पीपीगंज बापू स्नातकोत्तर महाविद्यालय पीपीगंज ,गोरखपुर में रक्षा अध्ययन विभाग के तत्वाधान में भारतीय वैश्विक परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित भारत इजराइल संबंध अतीत से वर्तमान: चुनौतियों और संभावनाएं विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के प्रथम दिन मुख्य अतीत प्रो रजनीकांत पाण्डेय पूर्व कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर ने कहा कि भारत एवं इजराइल ऐतिहासिक संस्कृति-सभ्यता एवं विचाराधारा रही है जिसने दोनों देशों के संबधों पर पर्याप्त प्रभाव डाला है जिसे हम वर्तमान में दोनों देशों के संबधों में स्पष्ट रूप से देख पा रहे हैं। उन्होंने भारत की आजादी के पूर्व एव आजादी के पश्चात दोनों देशों संबन्धों पर चर्चा की तथा इसके साथ ही 90 के दशक में दोनों देशों के संबन्धों में हुए बदलावों को भी विस्तृत रूप से बताया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत-इजराइल के रिश्तों में आए बदलावों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। सांस्कृतिक संबंधों से लेकर रक्षा और सामरिक संबंधों तक, दोनों देशों ने एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझा है।
विशिष्ट अतिथि डॉ ध्रुव ज्योति भट्टाचार्य वरिष्ठ शोध अध्येयता भारतीय वैश्विक परिषद नई दिल्ली ने परिषद के विषय में सामान्य जानकारी देते हुए कहा कि भारत और इस्राइल संबन्धों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करना अत्यंत प्रासंगिक है जिससे कि भविष्य में दोनों देशों के संबन्धों के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सके।
विशिष्ट अतीथ डॉ शक्ति जायसवाल सहआचार्य राजनीति विज्ञान विभाग बुद्ध विद्यापीठ पीजी कॉलेज नौगढ़ सिद्धार्थनगर ने कहा कि भारत इजराइल सम्बंधो की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए फ़िलीस्तीन का इनके संबन्धों पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तृत रूप बताया। उन्होंने राजनीतिक, स्ट्रेटेजिक,कूटनीतिक, सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ और धार्मिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए धार्मिक प्रभावों को अत्यधिक महत्ता दी और इसके ऐतिहासिक प्रभावों को स्पष्ट रूप से बताया।
विशिष्ट अतिथि प्रो श्याम कुमार सिंह प्राचार्य पवित्रा डिग्री कॉलेज मनीराम गोरखपुर ने कहा किभारत इजराइल संबन्धों के ऐतिहासिक पारस्परिक संबन्धों को बताते हुए कहा कि अतीत से ही दोनों देश एक दूसरे को विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करता रहे है, परंतु वर्तमान में दोनों के हितों में और वैश्विक दृष्टिकोणों में परिवर्तन होने के कारण उसका प्रभाव दोनों देशों के पारस्परिक संबधों पर भी पड़ा जिसमें फ़िलीस्तीन का भी प्रभाव देखने को मिलता है l ।महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो मंजु मिश्रा ने स्वागत उदबोधन देते हुए कहा कि भारत-इजराइल संबंधों के बारे में चर्चा होना दुर्लभ है। भारत और इजरायल दोनों ने रक्षा सहयोग, निवेश और व्यापार नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया है
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्रबंधक कमाल जावेद ने कहा कि दोनों देशों ने विज्ञान और तकनीक में विकास किया है और अब अंतरिक्ष तकनीक के मामले में भी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देशों ने एक साथ कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। दोनों ने कूटनीतिक साझेदारी से लेकर सामरिक साझेदारी तक खुद को विकसित किया है।इस अवसर पर विषय प्रवर्तन करते हुए महाविद्यालय के भूगोल विभाग के सहायक आचार्य डॉ सुनील कुमार प्रसाद ने कहा कि’भारत-इजराइल सम्बन्ध अतीत से वर्तमान : चुनौतियां एव सम्भावनायें’ के सन्दर्भ भारत इजराइल समबन्ध के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को बताते हुए वर्तमान में दोनों के पारस्परिक संबन्धों एवं संभावनाओं को संक्षिप्त रूप से बताया।
महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ नित्यानंद ने आभार व्यक्त किया एवं संगोष्ठी के संयोजक डॉ करुणेंद्र सिंह ने मंच संचालन किया। तकनीकी सत्र में शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र का वाचन भी किया गया। अतिथियों द्वारा महाविद्यालय की पत्रिका “बापू पथ ” एवं भारत -इजराइल संबंध अतीत से वर्तमान:चुनौतियां और संभावनाएं” विषय पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर अन्य महाविद्यालय से आए हुए प्राचार्य ,शिक्षक गण एवं महाविद्यालय के शिक्षक डॉ राकेश प्रताप सिंह,डॉ रवि शंकर पाण्डेय ,डॉअमित कुमार तिवारी, डॉ संजीत कुमार सिंह, डॉ देवनारायण पांडेय, डॉ अतुल कुमार शुक्ला, नितिन कुमार लाल, डॉ सुनील कुमार प्रसाद, डॉ श्रीराम यादव ,डॉ दीपमाला यादव ,डॉ रंजू यादव, डॉ आनंत प्रकाश पांडेय, डॉ विशाल रंजन त्रिपाठी, प्रेमलता यादव, शैलजा पांडे, रेखा ,संदीप जायसवाल, साक्षी शाही एवं महाविद्यालय के शिक्षणेत्तर कर्मचारी, छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे साथ ही इस संगोष्ठी में गूगल मीट के माध्यम से भी प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
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