Category: पर्यावरण

  • 22 अप्रैल की रात्रि में दिखेंगे शानदार टूटते हुए तारे

    22 अप्रैल की रात्रि में दिखेंगे शानदार टूटते हुए तारे

    अगर आप अंतरिक्ष में थोड़ी सी भी रुचि रखते हैं तो यह ख़बर वास्तव में आपके लिए ही है, जी हाँ ,हम बात कर रहे हैं अंतरिक्ष में घटित होने वाले रोमांचक नज़ारों में से एक की, जो कि 22 अप्रैल की रात्रि में घटित होने वाला है।

    अंतरिक्ष में रुचि रखने वाले अंतरिक्ष प्रेमियों को एक बार फिर होगा रोमांच का अनुभव। हम बात कर रहे हैं 22 अप्रैल की रात्रि में होने वाली शानदार उल्का वृष्टि/ टूटते हुए तारों की।

    क्या है उल्का वृष्टि/टूटते हुए तारे ?

    वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि, सौर मंडल के ग्रहों के बीच के अंतरिक्ष में पत्थर और लोहे के अनगिनत छोटे छोटे कंकड़ या कण मौजूद हैं, ऐसा कोई कण जब पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण में आने पर तीव्र वेग से पृथ्वी के वायुमंडलीय घर्षण के कारण रात्रि के आकाश में क्षण भर के लिए चमक उठता है, इसी को उल्का या टूटता तारा कहा जाता है,
    खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्का वृष्टि का संबंध किसी न किसी धूमकेतुओं से ही होता है, धूमकेतु जोकि धूलिकड़ों और बर्फ से बनी गैसों के पिण्ड होते हैं ये लंबी दीर्घब्रत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते हैं, इनसे निकले हुए कण इनकी कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं, जब पृथ्वी वार्षिक ग़मन के दौरान किसी धूमकेतु के यात्रापथ से गुजरती है, तब धूमकेतु के बे कण पृथ्वी के वायुमंडल में घर्षण के कारण जलने लगते हैं और उल्काओं के रूप में चमकते हुए दिखाई देते हैं, तभी रात्रि के दौरान आकाश में हमें उल्का वृष्टि का आकर्षक नज़ारा दिखाई देता है, इसी को खगोल विज्ञान की भाषा में मेटियर शॉवर या उल्का वृष्टि या केतु वृष्टि कहा जाता है, लेकिन आम जन मानस की भाषा में तो इसे ही टूटते हुए तारे कहा जाता है।

    क्या होती है लिरिड मीटीयर शॉवर/ कैसे देखें इसे

    लिरिड उल्का बौछार एक खगोलीय घटना है, जो हर साल अप्रैल के अंत में होती है, यह उल्का वर्षा पृथ्वी के वायुमंडल में धूमकेतु थैचर ( C/1861G1) के मलबे के कणों के द्वारा होती है, थैचर धूमकेतु 415 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है, और यह धूमकेतु दुबारा वर्ष 2276 में फ़िर से पृथ्वी से नज़र आयेगा, फिलहाल के लिए आप इस से होने वाली उल्का वृष्टि का आनंद तो उठा ही सकते हैं, वैसे तो यह उल्का वृष्टि प्रत्येक वर्ष 16 अप्रैल से शुरू होकर लगभग 25 से 30 अप्रैल तक भी दिखाई देती है ,लेकिन इस बार यह 22 अप्रैल की मध्य रात्रि से 23 अप्रैल की भोर तक अपने चरम पर दिखाई देगी, इस दौरान लगभग 10 से 20 उल्काएं प्रति घंटे तक दिखाई देने की संभावना है, लिरिड मीटीयर शॉवर वर्ष की बहुत ही चमकदार उल्का वृष्टि नहीं होती है इसलिए आप को इसे सावधानी पूर्वक देखने की आवश्यकता है जैसे कि कम से कम आधा घंटा पहले अपनी आंखों को अंधेरे के सापेक्ष समायोजित करें और अति उच्च स्तर के बाहरी प्रकाश से दूरी बनाएं तब आसानी से आप इसका आनंद उठा सकते हैं,

    खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि
    प्रत्येक वर्ष अप्रैल में होने वाली यह लिरिड मीटीयर शॉवर/उल्का वृष्टि आकाश में लायरा कांस्टेलेशन जिसे हिंदी में वीणा तारामण्डल कहा जाता है यह एक छोटा लेकिन पहचानने योग्य तारामंडल है, जोकि आजकल पूर्वोत्तर आकाश में स्थित लगभग मध्यरात्रि में आकाश साफ़ होने पर बिल्कुल साफ दिखाई देता है , इसका सबसे चमकीला तारा वेगा है, जो आकाश का पाँचवा सबसे चमकीला तारा भी है,
    यह उल्का वृष्टि उसी लायरा तारामंडल की तरफ़ से आती हुई दिखाई देगी इसीलिए इस उल्का वृष्टि को लिरिड मीटीयर शॉवर कहा जाता है, और यह जिस तारामण्डल से आती हुई दिखाई देती है जिसे आकाश में रेडिएंट प्वाइंट ( बिकीरनक् बिंदु) कहा जाता है,वैसे तो यह आकाश में किसी भी तरफ़ से आती हुई दिखाई दे सकती हैं।

    अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बार की उल्का वृष्टि में आप एक घण्टे में कम से कम 10 से लेकर 20 उल्काओं का दीदार कर सकते हैं, जो कि पृथ्वी के धरातल से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर 47 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चमकती हुई उल्काएं दिखाई देंगी, इस अप्रैल की उल्का वृष्टि का कारण है धूमकेतु थैचर (C/1861G1) अप्रैल में होने वाली उल्का वृष्टि/टूटते हुए तारों को नाम दिया जाता है लिरिड मेटियर्र शॉवर।

    क्यों और किस तरीक़े से देखें

    वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल ) गोरखपुर के खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि आज के दौड़धूप भरी दुनिया में लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं और मोबाइल फोन पर स्क्रीन समय बढ़ता जा रहा है, जो कई परेशानियों का कारण भी बनता जा रहा है। ऐसे में लोगों को अंतरिक्ष विज्ञान में कुछ शौक रखने से कई समस्याओं के समाधान मिल सकते हैं , जैसे कि केवल साधारण आंखों से आकाश को निहारने में कोई क़ीमत और तकनीकी उपकरण की भी जरूरत नहीं है और आपको प्रकृति की जादुई गोद में नज़दीक होने का भी अहसास होगा, और उल्का वृष्टि को देखने के लिए आपको किसी भी ख़ास या अतिरिक्त प्रकार के दूरबीन या अन्य उपकरण की कोई भी आवश्यकता नहीं होती है, आप सीधे तौर से अपनी साधारण आंखों से रात्रि के साफ़ आकाश में इसे आसानी से अपने घरों से ही देख सकते हैं, जहां ज्यादा प्रकाश प्रदूषण (लाइट पॉल्यूशन) न हो, रात्रि के आकाश में इस उल्का वृष्टि को देखने के लिए किसी सुरक्षित ख़ास साफ़ जगह का चयन करें और लेटकर आकाश की ओर उन्मुख होकर रात्रि के आकाश को भरपूर तरीक़े से निहारें तब यह आकर्षक नज़ारा आसानी से देख सकते हैं, वैसे तो शाम होते ही उल्का वृष्टि/ टूटते हुए तारों का दीदार होना शुरु हो जायेगा, लेकिन ये 22 अप्रैल की मध्य रात्रि से 23 अप्रैल की भोर तक अपने चरम सीमा पर दिखाई देंगी।

    News Courtesy : अमर पाल सिंह, खगोलविद ,वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल), गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

  • वन के साथ वन्य जीवों का संरक्षण भी जरुरी: शिवजीत सिंह

    वन के साथ वन्य जीवों का संरक्षण भी जरुरी: शिवजीत सिंह

    ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

    बड़हलगंज/गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे): बड़हलगंज पेड़ पौधों का हमारे जीवन में बहुमूल्य योगदान है। पेड़ पौधों के साथ ही वन्य जीव भी पर्यावरण के लिए काफी मायने रखते हैं, अतः वन के साथ वन्य जीवों का संरक्षण भी जरुरी है।

    उक्त बातें मंगलवार को नगर पंचायत बड़हलगंज के सभागार में वन विभाग द्वारा आयोजित वन एवं वन्य जीव सुरक्षा माह के तहत आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वन क्षेत्राधिकारी शिवजीत सिंह ने कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत वनों एवं वन्य जीवों को क्षति करने वाले पर भारतीय वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अर्न्तगत कार्यवाई भी की जा रही है। ईओ राम समुख ने कहा कि बिना वनों के हमारा जीवन संभव नहीं है। उन्होंने समस्त नगर पंचायत कर्मियों से एक एक पौधा लगाने व उसके देखभाल के लिए भी निर्देश दिया।

    इस दौरान नगर पंचायत परिसर में संतरा, मौसमी व कटहल के पौधे का भी रोपण किया गया। इस दौरान चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर, वन दरोगा मुन्नीलाल, ज्योति भूषण तिवारी, रामदवन, रामदास मद्धेशिया, सुरेश उमर, कृष्णा गुप्ता, अभिषेक श्रीवास्तव, राजेश जायसवाल, अजीत राव, वीके शर्मा, सुरेश सोनकर, हिमांशु गौंड, अमलेश कुमार, आजाद अहमद, सतीश उमर, जैनू, शैलेश तिवारी, पप्पू यादव, अजय सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

  • एनआईसीपीआर के मुताबिक प्रतिवर्ष 1.7 लाख टन कचरे का उत्पादन होता है

    एनआईसीपीआर के मुताबिक प्रतिवर्ष 1.7 लाख टन कचरे का उत्पादन होता है

    राष्ट्रीय कैंसर इंस्टीट्यूट आफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआइसीपीआर) के मुताबिक सभी प्रकार के तंबाकू उत्पाद जैसे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी आदि से प्रतिवर्ष 1.7 लाख टन कचरे का उत्पादन होता है जो बढ़कर इस वर्ष तक 2 लाख टन से भी ज्यादा संभावित है। इसमें अकेले उत्तर प्रदेश की भागीदारी सर्वाधिक 22 प्रतिशत है।

    इस रिपोर्ट को ‘द एनवायरनमेंटल बर्डन आफ टोबैको प्रोडक्ट्स वेस्टेज इन इंडिया’ ने तैयार किया। इसके मुताबिक सिगरेट के 70 ब्रांड, बीड़ी के 94 ब्रांड और धुंआ रहित तंबाकू के 58 ब्रांड को परखा गया। इसमें प्लास्टिक, कागज, रैपर और फिल्टर के अलग-अलग वजन को ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया डाटा के साथ मिलाया गया। इससे पता चला कि तंबाकू उत्पादों द्वारा उत्पन्न कुल कचरे में 73,500 टन प्लास्टिक है।

  • पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन

    पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन

    संवाददाता: सूर्य प्रकाश ओझा

    गोरखपुर।सनराइज सेवा संस्थान ट्रस्ट और नेचुरल रिसोर्सेज सस्टेनेबिलिटी फाउंडेशन एवं सेंट जोसेफ कॉलेज फॉर वीमेन के संयुक्त तत्वाधान में “पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सेंट जोसफ कॉलेज फॉर वीमेन में किया गया। इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर राजश्री गौर, बायोटेक्नोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष, गोरखपुर विश्वविद्यालय, और विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार मिश्रा, कुलपति, सिक्किम स्किल यूनिवर्सिटी, उपस्थित रहे।प्रोफेसर राजश्री गौर ने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया और उन्हें पौधारोपण करने, अपने आसपास साफ-सफाई रखने और लोगों को स्वच्छ और स्वस्थ शहर बनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वे आने वाले समय के पर्यावरण प्रहरी हैं और उन्हें पृथ्वी की रक्षा के लिए जल संरक्षण, वन संरक्षण और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर पौधारोपण करना चाहिए ताकि पर्यावरण को हरा-भरा बनाया जा सके। कॉलेज के प्राचार्य फादर रोजर ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया और छात्रों को प्रकृति के साथ जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रतिमा विश्वकर्मा ने किया। कार्यशाला से पहले एक फील्ड वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. शोभित कुमार श्रीवास्तव “डॉ. टैक्सओ” वनस्पतिशास्त्री ने छात्रों को पौधों की पहचान, हर्बेरियम तकनीक और औषधीय पौधों के महत्व के बारे में प्रशिक्षण दिया।कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

    इस कार्यक्रम में डॉक्टर प्रतिमा विश्वकर्मा, डॉ. पवन कुमार मिश्रा, डॉ. के. के. सिंह, डॉ.महेश्वर, डॉ. वंदना डॉ. रूही डॉ अरुणा डॉ इग्निस फ्लोरा मिस कोपल डॉ. किरुबा डॉ. मीना पाण्डेय जैसे गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।यह कार्यशाला पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और छात्रों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने में सफल रही।

  • हिमस्खलनः फंसे मज़दूरों को बचाने में जुटी सेना, अब तक 47 लोग बचाए गए

    शुक्रवार को सुबह उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के पास माणा गांव में ग्लेशियर टूटने से 55 मज़दूर बर्फ़ में दब गए, जिनमें पहले 33 और अब 14 और मज़दूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।पहले जानकारी आई थी कि 57 मज़दूर फंस गए हैं, लेकिन शुक्रवार शाम चमोली डीएम संदीप तिवारी ने बताया कि “उस क्षेत्र में 57 नहीं बल्कि कुल 55 लोग मौजूद थे। दो लोग छुट्टी पर थे। कुल 33 लोग अभी तक मिल चुके हैं। सुबह तक 14 और मजदूरों को खोज लिया गया। सेना युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है।

  • धूल प्रदूषण से जानलेवा बने ईंट भट्ठे की एसडीएम से शिकायत

    धूल प्रदूषण से जानलेवा बने ईंट भट्ठे की एसडीएम से शिकायत

    धूल प्रदूषण से जानलेवा बने ईंट भट्ठे की एसडीएम से शिकायत,

    मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने की जांच, सौंपी रिपोर्ट,

    ब्यूरो प्रभारी : संतोष कुमार त्रिपाठी खजनी गोरखपुर

    खजनी गोरखपुर। इलाके के नैपुरा गांव के निवासी जयनाथ चौबे ने उप जिलाधिकारी कुंवर सचिन सिंह को प्रार्थनापत्र देकर बताया कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उनके गांव नैपुरा की ओर जाने वाले संपर्क मार्ग पर बने ईंट भट्ठों के कारण वाहनों के आवागमन से अथवा तेज हवा चलने पर धूल के घने गुबार के कारण लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

    प्रार्थनापत्र में बताया गया है कि डीएस मार्का, रमेश मार्का और काका मार्का ईंट भट्ठों पर आने जाने वाले वाहनों तथा निजी वाहनों के आवागमन से उड़ने वाली धूल के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा हैं। कई लोग प्रदूषण के कारण दमा, एलर्जी और त्वचा रोग के शिकार हो चुके हैं और अपना इलाज करा रहे हैं। मामले में स्थानीय लोगों ने बताया कि हमारे घरों के बाहर, दरवाजे और खिड़कियों पर धूल की मोटी परत जम जाती है। रोज सफाई करने पर भी कोई राहत नहीं मिलती, सुबह धूल साफ करें तो शाम तक फिर वही स्थिति हो जाती है।
    मामले में एसडीएम के निर्देश पर जांच के लिए पहुंचे नायब तहसीलदार रामसूरज प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर जांच की उन्होंने बताया कि समस्या गंभीर है उनके द्वारा जांच के बाद रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी गई है।
    इस संदर्भ में एसडीएम कुंवर सचिन सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ईंट भट्ठे के मालिकों को नोटिस भेज कर उन्हें समस्या के समाधान हेतु बुलाया जाएगा।

  • प्राकृतिक विधि के जल शोधन से नदी की शुद्धि के साथ करोड़ों की बचत

    प्राकृतिक विधि के जल शोधन से नदी की शुद्धि के साथ करोड़ों की बचत

    प्राकृतिक विधि के जल शोधन से नदी की शुद्धि के साथ करोड़ों की बचत : मुख्यमंत्री

    सीएम योगी ने किया राप्ती नदी में गिरने वाले नालों के जल शोधन की 2 करोड़ 70 लाख की परियोजना का शुभारंभ

    प्राकृतिक विधि से जल शोधन उर्वरता और जीवन को बचाने का कार्य : मुख्यमंत्री

    गोरखपुर, 3 जनवरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राप्ती नदी में गिरने वाले नालों के प्राकृतिक विधि (फाइटोरेमिडीएशन तकनीकी) से जल शोधन की 2 करोड़ 70 लाख रुपये की नगर निगम की परियोजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक विधि से जल शोधन से नदी की शुद्धि के साथ करोड़ों रुपए की बचत भी होगी। इसमें न तो बिजली का खर्च आएगा और न ही मेंटिनेंस का,

    तकियाघाट पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में राप्ती नदी अविरल एवं निर्मल रहे, उसका जल स्वच्छ एवं सुदर रहे, इसके लिए जो प्रयास नगर निगम ने किया है वह सराहनीय है। यह बहुत बड़ा काम हुआ है। यह कार्य उर्वरता और जीवन को बचाने के लिए हुआ है। सीएम ने कहा कि महापुरूषों ने जल को जीवन माना है। प्रदूषित जल के कारण गोरखपुर के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1977 से लेकर 2017 तक 50 हजार मासूम बच्चे इंसेफेलाइटिस एवं वेक्टरजनित बीमारियों के कारण काल के गाल में समा गए। विषाणुजनित बीमारियों से होने वाली मौतों का कारण प्रदूषित जल और गंदगी था। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से स्वच्छ भारत मिशन पूरे देश में लागू हुआ। हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए शहरी क्षेत्र में अमृत मिशन और ग्रामीण क्षेत्र में जल जीवन मिशन प्रारम्भ हुआ। हर घर नल योजना के माध्यम से घर-घर तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य किया गया,

    पीएम मोदी की प्रेरणा से प्रारम्भ हुआ नदी संस्कृति को बचाने का कार्य
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज नामामि गंगे परियोजना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से नदी संस्कृति को बचाने का कार्य प्रारम्भ किया गया है। आज उसका परिणाम है कि दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक समागम उत्तर प्रदेश की धरती प्रयागराज में मां गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी पर महाकुम्भ के रूप में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में भी हमारी सभ्यता एवं संस्कृति नदी के तट पर बसी है। गोरखपुर राप्ती नदी व रोहिन नदी के तट पर बसा है। जो नदी हमारी सभ्यता व संस्कृति की जननी है, उसे शुद्ध करने का कार्य किया जा रहा है,

    350 था बीओडी लेवल, अब 22 हुआ
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राप्ती नदी में प्रदूषित पानी गिरने के कारण पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नगर निगम पर लगातार जुर्माना कर रहा था। नगर निगम ने 110 करोड रुपये की लागत से एसटीपी बनने की तैयारी की थी। तब हमने कहा कि जल शोधन के लिए प्राकृतिक तरीका अपनाया जाए। आज उसका सुखद परिणाम सबके सामने है। पहले यहां पानी का बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) लेवल 350 तक पहुंच गया था और खतरनाक जहर से भी बदतर होकर वह खेतों में सिंचाई के लायक भी नहीं था। प्राकृतिक विधि से जल शोधन के बाद अब बीओडी लेवल शुद्ध स्थिति में आ गया है। इस परियोजना में अंतिम छोर पर गिरने वाले पानी का बीओडी लेवल 22 आया है,

    सिर्फ एक बार का खर्च और फिर बचत ही बचत
    सीएम योगी ने कहा कि प्राकृतिक विधि से जल शोधन की इस परियोजना में सिर्फ एक बार 2 करोड़ 70 लाख रुपये लगे हैं। और, अब इससे करोड़ों रुपए की बिजली और मेंटिनेंस खर्च की बचत होगी। उन्होंने कहा कि इस विधि को और भी अच्छे ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं। यह सतत विकास का एक मॉडल है। इसको हम हर नाले के साथ जोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी ड्रेनेज और सीवर से जुड़े हुए जितने भी नाले हैं, उन सबको इसी रूप में आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे तो एक प्राकृतिक मॉडल के माध्यम से कम खर्चे में बेहतर परिणाम देकर जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकता जल की शुद्धता को बनाये रखने में हम सफल हो पायेंगे।
    समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर भाजपा के महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता, भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक भोला अग्रहरि, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे,

    नाले के शोधन कार्य का सीएम योगी में लिया जायजा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को नगर निगम की प्राकृतिक विधि (फाइटोरेमिडीएशन तकनीकी) से जल शोधन परियोजना का शुभारंभ करने से पूर्व इसका जायजा भी लिया। उन्होंने प्रोजेक्ट की डिजाइन का अवलोकन करने के साथ मौके पर जाकर शोधित जल की स्थिति भी देखी। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने उन्हें बताया कि महानगर से निकलने वाला दूषित जल मुख्य 15 नालों के माध्यम से राप्ती और रोहिन नदी में गिरता है। नदी के जल को दूषित होने से बचाने के लिए इलाहीबाग रेगुलेटर से तकिया घाट होते हुए राप्ती नदी में गिरने वाले नाले पर नगर निगम द्वारा 2 करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से प्राकृतिक विधि (फाइटोरेमिडीएशन तकनीकी) से जल शोधन का कार्य कराया जा रहा है। इस विधि के तहत मुख्य नाले एवं उसमें गिरने वाले चार ब्रांच नालों और दो अन्य ब्रांच नालों पर प्री फिल्टर लगाया गया है। साथ ही प्रति 30 से 40 मीटर पर प्राकृतिक स्टोन से गैबियन वाल बनाई गई है। नाले में एक्वेटिक प्लांट भी लगाए गए हैं। इन प्रक्रियाओं से होकर गुजरने वाला जल शोधित होकर नदी में गिरता है। इस परियोजना की क्षमता प्रतिदिन 15 मेगा लीटर जल शोधन की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अन्य नालों को भी इंटरसेप्ट कर प्राकृतिक विधि से जल शोधन का सुझाव दिया,

    नागरिकों से किया आत्मीय संवाद, बच्ची से पूछा- कैसी चल रही पढ़ाई
    तकियाघाट पर जल शोधन परियोजना का निरीक्षण करने के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कक्षा तीन में पढ़ने वाली आशिया नाम की एक बच्ची से पूछा कि पढ़ाई कैसी चल रही है। मुख्यमंत्री में आशिया और अन्य बच्चों को आशीर्वाद देते हुए चॉकलेट भी गिफ्ट किया,

  • उड़ते पक्षी का पेट फाड़कर बाहर निकल गई ईल (बामी) मछली

    उड़ते पक्षी का पेट फाड़कर बाहर निकल गई ईल (बामी) मछली

    सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर वायरल हो रही है, जिसने लोगों के बीच हंगामा मचा दिया है, फोटोग्राफर ने कैमरे में कैद किया हैरान कर देने वाला नज़ारा। जिसमे ईल मछली हजारों फिट ऊपर हेरॉन पक्षी का पेट फाड़कर बाहर आई है, यह घटना जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही दुर्लभ भी थी। पोस्ट के वायरल होने के बाद से लेकर अब तक इसे 31.6 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है तो वहीं 2 लाख 16 हजार से ज्यादा लोगों ने इस अद्भुत तस्वीर को लाइक भी किया है.

  • सहजनवां क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटान जोरों पर

    सहजनवां क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटान जोरों पर

    संवाददाता– एस. पी. सिंह
    गोरखपुर/सहजनवा ।

    एक ओर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर पौधरोपण के लिए जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ लकड़ी माफिया हरे फलदार वृक्ष धड़ल्ले से काट रहे हैं । शनिवार को कोड़री उर्फ हड़ही गांव के उत्तर बाग में लकड़ी माफिया द्वारा हरे आम के वृक्ष को काटा गया । बताते चलें कि सहजनवां क्षेत्र में लकड़ी माफिया भयमुक्त हो कर हरे पेड़ों की धड़ल्ले से दिन रात कटान कर सरकार के मंसूबे पर पानी फेर रहे हैं । इसी तरह हरे पेड़ों की कटान होती रही और विभाग लकड़ी माफियाओं पर अंकुश लगाने में असफल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पर्यावरण संरक्षण तो दूर धरती पर मानव जीवन के साथ साथ सभी जीव जन्तुओं को भी अपने जांन बचाने मुश्किल हो जाएंगे । हरे पेड़ के इस कटान के संबंध में डीएफओ गोरखपुर को अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि इसको हम तत्काल दिखवाते हैं।

     

  • ट्रीटमेंट होकर नदी में गिरेगा नाले का पानी

    ट्रीटमेंट होकर नदी में गिरेगा नाले का पानी

    बड़हलगंज नगर पंचायत ने सरयू नदी में गिरने वाले नाले के पानी को अब स्वच्छ करके गिराने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए प्रापर तरीके से बायो रेमिडियेशन ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।

    बुधवार को अधिशासी अधिकारी राम समुझ ने चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर के साथ सरयू नगर वॉर्ड स्थित गौशाला के समीप बन रहे बायो रेमिडियेशन ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने बताया कि लगभग तीस लाख की लागत से इस प्रोजेक्ट का काम शुरू हो गया है, जल्द ही इसका निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा उसके बाद नदी में कई मोहल्लों से जाने वाला नाले का पानी ट्रीटमेंट होकर नदी में गिरेगा, जिससे नदी के प्रदूषण में रोकथाम हो सकेगा। इस दौरान सुरेश उमर, अमलेश कुमार, सुनील कुमार, सुरेश सोनकर, रविन्द्र, हिमांशु गौंड, विकास गौंड, मनोज निगम, विजयनाथ सहित अन्य लोग मौजूद रहें।