मां की दुआ, पुलिस की मेहनत… 13 वर्षीय बेटे की सकुशल वापसी ने पूरे परिवार की लौटा दी खुशियां”

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“मां की दुआ, पुलिस की मेहनत… 13 वर्षीय बेटे की सकुशल वापसी ने पूरे परिवार की लौटा दी खुशियां”

सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग, चौकी प्रभारी आनंद उपाध्याय की सूझबूझ और लगातार तलाश ने कुछ ही घंटों में मिलाया बेटे को परिजनों से

गोरखपुर। घर से लापता हुए 13 वर्षीय बेटे के गायब होने के बाद एक परिवार की दुनिया जैसे थम गई थी। मां की आंखों में आंसू थे, पिता हर आने-जाने वाले से बेटे का पता पूछ रहे थे और हर गुजरता पल बेचैनी बढ़ा रहा था। लेकिन राजघाट पुलिस की संवेदनशीलता और चौकी प्रभारी आनंद उपाध्याय की सक्रियता ने इस परिवार की टूटती उम्मीदों को फिर से जिंदगी दे दी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक नगर निमिष पाटिल के निर्देशन, क्षेत्राधिकारी कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी के पर्यवेक्षण तथा थाना प्रभारी राजघाट गौरव कुमार वर्मा के नेतृत्व में चौकी प्रभारी रहमत नगर उपनिरीक्षक आनंद उपाध्याय ने बिना समय गंवाए बच्चे की तलाश शुरू कर दी। उन्होंने सबसे पहले परिजनों से विस्तार से बातचीत की, फिर इलाके के सीसीटीवी कैमरों की एक-एक फुटेज खंगाली। इसी दौरान बच्चा निजामपुर और डोमिनगढ़ की ओर जाता दिखाई दिया।

यहीं से जांच ने नई दिशा पकड़ी। आनंद उपाध्याय ने परिवार से रिश्तेदारों की जानकारी जुटाई तो पता चला कि बच्चे का ननिहाल जगतबेला में है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तत्काल वहां पहुंची, जहां बच्चा सकुशल मिला। उसे सुरक्षित थाना लाकर परिजनों की मौजूदगी में काउंसलिंग की गई और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

बेटे को सामने देखकर मां उसे गले लगाकर रो पड़ी, जबकि पिता और अन्य परिजनों ने राहत की सांस ली। परिवार ने राजघाट पुलिस और विशेष रूप से उपनिरीक्षक आनंद उपाध्याय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पुलिस इतनी तत्परता न दिखाती, तो उनकी चिंता और बढ़ सकती थी।

इस अभियान में कांस्टेबल संजीत शाह और कांस्टेबल मो. फहीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कार्रवाई केवल एक गुमशुदा बच्चे की बरामदगी नहीं, बल्कि पुलिस की मानवीय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण है जिसने एक परिवार की खुशियां फिर से लौटा दीं।

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