बेटी की बिदाई का दुख झेलना पिता के लिए होता है दुखदायी: अतुल ‘पारासर’

              ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
बड़हलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज स्त्री के अनेको रूप है। एक पिता का अपने पुत्री का प्यार उस समय पता चलता है जब बेटी व्याह के बाद अपने घर को जाती है। उस समय पिता को अपनी पुत्री को विदा करना बहुत ही कष्टदायी होता है। यह बाते अतुल परासर महाराज ने पिड़हनी चौराहे पर श्रीराम कथा का रसपान कराते हुए श्रद्धालुओ से कही। उन्होंने जनकपुर में माता सीता की विदाई का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उस समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं, जनकपुरी का वह दृश्य, जहां राजा जनक अपनी लाड़ली पुत्री को विदा करते हैं, हृदय को भाव-विभोर कर देने वाला था। आचार्य अतुल ‘पाराशर’ ने कहा कि यह केवल एक पुत्री की विदाई नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार और त्याग की परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
समाजसेवी सुभाषपा के राष्ट्रीय युवा प्रभारी शिखर गुप्ता, पूर्व प्रमुख राजबहादुर सिंह, बसपा नेता डीएन पान्डेय उर्फ चंचल बाबा, जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी पंकज यादव, ग्राम प्रधान आदर्श शाही आदि ने व्यास पीठ की आरती कर कथा का सुभारंभ कराया। सुभाषपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जहा कथा होता है वहा कि धरती पवित्र हो जाती है। सनातन धर्म में कथा का बहुत ही महत्व है। उन्होंने कथावाचक अतुल पारासर को कथा के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान राम आशीष पान्डेय, राममनोहर पान्डेय, अंकित तिवारी, नितेंद्र तिवारी, शिवदत्त तिवारी, मनीष यादव, राघवेन्द्र मिश्र आदि लोग मौजूद थे।

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