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  • प्रत्येक एचआईवी मरीज को छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खाना अनिवार्य’’

    प्रत्येक एचआईवी मरीज को छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खाना अनिवार्य’’

    विश्व एड्स दिवस (01 दिसम्बर 2024) पर विशेष,

    ‘’प्रत्येक एचआईवी मरीज को छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खाना अनिवार्य’’,

    एचआईवी मरीजों में टीबी रोगी होने की संभावना अधिक,

    वर्ष 2019 से अब तक 0.74 फीसदी मरीजों में एचआईवी-एड्स और टीबी दोनों बीमारियां मिलीं

    गोरखपुर, 30 नवम्बर 2024,

    ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) वह वायरस है जो एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम (एड्स) बीमारी का कारण बनता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण एचआईवी मरीजों में टीबी होने की आशंका कहीं अधिक होती है । इसकी वजह से प्रत्येक एचआईवी मरीज की टीबी जांच जरूरी है और अगर वह टीबी मरीज नहीं होते हैं तब भी उन्हें छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खाना अनिवार्य है। गोरखपुर जिले में वर्ष 2019 से अब तक 0.74 फीसदी मरीजों में एचआईवी-एड्स और टीबी दोनों बीमारियां मिली हैं।

    जिला एड्स नियंत्रण और क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव ने बताया कि वर्ष 2019 से अब तक टीबी के 71103 नये रोगी ढूंढे गये। इनमें से 528 मरीज ऐसे पाए गये जिन्हें दोनों बीमारियां थीं। एचआईवी से ग्रसित टीबी मरीजों के ठीक होने में समय लगता है और उन्हें जटिलताएं भी कहीं ज्यादा होती हैं, लेकिन समय से इस सहरूग्णता की पहचान हो जाए तो ऐसे टीबी मरीज भी जल्दी ठीक हो सकते हैं । इसी वजह से टीबी की पहचान होने पर प्रत्येक मरीज की एचआईवी जांच और प्रत्येक एचआईवी मरीज की टीबी जांच अनिवार्य है ।

    उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक टीबी मरीज की एचआईवी जांच करवाता है। एचआईवी की पुष्टि होने पर टीबी और एचआईवी की दवा साथ साथ चलती है । ऐसा करने से एचआईवी ग्रसित टीबी मरीज ठीक हो जाता है और उसका जटिलताओं से भी बचाव होता है । निजी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले टीबी मरीजों को भी चिकित्सक की सहमति से इस जांच की सुविधा सरकारी अस्पतालों में दी जा रही है । एचआईवी ग्रसित टीबी मरीजों के जीवनसाथी की भी जांच कराई जाती है ।

    *316 मरीजों को खिलाई बचाव की दवा*

    डॉ यादव ने बताया कि इस वर्ष 316 एचआईवी मरीजों को टीबी से बचाव की दवा खिलाई गई। जिन टीबी मरीजों को एचआईवी भी है, उनके टीबी का इलाज पूरा होने के बाद उन्हें भी छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खिलाते हैं। लेकिन अगर ऐसे मरीज ड्रग रेसिस्टेंट टीबी मरीज हैं तो उन्हें बचाव की दवा नहीं खिलाई जाती है।

    जिले में एचआईवी के 5672 सक्रिय मरीज,

    जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ गणेश यादव ने बताया कि इस समय जनपद में एचआईवी के 5672 सक्रिय मरीज हैं। इस वित्तीय वर्ष में 436 नये एचआईवी मरीज पंजीकृत किये गये। इलाज के दौरान दस एचआईवी मरीजों की मौत भी हुई है। सत्तावन ऐसे एचआईवी मरीज पंजीकृत किये गये हैं जिनमें टीबी की भी बीमारी निकली है। इन मरीजों को दोनों प्रकार की दवाएं साथ साथ खिलाई जा रही हैं।

    टीबी के लक्षण,

    • दो सप्ताह से अधिक की खांसी
    • पसीने के साथ बुखार
    • अत्यधिक कमजोरी
    • भूख न लगना
    • बलगम में खून आना
    • सीने में दर्द

    एचआईवी के लक्षण,

    • वजन का कम होना
    • एक महीने से अधिक बुखार आना
    • एक महीने से अधिक का दस्त

    एड्स के लक्षण,

    • लगातार खांसी
    • चर्म रोग
    • मुंह एवं गले में छाले होना
    • लसिका ग्रंथियों में सूजन एवं गिल्टी
    • याददाश्त खोना
    • मानसिक क्षमता कम होना
    • शारीरिक शक्ति का कम होना

    *एचआईवी और एड्स में अंतर*

    डॉ यादव ने बताया कि जब कोई व्यक्ति कई वर्षों तक एचआईवी वायरस से पीड़ित रहता है और उसका उपचार नहीं होता है तो वह एड्स मरीज बन जाता है । यदि एचआईवी मरीज एड्स का रोगी बन जाता है, तो उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली रोगाणुओं से अच्छी तरह से नहीं लड़ पाती। यही वजह है कि एड्स से पीड़ित लोगों को अक्सर गंभीर संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: एम्स गोरखपुर में पहली बार सफल लैप्रोस्कोपिक रेडिकल कोलेसिस्टेक्टॉमी

    ऐतिहासिक उपलब्धि: एम्स गोरखपुर में पहली बार सफल लैप्रोस्कोपिक रेडिकल कोलेसिस्टेक्टॉमी

    ऐतिहासिक उपलब्धि: एम्स गोरखपुर में पहली बार सफल लैप्रोस्कोपिक रेडिकल कोलेसिस्टेक्टॉमी,

    गोरखपुर, 26 नवंबर 2024: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार लैप्रोस्कोपिक रेडिकल कोलेसिस्टेक्टॉमी सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह सर्जरी एक बुजुर्ग महिला मरीज पर की गई, जिन्हें उच्च रक्तचाप और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव की समस्या थी।

    इस जटिल सर्जरी को सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता के निर्देशन में डॉ. हरिकेश यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, सर्जरी विभाग ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मरीज को एनेस्थीसिया देने की जिम्मेदारी डॉ. गणेश, एसोसिएट प्रोफेसर ने निभाई, जो एनेस्थीसिया विभाग के प्रॉफेसर और कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में कार्यरत थे। मरीज के जटिल चिकित्सीय इतिहास को देखते हुए सर्जरी से पहले गहन योजना और अत्याधुनिक मॉनिटरिंग तकनीक का उपयोग किया गया।

    फिलहाल मरीज को हाल ही में उद्घाटन किए गए एनेस्थीसिया इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती किया गया है, जहां उनकी स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। आईसीयू की टीम मरीज की सुरक्षा और शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

    एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह ने सर्जिकल और एनेस्थीसिया टीम के इस अद्वितीय प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एम्स गोरखपुर की आधुनिक और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

  • संक्रमण मुक्त होता है मां का दूध, टीबी उपचाराधीन माताएं करा सकती हैं स्तनपान

    संक्रमण मुक्त होता है मां का दूध, टीबी उपचाराधीन माताएं करा सकती हैं स्तनपान

    संक्रमण मुक्त होता है मां का दूध, टीबी उपचाराधीन माताएं करा सकती हैं स्तनपान,

    मास्क का इस्तेमाल कर बच्चे को स्तनपान कराना सुरक्षित

    टीबी के लक्षणों के प्रति गर्भवती और धात्री महिलाओं को रहना चाहिए अधिक सतर्क

    गोरखपुर, 26 नवम्बर 2024,

    मां का दूध हर प्रकार से संक्रमण मुक्त होता है । ऐसे में अगर किसी माता को टीबी है और उनका उपचार चल रहा है तो वह भी मास्क लगा कर सावधानी के साथ बच्चे को स्तनपान करवाना जारी रखें। ऐसी माताओं द्वारा बच्चे को स्तनपान न कराना बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम कर सकता है। साथ ही अगर किसी भी गर्भवती और धात्री महिला में टीबी का लक्षण दिखे तो अधिक सतर्कता बरतते हुए त्वरित जांच और इलाज करवाना चाहिए। यह कहना है जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव का । उन्होंने अपील की है कि अगर किसी गर्भवती या धात्री को लगातार दो सप्ताह से अधिक की खांसी आ रही है तो वह टीबी जांच जरूर करावें।

    डीटीओ डॉ यादव ने बताया कि गर्भवती में समय से टीबी की पहचान न होने से बच्चे के समय से पहले जन्म, कम वजन वाले बच्चे के जन्म, अंतर्गर्भाशयी विकास प्रतिबंध और प्रसवकालीन मृत्यु में छह गुना वृद्धि का जोखिम बना रहता है। इसके ठीक विपरीत समय से जांच और इलाज शुरू हो जाने से मां और बच्चे दोनों सुरक्षित हो जाते हैं। टीबी ग्रसित गर्भवती और धात्री महिलाओं के उपचार के लिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत निश्चित प्रोटोकॉल तय हैं और इनके जरिये मां बच्चे दोनों का ध्यान रखा जाता है। इन मरीजों को यथाशीघ्र नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भेजा जाना चाहिए।

    डॉ यादव ने बताया कि ऐसी महिलाओं को मातृ सूक्ष्म पोषक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आयरन, फोलिक एसिड तथा अन्य विटामिन और खनिज देना जारी रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में गर्भावस्था के दौरान जब कैल्शियम का सेवन कम हो, तो प्रसवपूर्व देखभाल के भाग के रूप में कैल्शियम अनुपूरण की सिफारिश भी की जाती है। उपचाराधीन मां को दवा के साथ साथ चिकित्सक के परामर्श के अनुसार संतुलित आहार लेते हुए आराम भी करना चाहिए।

    शीघ्र स्तनपान जरूरी,

    शाहपुर नगरीय स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ नीतू मौर्या का कहना है कि टीबी उपचाराधीन गर्भवती को भी प्रसव के तुरंत बाद यथाशीघ्र बच्चे के स्तनपान के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसी मां का दूध बच्चे के लिए पहला टीका होता है। मां को बच्चे के ओरल कांटैक्ट से बचने की सलाह दी जाती है। मास्क लगा कर स्वच्छता व्यवहार अपनाते हुए इन माताओं को भी छह माह तक सिर्फ अपना दूध ही बच्चे को पिलाने के लिए कहा जाता है। उपचाराधीन माता को हाथों की स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। मां के दूध से बच्चे को टीबी का संक्रमण नहीं होता है, बल्कि यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा कर उसे टीबी जैसी बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।

    देते हैं बचाव की दवा,

    डीटीओ डॉ गणेश यादव ने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चे के जन्म के बाद लगने वाला बीसीजी का टीका उन्हें टीबी समेत कई बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है। स्तनपान भी बच्चे को इस बीमारी से बचाव का सामर्थ्य व पोषण प्रदान करता है। टीबी पीड़ित धात्री महिला के बच्चों को बचाव की दवा भी दी जाती है।

    यह लक्षण दिखे तो गर्भवती-धात्री कराएं जांच,

    दो सप्ताह से अधिक की खांसी
    शाम को पसीने के साथ बुखार
    सीने में दर्द
    सांस फूलना
    वजन कम होना
    बलगम में खून आना

  • एम्स गोरखपुर में आयोजित हुई स्किललॉग IV कार्यशाला प्रोफेसर (डॉ.) शिखा सेठ की अध्यक्षता में

    एम्स गोरखपुर में आयोजित हुई स्किललॉग IV कार्यशाला प्रोफेसर (डॉ.) शिखा सेठ की अध्यक्षता में

    गोरखपुर, 23 नवंबर 2024: एम्स गोरखपुर के स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष, डॉ. प्रोफेसर शिखा सेठ की अध्यक्षता में आयोजित स्किललॉग IV कार्यशाला ने सीजेरियन सेक्शन की बढ़ती दर को कम करने और मातृ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इस कार्यशाला में विभाग के सभी चिकित्सकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और सीजेरियन सेक्शन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और उनके समाधानों पर गहन चर्चा की। इस कार्यशाला में एम्स गोरखपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञों, नर्सिंग अधिकारियों और छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर सीजेरियन सेक्शन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और उनके समाधानों पर गहन चर्चा की।

    कार्यशाला का उद्देश्य:

    इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीजेरियन सेक्शन की बढ़ती दर को कम करना और मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना था। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि सीजेरियन सेक्शन एक जरूरी सर्जरी हो सकती है, लेकिन इसे आखिरी विकल्प के रूप में ही अपनाना चाहिए।

    कार्यशाला में हुए प्रमुख बिंदु:

    सीजेरियन सेक्शन की जटिलताएं और उनका प्रबंधन: विशेषज्ञों ने सीजेरियन सेक्शन के दौरान होने वाली विभिन्न जटिलताओं और उनके निवारण के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
    रॉब्सन वर्गीकरण: इस वर्गीकरण के माध्यम से सीजेरियन सेक्शन के विभिन्न प्रकारों और उनके कारणों को समझाया गया।
    पेट के सर्जिकल घावों की देखभाल: सर्जरी के बाद घावों की उचित देखभाल के महत्व पर जोर दिया गया।

    पैनल चर्चा: पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने जटिल मामलों को संभालने के अपने अनुभव साझा किए और सीजेरियन सेक्शन की दर को कम करने के उपाय सुझाए।

    सीजेरियन सेक्शन दर में कमी: कार्यक्रम में सीजेरियन सेक्शन की बढ़ती दर को कम करने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
    विशेषज्ञों की भागीदारी:

    कार्यक्रम में डॉ. शिखा सेठ, डॉ. प्रीतिबाला सिंह, डॉ. आराधना सिंह, डॉ. प्रीति प्रियदर्शिनी और डॉ. प्रियंका सिंह शिशोदिया जैसे जाने-माने विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

    एम्स, गोरखपुर का योगदान:

    एम्स, गोरखपुर ने इस कार्यशाला के आयोजन के माध्यम से मातृ और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है

  • ठंड में टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, संक्रमण के प्रसार की भी बढ़ जाती है आशंका

    ठंड में टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, संक्रमण के प्रसार की भी बढ़ जाती है आशंका

    ठंड में टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, संक्रमण के प्रसार की भी बढ़ जाती है आशंका,

    बदलते मौसम में स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के उपचाराधीन मरीजों को किया सतर्क,

    जिले में करीब नौ हजार टीबी मरीजों का चल रहा है उपचार,

    गोरखपुर, 22 नवम्बर 2024,

    बढ़ती हुई ठंड के बीच स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के उपचाराधीन मरीजों को सतर्क किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी और चेस्ट फीजिशियन डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने कहा है कि ठंड से बचाव न करने पर टीबी मरीजों में जटिलताएं बढ़ सकती हैं। अत्यधिक खांसी आ सकती है और इस खांसी के कारण संक्रमण के प्रसार की भी आशंका बढ़ जाती है। हांलाकि जिन टीबी मरीजों ने तीन से चार हफ्ते तक टीबी की दवा का नियमित सेवन कर लिया है, उनसे संक्रमण नहीं फैलता है। इस मौसम में जिले के उपचाराधीन करीब नौ हजार टीबी रोगियों को विशेष तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि टीबी मरीजों को ठंड और प्रदूषण से बचाव के लिए इस मौसम में मास्क का प्रयोग करना चाहिए। इससे वह खुद भी जटिलताओं से बचेंगे, साथ ही बीमारी के प्रसार की आशंका भी कम रहेगी। नियमित दवा सेवन के साथ साथ मरीजों को गर्म कपड़े पहनने चाहिए। खांसी के साथ आने वाले बलगम को मिट्टी से ढक देना है। मौसमी फल व सब्जियों के साथ प्रोटीनयुक्त आहार जैसे दूध, पनीर, सोयाबीन, मांस और अंडे आदि का सेवन जारी रखना है। ठंड के मौसम में असावधानी फेफड़ों के टीबी के मरीजों में जटिलताएं बढ़ा सकता है, इसलिए मरीज पूरे शरीर को ढक कर रखें। घर से बाहर कम से कम निकलें।

    डॉ दूबे ने बताया कि इस मौसम में सर्दी और खांसी की समस्या सामान्य है। ऐसे में अगर किसी को दो सप्ताह से अधिक की लगातार खांसी आ रही है तो उसे टीबी जांच भी अवश्य करवानी चाहिए। इस जांच की सुविधा सरकारी खर्चे पर सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। रात में पसीने के साथ बुखार, बलगम में खून आना, लगातार वजन गिरना, सांस फूलना और सीने में दर्द भी टीबी के लक्षण हैं। लगातार खांसी के साथ ये लक्षण दिखें तो जांच जरूर कराएं। टीबी के शीघ्र जांच और इलाज से जहां मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है, वहीं संक्रमण का प्रसार भी रुक जाता है।

    मधुमेह ग्रसित टीबी मरीज रखें ध्यान,

    ठंड के मौसम में मधुमेह को नियंत्रित रखना भी एक अहम चुनौती है। जिन मरीजों को टीबी के साथ मधुमेह है उन्हें संयमित खानपान रखना चाहिए। मधुमेह को नियंत्रित रखे बिना टीबी की दवा कारगर नहीं होती है। आहार परामर्शदाता के सुझाव के अनुसार रोटी, दाल और हरी साग सब्जियों का सेवन करना चाहिए। दूध से मलाई हटा कर पीना चाहिए। मधुमेह और टीबी दोनों दवाओं का सेवन जारी रखना चाहिए। लक्षण दिखने पर मधुमेह के मरीजों को टीबी की जांच भी अवश्य करवानी चाहिए।

  • पुरुष नसबंदी पखवाड़ा शुरू, 28 नवम्बर से होगा सेवा प्रदायगी चरण का आगाज

    पुरुष नसबंदी पखवाड़ा शुरू, 28 नवम्बर से होगा सेवा प्रदायगी चरण का आगाज

     

    मोबिलाईजेशन चरण में 27 नवम्बर तक प्रेरित किये जाएंगे योग्य दंपति,

    ’’आज ही शुरूआत करें, पति-पत्नी मिल कर परिवार नियोजन की बात करें ’’ स्लोगन से कर रहे जागरूक

    चार दिसम्बर तक अभियान चला कर की जाएगी पुरुष नसबंदी

    गोरखपुर, 21 नवम्बर 2024,

    जिले में पुरुष नसबंदी पखवाड़े का गुरुवार से आगाज हो गया और यह चार दिसम्बर तक चलेगा। इसका मोबिलाईजेशन चरण 27 नवम्बर तक चलाया जाएगा और इस दौरान योग्य दंपति को परिवार नियोजन के सभी साधनों की जानकारी देकर इच्छुक पुरुष को नसबंदी के लिए तैयार किया जाएगा। इसके बाद 28 नवम्बर से सेवा प्रदायगी चरण शुरू होगा, जिसमें अभियान चला कर पुरुष नसबंदी की सुविधा प्रदान की जाएगी। प्रथम चरण में ’’आज ही शुरूआत करें, पति-पत्नी मिल कर परिवार नियोजन की बात करें ’’ जैसे स्लोगन की मदद से लोगों को परिवार नियोजन की महत्ता समझाई जा रही है।

    अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी परिवार कल्याण डॉ एके चौधरी ने बताया कि सारथी वाहन, सास बहू बेटा सम्मेलन और घर घर सम्पर्क कर मोबिलाईजेशन चरण के दौरान दंपति को परिवार नियोजन की महत्ता बताई जाएगी। खासतौर से पुरुष नसबंदी के बारे में विस्तार से जानकारी देने का निर्देश है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा दंपति को संदेश दिया जा रहा है कि पुरुष नसबंदी एक स्थायी गर्भनिरोधक साधन है। यह बिना चीरा और टांके के होने वाली दस मिनट की सरल प्रक्रिया है। इसे करवाने के आधे घंटे बाद व्यक्ति घर जा सकता है। पुरुष नसबंदी आसान और सुरक्षित है और इसे करवाने के बाद सब कुछ पहले जैसा ही हो जाता है।

    डॉ चौधरी ने बताया कि वर्ष 2020 से 2023 तक पखवाड़े के दौरान 50 पुरुषों ने नसबंदी को अपनाया। इस दौरान ढेर सारे पुरुषों ने परिवार नियोजन के लिए कंडोम का विकल्प चुना और करीब साढ़े बारह लाख कंडोम सरकारी खर्चे पर वितरित किये गये। परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है और इसे सुनिश्चित करवाने के लिए ही यह पखवाड़ा मनाया जाता है। इस बार भी ‘’स्वस्थ मां स्वस्थ बच्चा, जब पति का हो परिवार नियोजन में योगदान अच्छा’’ और ‘’पति होने का फर्ज निभाऊंगा, स्वस्थ, सुखी परिवार के लिए परिवार नियोजन की जिम्मेदारी मैं भी उठाऊंगा’’ जैसे स्लोगन्स के जरिये पुरुषों की भागीदारी की महत्ता समझाई जा रही है। नसबंदी की सुविधा प्राप्त करने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य कार्यकर्ता से सम्पर्क कर सकते है।

    मिलती है प्रोत्साहन राशि,

    एसीएमओ आरसीएच डॉ चौधरी ने बताया कि नसबंदी करवाने वाले पुरुषों को तीन हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि उनके खाते में दी जाती है। साथ ही उन्हें कुछ सावधानियों के बारे में भी बताया जाता है। जैसे पुरुष नसबंदी के बाद भी कंडोम का इस्तेमाल तब तक करना है, जब तक कि जांच द्वारा स्पष्ट न हो जाए कि पहले के शुक्राणु समाप्त हो गये हैं। नसबंदी के तीन माह बाद सरकारी अस्पताल से शुक्राणु जांच करवाने के बाद इसका प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

  • कैंसर सर्जरी के साथ पहली बार लाइव चली एनाटोमी की क्लास

    कैंसर सर्जरी के साथ पहली बार लाइव चली एनाटोमी की क्लास

    कैंसर सर्जरी के साथ पहली बार लाइव चली एनाटोमी की क्लास,

    कैंसर की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी सर्जरी करने वाले देश के चुनिंदा इंस्टिट्यूट में शामिल हुआ गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज,

    दुनिया के जाने-माने कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी और रेखा माहेश्वरी ने की कैंसर पीड़ित महिला की सर्जरी,

    गोरखपुर, 21नवंबर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में संचालित गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज देश के उन चुनिंदा इंस्टिट्यूट में शामिल हो गया है जहां कैंसर की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (एमआरएम) सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यही नहीं, इस इंस्टिट्यूट में कैंसर की एमआरएम सर्जरी के साथ विश्व प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी द्वारा एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए एनाटोमी की लाइव क्लास भी चलाई गई और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। जटिल सर्जरी के साथ एनाटोमी की लाइव क्लास का संचालन विश्व में संभवतः पहली बार किया गया।

    एमपी बिरला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के मेडिकल डायरेक्टर और दुनिया के जाने-माने कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी और उनकी पत्नी कैंसर सर्जन डॉ. रेखा माहेश्वरी की चिकित्सकीय सेवाएं गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के जरिये प्रतिमाह पूर्वी उत्तर प्रदेश के कैंसर रोगियों को मिलने लगी हैं। गत दिवस डॉ. संजय माहेश्वरी और रेखा माहेश्वरी ने इस इंस्टिट्यूट में रोगियों की जांच और परामर्श देने के साथ एक 52 वर्षीय कैंसर पीड़ित महिला की सफल मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी सर्जरी की। यह सर्जरी तीन घंटे से अधिक समय तक चली।

    डॉ. संजय माहेश्वरी ने बताया कि मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी में स्तन का पूरा भाग जिसमें एरियल (निप्पल के चारों तरफ की डार्क त्वचा), निप्पल नोड एवं अंडर आर्म के नीचे के कुछ हिस्सों को काट कर निकल जाता है। यह पद्धति कैंसर के व्यापक चिकित्सकीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह विधि क्लासिकल रेडिकल मास्टेक्टॉमी, जिसे कभी कैंसर का इलाज माना जाता था की तुलना में कम कठोर आपरेशन है। सर्जरी के बाद मरीज को दो-तीन दिन तक दर्द या बांह के नीचे खिंचाव व उस क्षेत्र में झुनझुनी की शिकायत रहती है। यह दिक्कत कुछ दिनो में ही ठीक हो जाती है।

    डॉ. संजय माहेश्वरी ने बताया कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में संचालित गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते उन्होंने एमबीबीएस फर्स्ट बैच के विद्यार्थियों के लिए एनाटोमी की क्लास भी लाइव चलाई। संभवतः पूरी दुनिया में एनाटोमी की लाइव क्लास कैंसर की इस तरह की सर्जरी के साथ चलाई गई है। इस दौरान एमबीबीएस फर्स्ट बैच के विद्यार्थियों को कैंसर प्रभावित अंग की संरचना की बारीकियों को समझाया गया और पढ़ाई के शुरुआती दौर में ही उन्हें सर्जरी से जुड़ी गहन जानकारी भी दी गई। डॉ. माहेश्वरी सर्जरी करने के दौरान विद्यार्थियों से लगातार संवाद करते रहे और उनके सभी सवालों का भी जवाब दिया।

  • लिटिल बुद्धा के छात्रों का हुआ दंत परीक्षण

    लिटिल बुद्धा के छात्रों का हुआ दंत परीक्षण

    संवाददाता– एस. पी. सिंह

    गोरखपुर/सहजनवा ।

    लिटिल बुद्धा स्कूल में दंत समस्या एवं साफ सफाई के प्रति जागरुकता के उद्देश्य से छात्र-छात्राओं के लिए दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन हुआ । जिसमें शहर की प्रसिद्ध दंत चिकित्सक डॉ० ईशा जैन गुलाटी एवं उनकी टीम द्वारा 69 छात्र-छात्राओं का दंत परीक्षण किया गया । दांत स्वस्थ एवं मजबूत रहे इसके लिए क्या खाना चाहिए एवं क्या नहीं खाना चाहिए इससे अवगत कराया गया । छात्र-छात्राओं के साथ आये सभ्रान्त अभिभावकों को संबोधित करते हुए डॉ० गुलाटी ने कहा कि आप अपने दांत का ख्याल अगर शुरुआत से ही करते हैं तो यह आपका लम्बे समय तक साथ देंगे और अगर आपने अत्यधिक चॉकलेट, फास्ट फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक, पैकेट बंद फूड का सेवन किया और अपने दांत की समुचित रूप से साफ सफाई नहीं की तो कम आयु में आपके दांत आपका साथ छोड़ देंगे ।
    संस्था प्रबंधक डॉ० संगीता अग्रवाल ने कहा कि आप अपनी सेहत के प्रति सदैव जागरूक एंव सजग रहे । नियमित दिनचर्या व्यायाम सही खान-पान का उपयोग करें और कम से कम टी०वी० एवं मोबाइल का प्रयोग करें । अगर आप अपनी ऊर्जा एवं समय टी०वी० एवं मोबाइल में ही लगा देंगे तो आपके जीवन में निर्धारित लक्ष्य अधूरे रह जाएंगे । संस्था की प्राचार्य साहिस्ता खान ने उपस्थित अतिथि एवं अभिभावकों का स्वागत कर धन्यवाद ज्ञापित किया । कार्यक्रम में ममता मिश्रा, नजमा, नेहा यादव, सबा, प्रिया भारती, इत्यादि लोगो कि अहम भूमिका रही ।

  • शिविर में चयनित हुए दिव्यांग

    शिविर में चयनित हुए दिव्यांग

     

    ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
    बड़हलगंज/ गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे) : प्रदेश के दिव्यांगों को सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सुगम और आसान बनाने हेतु सोमवार को शासन के निर्देश पर बड़हलगंज के अंबेडकर तिराहे पर एक शिविर का आयोजन किया गया जिसमें उपकरण हेतु 49 लाभार्थी चयनित किए गए। शिविर को संबोधित करते हुए चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए सभी को शिविर में किए जाने वाले कार्यों और योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मानवता के नाते हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपने आसपास किसी पात्र व्यक्ति को सरकार की योजना का लाभ दिलाएं।पुनर्वास अधिकारी राजेश कुमार यादव तथा विशेष शिक्षक नागेन्द्र पांडेय ने कहा कि सरकार के द्वारा दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध करवाने को लेकर शिविर में चिह्नीकरण किया गया है। इन्हें इनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने विभाग द्वारा दिव्यांग जनों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। शिविर में 49 दिव्यांगों का योजनाओं के लिए पंजीकरण किया गया। इस अवसर पर विधायक चिल्लूपार प्रतिनिधि आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी, प्रशांत शाही, बनवारी प्रसाद,मानस मणि त्रिपाठी, दीपक शर्मा, दीपक गौंड, राकेश राय, रमेश शाही, सुग्रीव यादव, अखण्ड प्रताप शाही, गंगा सागर शाही, सुरेश उमर आदि उपस्थित रहे।

  • सशस्त्र सीमा बल द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

    सशस्त्र सीमा बल द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

    गोरखपुर: सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के प्रशिक्षु प्रशिक्षण केंद्र एवं संयुक्त चिकित्सालय द्वारा दिनांक 18 नवंबर 2024, दिन सोमवार को Composite Hospital SSB, गोरखपुर में एक रक्तदान शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज के सहयोग से किया गया।

    इस शिविर में एसएसबी के कार्मिकों और प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा स्वेच्छा से रक्तदान किया। इस आयोजन का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाना था।

    कार्यक्रम के दौरान एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित होकर रक्तदान करने वाले जवानों का उत्साहवर्धन किया और इस नेक कार्य को समाज सेवा का उत्तम उदाहरण बताया। बाबा रघवदास मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और स्टाफ ने इस शिविर के आयोजन में सहयोग प्रदान किया और रक्त संग्रह का कार्य सुचारू रूप से संपन्न किया।

    सशस्त्र सीमा बल की यह पहल समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी और सेवाभाव को दर्शाती है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने रक्तदान के महत्व को समझा और भविष्य में इस कार्य में अपना योगदान देने की प्रेरणा प्राप्त की।

    शिविर के अंत में एसएसबी अधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का सफल समापन सभी के सहयोग और सेवाभाव के साथ हुआ।

    आकस्मिक समय में रक्तदान के लिए संपर्क करें:
    सशस्त्र सीमा बल,
    प्रशिक्षु प्रशिक्षण केंद्र एवं संयुक्त चिकित्सालय,
    गोरखपुर।