जहां अपने पते पर लापता रहते हैं लोग, उसको गांव कहते हैं 28/10

जहां अपने पते पर लापता रहते हैं लोग, उसको गांव कहते हैं  सहड़ौली में आयोजित हुआ भव्य कवि-सम्मेलन

बड़हलगंज/गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे)

जहां अपने पते पर लापता रहते हैं लोग, उसको गांव कहते हैं
जहां अपने पते पर लापता रहते हैं लोग, उसको गांव कहते हैं
स्थानीय विकास खण्ड के गांव सहड़ौली में रविवार की देर शाम, गीतकारों,ग़ज़लकारों और हास्य-व्यंग्य के कवियों ने अपनी बेहतरीन कविताओं से सैकडों श्रोताओं को अपनी उच्चस्तरीय रचनाओं से मंत्र मुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध ग़ज़लकार और बी.एच.यू. के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप के संयोजन में गाँव में हुए इस कवि-सम्मेलन में लोकप्रियता, गंभीरता और मनोरंजन का एक अलग मानदंड स्थापित किया। कवि भालचन्द्र त्रिपाठी ने अपनी ग़जल सुनाते हुए कहा कि “जो सच कह दूँ तो इक मासूम का दिल टूट जाएगा। ज़रा ठहरों मुझे कोई बहाना ढूँढ लेने दो।” डॉ कमलेश राय ने ‘तुलसी चौर पर दियना के बारी चलेली, गोरी मानत मनौती हजार चलेली” के माध्यम से भारतीय स्त्री के जीवन का चित्र प्रस्तुत किया। डॉ. सुभाष चन्द्र यादव ने माँ के महत्व को रेखांकित करते हुए सुनाया कि ‘जग में माई लेखा कवनो सहाई न होई , केहू केतनों दुलारी बाकी माई न होई।’ अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ नवगीतकार डॉ.अशोक कुमार सिंह का गीत ‘जहाँ अपने पते पर लापता रहते हैं सारे लोग, उसको गाँव कहते हैं’ खूब सराहा गया। संचालक डॉ. सुशान्त शर्मा के जटायू खण्ड काव्य के छंदों और उनके गीतों को श्रोताओं ने बड़े मन से सुना। प्रो. वशिष्ठ अनूप की ग़ज़ल ” गर्म रोटी के ऊपर नमक-तेल था, माँ ने हँसकर दुलारा तो अच्छा लगा।’ और ‘ “हमारे गाँव की मिट्टी में जैसी खुशबू है, तुम्हारे शहर के परफ्यूम में वो बात कहाँ।’ लोगों में आत्मीयता का संचार किया। सभाजीत द्विवेदी ‘प्रखर’ और बादशाह प्रेमी के हास्य-व्यंग्य ने लोगों का ख़ूब मनोरंजन किया। प्रतिभा गुप्ता के गीतों-ग़ज़लों और आकृति विज्ञा की समाज और स्त्री केन्द्रित कविताओं ने श्रोताओं को काफी प्रभावित किया। अनुज पाण्डेय के गीतों तथा निर्भय निनाद की कविताओं को भी लोगों ने पसन्द किया। इस नये प्रयोगों से युक्त बेहतरीन कार्यक्रम में प्रो.अनिल कुमार राय, डॉ. परितोष त्रिपाठी, सूरज पाण्डेय, श्रीषदास जी महाराज, रामेश्वर दुबे, प्रणव द्विवेदी, अरविन्द दुबे, धीरज राय, बसन्त पासवान, मक्खन यादव, भुवनेश्वर चतुर्वेदी, आशीष राय, प्रभाकर ओझा, सतीश दुबे, डॉ. शैलेश पांडेय, व्यासजी दुबे, सर्वेश कुमार दुबे, आदि के साथ गाँव तथा क्षेत्र के प्रबुद्व नागरिकों तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के दो दर्जन से अधिक शोध छात्रों की विशिष्ट उपस्थिति रही। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोक गायक सँवरू मास्टर ने भी भागीदारी की।
ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

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