Category: ब्रेकिंग न्यूज़

  • श्री श्री रविशंकर ने मनीष वर्मा को कबूतरी देवी राजेश्वर त्रिपाठी स्मारक पीजी कॉलेज का प्रबंधक नियुक्त किया, शिक्षा जगत में नई उम्मीद

    श्री श्री रविशंकर ने मनीष वर्मा को कबूतरी देवी राजेश्वर त्रिपाठी स्मारक पीजी कॉलेज का प्रबंधक नियुक्त किया, शिक्षा जगत में नई उम्मीद

    श्री श्री रविशंकर ने मनीष वर्मा को कबूतरी देवी राजेश्वर त्रिपाठी स्मारक पीजी कॉलेज का प्रबंधक नियुक्त किया, शिक्षा जगत में नई उम्मीद

     

    सोनबरसा – गोरखपुर। संवाददाता अभिषेक कुमार पाठक। शिक्षा के क्षेत्र में सेवा, समर्पण और संस्कार को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी ने अपने आशीर्वाद और विश्वास के साथ मनीष वर्मा को कबूतरी देवी राजेश्वर त्रिपाठी स्मारक पीजी कॉलेज, बालेन्द्रपुरी, डुमरी खास का प्रबंधक नियुक्त किया है।

    यह नियुक्ति केवल एक पदभार नहीं, बल्कि गुरुदेव की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे चरित्र निर्माण, सेवा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जाता है। मनीष वर्मा की यह नई जिम्मेदारी क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और युवाओं को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने की एक नई शुरुआत मानी जा रही है।

    गुरुदेव की कृपा और विश्वास का प्रसाद

    नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मनीष वर्मा ने भावुक होते हुए इसे गुरुदेव की कृपा और उनके विश्वास का प्रसाद बताया। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं है। यह मेरे जीवन की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी ने जो विश्वास मुझ पर दिखाया है, मैं पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा।”

    मनीष वर्मा लंबे समय से आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े रहे हैं और गुरुदेव के मार्गदर्शन में सामाजिक सेवा, शिक्षा और मानवतावादी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। सोनबरसा और आसपास के क्षेत्रों में उनके द्वारा किए गए सेवा कार्यों की हमेशा सराहना होती रही है। चाहे वह पर्यावरण संरक्षण हो, नशा मुक्ति अभियान हो या युवाओं को ध्यान और सुदर्शन क्रिया से जोड़ना हो, मनीष वर्मा ने हमेशा एक सेवक के रूप में काम किया है।

    क्या है मनीष वर्मा का विजन?

    प्रबंधक नियुक्त होने के बाद मनीष वर्मा ने महाविद्यालय के लिए अपना स्पष्ट विजन रखा। उन्होंने कहा कि उनकी तीन प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।

    1. शैक्षिक व्यवस्था को मजबूत करना: महाविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना। नियमित कक्षाएं, अनुभवी प्राध्यापकों की नियुक्ति, लाइब्रेरी को डिजिटल और समृद्ध करना और छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था करना।

    2. प्रबंधन को प्रभावी और पारदर्शी बनाना: कॉलेज के प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना, ताकि छात्रों और अभिभावकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। प्रवेश से लेकर परीक्षा तक की पूरी प्रक्रिया को सरल और छात्र-हितैषी बनाना।

    3. बेहतर शैक्षिक वातावरण: छात्र-छात्राओं को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक शिक्षा, योग, ध्यान और व्यक्तित्व विकास का भी वातावरण देना। गुरुदेव की प्रेरणा से संचालित मानव मूल्यों पर आधारित शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना।

    उन्होंने कहा कि संस्थान की गरिमा को बनाए रखते हुए इसे पूर्वांचल का एक आदर्श महाविद्यालय बनाने का लक्ष्य है।

     

    संस्थापक परिवार के प्रति आभार

    मनीष वर्मा ने इस अवसर पर महाविद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय बालेंद्र त्रिपाठी जी को नमन किया और उनके परिवार के प्रति विशेष कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संस्थापक के पुत्र *राधेश्याम त्रिपाठीऔर उनकी धर्मपत्नी अमिता त्रिपाठीने हमेशा उन्हें एक छोटे भाई की तरह सहयोग दिया और सेवा कार्यों से जोड़े रखा।

     

    उन्होंने कहा, “राधेश्याम भैया और अमिता भाभी ने जिस तरह से इस महाविद्यालय की नींव को अपने पिता के सपनों के अनुसार सींचा है, वह प्रेरणादायक है। उनका निरंतर मार्गदर्शन मुझे इस नई जिम्मेदारी को निभाने में शक्ति देगा।”

     

    आर्ट ऑफ लिविंग परिवार का मिला आशीर्वाद

     

    मनीष वर्मा ने बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के मुख्यालय से आईं एसएसआरवीएम ट्रस्ट एवं आर्ट ऑफ लिविंग के उच्च शिक्षा विभाग की प्रमुख दिव्या कांचीभोटलाऔर संजय पांडेय सहित सभी वरिष्ठ सहयोगियों का हृदय से आभार जताया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु से मिले मार्गदर्शन और सहयोग के बिना यह संभव नहीं था।

    उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग गोरखपुर परिवार के सभी साधकों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने हमेशा उनके हर सेवा कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया है।

    क्षेत्र में खुशी की लहर

    मनीष वर्मा के प्रबंधक बनने की खबर मिलते ही सोनबरसा, डुमरी खास, बालेन्द्रपुरी और पूरे गोरखपुर जिले में उनके शुभचिंतकों, छात्रों और आर्ट ऑफ लिविंग परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों का मानना है कि एक युवा, ऊर्जावान और सेवा भावी व्यक्ति के हाथों में महाविद्यालय का प्रबंधन आने से संस्थान निश्चित रूप से प्रगति के नए शिखर छुएगा।

    कबूतरी देवी राजेश्वर त्रिपाठी स्मारक पीजी कॉलेज, इस क्षेत्र के हजारों ग्रामीण छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का एकमात्र प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मनीष वर्मा जैसे अनुभवी और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े व्यक्ति का नेतृत्व इस कॉलेज के लिए एक नई उम्मीद बनकर आया है।

  • मालदीव में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पूर्व विदेश मंत्री और UNGA अध्यक्ष रहे अब्दुल्ला शाहिद नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार

    मालदीव में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पूर्व विदेश मंत्री और UNGA अध्यक्ष रहे अब्दुल्ला शाहिद नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार

    मालदीव में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पूर्व विदेश मंत्री और UNGA अध्यक्ष रहे अब्दुल्ला शाहिद नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तारu

     

    माले। हिंद महासागर के द्वीपीय देश मालदीव की राजनीति में सोमवार देर रात एक बड़ा भूचाल आ गया। मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री, संसद के पूर्व स्पीकर और विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के कद्दावर नेता अब्दुल्ला शाहिद को मालदीव पुलिस ने नाबालिग के यौन शोषण के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

    मालदीव पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार, 64 वर्षीय अब्दुल्ला शाहिद को 2 नवंबर 2026 की रात करीब 9:59 बजे कोर्ट वारंट के तहत गिरफ्तार किया गया।

    मालदीव पुलिस ने X (पूर्व ट्विटर) पर जारी बयान में कहा – “18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग के यौन शोषण के संदेह में, अब्दुल्ला शाहिद (64 वर्ष), एच. रबीई मंजिल, माले, को 2 नवंबर 2026 की रात लगभग 21:59 बजे अदालत के वारंट के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस वर्तमान में इस मामले में आगे की जांच कर रही है।” e81e

    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें उनके हुलहुमाले स्थित आवास Rainbow Ocean Front से हिरासत में लिया गया। पहले उन्हें हुलहुमाले पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में धूनिधू स्थित पुलिस कस्टडी सेंटर में ट्रांसफर कर दिया गया।

    गिरफ्तारी से ठीक पहले शाहिद ने क्या कहा?

    गिरफ्तारी से कुछ ही मिनट पहले अब्दुल्ला शाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया।

    शाहिद ने लिखा, “मेरे चरित्र हनन के लिए राजनीतिक रूप से प्रसारित की जा रही कहानियां पूरी तरह से निराधार झूठ हैं। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि ऐसे अपुष्ट दावों को न फैलाएं।” e81e

    उन्होंने कहा कि यह उनकी छवि को खराब करने की कोशिश है और यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है।

    कौन हैं अब्दुल्ला शाहिद? मालदीव के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक

    अब्दुल्ला शाहिद को मालदीव की सबसे प्रभावशाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक पहचानी जाने वाली हस्तियों में गिना जाता है। उनका राजनीतिक करियर चार दशकों से भी ज्यादा लंबा है।

    1. दो बार विदेश मंत्री:*उन्होंने दो बार मालदीव के विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया है। पहली बार 2007 से 2008 तक तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम के कार्यकाल में, और दूसरी बार 2018 से 2023 तक पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के कार्यकाल में। 3146

    2. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष: शाहिद 2021 से 2022 तक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। यह पद किसी मालदीवियाई नागरिक के लिए अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पद माना जाता है। इसी दौरान उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान मिली।

    3. संसद के स्पीकर: वह 2009 से 2014 तक मालदीव की संसद पीपुल्स मजलिस के स्पीकर भी रहे हैं।

    4. राजनीतिक सफर: उन्होंने 1984 में मालदीव के विदेश मंत्रालय से अपने करियर की शुरुआत की थी। वह 2013 में MDP में शामिल हुए थे। फरवरी 2024 में वह MDP के अध्यक्ष बने और अगस्त 2026 में उन्होंने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए पार्टी के प्राइमरी में लड़ने के लिए इस पद से इस्तीफा दे दिया था।

    राजनीतिक समय क्यों है महत्वपूर्ण? 2028 चुनाव से सीधा कनेक्शन

    यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब मालदीव में 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। अब्दुल्ला शाहिद को मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा और संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था।

    मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) जो 2023 में सत्ता से बाहर हो गई थी, अब 2028 में वापसी की तैयारी कर रही है। शाहिद खुद को एक अनुभवी, एकजुट करने वाले और अंतरराष्ट्रीय साख वाले नेता के रूप में पेश कर रहे थे। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी ने MDP की पूरी रणनीति पर सवाल खड़ा कर दिया है। ba1c

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला मालदीव की राजनीति को दो हिस्सों में बांट सकता है। सत्ता पक्ष इसे कानून का राज बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत सबूत या पीड़ित के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, और कहा है कि जांच जारी है।

    1. फिलहाल मालदीव पुलिस ने कहा है कि जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में साबित होने बाकी हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर न केवल मालदीव, बल्कि संमालदीव में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पूर्व विदेश मंत्री और UNGA अध्यक्ष रहे युक्त राष्ट्र और भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की नजर टिकी हुई है।
  • उत्तर प्रदेश ब्रेकिंग: सीएम योगी आज रात 9 बजे करेंगे बड़ी समीक्षा, कानून-व्यवस्था और त्योहारों को लेकर मंडलायुक्त, DM, SSP को सख्त निर्देश

    उत्तर प्रदेश ब्रेकिंग: सीएम योगी आज रात 9 बजे करेंगे बड़ी समीक्षा, कानून-व्यवस्था और त्योहारों को लेकर मंडलायुक्त, DM, SSP को सख्त निर्देश

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    • ब्रेकिंग: सीएम योगी आज रात 9 बजे करेंगे बड़ी समीक्षा, कानून-व्यवस्था और त्योहारों को लेकर मंडलायुक्त, DM, SSP को सख्त निर्देश

    लखनऊ।उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने और आने वाले त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज रात 9 बजे प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी, SSP/SP सहित सभी उच्च अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक करेंगे।

    मुख्यमंत्री कार्यालय, लोक भवन, लखनऊ से 2 नवंबर 2026 को जारी पत्र संख्या 745/सी.एम.(आर)/2026 के अनुसार यह महत्वपूर्ण बैठक 03 नवंबर 2026, मंगलवार को सायं 09:00 बजे* आयोजित की जाएगी। यह पत्र मुख्यमंत्री के निजी सचिव जय शंकर सिंह द्वारा जारी किया गया है।

    पत्र में किसे-किसे किया गया है शामिल?

    इस हाईलेवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रदेश के पूरे प्रशासनिक और पुलिस अमले को शामिल किया गया है।

    पत्र के अनुसार इसमें – मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश, अध्यक्ष राजस्व परिषद, कृषि उत्पादन आयुक्त, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव – गृह, सूचना एवं जनसंपर्क, राजस्व, ऊर्जा, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष, चिकित्सा शिक्षा, लोक निर्माण, कृषि, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, नगर विकास, औद्योगिक विकास, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, पशुधन, आबकारी, आवास एवं शहरी नियोजन, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, परिवहन, ग्रामीण अभियंत्रण, सिंचाई, लघु सिंचाई, नमामि गंगे, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति, बेसिक/माध्यमिक/उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यम शीलता, समाज कल्याण/वन एवं पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य, सहकारिता, श्रम एवं सेवायोजन, अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक उ0प्र0 पॉवर कॉर्पोरेशन लि0, प्रबंध निदेशक, जल निगम, महानिदेशक, पीएसी, अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था/अग्निशमन/112 आपातकालीन सेवा/महिला हेल्पलाइन/यातायात, राहत आयुक्त, आवास आयुक्त, सीईओ नोएडा/ग्रेटर नोएडा, यीडा, बीडा, यूपीडा शामिल होंगे।

    इसके अलावा जिला स्तर पर सभी मंडलायुक्त, अपर पुलिस महानिदेशक (क्षेत्र), पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक/उप महानिरीक्षक (परिक्षेत्र), जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण, नगर आयुक्त, नगर निकाय के अधिशासी अधिकारी तथा उपरोक्त समस्त विभागों के मंडल/जिला स्तरीय उच्च अधिकारी भी इस वीसी में जुड़ेंगे।क्या होगा बैठक का मुख्य एजेंडा?

    सूत्रों के अनुसार इस बैठक का मुख्य एजेंडा तीन बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा।

    1. कानून-व्यवस्था की समीक्षा: मुख्यमंत्री योगी की सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना है। इस बैठक में महिला सुरक्षा, मिशन शक्ति, थानों पर लंबित शिकायतों, भू-माफिया, माफिया के खिलाफ चल रहे अभियान, गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट की कार्रवाई की समीक्षा होगी। सीएम अधिकारियों को जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने का सख्त निर्देश दे सकते हैं।

    2. आगामी त्योहारों की तैयारी: आने वाले दिनों में कई बड़े त्योहार हैं। ऐसे में जुलूस, शोभायात्रा, मेले और भीड़ प्रबंधन को लेकर व्यापक तैयारी जरूरी है। मुख्यमंत्री इस बात पर जोर दे सकते हैं कि सभी त्योहार शांति और सौहार्द के साथ मनाए जाएं, इसके लिए धर्मगुरुओं और शांति समितियों के साथ पहले से ही संवाद स्थापित किया जाए। डीजे, लाउडस्पीकर और भड़काऊ भाषणों पर पूरी तरह से रोक लगाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

    3. विकास कार्यों की प्रगति: इसके अलावा प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों, अमृत योजना, स्मार्ट सिटी, सड़क निर्माण, बिजली-पानी की आपूर्ति और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा हो सकती है।

    15 मिनट पहले उपस्थिति के निर्देश

    पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “कृपया तदनुसार सभी सम्बन्धित अधिकारियों को अपने स्तर से संसूचित करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पूर्ण तैयारी के साथ प्रतिभाग किये जाने की अपेक्षा की गयी है। प्रतिभागी अधिकारीगण बैठक प्रारम्भ होने से 15 मिनट पूर्व अपना स्थान ग्रहण करने का कष्ट करें।”

    इसका साफ मतलब है कि मुख्यमंत्री ने समय की पाबंदी को लेकर कोई ढील न देने का मन बना लिया है।

    इस पत्र के जारी होते ही पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। सभी जिलाधिकारी और एसएसपी अपने-अपने जिलों का डेटा इकट्ठा करने में लग गए हैं। आज रात 9 बजे होने वाली यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की दिशा तय करेगी।

    (more…)

  • राष्ट्रीय एकता दिवस पर सरदार पटेल के योगदान को किया गया याद

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर सरदार पटेल के योगदान को किया गया याद

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-



    मदरसा नूरिया खरिया में संगोष्ठी आयोजित, युवाओं से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने की अपील


    खरिया, 31 अक्टूबर 2026।

    भारत के लौह पुरुष और देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर मदरसा नूरिया खरिया के परिसर में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था— “स्वतंत्रता प्राप्ति में सरदार पटेल की भूमिका, देश की एकता-अखंडता के लिए उनका योगदान एवं समकालीन चुनौतियां।” इस अवसर पर सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मदरसा नूरिया खरिया के प्रबंधक सैयद इज़हार अहमद ने कहा कि ‘आयरन मैन ऑफ इंडिया’ सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की स्वतंत्रता प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद 562 देशी रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण कर उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया। देश उनके इस राष्ट्रनिर्माण के कार्य को हमेशा याद रखेगा।

    उन्होंने कहा कि सरदार पटेल एक सच्चे राष्ट्रवादी, कुशल राजनीतिज्ञ और महान देशभक्त थे। भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश को एक मजबूत प्रशासनिक और राजनीतिक आधार प्रदान किया। भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा प्रशासनिक सेवाओं के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    प्रमुख हाईलाइट :-

    राष्ट्रीय एकता दिवस: सरदार पटेल की जयंती पर विशेष संगोष्ठी।

    562 रियासतों का एकीकरण: राष्ट्र निर्माण में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका को किया याद।

    खेड़ा सत्याग्रह: किसानों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष पर डाला प्रकाश।

    युवाओं से अपील: राष्ट्रवाद, भाईचारे और सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने का संदेश।

    मुस्लिम युवाओं और उलेमाओं से आह्वान: सरदार पटेल की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की अपील।

    एकता ही सच्ची श्रद्धांजलि: सामुदायिक सौहार्द और देश की तरक्की के लिए मिलकर काम करने का संकल्प।

    खेड़ा आंदोलन से स्वतंत्रता संग्राम तक रहा ऐतिहासिक योगदान :-

    सैयद इज़हार अहमद ने कहा कि वर्ष 1918 का खेड़ा सत्याग्रह सरदार पटेल के सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक था। गुजरात के खेड़ा क्षेत्र में सूखे और आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को लगान में राहत दिलाने के लिए उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व किया। किसानों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की एक मजबूत आवाज बना।

    उन्होंने बताया कि सरदार पटेल ने अपना सफल बैरिस्टर का पेशा छोड़कर महात्मा गांधी के विचारों और सिद्धांतों से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। भारत छोड़ो आंदोलन सहित विभिन्न आंदोलनों में उनकी भूमिका और त्याग देश के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।

    युवाओं और उलेमाओं से एकता का संदेश फैलाने की अपील

    संगोष्ठी में सैयद इज़हार अहमद ने विशेष रूप से मुस्लिम युवाओं और धार्मिक उलेमाओं से अपील की कि वे सरदार पटेल के संघर्षपूर्ण जीवन, राष्ट्रवाद और देश के प्रति समर्पण से प्रेरणा लें। उनकी विरासत और विचारों को आम जनमानस तक पहुंचाएं तथा अपने समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों में भी भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का प्रयास करें।

    उन्होंने कहा कि आज देश के सामने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सामुदायिक सौहार्द को बनाए रखने की महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश की तरक्की, शांति और एकता के लिए काम करें।

    सच्ची श्रद्धांजलि राष्ट्र की एकता को मजबूत करना है

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने त्याग, तपस्या, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना से देश की सेवा की।

    आज हमें उनके आदर्शों को केवल याद ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारना है। सभी समुदायों के बीच प्रेम, विश्वास और भाईचारा स्थापित करना तथा देश की उन्नति और अखंडता के लिए मिलकर काम करना ही लौह पुरुष सरदार पटेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

  • सहजनवां में जाम का कहर: एंबुलेंस से लेकर स्कूली बसें तक फंस रहीं, आखिर कब जागेगा पुलिस-प्रशासन ?

    सहजनवां में जाम का कहर: एंबुलेंस से लेकर स्कूली बसें तक फंस रहीं, आखिर कब जागेगा पुलिस-प्रशासन ?

    NH-28 और कस्बे के प्रमुख चौराहों पर रोजाना लग रहा भीषण जाम, अवैध स्टैंड और अतिक्रमण से जनता त्रस्त; यातायात व्यवस्था सुधारने में जिम्मेदारों की कथित नाकामी पर उठ रहे सवाल।

    संवाददाता- एस.पी. सिंह

    सहजनवां, (गोरखपुर)।

    सहजनवां कस्बे और राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें, चौराहों पर बेतरतीब खड़े ऑटो और ई-रिक्शा तथा सड़क की पटरियों पर अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई होती दिखाई नहीं देने से पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    जाम में फंस रहीं एंबुलेंस, मरीजों की जान पर संकट।

     

    सहजनवां थाना चौराहे से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और तहसील की ओर जाने वाले मार्ग पर जाम की समस्या लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जाम के कारण एंबुलेंस और स्कूली बसों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे चिंताजनक स्थिति तब होती है, जब किसी गंभीर मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस जाम में फंस जाती है। ऐसे में इलाज मिलने में देरी का खतरा बना रहता है। सवाल यह है कि यदि आपातकालीन वाहनों के लिए भी रास्ता सुगम नहीं है, तो यातायात व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी आखिर क्या कर रहे हैं?

     

    चौराहों पर अवैध स्टैंड का कब्जा, सड़क बनी पार्किंग।

     

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि थाना चौराहे से घघसरा बाजार मोड़ तक ऑटो और ई-रिक्शा चालक सड़क किनारे तथा चौराहों के आसपास बेतरतीब ढंग से वाहन खड़े कर देते हैं। इससे सड़क की चौड़ाई घट जाती है और जाम की स्थिति पैदा होती है। यदि इन स्थानों पर अवैध स्टैंड संचालित हो रहे हैं, तो उनकी पहचान कर कार्रवाई करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। आखिर बिना प्रभावी नियंत्रण के सड़कों पर वाहनों का जमावड़ा कैसे लगा रहता है?

     

    पटरियों पर दुकानें, पैदल चलना भी मुश्किल।

     

    मुख्य मार्ग की पटरियों पर फल, सब्जी और अन्य सामान की दुकानें लगने से पैदल यात्रियों को भी सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है। इससे न केवल जाम बढ़ता है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, उन्हें केवल औपचारिकता निभाने के बजाय नियमित और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।

     

    हादसों का खतरा, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो।

     

    सहजनवां में यातायात की समस्या अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है। यह आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। रोजाना जाम से जूझते नागरिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब समस्या लंबे समय से बनी हुई है, तो पुलिस और प्रशासन की ओर से ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?

    सवाल पुलिस-प्रशासन से है: क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी? क्या एंबुलेंस के जाम में फंसने या किसी राहगीर के दुर्घटना का शिकार होने का इंतजार किया जा रहा है? यदि नहीं, तो फिर अवैध स्टैंड, बेतरतीब पार्किंग और अतिक्रमण पर सख्ती क्यों नहीं दिखाई दे रही है?

     

    जनता की मांग – अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।

     

    स्थानीय लोगों ने सहजनवां के प्रमुख चौराहों पर नियमित यातायात पुलिस की तैनाती, अवैध स्टैंड हटाने, सड़क की पटरियों से अतिक्रमण मुक्त कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ चालान व अन्य वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए निर्बाध रास्ता सुनिश्चित करने की भी जरूरत है।

    अब पुलिस और प्रशासन को जवाबदेही के साथ कार्रवाई करनी होगी। सहजनवां की जनता को रोजाना जाम की सजा देना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। यातायात व्यवस्था सुधारना कोई एहसान नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जाम की यह समस्या किसी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

    इस मामले में सीओ गीडा आभा सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

  • Disaster

    हजारों करोड़ का बजट, फिर भी आपदाओं के आगे बेबस सुरक्षा

    आपदा से पहले तैयारी या तबाही के बाद भरपाई? हजारों करोड़ के बजट के बावजूद सुरक्षा की चुनौती!
    भारत में आपदा प्रबंधन पर बढ़ता निवेश, जान-माल की क्षति, संसाधनों के उपयोग और जमीनी तैयारियों के बीच अंतर—अब योजनाओं से आगे बढ़कर परिणाम देने का समय।

    भारत आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएँ केवल मौसमी घटनाएँ नहीं रह गई हैं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय अवसंरचना के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, चक्रवात, बादल फटना, बिजली गिरना, लू, शहरी जलभराव और औद्योगिक दुर्घटनाएँ हर वर्ष हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित करती हैं। ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है—जब देश में आपदा प्रबंधन के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान है, तो क्या हमारी तैयारियाँ, मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन योजनाएँ वास्तविक जोखिमों के अनुरूप पर्याप्त प्रभावी हैं?

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट इस चुनौती की गंभीरता उजागर करती है। देश में विभिन्न चरम मौसमी घटनाओं से लगभग 2,760 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई। इनमें भारी वर्षा, बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से 1,370 से अधिक तथा आंधी-तूफान और बिजली गिरने से 1,310 से अधिक लोगों की जान गई। उत्तर प्रदेश में 410 से अधिक, मध्य प्रदेश में 350 से अधिक, महाराष्ट्र में 270 से अधिक और बिहार में 174 मौतें दर्ज हुईं। ये केवल आँकड़े नहीं, बल्कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी और स्थानीय तैयारियों को मजबूत बनाने की आवश्यकता के गंभीर संकेत हैं।

     

    सरकारी स्तर पर वित्तीय प्रतिबद्धता भी उल्लेखनीय है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2021–26 के लिए राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के अंतर्गत ₹1,60,153 करोड़ तथा राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए ₹68,463 करोड़ का प्रावधान अनुशंसित किया था। राज्य स्तरीय राशि का 80 प्रतिशत आपदा प्रतिक्रिया और 20 प्रतिशत जोखिम न्यूनीकरण के लिए निर्धारित किया गया। यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपदा के बाद राहत पहुँचाने के साथ-साथ आपदा से पहले जोखिम कम करने में निवेश करना भी आवश्यक है।

     

    आपदा प्रबंधन के प्रमुख वित्तीय प्रावधान | 2021–26
    राज्य जोखिम प्रबंधन कोष
    ₹1.60 लाख करोड़
    वित्त आयोग की अनुशंसा

    राष्ट्रीय जोखिम प्रबंधन कोष
    ₹68,463 करोड़
    वित्त आयोग की अनुशंसा

    ये बहुवर्षीय वित्तीय प्रावधान हैं, वास्तविक व्यय या उपयोगिता के आँकड़े नहीं। स्रोत: गृह मंत्रालय एवं 15वाँ वित्त आयोग।
    वित्तीय सहायता के वास्तविक प्रवाह पर भी ध्यान देना आवश्यक है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 13 मार्च 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में उस तिथि तक राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के अंतर्गत 28 राज्यों को ₹20,735.20 करोड़ और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से 21 राज्यों को ₹3,628.18 करोड़ जारी किए गए। इसके अतिरिक्त राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष से ₹5,373.20 करोड़ और राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष से ₹1,189.56 करोड़ जारी किए गए। स्पष्ट है कि सरकार राहत के साथ जोखिम न्यूनीकरण के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।

     

     

    लेकिन धनराशि का आवंटन, राज्यों को उसका जारी होना और धरातल पर उसका प्रभावी उपयोग—तीन अलग-अलग अवस्थाएँ हैं। जारी धनराशि को वास्तविक व्यय या सफल परिणाम मान लेना उचित नहीं होगा। इसके लिए परियोजनावार उपयोगिता प्रमाणपत्र, भौतिक प्रगति, स्वतंत्र मूल्यांकन और जोखिम में वास्तविक कमी के प्रमाण आवश्यक हैं।

    इस व्यवस्था में उपयोग और क्षमता निर्माण के बीच अंतर भी दिखाई देता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष की तैयारी एवं क्षमता निर्माण संबंधी वित्तीय व्यवस्था से ₹1,579.12 करोड़ जारी किए गए, जिनमें ₹994.05 करोड़ अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए थे। इसी अवधि में शहरी बाढ़ प्रबंधन के लिए तमिलनाडु और असम को ₹270.75 करोड़ तथा आर्द्रभूमि पुनर्जीवन के लिए असम को ₹155.71 करोड़ की सहायता जारी की गई। ये पहल दर्शाती हैं कि जोखिम न्यूनीकरण में निवेश का दायरा बढ़ रहा हैl
    फिर भी जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण कमियाँ मौजूद हैं। संसद की गृह संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 261वीं रिपोर्ट में राज्यों और जिलों की आपदा प्रबंधन योजनाओं की गुणवत्ता में असमानता, वित्तीय संसाधनों के उपयोग में देरी, संस्थागत क्षमता की कमी तथा विभागीय समन्वय की चुनौतियों को रेखांकित किया है। समिति ने आपदा प्रबंधन योजनाओं की कम-से-कम प्रत्येक दो वर्ष में समीक्षा तथा राज्य और जिला स्तर पर प्रतिवर्ष कम-से-कम दो बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित करने की सिफारिश की है। ये सिफारिशें हैं, सभी संस्थानों पर लागू एकसमान वैधानिक अनिवार्यता नहीं।

    यहाँ एक और गंभीर प्रश्न उठता है—क्या मॉक ड्रिल वास्तव में हमारी तैयारियों की परीक्षा ले रही हैं या केवल औपचारिक आयोजन बनकर रह गई हैं? किसी अस्पताल में अग्निकांड, विद्यालय में भूकंप, औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक रिसाव या शहर में अचानक आई बाढ़ की स्थिति में सबसे पहले कौन प्रतिक्रिया देगा, कितने समय में बचाव दल पहुँचेगा और संवेदनशील नागरिकों को कैसे सुरक्षित निकाला जाएगा—इन प्रश्नों का उत्तर वास्तविक अभ्यास से ही मिल सकता है।

    प्रत्येक मॉक ड्रिल में पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय निकायों और सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। अभ्यास के बाद प्रतिक्रिया समय, संचार व्यवस्था, उपकरणों की कार्यशीलता, सुरक्षित निकासी और प्राथमिक उपचार की क्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए। कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना और जवाबदेही निर्धारित करना भी उतना ही आवश्यक है।

    ग्रामीण भारत में ग्राम पंचायतों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 20 राज्यों के 81 आपदा-संवेदनशील जिलों में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से सामुदायिक आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत करने के लिए ₹507.37 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की। यह पहल स्थानीय संस्थाओं को केवल राहत वितरण तक सीमित रखने के बजाय जोखिम पहचान, जनजागरूकता, प्रशिक्षण और पूर्व तैयारी में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

     

    आने वाले वर्षों में वित्तीय प्रावधान और बढ़ने की संभावना है। सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026–31 के लिए राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष हेतु ₹2,04,401 करोड़ और राष्ट्रीय स्तर के कोष के लिए ₹79,406 करोड़ की अनुशंसा की है। लेकिन बढ़ता बजट तभी सार्थक होगा, जब उसका उपयोग वैज्ञानिक जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी, सुरक्षित अवसंरचना, स्थानीय प्रशिक्षण और नियमित मॉक ड्रिल जैसे परिणामोन्मुख कार्यों में दिखाई दे।

     

    भारत को अब ‘आवंटन से परिणाम’ और ‘राहत से जोखिम न्यूनीकरण’ की दिशा में निर्णायक परिवर्तन करना होगा। प्रत्येक जिले में अद्यतन बहु-आपदा प्रबंधन योजना, स्थानीय जोखिम मानचित्र, आपातकालीन संसाधनों की डिजिटल सूची, प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवक और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तैयारी संकेतक विकसित किए जाने चाहिए। विद्यालयों, अस्पतालों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और शहरी निकायों की तैयारियों का नियमित परीक्षण भी आवश्यक है।

    आपदा प्रबंधन पर होने वाले खर्च की सफलता केवल उपयोगिता प्रमाणपत्रों से नहीं, बल्कि बचाई गई जिंदगियों, कम हुई आर्थिक क्षति, घटे प्रतिक्रिया समय और मजबूत हुई सामुदायिक क्षमता से मापी जानी चाहिए।

    भारत को अब यह तय करना होगा कि आपदा प्रबंधन की सफलता का पैमाना तबाही के बाद बाँटी गई राहत राशि होगी या आपदा आने से पहले बचाई गई जिंदगियाँ। क्योंकि सच्चा आपदा प्रबंधन वही है, जिसमें राहत की आवश्यकता कम पड़े और नागरिकों की सुरक्षा अधिक सुनिश्चित हो।

    — डॉ. राकेश कुमार भट्ट
    आपदा जोखिम प्रबंधन, पर्यावरण एवं सामाजिक विकास विशेषज्ञ

  • “सपा के नेता हो गइला का?” से अखिलेश यादव तक: गोरखपुर में रवि किशन के तंज की सियासी गूंज और जलभराव की स्थायी कहानी

    “सपा के नेता हो गइला का?” से अखिलेश यादव तक: गोरखपुर में रवि किशन के तंज की सियासी गूंज और जलभराव की स्थायी कहानी

    गोरखपुर ब्यूरो , निष्पक्ष टुडे

    रवि किशन के तंज के बाद अखिलेश यादव से मिले विश्वजीत त्रिपाठी, सपा के साथ काम करने की घोषणा


    गोरखपुर। गोरखपुर में भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात और सपा के पक्ष में काम करने के ऐलान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। 16 अक्टूबर को सामने आई तस्वीरों के बाद 17 अक्टूबर की रिपोर्टों में उनके भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम ने सांसद रवि किशन के पुराने तंज—“सपा के नेता हो गइला का?”—को फिर चर्चा में ला दिया है। जिस सवाल को उस समय राजनीतिक कटाक्ष माना गया था, वही अब दल-बदल की खबरों के बीच सियासी संकेत की तरह देखा जा रहा है।

    “सपा के नेता हो गइला का?”: जलभराव से शुरू हुई बात, सियासी बदलाव तक पहुंची

    भारी बारिश के बाद बेतियाहाता वार्ड :- 

    जलभराव की समस्या को लेकर पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने रवि किशन से फोन पर बात की थी। वायरल बातचीत में सांसद ने उनसे पूछा था कि क्या वह सपा में शामिल हो गए हैं। त्रिपाठी ने जवाब दिया था कि जलभराव की समस्या उठाने का मतलब सपा में शामिल होना नहीं है।

    अब अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद वही बातचीत नए राजनीतिक संदर्भ में देखी जा रही है।

    पहले सपा से जुड़े रहे और सपा के टिकट पर पार्षद चुने गए थे। बाद में वह भाजपा में शामिल हुए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने भाजपा में कार्यकर्ताओं के सम्मान, संगठन और स्थानीय समस्याओं को लेकर सवाल उठाए हैं। सहजनवां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावित इच्छा की चर्चा भी है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रवि किशन का सवाल बना सियासी आईना, लेकिन जलभराव का जवाब अब भी बाकी

    दल-बदल और राजनीतिक बयानबाजी के बीच गोरखपुर के नागरिकों की प्राथमिक चिंता अब भी जलभराव और जलनिकासी की समस्या है।

     

    जनप्रतिनिधि यदि अपने क्षेत्र की समस्या उठाता है, तो उसे राजनीतिक निष्ठा से जोड़ने के बजाय समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए। सवाल पूछना किसी दल की सदस्यता का प्रमाण नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की जवाबदेही का हिस्सा है।

    रवि किशन का तंज राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया, लेकिन उस बातचीत की मूल वजह—जलभराव—आज भी गोरखपुर की जमीनी समस्या बनी हुई है। दल बदलते हैं, बयान बदलते हैं और सियासी समीकरण बदलते हैं; मगर बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी और नागरिकों की परेशानी जस की तस रहती है।

    निष्पक्ष टुडे का सवाल: “सपा के नेता हो गइला का?” का जवाब तो सियासत ने दे दिया, लेकिन हर बारिश में जलभराव से जनता को कब राहत मिलेगी?

    निष्पक्ष टुडे — खबर भी, कटाक्ष भी, सवाल भी, जवाबदेही भी।

  • मेरठ हत्याकांड: रिश्तों का कत्ल, साजिश का खौफनाक अंजाम!

    मेरठ हत्याकांड: रिश्तों का कत्ल, साजिश का खौफनाक अंजाम!

    अनुराग त्रिपाठी /मेरठ ब्यूरो ,निष्पक्ष टुडे :-

    पति की हत्या के मामले में रविता और अमरदीप को फांसी की सजा — अदालत का सख्त संदेश, अपराध करके कानून से बचना आसान नहीं!


    मेरठ, उत्तर प्रदेश। रिश्तों के भरोसे को तार-तार करने वाले मेरठ के अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। पति की हत्या की साजिश रचने के मामले में पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई गई है। यह फैसला केवल एक आपराधिक मामले का घटनाक्रम नहीं, बल्कि समाज, पारिवारिक रिश्तों और कानून के प्रति हमारी जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।

    आखिर क्या था पूरा मामला?

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, 12 अप्रैल 2025 को मेरठ में अमित कश्यप की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि उनकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप ने मिलकर पहले अमित की गला दबाकर हत्या की और फिर घटना को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की।

    बताया गया कि अमित के बिस्तर पर एक कोबरा सांप छोड़ा गया था। जांच के दौरान कथित तौर पर यह बात सामने आई कि सांप के दांत निकाल दिए गए थे और वह इस तरह मौत का कारण नहीं बन सकता था। इस घटनाक्रम ने मामले को और भी गंभीर बना दिया।

    अदालत में सजा सुनाए जाने का क्षण :-

    बताया जा रहा है कि फैसला सुनाए जाने से पहले अदालत में दोनों दोषियों से उनकी सजा के संबंध में बात की गई। रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों की देखभाल की चिंता जताई, जबकि अमरदीप ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का सवाल उठाया।

    लेकिन अदालत का फैसला अपराध की गंभीरता और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर सामने आया। एडीजे-12 जयवीर सिंह नागर की अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।

    हालांकि, मृत्युदंड सुनाए जाने और उसके अंतिम क्रियान्वयन में अंतर है। इस सजा पर लागू कानूनी प्रक्रिया और उच्च न्यायालय की पुष्टि की स्थिति की आधिकारिक जानकारी के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

     इस घटना से जुड़े 5 महत्वपूर्ण बिंदु :-

    1. घटना की तारीख: 12 अप्रैल 2025।
    2. मृतक: अमित कश्यप, मेरठ।
    3. आरोपी: पत्नी रविता और अमरदीप।
    4. आरोप का स्वरूप: हत्या करके उसे सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कथित कोशिश।
    5. अदालती फैसला: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई।

    जनता के लिए जागरूकता संदेश :-

    यह मामला समाज के सामने एक जरूरी सवाल रखता है—क्या किसी व्यक्तिगत रिश्ते, विवाद या भावनात्मक तनाव के कारण किसी की जिंदगी छीनने का अधिकार किसी को मिल सकता है? जवाब स्पष्ट है: नहीं!

    रिश्तों में विवाद हो, वैवाहिक तनाव हो या प्रेम संबंधों को लेकर कोई कठिन परिस्थिति—हिंसा और हत्या कभी समाधान नहीं हो सकते। ऐसी परिस्थितियों में परिवार के जिम्मेदार लोगों, काउंसलर, कानूनी सलाहकार या संबंधित अधिकारियों की मदद लेना जरूरी है।

    बच्चों का भविष्य केवल आर्थिक सहायता से नहीं, बल्कि सुरक्षित पारिवारिक वातावरण, भावनात्मक सहारे और सही मार्गदर्शन से भी बनता है। अपराध का सबसे गहरा असर अक्सर उन मासूम बच्चों पर पड़ता है, जिनका उस अपराध में कोई दोष नहीं होता।

     संदेश :-समाज को

    याद रखिए—अपराध के बाद परिवार की चिंता जताना, अपने कर्तव्य से बचने का रास्ता नहीं बन सकता। कानून सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर फैसला करता है।

    रिश्ते विश्वास से बनते हैं, साजिश से नहीं। विवाद का समाधान संवाद है, हिंसा नहीं। और न्याय का रास्ता कानून से होकर गुजरता है।

    मेरठ के इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रखना जरूरी है। समाज को चाहिए कि वह इस घटना से सबक ले, बच्चों के हितों की रक्षा के प्रति जागरूक रहे और किसी भी विवाद में कानून को अपने हाथ में लेने से बचे।

    निष्पक्ष टुडे — खबर वही, जो समाज को जागरूक बनाए।

  • वोटर लिस्ट, संस्थागत जांच और जनता का भरोसा

    वोटर लिस्ट, संस्थागत जांच और जनता का भरोसा

    भारत में चुनाव आयोग (ECI) और उसके ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को लेकर चल रही बहस अब सिर्फ़ वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की संख्या तक सीमित नहीं है। यह इस बारे में भी है कि वोटर लिस्ट कैसे बनाई, जांची और सुधारी जाती है, और चुनाव आयोग के भीतर फ़ैसले लेने का अधिकार किसके पास है।

    SIR की प्रक्रिया सटीक वोटर लिस्ट और सभी को शामिल करने वाले वोटर रजिस्ट्रेशन के बीच संतुलन बनाने के महत्व को उजागर करती है। बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर जानकारी लेना, कमज़ोर वर्गों के लिए स्पेशल हेल्प डेस्क, बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) की मदद और ऑनलाइन डॉक्यूमेंट जमा करने जैसे उपाय इस प्रक्रिया को ज़्यादा आसान बनाने के लिए किए गए हैं। 24 जून 2025 और अक्टूबर 2026 के बीच 2.37 करोड़ ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) वोटर जुड़ने के साथ, यह पक्का करना कि हर योग्य नागरिक रजिस्टर कर सके और अपनी जानकारी वेरिफ़ाई कर सके, चुनावी भागीदारी के लिए बहुत ज़रूरी है।

    इसलिए, यह समझना ज़रूरी है कि SIR असल में क्या है, इसे क्यों शुरू किया गया और असली वोटरों को बाहर होने से बचाने के लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

    * SIR क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?

    ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ वोटर लिस्ट को वेरिफ़ाई और अपडेट करने की एक विस्तृत प्रक्रिया है। आम ‘समरी रिविज़न’ के उलट, इसमें मौजूदा एंट्रीज़ की गहरी जांच-पड़ताल शामिल होती है, जिसमें यह देखना भी शामिल है कि वोटर ज़िंदा हैं या नहीं, बताए गए पते पर आम तौर पर रहते हैं या नहीं, और उनका नाम एक से ज़्यादा बार तो दर्ज नहीं है।

    इसका कानूनी आधार संविधान का अनुच्छेद 324 और ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 21(3) है, जो ECI को कारण बताते हुए किसी भी समय स्पेशल रिविज़न का आदेश देने की इजाज़त देती है।

    इसकी ज़रूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि वोटर लिस्ट लगातार बदलती रहती है। लोग मरते हैं, दूसरी जगह जाते हैं, चुनाव क्षेत्र बदलते हैं और कभी-कभी एक से ज़्यादा बार लिस्ट में आ जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फ़ैसले में कहा गया था कि बिहार में पिछली बार ‘इंटेंसिव रिविज़न’ 2003 में हुआ था, जबकि उसके बाद के दो दशकों में तेज़ी से शहरीकरण, बड़े पैमाने पर पलायन, मौतों की जानकारी न मिलना और एंट्रीज़ का डुप्लीकेशन हुआ। कोर्ट ने माना कि SIR का मकसद वोटर लिस्ट की सटीकता और ईमानदारी बनाए रखना और निष्पक्ष चुनाव कराना था।
    बिहार में SIR (स्पेशल समरी रिविज़न) 24 जून 2025 को शुरू हुआ। एक समय पर, 98.01% वोटर्स को कवर कर लिया गया था, और 7.17 करोड़ एन्यूमरेशन फ़ॉर्म (कुल का 90.89%) मिल गए थे और उन्हें डिजिटाइज़ कर लिया गया था। इस प्रक्रिया में लगभग 20 लाख मृत वोटर्स, 28 लाख स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए वोटर्स, 7 लाख डुप्लिकेट एनरोलमेंट, 1 ​​लाख ऐसे वोटर्स जिनका पता नहीं चल सका और लगभग 15 लाख ऐसे फ़ॉर्म जिनकी जानकारी नहीं मिली, उनकी पहचान की गई।

    ये आंकड़े बताते हैं कि वोटर डेटाबेस की समय-समय पर गहन जांच क्यों ज़रूरी है। लेकिन सटीकता के साथ-साथ सभी को शामिल करना भी ज़रूरी है।

    * यह प्रक्रिया वोटर्स की सुरक्षा कैसे करती है?

    ECI ने बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा किया, और बाकी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरा चरण शुरू किया।

    अनमैपिंग या लॉजिकल गड़बड़ियों की वजह से जिन वोटर्स को नोटिस मिलते हैं, उनके लिए बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) घर-घर जाकर दस्तावेज़ इकट्ठा करते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड करते हैं, जिससे उन्हें ERO या AERO ऑफिस जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। सुनवाई जहाँ तक संभव हो ऑनलाइन होती है, और वोटर्स अपनी तरफ़ से किसी वयस्क परिवार के सदस्य को अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं।

    ज़िला चुनाव अधिकारियों ने मज़दूरों, नाइट-शेल्टर में रहने वालों और गरीब नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाए हैं। गोवा में, BLO के संपर्क अभियान से पहचाने गए 97 छूटे हुए वोटर्स में से 81 को फ़ॉर्म 6 जमा करने और अपना रजिस्ट्रेशन बहाल करने में मदद मिली।

    फ़ील्ड में भागीदारी का स्तर भी काफ़ी बड़ा है। बिहार ने 77,895 मौजूदा BLOs, 20,603 नए नियुक्त BLOs और बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और कमज़ोर नागरिकों की मदद करने वाले 4 लाख से ज़्यादा वॉलंटियर्स को काम पर लगाया। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने वोटर लिस्ट की साथ-साथ जांच करने के लिए लगभग 1.56 लाख बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) नियुक्त किए। पूरे देश में, 20 लाख से ज़्यादा BLAs रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का ऑडिट करते हैं, जबकि चुनाव के दिन पोलिंग स्टेशनों पर 100% वेबकास्टिंग की जाती है।

    30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से ज़्यादा ड्राफ़्ट डिलीशन (हटाए जाने वाले नामों) का आंकड़ा विवाद का मुख्य कारण बन गया है। लेकिन ड्राफ्ट डिलीशन में मृत, प्रवासी, डुप्लिकेट और अपुष्ट प्रविष्टियों जैसी श्रेणियां शामिल हैं। इसलिए ड्राफ्ट डिलीशन स्वतः ही मताधिकार से वंचित करने के समान नहीं है।

    * प्रक्रिया, युवाओं का नामांकन और कोर्ट का नया सवाल:

    SIR टाइमलाइन में 24 जून 2025 का शुरुआती आदेश, 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 का शेड्यूल और 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 का शेड्यूल शामिल था। ECI ने कहा था कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से इन आदेशों पर सहमति जताई थी।

    सुप्रीम कोर्ट की 26 मई 2026 और 27 मई 2026 की कार्यवाही ने बिहार SIR फ्रेमवर्क के कानूनी आधार को सही ठहराया।

    साथ ही, 24 जून 2025 और अक्टूबर 2026 के बीच, 2.37 करोड़ GenZ वोटर जोड़े गए – यानी हर महीने लगभग 16 लाख, या हर दिन 50,000। दिल्ली में दावे और आपत्तियों की समय-सीमा 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई और इनका निपटारा 30 नवंबर 2026 तक किया जाना था; वहीं महाराष्ट्र में यह समय-सीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई और निपटारा 10 नवंबर 2026 तक होना था।

    * प्रशासनिक और तकनीकी जांच:

    कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र डेप्युटेशन पर काम कर रहे एक अधिकारी से संबंधित था और इसका आयोग की नीतिगत मामलों या IT डिवीज़न से कोई लेना-देना नहीं था। अधिकारी द्वारा जारी काम के बंटवारे से जुड़े आदेशों को दो आयुक्तों के निर्देशों के बाद लागू नहीं किया गया। डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर द्वारा IT डिवीज़न की देखरेख का अधिकार कभी वापस नहीं लिया गया।

    एक सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति को, जिसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल था, ECINet की समीक्षा करने का काम सौंपा गया था।

    EVMs स्टैंडअलोन यूनिट होती हैं जो किसी भी नेटवर्क से जुड़ी नहीं होती हैं। सुरक्षा उपायों में फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC), उम्मीदवार के एजेंटों की मौजूदगी में मशीन रैंडमाइजेशन के दो चरण, चुनाव से पहले अनिवार्य मॉक पोल, बर्न मेमोरी का उम्मीदवार द्वारा वेरिफिकेशन, और हर विधानसभा क्षेत्र में रैंडम तरीके से चुने गए पांच पोलिंग स्टेशनों पर VVPAT पर्ची का अनिवार्य मिलान शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2024 में ADR बनाम ECI मामले में इन सुरक्षा उपायों को फिर से दोहराया।

    * सटीकता, समावेश और संस्थागत भरोसा:

    SIR ज़रूरी है क्योंकि मौत, पलायन, डुप्लीकेशन और निवास स्थान में बदलावों को समय-समय पर शामिल किए बिना वोटर लिस्ट सटीक नहीं रह सकती। लेकिन गहन संशोधन से एक संबंधित स्थिति भी पैदा होती है।
    ज़िम्मेदारी: असली वोटरों के पास अपनी पात्रता साबित करने और गलतियों पर सवाल उठाने के आसान तरीके होने चाहिए।

    13 करोड़ नामों को हटाने का ड्राफ्ट, GenZ के 2.37 करोड़ नए वोटर, 20 लाख से ज़्यादा BLAs, 100% वेबकास्टिंग, BLO वेरिफिकेशन, तकनीकी सुरक्षा उपाय और न्यायिक निगरानी इस पूरी प्रक्रिया के बड़े पैमाने को दिखाते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की हालिया कार्यवाही से एक और बात सीखने को मिलती है। SIR प्रक्रिया की वैधता और उसके तहत लिए गए खास प्रशासनिक फैसलों की वैधता, दोनों अलग-अलग सवाल हैं। कोर्ट पहले ही SIR कराने की ECI की शक्ति की जांच कर चुका है; अब वह खास फैसलों और बदले हुए फॉर्म 6 से जुड़े आरोपों की जांच कर रहा है।

    आखिरकार, चुनावी लिस्ट में सुधार की विश्वसनीयता इस समीकरण के दोनों पहलुओं पर निर्भर करती है: सही वोटर लिस्ट और गलतियों को सुधारने की असरदार प्रक्रिया।

  • राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी की प्रतिक्रिया राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी ने जताई नाराजगी

    राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी की प्रतिक्रिया राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी ने जताई नाराजगी

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों पर कार्रवाई की मांग; कार्रवाई न होने पर लखनऊ में लोकतांत्रिक घेराव की चेतावनी


    राम नगीना साहनी जी के साथ हुई घटना को लेकर निषाद समाज और निषाद पार्टी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद के कथन का समर्थन करते हुए कहा गया है कि उनके साथ हुई घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

    क्या कहा गया?

    बयान में आरोप लगाया गया है कि इस घटना में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग शामिल थे। इसे लेकर समाजवादी पार्टी के राजनीतिक व्यवहार और सोच पर सवाल उठाए गए हैं।

    बयान में यह भी कहा गया है कि इस घटना से यह चिंता पैदा होती है कि यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है, तो निषाद समाज के साथ उसका व्यवहार कैसा होगा।

    अखिलेश यादव से स्पष्ट रुख की मांग

    निषाद पार्टी की ओर से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से इस मामले पर स्पष्ट और आधिकारिक रुख सामने रखने की मांग की गई है।

    साथ ही, घटना के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
    लखनऊ कार्यालय के घेराव की चेतावनी
    बयान में कहा गया है कि यदि मामले में स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती है, तो निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद के नेतृत्व में लोकतांत्रिक तरीके से समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

    निषाद समाज के सम्मान का मुद्दा –

    बयान में स्पष्ट किया गया है कि निषाद समाज के सम्मान और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार के अन्याय को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    अब सवाल यह है कि राम नगीना साहनी प्रकरण पर समाजवादी पार्टी नेतृत्व की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है?