंग राय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पौधारोपण जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने समाज को हरित, स्वच्छ और स्वस्थ बनाने हेतु निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।
सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, जिसमें दो नए विधेयकों को संसद में पेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करेंगे… विपक्षी दलों से संसद में जन सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर स्वस्थ बहस की अपील करेंगे।
इस सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सिगरेट, गुटखा और पान मसाला पर टैक्स लगाने संबंधी एक विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक को सरकार स्वास्थ्य और कर नीति को ध्यान में रख कर पेश कर रही है।
इसके अलावा, विपक्षी दलों द्वारा सरकार को वायु प्रदूषण और SIR के मुद्दे पर घेरने की संभावना जताई जा रही है। शीतकालीन सत्र में इस पर तीव्र बहस के आसार नजर आ रहे है।
इस सत्र में हंगामे की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कई मुद्दों पर विरोधी दलों के तीव्र विरोध की उम्मीद है। यह सत्र एक बार फिर से राजनीतिक और विधायी गतिविधियों का केंद्र बन सकता है।
सहजनवा तहसील क्षेत्र में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी सहजनवा केशरी नन्दन तिवारी ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेश में कहा गया है कि 7 नवंबर को भेजे गए निर्देशों के बावजूद क्षेत्र में पराली जलाने की शिकायतें मिल रही हैं, जो कानूनन दंडनीय है और पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक भी।
एसडीएम ने खंड विकास अधिकारी पाली/सहजनवां/पिपरौली तथा कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित भ्रमण कर यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी पराली न जलाई जाए। यदि ऐसी कोई घटना घटित होती है, तो संबंधित अधिकारी उसकी पूरी जिम्मेदारी के लिए उत्तरदायी होंगे।
आदेश में यह भी कहा गया है कि पराली जलाने की किसी भी घटना की तत्काल सूचना उच्च अधिकारियों को दी जाए। साथ ही किसानों को पराली न जलाने के नुकसान और वैकल्पिक प्रबंधन के तरीकों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।
उप जिलाधिकारी ने मीडिया से भी अपील की है कि पराली न जलाने संबंधित संदेशों को प्रकाशित कर जनजागरूकता बढ़ाने में सहयोग करें। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई से कोई छूट नहीं मिलेगी।
“प्रबंधक महबूब सईद हारीश ने पेश किया खेराजे अकीदत”
गोरखपुर । इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी हर साल की तरह इस साल भी हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों ने जो कर्बला के मैदान मे शहादत दी सभी के याद में 72 पौधा लगाने का काम पिछले कई दिनों से विभिन्न स्थानों पर करती चलती आ रही है।
पहला पौधा इमामबाड़ा स्टेट के सज्जादानशीन व सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के सदस्य सैयद अदनान फर्रूख शाह मियां साहब के साहबजादे अयान शाह ने लगाकर इस कार्यक्रम का शुरूआत किया। इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी के जिला अध्यक्ष सैयद इरशाद अहमद ने बताया कि आज 72वां पौधा मियां साहब इस्लामी इंटर कॉलेज बक्सीपुर के प्रबंधक महबूब सईद हारीश के हाथों लगाया जा रहा है। कमेटी का 72वां पौधा कई वर्षों से महबूब सईद हारीश लग रहे हैं।
पौधा रोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महबूब सईद हारीश ने कमेटी के कार्यकी सराहना करते हुए कहा कि यह कमेटी मोहर्रम में हीनहीं काम करती बल्कि सभी त्योहारों में अपनी जिम्मेदारियां का निर्वाहन करती है हम कमेटी के सभी लोगों का शुक्रिया अदा करते हैं यह काम जो पौधारोपण का है उसे पूरी ईमानदारी से अंजाम दिया और 72 वां पौधा लगाकर, पौधा रोपण कार्यक्रम का समापन हो गया। कमेटी को आज मै विश्वास दिलाता हूं की जो भी काम होगा बताइएगा इसे पूरा करने का पूरा प्रयास करूंगा।
पौधा रोपण कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष सैयद इरशाद अहमद व महासचिव हाजी सोहराब खान मोहम्मद आदिल अख्तर खान शकील शाही सैयद वसीम इकबाल कबीर अली मेहंदी हसन आफाक अहमद खान डॉक्टर जावेद मोहम्मद वसीम तमाम लोग उपस्थित थे।