अंग्रेज़ी विभाग में रामचरितमानस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भोजपुरी लोकगीत और जलवायु परिवर्तन पर होगा शोध

अंग्रेज़ी विभाग में रामचरितमानस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भोजपुरी लोकगीत और जलवायु परिवर्तन पर होगा शोध
एनईपी के अंतःविषयक और समग्र शिक्षा के सिद्धांत के अनुरूप होगा शोध कार्य
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में शोधार्थियों ने एनईपी के अंतःविषयक और समग्र शिक्षा के सिद्धांत के अनुरूप रामचरितमानस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भोजपुरी लोकगीत और जलवायु परिवर्तन पर शोध कार्य करना प्रारंभ किया है . अंग्रेजी विभाग ने विभागीय शोध समिति की बैठक में विभिन्न शोध प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन शोध विषयों में न केवल साहित्यिक कृतियों का विश्लेषण किया जा रहा है, बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं पर भी गहराई से अध्ययन किया जा रहा है।
शोधार्थी विष्णु मिश्रा का रामचरितमानस के समाज की मुख्य धारा से वंचित पात्रों जैसे शबरी, केवट, जामवंत, अंगद, सुग्रीव, जटायु आदि पर एक शोध प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है। शोधार्थी ने रामचरितमानस में वर्णित घटनाओं के माध्यम से यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि रामचरितमानस में सभी वर्गों को समानता से दिखाया गया है। इस अध्ययन में अरण्यकांड और अन्य कांडों से उदाहरण लिए गए हैं, जिससे समाज में वर्गों के धुंधले होने का संकेत मिलता है।
इसी प्रकार, शोधार्थी विकास गुप्ता ने साइबरपंक उपन्यासों में वर्चुअल रियलिटी और साइबर स्पेस की अवधारणाओं पर शोध कार्य आरंभ किया है। उनका शोध कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आभासी वास्तविकता के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा।
भोजपुरी लोकगीतों के अध्ययन पर खुशबू जायसवाल द्वारा किए जा रहे शोध में धार्मिक गीतों (जैसे छठ गीत, माता के गीत, शिव के गीत,आदि), विवाह के विभिन्न अवसरों के गीत (सगुन, सिंदूरदान, विदाई, आदि), भारतीय संस्कारों के गीत (सोहर, नामकरण, जनेऊ आदि), त्योहारों के गीत (होली, नागपंचमी, आदि), नारीवाद और प्रकृति पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस शोध का उद्देश्य न केवल इन लोकगीतों की सांस्कृतिक महत्ता को स्थापित करना है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धरोहर को संरक्षित रखना भी है।*
इसके अलावा, दीपिका त्रिपाठी जलवायु परिवर्तन और आधुनिक डिस्टोपियन उपन्यासों पर शोध कर रही हैं, जिसमें वह जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं और उनके साहित्यिक प्रतिबिंबों का अध्ययन कर रही हैं।
अन्य शोधार्थियों में प्रतिभा गुप्ता ,दिव्या राय, कीर्ति श्रीवास्तव और रीतू यादव भी शामिल हैं, जो समकालीन साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर शोध कर रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, इन शोध विषयों का चयन किया गया है, जो न केवल पारंपरिक साहित्यिक अध्ययन तक सीमित हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों की व्यापक समझ भी प्रदान करते हैं। एनईपी के अंतःविषयक और समग्र शिक्षा के सिद्धांत के अनुरूप, अंग्रेजी विभाग के शोधार्थी रामचरितमानस से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जलवायु परिवर्तन तक के विविध और समकालीन विषयों पर शोध कर रहे हैं, जो कि इस नीति की व्यापक दृष्टि के अनुरूप है।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने कहा कि विभाग के शोधार्थियों द्वारा चुने गए इन विषयों से यह स्पष्ट है कि हमारे विद्यार्थी न केवल पारंपरिक साहित्यिक अध्ययन तक सीमित हैं, बल्कि समकालीन मुद्दों पर भी गहराई से अध्ययन कर रहे हैं। यह हमारे विभाग की प्रगति और समर्पण का प्रतीक है
अंग्रेज़ी विभाग के शोधार्थियों द्वारा रामचरितमानस, भोजपुरी लोकगीत, वर्चुअल रियलिटी, और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर किया जा रहा शोध सराहनीय है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अंतःविषयक और समग्र शिक्षा की अवधारणा को साकार करता है। अंग्रेज़ी विभाग के सभी शोधार्थियों को बधाई

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *