Author: Shishir Srivastava
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सुपर स्टार अभिनेता व सांसद रवि किशन ने किया विनायक शरण सिनेमा की फिल्म का प्रीमियर
गोरखपुर। बीते शाम एक भव्य समारोह में विनायक शरण सिनेमा की फिल्म का प्रीमियर फिल्म सुपर स्टार व सदर सांसद रवि किशन ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विनायक की फिल्में यथार्थवादी हैं जहां महान फिल्म मेकर सत्यजीत रे की झलक दिखती है। उन्होंने विनायक को शुभकामना देते हुए कहा कि मेरी हार्दिक इच्छा है कि मुझे तुम डायरेक्ट करो और अभिनय करूं। साथ ही उन्होंने विनायक को सलाह दी कि तुम्हारी गायिकी में गजब की खनक है, लिहाजा तुम गायन के क्षेत्र में अर्जित सिंह की कमी को भर सकते हो। उदीयमान कलाकार व निर्देशक विनायक शहर प्रख्यात रेटिनल सर्जन डा दुर्गेश श्रीवास्तव और नेत्र चिकित्सक डा पंखुरी श्रीवास्तव के सुपुत्र हैं। उक्त समारोह में तीन लघु फिल्मों को दिखाया गया। जिसमें पहले “हिडन हीरो” “एहसास” और” गुरु” फिल्म दिखायी गयी। हिडेन हीरो के मुख्य कलाकार विनायक शरण, संजय रैना, सुनिशा, हिमांशु मिश्रा, बृजेश मिश्रा, शैलेंद्र किशोर रुद्राक्ष चंद्र अर्णव अनुराग डॉक्टर पंखुड़ी, डॉक्टर दुर्गेश, और शिवांगी थी। कलाकारों ने अपने अभिनय से किरदारों में जान फूक दी। फिल्म में गानों का लेखन कंपोजिशन व गायन अभिनय विनायक शरण ने किया। साथ ही निर्देशन पार्थ मिश्रा द्वारा किया है। फिल्म में माता पिता व पुत्र के बीच के संबंधों को दिखाया गया है। दूसरी फिल्म गुरू में एक गुरु शिष्य के जीवन को कैसे बदल देता है यहां दिखाया गया है। फिल्म एहसास में आज की परिस्थितियों में पुत्र अपने संघर्षों और विफलताओं को मां-बाप को बताकर उन्हें कोई तनाव नहीं देना चाहता है। उनके प्रति अपने प्यार को बिना कहे की प्रस्तुत करता है। जबकि मां-बाप पुत्र को उसकी सफलताओं या असफलताओं के आधार पर नहीं बल्कि हर परिस्थिति में उसे प्यार करते हैं। फिल्म को देखकर सांसद रवि किशन ने फिल्मों की समीक्षात्मक मुल्यांकन करते हुए फिल्मों के विषय, लेखन, अभिनय, प्रस्तुतीकरण व निर्देशन को अप्रत्याशित बताते हुए जबरदस्त सराहना की। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों की फिल्म देखकर सभी की आंखें भर आई और सबने फिल्म की भूरि भूरि प्रशंसा की। मंच संचालन दिप्ती व अनुराग ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वरिष्ठ पत्रकार सुजीत पाण्डेय, राकेश श्रीवास्तव, डा नवनीत जयपुरियार, वागीश चंद श्रीवास्तव आदि लोग रहे।
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बालजागृति संस्थान द्वारा 26वां समर कैंप 19 मई से प्रारंभ
गोरखपुर। बाल जागृति संस्थान का 26वां समर कैंप दिनांक 19 मई दिन मंगलवार से प्रारंभ हो रहा है जिसमें बच्चों को कुशल प्रशिक्षकों द्वारा नृत्य, आर्ट ,सिलाई ,मंच संचालन , जूडो कराटे योग आदि की अनेक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा यह प्रशिक्षण तीन वर्ग में तथा प्रातः 8:00 से 10:00 बजे तक एवं सायं 4:00 से 6:00 बजे के बीच में दिया जाएगा 15 दिवसीय समर कैंप के समापन पर प्रशिक्षित बच्चों का मंचीय प्रदर्शन होगा तथा समस्त कार्यक्रम का संचालन कैंप में प्रशिक्षण पाए हुए बच्चों द्वारा होगा उनमें आकर्षण बढ़ एवं अधिक संख्या में प्रशिक्षण प्राप्त करके लाभ प्राप्त कर सकें इसलिए फॉर्म में ही लकी कूपन संलग्न है जिसके अंतर्गत 10 पुरस्कार समापन कार्यक्रम में दिया जाएगा उपरोक्त बात की जानकारी संस्था संस्थापक राजीव रस्तोगी ने दी यह समस्त कार्यक्रम बाल जागृति भवन इमामबाड़ा पश्चिम फाटक पर आयोजित होगा।
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श्री बालाजी मंदिर मे शनि जयंती के अवसर पर हवन एवं ब्राह्मण भोज
गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर, निकट सेल टैक्स ऑफिस तारामंडल गोरखपुर, पर आज बट सावित्री पूजा एवं शनि जयंती के अवसर पर बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी के मार्गदर्शन में हवन एवं ब्राह्मण भोज का आयोजन उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू की देखरेख में संपन्न हुआ।

जितेंद्र मणि तिवारी जी एवं अमितेशवर दुबे जी ने ने बताया ब्राह्मण भोज में शहर के सभी मंदिरों को निमंत्रण दिया गया था। सभी मंदिरों से अपार संतों का आगमन बालाजी दरबार में हुआ और प्रसाद ग्रहण किये। इनको अंग वस्त्र और दक्षिण प्रदान करके आशीर्वाद लिया गया।

हवन करने वालों में निखिल श्रीवास्तव सुशील सिंह मनीष मिश्रा अजय तिवारी कामाख्या नारायण सिंह अवनीश पांडे विश्वास सिंह सक्षम दुबे अन्य सभी लोगों ने सहयोग देकर इस महायोजना को सफल बनाया। बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के तरफ से सभी लोगों का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद।

“जय बालाजी सरकार की जय शनि देव।”
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एम्स गोरखपुर में प्रथम पोस्टग्रेजुएट एंडो-ट्रेनर स्किल लैब का उद्घाटन
गोरखपुर, 16 मई 2026। एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभाग में आज सर्जिकल शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि जुड़ गई, जब विभाग में प्रथम पोस्टग्रेजुएट एंडो-ट्रेनर स्किल लैब का उद्घाटन किया गया। इस अत्याधुनिक स्किल लैब का उद्घाटन संस्थान की कार्यकारी निदेशक रिटायर्ड मेजर जनरल प्रोफेसर डॉ. विभा दत्ता द्वारा मेल सर्जरी वार्ड में किया गया।
इस अवसर पर सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता सहित विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. धर्मेंद्र पिपल, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. मुकुल सिंह, डॉ. हरिकेश यादव, डॉ. रजनीश, डॉ. शहनवाज एवं डॉ. मनीष उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग से डॉ. शिखा सेठ तथा न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. नीरज कनौजिया सहित अन्य विभागों के संकाय सदस्य भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।
यह पीजी स्किल लैब सर्जिकल स्पेशियलिटी के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को लेप्रोस्कोपिक एवं मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान करेगी। एंडो-ट्रेनर आधारित इस सुविधा में छात्र वास्तविक ऑपरेशन से पूर्व सिमुलेशन के माध्यम से सर्जिकल उपकरणों का सुरक्षित एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। उद्घाटन समारोह के दौरान विद्यार्थियों को उपकरणों का लाइव प्रदर्शन दिखाया गया तथा एंडो-ट्रेनर पर अभ्यास भी कराया गया। सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के पीजी विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्किल लैब भविष्य के सर्जनों में हाथों की दक्षता, सटीकता, समन्वय तथा आत्मविश्वास विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे ऑपरेशन के दौरान संभावित त्रुटियों में कमी आएगी, मरीजों की सुरक्षा बेहतर होगी तथा प्रशिक्षुओं को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त होगा।
इसके अतिरिक्त यह सुविधा शोध, अकादमिक प्रशिक्षण तथा विभिन्न सर्जिकल शाखाओं के बीच समन्वित शिक्षण को भी बढ़ावा देगी। एंडो-ट्रेनर आधारित प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को बार-बार अभ्यास का अवसर मिलेगा, जिससे वे बिना मरीज पर जोखिम डाले जटिल प्रक्रियाओं में दक्षता प्राप्त कर सकेंगे।
एम्स गोरखपुर की यह पहल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है तथा भविष्य में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के क्षेत्र में बेहतर एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
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शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में गर्भस्थ शिशु के हृदय रोग का सफल उपचार, जन्म के बाद पूरी तरह स्वस्थ मिला बच्चा
•एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी कैंप ने गोरखपुर में आधुनिक चिकित्सा की नई उम्मीद जगाई
•डॉ. नीरज अवस्थी की देखरेख में 18 माह तक नियमित जांच और उपचार से मिली बड़ी सफलता
गोरखपुर।बाबा गुरु गोरखनाथ की पावन नगरी गोरखपुर अब आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रही है। शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में आयोजित एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी कैंप के माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चे के हृदय रोग का सफल उपचार शुरू किया गया। जन्म के बाद लगातार निगरानी और आधुनिक जांचों के परिणामस्वरूप आज बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।
पीपीगंज निवासी गर्भवती महिला प्रियंका सिंह के गर्भ में पल रहे शिशु की जांच के दौरान हृदय की मुख्य धमनी एओर्टिक आर्च में गंभीर समस्या का पता चला था। इस जानकारी के बाद परिजन अत्यंत चिंतित हो उठे। ऐसे कठिन समय में शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में उपलब्ध उन्नत सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श ने परिवार को नई आशा दी।
मामले की देखरेख *डॉ. नीरज अवस्थी* ने की, जो स्कॉट फोर्टिस इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी डायरेक्टर एवं *पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट* हैं। डॉ. अवस्थी वर्ष 2017 से प्रत्येक माह शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि नियमित निगरानी, समयबद्ध जांच और उचित उपचार से बच्चे को सुरक्षित रखा जा सकता है।
जन्म के बाद बच्चे की प्रत्येक छह माह पर *इकोकार्डियोग्राफी* द्वारा जांच की गई। वर्तमान में बच्चा लगभग 18 माह का हो चुका है। नवीनतम जांच में उसकी हृदय संबंधी समस्या लगभग पूरी तरह ठीक पाई गई है। यह सफलता न केवल परिजनों के लिए राहत का संदेश है, बल्कि पूर्वांचल में बाल हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के अनुसार डॉ. नीरज अवस्थी के मार्गदर्शन में *अब तक लगभग 650 बच्चों के हृदय का निःशुल्क ऑपरेशन* सफलतापूर्वक कराया जा चुका है और सभी बच्चे स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। यह सेवा उन परिवारों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है, जो बड़े शहरों में महंगा उपचार कराने में असमर्थ होते हैं।
अस्पताल में अब लेज़र तकनीक, रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और उन्नत कार्डियक सेवाओं जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थानीय मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गोरखपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े महानगरों की ओर जाने की मजबूरी काफी हद तक कम हो रही है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के माध्यम से अब ब्रेन स्ट्रोक, फेफड़ों और किडनी की जटिल समस्याओं, अत्यधिक ब्लीडिंग तथा ऐसे कैंसर जिनका ऑपरेशन संभव नहीं होता, उनके उपचार की सुविधा भी उपलब्ध है। यह चिकित्सा व्यवस्था गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में गर्भस्थ शिशु के हृदय रोग की पहचान, समय रहते उपचार की शुरुआत और जन्म के बाद बच्चे का स्वस्थ होना यह साबित करता है कि सही समय पर जांच, विशेषज्ञ चिकित्सक और आधुनिक तकनीक मिलकर असंभव प्रतीत होने वाली स्थितियों को भी आशा में बदल सकते हैं।
आज के कार्डियोलॉजी कैंप में कुल 86 बच्चों का परीक्षण हुआ। इतने बच्चे देखे गए जिसमें 19 बच्चों को हृदय के आपरेशन की आवश्यकता है जिनका निश्शुल्क आपरेशन कराने के लिए प्रयास चालू कर दिया गया है। अगले कुछ महीनों में इन सभी बच्चों का आपरेशन करा दिया जाएगा। -

महानगर को स्पोर्ट्स हब बनाने में जुटी योगी सरकार
*बेहतरीन सुविधाओं से संवरेंगी पूर्वांचल की खेल प्रतिभाएं*
*स्पोर्ट्स कॉलेज में मुहैया हुईं शानदार खेल सुविधाएं*
*मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की मिल चुकी है सौगात, ग्रामीण क्षेत्रों में मिनी स्टेडियम भी बने*
*रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम का भी हो रहा कायाकल्प*
*इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम से समृद्ध होगी गोरखपुर की उपलब्धियों की फेहरिस्त*
गोरखपुर, 14 मई। खेल सुविधाओं के ढांचागत विकास को सतत बढ़ावा देकर योगी सरकार गोरखपुर को स्पोर्ट्स हब बनाने में जुटी है। पिछले कुछ सालों में गोरखपुर के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में उल्लेखनीय सुदृढ़ता आई है और नव विकास हुआ है। यहां के वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में शानदार सुविधाएं मुहैया कराकर इसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है तो साथ ही राजेंद्र नगर के भाटी विहार में मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की सौगात मिल चुकी है। सहजनवा में मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिता की सुविधा दे रहा है तो रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम का तेजी से कायाकल्प जारी है। वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के जरिये रामगढ़ताल जल क्रीड़ा की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए नया मंच बन गया है। इन सबके बीच सबसे बड़ी उपलब्धि इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की जुड़ने जा रही है। इस स्टेडियम के बन जाने पर गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों के लिए भी तैयार हो जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गोरखपुर में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प इस स्तर पर किया जा रहा है कि आने वाले समय में यहां से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की नई श्रृंखला तैयार हो सके। इस सिलसिले में पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का पुनरोद्धार शुरू हुआ तो साथ ही कई नए खेल प्लेटफॉर्म का विकास हुआ। योगी सरकार ने वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज का करीब 10 करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार कराने के बाद यहां के एस्ट्रो टर्फ हॉकी मैदान पर अत्याधुनिक पैवेलियन के निर्माण के लिए 22.22 करोड़ रुपये की धनराशि दी। इस पैवेलियन का काम अंतिम दौर में है। योगी सरकार गोरखपुर में रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम का भी आधुनिकीकरण करा रही है। इस पर 47.42 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और वर्तमान में निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है।
सीएम योगी ने गोरखपुर को खेल क्षेत्र के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कई नए उपहार भी दिए हैं। इसके तहत जंगल कौड़िया में 10.16 करोड़ रुपये की लागत से महंत अवेद्यनाथ स्टेडियम बनवाया गया है। जबकि सहजनवा में 10.43 करोड़ रुपये से मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम का विकास किया गया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र के भाटी विहार (राजेंद्र नगर) में 5.96 करोड़ रुपये की लागत से मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। गुलरिहा क्षेत्र में भी करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से एक अन्य मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनना प्रस्तावित है जबकि राप्ती नगर विस्तार क्षेत्र में एक स्पोर्ट्स सिटी भी बननी है।
अब गोरखपुर की उपलब्धियों की फेहरिस्त में सबसे महत्वपूर्ण नाम इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का जुड़ने जा रहा है। करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले स्टेडियम का शिलान्यास 16 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इस स्टेडियमके निर्माण से न केवल पूर्वांचल के क्रिकेट प्रेमियों का सपना साकार होगा, बल्कि यहां अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन भी संभव हो सकेगा। यह स्टेडियम अत्याधुनिक सुविधाओं, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के पिच, पैवेलियन, फ्लड लाइट से लैस होकर इसे विश्व स्तरीय पहचान दिलाएगा।
*देश के लिए नए स्पोर्ट्स चैंपियंस तैयार करने की नर्सरी बनेगा
गोरखपुर : सांसद रविकिशन शुक्ल के मुताबिक गोरखपुर का स्पोर्ट्स हब बनना केवल खेल तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह प्रयास न केवल युवाओं को नशे और गलत रास्तों से दूर रखेगा, बल्कि देश के लिए नए ‘चैंपियंस’ तैयार करने की नर्सरी भी बनेगा। सांसद का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और बेहतर स्टेडियमों के कारण यहां खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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सिस्टम की बेवफाई और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का करारा जवाब “चौरी चौरा जन कल्याण भवन” का ऐलान
चौरी चौरा/गोरखपुर। वन भारत सिटीजन पार्टी (ओबीसी पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष काली शंकर यदुवंशी ने चौरी चौरा विधानसभा क्षेत्र के सथरी ग्राम पंचायत अंतर्गत केशवा पट्टी गांव में जनहित और सामाजिक कल्याण के लिए “चौरी चौरा जन कल्याण भवन” बनाने की घोषणा की है।

यह कदम उस समय उठाया गया जब गांव के गरीब बुजुर्ग श्री मुलई प्रजापति का मकान आग लगने से पूरी तरह जल गया। घटनास्थल का दौरा करने के बाद काली शंकर यदुवंशी ने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद सिस्टम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा स्पष्ट रूप से सामने आई है। काली शंकर यदुवंशी ने प्रजापति जी को आर्थिक सहायता दिया तथा उप जिलाधिकारी से वार्ता कर तत्काल इनको सरकारी मदद पहुंचाने की बात करी.
काली शंकर यदुवंशी ने घोषणा करते हुए कहा कि अब चौरी चौरा में एक व्यापक “जन अभियान” चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं और नीतियों के माध्यम से आवास दिलाना है, जिनके सिर पर आज भी सुरक्षित छत नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल एक भवन बनाना नहीं है, बल्कि हर जरूरतमंद को उसका अधिकार दिलाना है। जनता के लिए संघर्ष करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस अभियान के माध्यम से हम हर गरीब परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित छत दिलाने की दिशा में कार्य करेंगे।”
काली शंकर यदुवंशी ने कहा कि “चौरी चौरा जन कल्याण भवन” केवल एक भवन नहीं, बल्कि जनसेवा, सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक बनेगा।
वन भारत सिटीजन पार्टी (ओबीसी पार्टी) का यह कदम स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि पार्टी केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक सामाजिक परिवर्तन और चौरी चौरा के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
News Courtesy : काली शंकर यदुवंशी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, वन भारत सिटीजन पार्टी (ओबीसी पार्टी)।
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द्वितीय बड़े मंगल के पावन अवसर पर श्री बालाजी मंदिर में किया गया सुंदरकांड एवं भंडारें का आयोजन
ज्येष्ठ मास के द्वितीय बड़े मंगलवार को बालाजी मंदिर में सुंदरकांड एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

बड़ी संख्या में भक्त जनों ने प्रसाद ग्रहण किया। बालाजी सरकार सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उपाध्याक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू की देख रेख में यह आयोजन सफल हुआ। इसमें मुख्य रूप से राहुल तिवारी जी सहजानंद राय राजेश पांडे जी कामाख्या नारायण सिंह विश्ववि सिंह अवनीश पांडे रंजन बाबा सक्षम दुबे सुशील सिंह निखिल श्रीवास्तव कन्हैया तिवारी रंणनजय सिह का सहयोग मुख्य रूप से रहा इस कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद।
“बालाजी की कृपा हम सब पर सदा बनी रहे जय बालाजी सरकार की।”
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बरेली के डॉ सत्य पाल आर्य बने भारतीय वन सेवा अधिकारी: संघर्ष और अटूट संकल्प की मिसाल
बरेली। कठिन परिश्रम, लगन और वर्षों के संघर्ष का परिणाम आखिरकार बरेली के सत्य पाल आर्य को मिला। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 129 प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रेरणा
सत्य पाल आर्य मूल रूप से बरेली के निवासी हैं। एक साधारण परिवार से आने वाले सत्य पाल के पिता एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। उनके बड़े भाई वर्तमान में मेरठ में आईपीएस (IPS) अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। तैयारी के कठिन दौर में, वर्ष 2021 में उनकी माता का निधन हो गया। इस व्यक्तिगत क्षति ने उन्हें झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने अपनी माँ के सपनों को अपना संकल्प बनाकर हार नहीं मानी।
एक मेधावी शैक्षणिक सफर
सत्य पाल बचपन से ही मेधावी रहे हैं। उनकी सफलता की यात्रा उपलब्धियों से भरी है:
प्रारंभिक शिक्षा: जय नारायण सरस्वती विद्या मंदिर, बरेली से इंटरमीडिएट में स्कूल टॉपर।
स्नातक: दिल्ली विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान (B.Sc. Hons) में गोल्ड मेडल विजेता।
स्नातकोत्तर: दिल्ली विश्वविद्यालय (दक्षिण परिसर) से आनुवंशिकी (Genetics) में एमएससी।
उच्च शिक्षा: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पीएचडी पूर्ण की।
राष्ट्रीय पात्रता: उन्होंने CSIR-JRF और ICAR-NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएँ भी उत्तीर्ण कीं।वैज्ञानिक से सिविल सेवक तक का सफर
पीएचडी के बाद, सत्य पाल ने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में लगभग तीन वर्षों तक वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। एक सफल वैज्ञानिक करियर होने के बावजूद, समाज और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके लगाव ने उन्हें सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया।
चुनौतियाँ और अंतिम सफलता
सत्य पाल की सफलता का मार्ग आसान नहीं था। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में पाँच प्रयास किए और तीन बार प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की। हालांकि, उन्होंने अपना ध्यान भारतीय वन सेवा (IFS) पर केंद्रित किया और अपने पहले ही प्रयास में मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार उत्तीर्ण कर अंतिम चयन प्राप्त किया।
“सत्य पाल की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।”उनकी इस उपलब्धि से परिवार, शिक्षकों और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है, और वे युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बनकर उभरे हैं।















