गोरखपुर। मुख्यमंत्री के स्वर्णिम विचारधारा अपराध मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश के प्रथम जनपद के रूप में जनपद गोरखपुर द्वारा जनपद के थानों से न्यायालय जाने वाले अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास सहित समस्त आख्याएं अब समय से न्यायालय पहुंचेगी इसके लिए प्रत्येक थाना स्तर पर बनाए गए उप निरीक्षक अभियोजन को गुरुवार को पुलिस लाइन में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
अभियुक्त गण के जमानत प्रार्थना पत्र पर प्रस्तरवार आख्या समुचित तरीके से तैयार करते हुए आपराधिक इतिहास का पूर्ण विवरण अंकित किया जाएगा एवं वाहन या माल रिलीज, गवाहों के संबंध में आख्या जैसी तमाम सारी आख्या, जो रोजाना थाना स्तर से न्यायालयों में भेजी जाती थी या तो समय से नहीं पहुंचती थी या अधूरी रहती थी, जिससे आए दिन पुलिस को न्यायालय में असहज स्थिति का सामना करना पड़ता था और इसका लाभ अभियुक्त को मिलता था।
इस समस्या के समाधान के लिए नवप्रयोगधर्मी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर गौरव ग्रोवर द्वारा प्रत्येक थाना स्तर पर उप निरीक्षक अभियोजन के पद नामित किया गया है।
अब न्यायालय में भेजे जाने वाली प्रत्येक आख्या इन उपनिरीक्षक अभियोजन द्वारा ही तैयार की जाएगी और इन्हीं के द्वारा अग्रसारित होकर न्यायालय को सही समय पर प्रेषित की जाएगी। कोई आख्या यदि समय पर न्यायालय नहीं पहुंची या अधूरी रही या उसमें कोई कमी रही तो उसके लिए यही उपनिरीक्षक अब सीधे-सीधे जिम्मेदार होंगे।
अपने थाने के विवेचकों से आख्या प्राप्त कर कैसे तैयार करनी है, इसके लिए गुरुवार को पुलिस लाइन में नामित उप निरीक्षक अभियोजन को वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी संदीप सिंह व अभियोजन अधिकारीगण प्रत्यूष दुबे, दिलीप कुमार सिंह व अमित शर्मा द्वारा विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विवेचकों और प्रभारी निरीक्षकों और थाना अध्यक्षों की अति व्यस्तता के चलते आख्या समय पर न्यायालय नहीं पहुंच पाती थी। अब नामित किए गए प्रत्येक थाने पर उप निरीक्षक अभियोजन इसके लिए प्रतिदिन अपने पास एक रिकॉर्ड सुरक्षित रखेंगे। चाहे जनपद के न्यायालय हो या उच्च न्यायालय में भेजे जाने वाली आख्या को प्रतिदिन पैरोकार से प्राप्त कर अपने रजिस्टर में अघतन करना होगा और अगले दिन या जो भी तिथि निश्चित हो उसके लिए सही और सटीक ढंग से आख्या तैयार करनी होगी तथा अपने नाम की मोहर व पूर्ण हस्ताक्षर के साथ आख्या तैयार करनी होगी।
न्यायालय को भेजे जाने वाली आख्या यदि इन उप निरीक्षकों के द्वारा अग्रसारित नहीं है तो वह न्यायालय में पैरवी करने वाले अभियोजकों द्वारा सबमिट नहीं की जाएगी और इसकी सूचना तत्काल नोडल अधिकारी को प्रेषित की जाएगी। अब किसी भी आख्या में कोई कमी पाए जाने पर थाना अध्यक्ष/ प्रभारी निरिक्षक या विवेचन नहीं अपितु उप निरीक्षक अभियोजन जिम्मेदार होंगे। इनकी मॉनिटरिंग के लिए नोडल अधिकारी पुलिस अधीक्षक दक्षिणी जितेंद्र कुमार व पुलिस उपाधीक्षक प्रशाली गंगवार इन उप निरीक्षकों की नियमित मॉनिटरिंग करेगी।
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