माता-पिता की आज्ञा पालनकर सर्वप्रथम पूज्य बनें श्रीगणेश: राघव ऋषि

माता-पिता की आज्ञा पालनकर सर्वप्रथम पूज्य बनें श्रीगणेश: राघव ऋषि

ऋषि सेवा समिति, गोरखपुर के तत्वावधान में आयोजित आजाद चौक समीपस्थ दुर्गा चौक स्थित मेहंदी लॉन में परमपिता परमेश्वर भगवान सदाशिव के पावन चरित्र की मंगलमय संगीतमयी श्रीशिवमहापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पूज्य राघव ऋषि जी ने कहा कि: शिव अर्थात कल्याण। जीव को अपने कल्याण की कामना सदैव सदाशिव की आराधना द्वारा यथार्थ है। सृष्टि के कल्याण हेतु भगवान सदाशिव ने उमा से पाणिग्रहण कर उनके अभीष्ट को सिद्ध किया। उमा से विवाह हुआ भगवान उमापति बने।

सर्वप्रथम तारकासुर के वध के निमित्त कार्तिकेय स्वामी का ज्येष्ठ पुत्र के रूप में जन्म हुआ। आप देवताओं के सेनाध्यक्ष पद को सुशोभित किये। समर और युद्ध में विजय की कामना हेतु कार्तिकेय की पूजा का विधान है।

कथाक्रम में गणेशजी की उत्पत्ति का विस्तार करते हुए कहा कि पार्वतीजी ने स्वयं की इच्छा से अपने शरीर के मैल से सुंदर बालक को उत्पन्न किया जिसका गणेश नाम रखा अपने स्वयं के द्वारपाल के रूप में स्थापित किया। भगवान सदाशिव के कोप के फलस्वरूप गणेश का मस्तक शरीर से अलग हुआ भगवती पार्वती की इच्छा से पुनः गज अर्थात् हांथी का मस्तक शरीर में सुशोभित किया भगवती की इच्छा समस्त देवों की स्वीकृति से गणेश को सर्वाध्यक्ष पद पर प्रतिष्ठित किया। गणेश जी की उत्पति का उत्सव सभी देवों में मनाया।

पूज्यश्री ने बताया कि हमारे हिंदू धर्म परम्परा में षोडश संस्कारों का वर्णन किया गया है इन कार्यों में प्रथम पूज्य एकमात्र महराज गजानन हैं। महराज गजानन बुद्धि का दायक कहा गया है। ये विघ्नहर्ता भी हैं विघ्नकर्ता भी हैं। अतः संपूर्ण कार्यों को निर्विघ्न सम्पन्न करने के लिए महराज गजानन की कृपा प्राप्त कर लेना चाहिए।

गणेशजी के विवाह प्रसंग को पूज्यश्री ने बताया कि गणेशजी कुशाग्र बुद्धि से अपने माता पिता की सात प्रदक्षिणा कर प्रथम विवाह के अधिकारी हुए। ऋद्धि- सिद्धि नाम की कन्याओं के साथ महाराज गजानन का विवाह सम्पन्न हुआ।

भक्त श्रद्धालुओं ने विवाह झांकी का दर्शन पूजन किया। “जय गणपति वंदन गणनायक” मोहक मधुर भजन पूज्य ऋषिजी के एकमात्र सुपुत्र सौरभ ऋषि ने सुना भक्तों को झूमने पर मजबूर किया।

प्रातःकाल 6 बजे महारुद्राभिषेक का आयोजन रहा जिसमें काशी के विद्वत आचार्यों द्वारा अभिषेक सम्पन्न कराया गया। तत्पश्चात महालक्ष्मी पूज्य ऋषिजी के संरक्षण में अष्टविनायक गणेशजी का पूजन रहा जिसमें गेंदें के पुष्प से साधकों ने गणेश के विभिन्न रूपों का पूजन किया।

पोथीपूजन एवं व्यासपूजन मुख्य यजमान श्रीमती गायत्री देवी एवं दीन दयाल शरण कसौधन द्वारा संपादित किया गया।            कथा आरती में समिति के सर्वश्री रामाधार वर्मा, बनवारी लाल निगम, सतीश सिंह, सौरभ रुंगटा, कन्हैयालाल अग्रवाल, मुन्नालाल गुप्ता, बिष्णु नन्द द्विवेदी, रामशंकर त्रिपाठी, वीरेंद्र पाठक, यूपीएन सिंह, विकास गुप्ता, भरत गुप्ता, रुद्र प्रताप त्रिपाठी, अतुल तिवारी, ओमप्रकाश मौर्य, मनोज वर्मा, मनोज गुप्ता, धीरज गुप्ता, धर्मेंद्र गुप्ता, विनय पाण्डेय, राजीव त्रिपाठी, शिवजी वर्मा, संतोष वर्मा, ओंकार कसौधन भक्त श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण आरती संपन्न कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

मीडिया प्रभारी श्री विनोद शुक्ल ने बताया कि मंगलवार को रुद्रावतार श्रीहनुमान जी का परम पावन प्रसंग सहित शिवजी के विभिन्न अवतारों का वर्णन रहेगा।

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