मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार की नीतियों से औद्योगिक निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं ने शहर को नई पहचान दी है, जहाँ युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुल रहे हैं, लेकिन बेरोजगारी और पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी बरकरार हैं।
2011 की जनगणना के अनुसार गोरखपुर जिले की कुल जनसंख्या 44 लाख 40 हजार 895 थी, जिसमें युवा वर्ग का प्रमुख हिस्सा है, और 2025 तक अनुमानित जनसंख्या 51 लाख 45 हजार के करीब पहुँच चुकी है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि युवाओं की बड़ी आबादी विकास की रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन उन्हें अवसरों का लाभ उठाने के लिए कौशल और संसाधनों की आवश्यकता है।
गोरखपुर का औद्योगिक परिदृश्य अब पूर्वी उत्तर प्रदेश का हब बन चुका है। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने 2025 में रिकॉर्ड 305 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए, जिससे 7886 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ और वर्तमान वित्तीय वर्ष में 5800 करोड़ का अतिरिक्त निवेश प्राप्त हो चुका है। इससे लगभग 17 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, जिसमें प्लास्टिक पार्क, गारमेंट पार्क, फ्लैटेड फैक्ट्री और धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप प्रमुख हैं। नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री ने 408 करोड़ की 114 निवेश परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जो लॉजिस्टिक हब्स, एमएसएमई क्लस्टर्स और प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित कर रही हैं।
जिससे युवाओं को शहर में ही नौकरियाँ मिल रही हैं। जनवरी 2026 में 250 करोड़ की दो परियोजनाओं का उद्घाटन ट्रैफिक प्रबंधन और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है, जो अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बढ़ाएगा। इसके अलावा, 2025-26 के उत्तर प्रदेश बजट में स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए 400 करोड़ का प्रावधान किया गया, जिसमें 76.32 करोड़ की लंबित परियोजनाएँ गति पकड़ेंगी।
सरकारी योजनाएँ युवाओं को कौशल प्रदान कर आत्मनिर्भर बना रही हैं। उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने गोरखपुर में दर्जी, ब्यूटी पार्लर और फल प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निःशुल्क प्रशिक्षण शुरू किया, जिसमें सामान्य वर्ग के 100 और एससी वर्ग के 125 युवाओं को प्रतिदिन 250 रुपये स्टाइपेंड मिलेगा। कौशल सतरंग और मिशन युवा जैसी योजनाएँ बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उद्यमिता को बढ़ावा दे रही हैं। गीडा क्षेत्र में 2251 करोड़ की परियोजनाएँ और इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित हो रही हैं, जो 667 एकड़ में फैलकर हजारों नौकरियाँ पैदा करेंगी। राज्य स्तर पर बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से घटकर 2.4 प्रतिशत हो गई, जो रोजगार सृजन की दिशा में सकारात्मक संकेत है।फिर भी, चुनौतियाँ कम नहीं हैं।
सेवायोजन कार्यालय में 2021 के आंकड़ों के अनुसार 2 लाख से अधिक बेरोजगार युवा पंजीकृत थे, जिनमें से मात्र 4.42 प्रतिशत को रोजगार मिला, और हालिया रुझान बताते हैं कि स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर युवा बेरोजगारी (15-29 वर्ष) 13.8 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 17.2 प्रतिशत तक पहुँच रही है।
गोरखपुर में बाढ़ की समस्या हर वर्ष बरसात में युवाओं के जीवन को प्रभावित करती है, क्योंकि नदियाँ, नाले और जलभराव विकास कार्यों को बाधित करते हैं। कौशल की कमी से कई युवा पलायन को मजबूर होते हैं, जबकि प्रदूषण और अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों के विस्तार में बाधक हैं।
PLFS सर्वे के अनुसार शहरी बेरोजगारी जून 2025 में 18.8 प्रतिशत तक बढ़ी, जो गोरखपुर जैसे विकासशील शहरों के लिए चिंता का विषय है।
इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए युवाओं को कौशल विकास पर जोर देना होगा। गीडा और स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ एमएसएमई क्षेत्र में रोजगार बढ़ा रही हैं, जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर एक करोड़ नौकरियाँ सृजित हो सकती हैं। सरकार की निवेश नीतियाँ गोरखपुर को पूर्वांचल का मैन्युफैक्चरिंग हब बना रही हैं, लेकिन बेरोजगारी कम करने के लिए अधिक रोजगार मेलों और प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
युवा उद्यमिता को प्रोत्साहित कर पलायन रोका जा सकता है। कुल मिलाकर, निखरते गोरखपुर में युवाओं के पास सुनहरा भविष्य है, बशर्ते वे चुनौतियों का सामना कर अवसरों को ग्रहण करें। सरकार के डेटा से सिद्ध है कि निवेश और योजनाएँ विकास की गति को तेज कर रही हैं, अब युवाओं की बारी है इस बदलाव का हिस्सा बनने की।
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