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  • एम्स गोरखपुर में मेडिकल एवं क्लीनिकल उपयोग में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न

    एम्स गोरखपुर में मेडिकल एवं क्लीनिकल उपयोग में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न

    एम्स गोरखपुर के मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) द्वारा 14 सितम्बर 2025 को “मेडिकल एवं क्लीनिकल उपयोग में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन बहुउद्देश्यीय हॉल, ऑडिटोरियम में किया गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की नींव एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता द्वारा रखी गई।

    इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा, रोग-निदान, रोगी-देखभाल तथा अनुसंधान में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका और संभावनाओं पर प्रकाश डालना था, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में उभरती हुई तकनीकों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

    कार्यशाला में देश के प्रमुख संस्थानों से आए विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया, जिनमें डॉ. पार्था हलदार (एम्स नई दिल्ली), डॉ. अमित मेहंदीरत्ता (आईआईटी दिल्ली), डॉ. तवप्रीतेश सेठी (आईआईआईटी दिल्ली), डॉ. देवासेनाथिपति के (एम्स नई दिल्ली), डॉ. प्रियंका बगाड़े (आईआईटी कानपुर), डॉ. तनु आनंद (स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग), डॉ. राम शंकर रथ तथा डॉ. मोहन राज (एम्स गोरखपुर) शामिल थे।

    दिनभर चले तकनीकी सत्रों में एआई की बुनियादी अवधारणाओं, चिकित्सा इमेजिंग, हॉस्पिटल रिसोर्स मैनेजमेंट, एथिकल गवर्नेंस तथा एआई-आधारित शोध प्रोटोकॉल डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोपहर बाद आयोजित पैनल चर्चा “AI in Health Care Service and Research: Opportunities, Challenges, and Ethical Concerns” में विशेषज्ञ पैनलिस्टों ने चिकित्सा क्षेत्र में एआई के अवसरों तथा चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

    इस कार्यशाला का सफल आयोजन एमआरयू टीम के सहयोग से हुआ, जिसमें विशेष योगदान डॉ. आनंद मोहन दीक्षित (नोडल अधिकारी, एमआरयू), डॉ. चारुशीला रुकड़िकर (सह-नोडल अधिकारी, एमआरयू) तथा कार्यकारी सदस्य डॉ. सौरभ केडिया, डॉ. अतुल आर. रुकड़िकर और डॉ. मोहन राज पी.एस. का रहा।

    यह आयोजन चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में अत्याधुनिक तकनीक को समाहित करने की दिशा में एम्स गोरखपुर की एक ऐतिहासिक पहल साबित हुआ।

  • जटिल-दुर्लभ कैंसर का इलाज और गोरखपुर में भी संभव

    जटिल-दुर्लभ कैंसर का इलाज और गोरखपुर में भी संभव

    “कन्याकुमारी से आया मरीज, एमजीयूजी के हॉस्पिटल में हुई दुर्लभ कैंसर की सफल सर्जरी”

    “जटिल थी बीमारी, 76 साल के मरीज के रेयर पैरोटिड ग्लैंड कैंसर को हटाने में मिली सफलता”

    “विश्व प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी के नेतृत्व में हुआ ऑपरेशन”

    गोरखपुर, 5 अगस्त। कैंसर पीड़ितों को अब दुरूह सर्जरी के लिए मुंबई या अन्य बड़े महानगरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। जटिल और दुर्लभ कैंसर का इलाज अब गोरखपुर के महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में ही हो जाएगा। कम समय में ही एक के बाद कैंसर की सफल सर्जरी करने वाले इस चिकित्सालय में कन्याकुमारी से आए बुजुर्ग मरीज का विश्व प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी के नेतृत्व वाली मेडिकल टीम ने ऑपरेशन कर रेयर पैरोटिड ग्लैंड कैंसर को सफलतापूर्वक हटाया है। यह चिकित्सालय जटिल कैंसर सर्जरी करने वाले देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल हो गया है।

    एमजीयूजी के परिसर में पिछले साल इसके संबद्ध मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की 100 सीटों की मान्यता मिलने के साथ ही परिसर में महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय भी पूर्ण रूप से क्रियाशील है। अनेक अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त इस चिकित्सालय में दुनिया के जाने-माने कैंसर सर्जन और एमपी बिरला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय माहेश्वरी की सेवा भी मिलती है। बकौल डॉ. माहेश्वरी महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में पिछले कुछ महीनों से हो रहे कैंसर के इलाज की जानकारी सुदूर दक्षिण भारत के कन्याकुमारी निवासी 76 वर्षीय एक मरीज को भी हुई थी। (निजता के कारण मरीज के नाम का उल्लेख नहीं किया जा रहा है)। उसकी लार ग्रंथि में जटिल और दुर्लभ रूप से पाए जाने वाले कैंसर की बीमारी थी। वह कई जगह इलाज कराने के बाद एक नया विश्वास लेकर एमजीयूजी परिसर के महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय आया था।

    कन्याकुमारी से आए इस मरीज का गत दिनों सुप्राहायॉइड ब्लॉक विच्छेदन के साथ आरटी साइडेड रेयर पैरोटिड ग्लैंड कैंसर को हटाने के लिए एक जटिल कैंसर की सफल सर्जरी की गई। सर्जरी करने वाली टीम का नेतृत्व डॉ. संजय माहेश्वरी ने किया जबकि इस मेडिकल टीम में डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. तिवारी, डॉ. नेहा, ओटी व अन्य स्टाफ शुभ, दीपक, रवि, रघुराम आदि शामिल रहे। महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में दुर्लभ किस्म के जटिल कैंसर की सफल सर्जरी पर एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह, कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने प्रसन्नता की है। कुलपति ने कहा है कि कन्याकुमारी से आए मरीज का सफल इलाज यह दर्शाता है कि इस चिकित्सालय की ख्याति पूरे देश में विस्तारित हो रही है। गौरतलब हो कि पूर्व में इस चिकित्सालय में कैंसर की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (एमआरएम) सर्जरी भी सफलतापूर्वक हो चुकी है।

    देश के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र तक के मरीजों का ससम्मान इलाज

    महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय उत्तर प्रदेश के साथ ही देश के अन्य राज्यों के मरीजों के लिए भी विश्वास का बड़ा केंद्र बन रहा है। यहां देश के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र तक के मरीजों का भावपूर्ण स्वागत और ससम्मान इलाज हो रहा है। कन्याकुमारी से आए मरीज के इलाज से पहले गुवाहाटी के एक आईआईटी छात्र का भी सफल इलाज हो चुका है।

    सीएम योगी के विजन से मेडिकल हब बन रहा गोरखपुर : डॉ. माहेश्वरी

    सुविख्यात कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गोरखपुर देश का ऐसा मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है जहां भौगौलिक सीमाओं से परे लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। सीएम योगी की देखरेख में सरकारी क्षेत्र के साथ ही महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में चिकित्सा की विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।

  • जिले को कैंसर से बचाने के लिए चलेगा वृहद अभियान, एम्स गोरखपुर में विशेषज्ञों का हुआ अभिमुखीकरण

    जिले को कैंसर से बचाने के लिए चलेगा वृहद अभियान, एम्स गोरखपुर में विशेषज्ञों का हुआ अभिमुखीकरण

    “एम्स गोरखपुर, स्वास्थ्य विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज व श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज मिल कर करेंगे प्रयास”

    “हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल और गोरखपुर विश्वविद्यालय भी बने सहयोगी”

    गोरखपुर। जिले को कैंसर की महामारी से बचाने के लिए वृहद अभियान चलने जा रहा है। इसकी शुरुआत एम्स गोरखपुर में जिले की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के अभिमुखीकरण के साथ हो गई। इन विशेषज्ञों का सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर को लेकर बुधवार को अभिमुखीकरण किया गया। इसी क्रम में जिले की सभी महिला चिकित्सा अधिकारियों का सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और ओरल कैंसर के साथ साथ मधुमेह और उच्च रक्तचाप को लेकर अभिमुखीकरण दो दिनों तक एम्स गोरखपुर में ही किया जाएगा। गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि जिले को कैंसर से बचाने के लिए एम्स गोरखपुर, स्वास्थ्य विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज, हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल और गोरखपुर विश्वविद्यालय साथ-साथ मिल कर काम करेंगे।

    एम्स गोरखपुर में वहां के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ शिखा सेठ, विषय विशेषज्ञ डॉ अनुपमा और श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज व एम्स दिल्ली के वरिष्ठ सर्जन डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने जिले की गाइनकॉलजिस्ट को प्रशिक्षित किया।

    सीएमओ डॉ झा ने बताया कि चिकित्सा अधिकारियों को शीघ्र ही कैंसर स्क्रिनिंग को लेकर हैंड्स ऑन ट्रेनिंग भी दी जाएगी। आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण सीएचओ और एएनएम स्तर तक भी दिया जाएगा। इसके बाद समुदाय स्तर पर ब्रेस्ट और ओरल कैंसर की स्क्रिनिंग होगी। सर्वाइकल कैंसर की जांच की भी व्यवस्था की जा रही है। स्क्रिनिंग में जो भी संभावित मरीज निकलेंगे उनका आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा केंद्र में इलाज होगा। उद्देश्य यह है कि कैंसर का प्राथमिक अवस्था में ही पता चल जाए ताकि बिना जटिलता बढ़े समय रहते उसे ठीक किया जा सके। अभी यह प्रवृत्ति देखी जा रही है कि कैंसर के मरीज काफी देरी के बाद अस्पताल आते हैं जिसकी वजह से मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है और तमाम जटिलताएं भी पैदा हो जाती हैं।

    डॉ झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने एक पिंक कार्ड तैयार किया है। जिन महिलाओं की हेल्थ स्क्रिनिंग होगी उनके स्वास्थ्य का प्राथमिक विवरण और कैंसर स्क्रिनिंग सम्बन्धित विवरण भी इस कार्ड में दर्ज किया जाएगा ताकि संदर्भन की स्थिति में इलाज में सुविधा हो । कैंसर स्क्रिनिंग के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग का जोर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने में है। इसी कड़ी में चार सदस्यों वाली दस टीमें भी बनाई गई हैं जिनमें चिकित्सक, शिक्षक व अन्य सदस्य होंगे। यह टीमें जिले के सभी कॉलेज में कैंसर सहित विभिन्न स्वास्थ्य मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करेंगी। हमारा लक्ष्य जागरूकता का ऐसा वातावरण पैदा करना है कि एक तरफ लोग बीमारी से बच सकें और दूसरी तरफ बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही लोग इलाज के लिए खुद आगे आ जाएं।

    इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज आनंद मौजूद रहे।

    “हो चुकी हैं कई बैठकें”

    सीएमओ ने बताया कि कैंसर के मुद्दे पर काम करने वाले संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों की कई चरणों में बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों के जरिये बनी रणनीति के क्रम में विशेषज्ञों के अभिमुखीकरण से शुरुआत हो चुकी है। शीघ्र ही ग्राउंड लेवल की गतिविधियां भी शुरू कर दी जाएंगी।

  • 2 मई 2025 11 AM को शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में एडवांस पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी का कैंप

    2 मई 2025 11 AM को शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में एडवांस पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी का कैंप

     दिल्ली फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर तथा पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के विभाग अध्यक्ष डॉ नीरज अवस्थी आयेंगे .

    इकोकार्डियोग्राफी के साथ हृदय से संबंधित अन्य जांचे होंगी, जो 50% डिस्काउंट पर होंगी. जिन बच्चे में हृदय के ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ेगी उसे निशुल्क कराया जाएगा.

    बच्चों में हृदय की बीमारी का ऑपरेशन काफी महंगा पड़ता है अतः इसकी मदद के लिए मुख्यमंत्री निधि ,संसध निधि ,के साथ अन्य सामाजिक संगठन के सहयोग से किया जाता है . पुज्य योगी आदित्य नाथ जी महाराज माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के जनता दरबार में अभी तक जो भी गया है उसे कुछ न कुछ सहायता मिला है , पैसे के अभाव मे अभी तक किसी का इलाज नहीं रुका है .

    अगर आपके आस पास कोई भी , बच्चा दिल की बीमारी से पीड़ित हो तो उसे शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में जरूर भेजे।

    News courtesy : डॉ॰ शिवशंकर शाही, निदेशक, शाही ग्लोबल हॉस्पिटल तारामंडल, गोरखपुर.

  • दस्तक अभियान और टीकाकरण की स्थिति जानने को गांव की गलियों में उतरे सीएमओ

    दस्तक अभियान और टीकाकरण की स्थिति जानने को गांव की गलियों में उतरे सीएमओ

    “धूप और लू को देखते हुए समय से नियमित टीकाकरण सत्र शुरू करने की हिदायत दी”

    “हरसेवकपुर आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहुंच कर उपलब्ध सेवाओं को परखा”

    गोरखपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने दस्तक अभियान और नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की स्थिति का जायजा लेने के लिए शनिवार को अचानक चरगांवा ब्लॉक के छोटी जमुनहिया गांव का दौरा किया। वह गांव की गलियों में दस्तक अभियान की हकीकत परखते हुए सीधे नियमित टीकाकरण सत्र स्थल पहुंच गये। वहां एएनएम और अन्य सहयोगियों को निर्देश दिया कि गर्मी, धूप और लू को देखते हुए सुबह समय से सत्र शुरू किया जाए ताकि अधिकाधिक बच्चों और गर्भवती को लाभ मिल सके। इससे पहले वह हरसेवकपुर आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहुंचे और वहां उपलब्ध प्रत्येक सेवा की जानकारी ली।

    हरसेवकपुर आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) पूजा मिश्रा से सीएमओ ने सभी दवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। सीएचओ ने उन्हें बताया कि केंद्र पर बारह प्रकार की बीमारियों के लिए स्क्रीनिंग होती है और मरीजों के लिए 58 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। प्रतिदिन सात से आठ मरीजों को टेलीकंसल्टेशन के जरिये विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह दिलाई जाती है। सीएमओ ने अपने सामने ई कवच पर फीडिंग करवा कर देखा और उपलब्ध रिकॉर्ड एवं सीबैक फार्म की जांच की।

    अचानक सीएमओ ने नियमित टीकाकरण सत्र देखने के लिए कहा और छोटी जमुनहियां गांव चल पड़े। गांव पहुंचने के बाद उन्होंने ग्रामीणों से दस्तक अभियान के बारे में बात की। वह एक ग्रामीण के घर पहुंचे जहां पंद्रह वर्ष से कम उम्र का बच्चा मौजूद था। उन्होंने ऐसे घरों पर लगाए जाने वाले स्टीकर को देखा और बच्चे के पिता से उसके स्वास्थ्य के बारे में पूछा। उन्होंने उस परिवार को बताया कि अगर बच्चे को कभी भी बुखार आए तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध प्रशिक्षित चिकित्सक से ही इलाज कराएं। तेज बुखार होने पर अस्पताल जाने के लिए 108 नंबर एम्बुलेंस सेवा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद वह गांव में नियमित टीकाकरण सत्र स्थल पर पहुंचे जहां एएनएम को हिदायत दी कि मौसम को देखते हुए सत्र समय से शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने सत्र स्थल पर उपलब्ध दवाओं, टीकों और उपकरणों की जांच की। ड्यू लिस्ट देखा और कहा कि घर घर यह संदेश पहुंचाएं कि बच्चे को जन्म से पांच साल की उम्र तक सात बार नियमित टीका लगना जरूरी है। एक भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न हो पाए।

    इस अवसर पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा, डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय, एचईओ मनोज कुमार, बीसीपीएम चंद्रशेखर यादव, आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम मौजूद रहीं।

  • महापौर ने जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी, संचारी रोग नियंत्रण अभियान का आगाज

    महापौर ने जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी, संचारी रोग नियंत्रण अभियान का आगाज

    “एक माह तक ग्यारह विभाग मिल कर चलाएंगे अभियान, दस अप्रैल से घर घर होगी दस्तक”

     

    गोरखपुर। जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान का मंगलवार से आगाज हो गया। महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखा कर इस अभियान का शुभारंभ किया। एक माह तक चलने वाले इस अभियान के दौरान ग्यारह विभाग आपस में मिल कर संचारी रोगों की रोकथाम संबंधी गतिविधियों करेंगे। वहीं, दस अप्रैल से तीस अप्रैल तक स्वास्थ्य टीमें घर घर जाकर दस्तक देंगी और बीमारियों के प्रति जागरूकता के साथ साथ बुखार, टीबी, कुष्ठ, फाइलेरिया आदि के संभावित मरीजों को सूचीबद्ध करेंगी। जिले में हर साल चल रहे इस अभियान के कारण वर्ष दो हजार इक्कीस से लेकर अब तक जापानीज इंसेफेलाइटिस से कोई भी मौत नहीं हुई है।

    महापौर ने उपस्थित चिकित्सा अधिकारियों, नर्सिंग स्टॉफ और अन्य कर्मियों को संचारी रोगों से लड़ने में योगदान देने की शपथ भी दिलाई। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप पूरे जिले में एक माह तक संचारी रोगों से बचाव की गतिविधियां चलाई जाएंगी। साथ ही बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए संभावित मरीजों को ढूंढा जाएगा। उनकी जांच होगी और बीमारियों का इलाज भी किया जाएगा। एक माह के अभियान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, नगर विकास, पंचायती राज व ग्राम्य विकास, पशुपालन, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, कृषि एवं सिंचाई, सूचना और उद्यान विभाग संचारी रोगों के नियंत्रण की गतिविधियां चलाएंगे।

    इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एके चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान आभा आईडी भी बनाई जाएगी। हीट रिलेटेड इलनेस के बारे में जागरूकता लाई जाएगी और मच्छरों के घनत्व का पता लगा कर प्रभावी नियंत्रण के उपाय किये जाएंगे। नाले नालियों की सफाई, स्कूलों में जागरूकता, झाड़ियों की सफाई, चूहा व छछुंदर और सुकरबाड़ों का प्रबंधन, फॉगिंग, मच्छर विकर्षी पौधों का रोपण और कुपोषित बच्चों की पहचान जैसे अलग अलग कार्य शासनादेश के अनुसार अलग अलग विभाग समन्वय बना कर करेंगे।

    सीएमओ ने बताया कि जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ राजेश, जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह और जेई एईएस कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह समेत जिला मलेरिया विभाग की टीम व अन्य अधिकारीकरण स्वास्थ्य विभाग की तरफ से समन्वय स्थापित करेंगे। सभी विभागों को प्रतिदिन की गतिविधियों का चित्र व वीडियो आदि साझा करने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग नोडल की भूमिका में है।

    इस मौके पर एसीएमओ डॉ नंदलाल कुशवाहा, डॉ विनय पांडेय, डीटीओ डॉ गणेश यादव, डिप्टी सीएमओ डॉ अनिल सिंह, डीएचईआईओ केएन बरनवाल, विश्व स्वास्थ्य संगठन से डॉ विनय, यूनिसेफ से संदीप श्रीवास्तव, डॉ हसन फहीम, मलेरिया निरीक्षक प्रभात, राहुल, नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारीगण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से उपेंद्र मणि त्रिपाठी, धर्मवीर प्रताप, एएन मिश्रा, आदिल, अरविंद, रत्नाकर आदि प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

    “नियंत्रित हुईं बीमारियां”

    सीएमओ डॉ चौधरी ने बताया कि इस वर्ष जिले में एईएस के छह मामले मिले हैं। जापानीज इंसेफेलाइटिस का कोई केस नहीं मिला है। डेंगू के अठारह मरीज सामने आए और सभी ठीक हो चुके हैं। मलेरिया, फाइलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियों के एक भी रोगी नहीं मिले हैं। संचारी रोगों के कारण इस वर्ष अभी तक किसी की मृत्यु नहीं हुई है।

     

  • टीबी उन्मूलन के नवाचारों और रणनीतियों पर हुआ मंथन

    टीबी उन्मूलन के नवाचारों और रणनीतियों पर हुआ मंथन

    “दस जिलों की राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम इकाइयों को दिया गया प्रशिक्षण”

    गोरखपुर। वर्ष दो हजार पचीस के अंत तक गोरखपुर और आसपास के जिलों में टीबी उन्मूलन की प्रभावी रणनीति को लागू करने के लिए शहर के एक निजी होटल में शुक्रवार को देर शाम तक मंथन किया गया। इस मौके पर दस जिलों की राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम इकाइयों को प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान टीबी उन्मूलन की आधुनिकतम प्रक्रियाओं, नवाचारों और रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन आरटीपीएमयू गोरखपुर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला क्षय रोग केंद्र (डीटीसी) और स्टेट टीबी एसोसिशएन के समन्वित प्रयासों से हुआ।

    अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण डॉ बीएम राव, संयुक्त निदेशक डॉ अरूण गर्ग, गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अरूण कुमार चौधरी, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव और बीआरडी मेडिकल कॉलेज से आए विशेषज्ञ व उपाध्यक्ष स्टेट टीबी फोरम डॉ अश्विनी मिश्रा ने प्रमुख अतिथियों के तौर पर कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में आरटीपीएमयू गोरखपुर के तहत आने वाले सभी दस जिलों के जिला क्षय उन्मूलन अधिकारियों और उप जिला क्षय उन्मूलन अधिकारियों समेत स्टॉफ ने प्रतिभाग किया।

    गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और स्टेट टीबी एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि यह प्रशिक्षण टीबी के संक्रमण दर को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसका उद्देश्य नये टीबी रोगियों को खोजने और उनका समय से उपचार करने के आधुनिकतम तौर तरीकों से परिचित कराना था।

    गोरखपुर के जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव ने बताया कि प्रशिक्षण में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञ डॉ अमरेश कुमार सिंह, डॉ अनुराग शुक्ला, डॉ नेहा कपूर, डॉ हरीश तिवारी, डॉ एएन त्रिगुण, डॉ अजीत यादव, डॉ राहुल सरीन, डॉ शिवम पांडेय, डॉ नाबिल और डॉ एनके द्विवेदी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। यह आयोजन राज्य टीबी अधिकारी, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा और मिशन निदेशक के निर्देश पर किया गया। कार्यक्रम का संचालन एसटीडीसी गोरखपुर की चिकित्सा अधिकारी डॉ अभिलाषा श्रीवास्तव ने किया।

    गोरखपुर के उप जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, मनीष गुप्ता, अभय नारायण मिश्रा, राकेश कुमार सिंह, डीपीसी गोरखपुर धर्मवीर प्रताप सिंह और श्वेता समेत गोरखपुर जिला क्षय रोग केंद्र के सभी स्टॉफ ने आयोजन में विशेष योगदान दिया।

    “छिपाने से नहीं उपचार से ठीक होता है टीबी”

    सीएमओ डॉ दूबे ने बताया कि भय और भ्रांति के कारण नये टीबी मरीज सामने नहीं आते हैं जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। एक गैर उपचाराधीन टीबी मरीज एक वर्ष में दस से पंद्रह स्वस्थ लोगों को टीबी से संक्रमित कर देता है। वहीं, अगर समय से टीबी का उपचार शुरू हो जाए तो तीन से चार हफ्ते बाद उपचाराधीन मरीज से संक्रमण की आशंका नहीं रह जाती है। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों तक सही संदेश पहुंचा कर भेदभाव और कलंक की दुर्भावना को समाप्त करना है ताकि टीबी का उन्मूलन किया जा सके।

    “चल रहा है अभियान”

    सीएमओ ने बताया कि ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एक्शन अगेंस्ट स्टिगमा (आस) अभियान के जरिये टीबी उन्मूलन के लिए जनजागरूकता की मुहिम चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य बीमारी के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना है।

  • दवा खाएं नहीं होगा फाइलेरिया: डॉ प्रदीप त्रिपाठी

    दवा खाएं नहीं होगा फाइलेरिया: डॉ प्रदीप त्रिपाठी

    “खजनी चिकित्सा प्रभारी डॉ प्रदीप त्रिपाठी द्वारा फाइलेरिया किट वितरण किया गया”

    ब्यूरो प्रभारी- संतोष कुमार त्रिपाठी, खजनी, गोरखपुर।

    खजनी गोरखपुर। खजनी चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर प्रदीप त्रिपाठी के द्वारा आज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खजनी में फाइलेरिया किट का वितरण किया गया फाइलेरिया बीमारी को आम बोलचाल की भाषा में हाथी पांव की बीमारी भी कहा जाता है। इस बीमारी के रोकथाम के लिए प्रतिवर्ष फाइलेरिया की दवा खानी होती है,जो कि 5 सालों तक निरंतर खाने से फाइलेरिया की बीमारी से बच सकते हैं।घाव की कैसे देख भाल करें इसके बारे में बताया गया ।

    खजनी चिकित्सा प्रभारी डॉ प्रदीप त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में फाइलेरिया रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए तींस की संख्या में फाइलेरिया मरीजों को किट का वितरण किया गया। इस अवसर पर अशोक सिंह,डी एन सिंह, के एम सिंह,सी पी राय, खुश मोहम्मद अंसारी, शौकीन अहमद, बैजनाथ,अन्य संबंधित कर्मचारी एवं संबंधित ग्राम की आशाएं उपस्थिति रही।

  • टी बी मुक्त भारत अभियान मे रेडक्रास की अहम भूमिका:आनंदी बेन पटेल

    टी बी मुक्त भारत अभियान मे रेडक्रास की अहम भूमिका:आनंदी बेन पटेल

    “टी बी मुक्त भारत अभियान मे रेडक्रास की अहम भूमिका:आनंदी बेन पटे”

    “महामहिम ने रक्तदान प्रभारी ज्ञानेन्द्र ओझा सहित 8 को सामाजिक कार्यों के लिए किया सम्मानित”

    गोरखपुर। टी बी मुक्त भारत अभियान मे प्रबुद्ध वर्ग की नैतिक जिम्मेदारी तो है ही वहीं इस लोक कल्याण कार्य मे रेडक्रास की अहम जिम्मेदारी है।

    महा. राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने एनेक्सी सभागार मे रेडक्रास गोरखपुर के तत्वाधान मे 200 क्षय रोग पीड़ितों मरीजों को पोषण पोटली वितरण एवं प्रबुद्ध वर्ग से संवाद कार्यक्रम सम्बोधित करते उन्होंने कही।
    उन्होंने नशा मुक्ति अभियान के साथ ही टी बी मुक्त अभियान को और प्रभावी ढंग से आम जनता में जागरुकता पैदा करे,शत प्रतिशत गोद लिए जाने के बाबत उन्होंने आह्वान किया।
    राज्यपाल ने 200 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की टी बी मरीजों गोद लेने वाले 11 लोगों सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया।

    महासचिव डॉ हेमा बिन्दु नायक ने रेडक्रास के दायित्व के बाबत विस्तार से चर्चा कर रेडक्रास वॉलंटियर्स का उत्साहवर्धन किया।

    सचिव अजय प्रताप सिंह ने रेडक्रास गोरखपुर की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत किया एवं भविष्य की योजनाओं के राज्यपाल महोदया बिंदु वार प्रस्तुत की गयी,
    उपसभापति राज्य शाखा अखिलेन्द्र शाही ने आभार प्रकट कर सभी धन्यवाद ज्ञापित किया।

    गोरखपुर रेडक्रॉस के सभापति शिवेन्द्र विक्रम सिंह ने महामहिम राज्यपाल का स्वागत किया।
    कार्यक्रम का संचालन डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी ने किया।

    रेडक्रास की तरफ 51 सेट पुस्तक बच्चों के लिए राज्यपाल को संरक्षक सदस्य राम जन्म सिंह भेट किया।

    महामहिम राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने रेडक्रॉस के रक्तदान प्रभारी ज्ञानेन्द्र ओझा सहित 5 अन्य को उनके टी बी मुक्त अभियान, रक्तदान आदि सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित किया।
    कार्यक्रम में रेडक्रास के पदाधिकारी विशाल जायसवाल, नागेन्द्र प्रताप सिंह मुन्ना, डॉ भानु प्रताप सिंह, डॉ अवधेश शुक्ल, डॉ प्रियंका यादव, ज्ञानेन्द्र ओझा, संगीता राय, लक्ष्मी प्रजापति, आदित्य निगम इमरान एहसान डॉ राकेश कुमार उमेश चौधरी, राकेश सिंह सहित भारी तादात मे रेडक्रास वॉलंटियर उपस्थित रहे।