आरोप: निजी भूमिधरी में उपजिलाधिकारी और थाना प्रभारी ने जबरजस्ती कब्जा कर करवाया सड़क निर्माण

बेलघाट, ( गोरखपुर ) ।

ब्रह्मसारी थाना बेलघाट निवासिनी सरोज देवी पत्नी शिव कुमार दुबे ने आज बुधवार को गोरखपुर प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपजिलाधिकारी खजनी और थाना प्रभारी बेलघाट पर जबरजस्ती अवैध कब्जा कर सड़क निर्माण कराने का आरोप लगाया है।

बताते चले कि सरोज देवी, निवासी ब्रह्मसारी, थाना बेलघाट, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाते हुए बताया कि, 9 जून 2025 को उपजिलाअधिकारी खजनी के आदेश का हवाला देकर थाना अध्यक्ष बेलघाट विकास नाथ व नायब तहसीलदार हरीश यादव द्वारा पीड़िता के खजनी तहसील अंतर्गत निजी भूमिधरी जिसकी आराजी संख्या 317 मी व 263 पर भारी पुलिस बल की उपस्थिति में शाम 4:30 बजे अवैध कब्जा करवा कर सड़क निर्माण करवाया गया। वही इस आराजी संख्या पर न्यायालय बांसगांव में दीवानी मुकदमा 123/24 भी चल रहा है, जब पीड़िता द्वारा इस अवैध कब्जा का विरोध कर, सरकारी आदेश की छाया प्रति मांगी गई तो, थानाअध्यक्ष द्वारा बताया गया कि, आप उपजिलाधिकारी खजनी से आदेश की छाया प्रति जाकर प्राप्त कर सकते हैं। वही जब पीड़िता उपजिलाधिकारी खजनी से आदेश की कॉफी मांगा तो, उनके द्वारा बताया गया कि कोई सरकारी आदेश नहीं है। जब पीड़िता द्वारा इस अवैध कब्जे का विरोध दर्ज कराया गया तो, उपजिलाधिकारी द्वारा पीड़िता, उसके परिवार व सहयोगियों को फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी भी दी गई। वहीं थाना अध्यक्ष बेलघाट द्वारा पीड़िता, उसके परिवार व सहयोगियों को धमकी दिया गया। पीड़िता ने आगे बताया कि, उनके सहयोगी मोहित यादव के घर पर रात में सो रहे उनके मित्र अश्वनी यादव को पुलिस उठा ले गई तथा उन्हें मारा पीटा गया साथ ही थाने के सिपाही रोहित यादव द्वारा 25000 रुपए भी लिया गया। वहीं जब पीड़िता और उनके परिजनों को जब इसकी जानकारी हुई तो इनलोगों द्वारा इसका विरोध किया गया, जिसके बाद सिपाही द्वारा पैसा वापस कर अश्वनी यादव के ऊपर 151 में चालान कर दिया गया।

पीड़िता ने आगे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, विरोधी पक्ष प्रधान प्रतिनिधि सतीश चंद्र उर्फ गुड्डू लाल थाने व तहसील की दलाली करता है, इसलिए उपजिलाधिकारी खजनी और थाना अध्यक्ष बेलघाट द्वारा पैसा लेकर मेरी जमीन पर अवैध कब्जा व मेरे परिवार व सहयोगियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। वहीं पीड़िता द्वारा यह भी आरोप लगाया कि, फोन पर व कार्यालय में जाकर जिला अधिकारी गोरखपुर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर को शिकायत किया गया, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

 

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