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  • “सपा के नेता हो गइला का?” से अखिलेश यादव तक: गोरखपुर में रवि किशन के तंज की सियासी गूंज और जलभराव की स्थायी कहानी

    “सपा के नेता हो गइला का?” से अखिलेश यादव तक: गोरखपुर में रवि किशन के तंज की सियासी गूंज और जलभराव की स्थायी कहानी

    गोरखपुर ब्यूरो , निष्पक्ष टुडे

    रवि किशन के तंज के बाद अखिलेश यादव से मिले विश्वजीत त्रिपाठी, सपा के साथ काम करने की घोषणा


    गोरखपुर। गोरखपुर में भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात और सपा के पक्ष में काम करने के ऐलान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। 16 अक्टूबर को सामने आई तस्वीरों के बाद 17 अक्टूबर की रिपोर्टों में उनके भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम ने सांसद रवि किशन के पुराने तंज—“सपा के नेता हो गइला का?”—को फिर चर्चा में ला दिया है। जिस सवाल को उस समय राजनीतिक कटाक्ष माना गया था, वही अब दल-बदल की खबरों के बीच सियासी संकेत की तरह देखा जा रहा है।

    “सपा के नेता हो गइला का?”: जलभराव से शुरू हुई बात, सियासी बदलाव तक पहुंची

    भारी बारिश के बाद बेतियाहाता वार्ड :- 

    जलभराव की समस्या को लेकर पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने रवि किशन से फोन पर बात की थी। वायरल बातचीत में सांसद ने उनसे पूछा था कि क्या वह सपा में शामिल हो गए हैं। त्रिपाठी ने जवाब दिया था कि जलभराव की समस्या उठाने का मतलब सपा में शामिल होना नहीं है।

    अब अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद वही बातचीत नए राजनीतिक संदर्भ में देखी जा रही है।

    पहले सपा से जुड़े रहे और सपा के टिकट पर पार्षद चुने गए थे। बाद में वह भाजपा में शामिल हुए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने भाजपा में कार्यकर्ताओं के सम्मान, संगठन और स्थानीय समस्याओं को लेकर सवाल उठाए हैं। सहजनवां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावित इच्छा की चर्चा भी है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रवि किशन का सवाल बना सियासी आईना, लेकिन जलभराव का जवाब अब भी बाकी

    दल-बदल और राजनीतिक बयानबाजी के बीच गोरखपुर के नागरिकों की प्राथमिक चिंता अब भी जलभराव और जलनिकासी की समस्या है।

     

    जनप्रतिनिधि यदि अपने क्षेत्र की समस्या उठाता है, तो उसे राजनीतिक निष्ठा से जोड़ने के बजाय समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए। सवाल पूछना किसी दल की सदस्यता का प्रमाण नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की जवाबदेही का हिस्सा है।

    रवि किशन का तंज राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया, लेकिन उस बातचीत की मूल वजह—जलभराव—आज भी गोरखपुर की जमीनी समस्या बनी हुई है। दल बदलते हैं, बयान बदलते हैं और सियासी समीकरण बदलते हैं; मगर बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी और नागरिकों की परेशानी जस की तस रहती है।

    निष्पक्ष टुडे का सवाल: “सपा के नेता हो गइला का?” का जवाब तो सियासत ने दे दिया, लेकिन हर बारिश में जलभराव से जनता को कब राहत मिलेगी?

    निष्पक्ष टुडे — खबर भी, कटाक्ष भी, सवाल भी, जवाबदेही भी।

  • गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के 42वें शपथ ग्रहण समारोह में पत्रकारिता, AI और बदलते मीडिया पर मंथन

    गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के 42वें शपथ ग्रहण समारोह में पत्रकारिता, AI और बदलते मीडिया पर मंथन

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे ;-

    कोरोना के बाद पत्रकारिता पर सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का :- रणविजय सिंह

    गोरखपुर। कोरोना महामारी के बाद पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का पैदा हुआ है। पत्रकारिता का संगठित स्वरूप भी कमजोर हुआ और बाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया।

    यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रणविजय सिंह ने गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के 42वें शपथ ग्रहण समारोह में बतौर सभा अध्यक्ष व्यक्त किए।

    उन्होंने कहा कि पहले पत्रकार समाचार के साथ उसका गंभीर विश्लेषण भी प्रस्तुत करता था, जबकि AI केवल जानकारी देता है, जिसमें कई बार विश्लेषण और विश्वसनीयता का अभाव रहता है। इसका असर पत्रकारिता की साख पर पड़ा है।

    इस अवसर पर रणविजय सिंह ने गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पत्रकारों को शपथ दिलाई।

    कार्यक्रम के दौरान कई पत्रकारों और प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया।सम्मान समारोह में दैनिक स्वतंत्र चेतना के समाचार प्रभारी रविंद्र शर्मा को 42 वर्ष की पत्रकारिता सेवा के लिए स्व. यति वर्मा स्मृति विलक्षण प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया,वहीं गोरखपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाले शूटर मुकीम सिद्दीकी को लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस ढिल्लों स्मृति प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया।इसके अलावा वरिष्ठ हाकर पारसनाथ गुप्ता को स्व. डीके गुप्ता स्मृति प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने कहा कि कोरोना काल में हजारों अखबार बंद हो गए और पत्रकारों की नौकरियां खत्म हो गईं।

    डॉ. रामकृपाल राय ने कहा कि संकट के समय पत्रकार समाज के लिए काम करता रहा, लेकिन कठिन दौर में समाज पत्रकारों के साथ खड़ा नहीं हुआ।

    पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ पंकज सिंह ने कहा कि कोरोना की त्रासदी ने हमें आपदा से लड़ना सिखाया है और पत्रकारों को नई तकनीक को अवसर के रूप में अपनाना होगा।

    लोकभारती समूह के संपादक अनाम पांडे ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में हर व्यक्ति खुद को पत्रकार मानने लगा है, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

    दैनिक आज के यूनिट हेड अखिलेश चंद्र ने कहा कि कोरोना की चुनौती का समाधान भी पत्रकारों को खुद ही खोजना होगा।
    कार्यक्रम का संचालन मृत्युंजय उपाध्याय नवल ने किया।
    समारोह के अंत में सिंदूर ऑपरेशन में शहीद सैनिकों और दिवंगत पत्रकारों को श्रद्धांजलि दी गई।

    इस अवसर पर गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया शाखा के करीब 200 पत्रकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • सौतेली मां ने 3 साल के मासूम बच्ची को कुल्हाड़ी के काट कर मौत के घाट उतारा

    सौतेली मां ने 3 साल के मासूम बच्ची को कुल्हाड़ी के काट कर मौत के घाट उतारा

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे ;-

    सर को धड़ से किया अलग।

    पति घर के बाहर फोन पर कर रहा था बात पत्नी ने घर के अंदर घटना को दिया अंजाम।

    बच्ची के लाश के पास सिंदूर से लगा था टीका, होता था पूजा पाठ जिससे तंत्र मंत्र का भी है आशंका

    पहली पत्नी के मौत के बाद 25 जनवरी 2026 को दूसरी शादी कर घर लाया था पति ,पहली पत्नी से थी तीन साल की मासूम।पिपराइच थाना क्षेत्र के इमलिया उर्फ विजहरा की है ये दर्दनाक और शर्मनाक  घटना,महिला घटना को अंजाम देने के बाद घर से भाग रही थी।गांव के लोगों ने दौड़ाकर किसी तरह पकड़ा पुलिस को सौंपा,रात बारह बजे की है घटना।

     

    रात को ही मौके पर सीओ कैंट थाना प्रभारी पिपराइच मम फोर्स पहुचे।

    गोरखपुर जिले के कुसम्ही* बाजार क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक सौतेली मां ने तीन साल की मासूम बच्ची की कुल्हाड़ी से बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के दौरान महिला ने बच्ची का सिर धड़ से अलग कर दिया, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

    बताया जा रहा है कि घटना इमलिया उर्फ विजहरा गांव, थाना पिपराइच थाना क्षेत्र की है। बुधवार देर रात करीब 12 बजे आरोपी महिला ने घर के अंदर इस वारदात को अंजाम दिया, जबकि उसका पति घर के बाहर फोन पर बात कर रहा था।
    घटना के बाद जब परिजन और आसपास के लोगों ने अंदर का मंजर देखा तो उनके होश उड़ गए। मासूम बच्ची का शव घर में पड़ा था और उसके पास सिंदूर से टीका किया गया था, जिससे तंत्र-मंत्र की आशंका भी जताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला की शादी 25 जनवरी 2026 को हुई थी। पति की पहली पत्नी की मौत हो चुकी थी और उसी पत्नी से तीन साल की यह बच्ची थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद महिला ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया।

    घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी महिला घर से भागने की कोशिश कर रही थी, लेकिन गांव के लोगों ने दौड़ाकर उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

    सूचना मिलते ही रात में ही क्षेत्राधिकारी (सीओ) और थाना प्रभारी पिपराइच पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस आरोपी महिला से पूछताछ कर रही है और हत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।

  • स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन (एसबीएम यू) के तहत नाला प्रबंधनः आवश्कता और अनिवार्यता

    स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन (एसबीएम यू) के तहत नाला प्रबंधनः आवश्कता और अनिवार्यता

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे ;-

    राकेश कुमार भट्ट डेवलपमेंट शहरी स्वच्छता बंधन विशेषज्ञ)

    भारत के शहरीकरण की रफ्तार ने शहरों को चमकदार ऊंची इमारतों से सजा दिया है, लेकिन इसी के साथ जल निकासी की व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ गया है। नाले, जो शहरों की जीवनरेखा हैं, आज प्रदूषण, जलभराव और बाढ़ के कारण अभिशाप बन चुके हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में शहरी क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 61948 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल लगभग 40 प्रतिशत ही उपचारित होता है। शेष लगभग 60 प्रतिशत सीधे नालों में बह जाता है, जो नदियों को विषैला बना देता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हाल ही में लुधियाना के बुद्धा नाला मामले में सख्ती दिखाई है, जहां डाइंग इकाइयों के सीईटीपी से अनुपचारित जल नाले में छोड़ा जा रहा है। यह समस्या केवल एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे महानगरों में आम है।

    स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन (एसबीएम यू) के तहत 2024 तक 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए, जिससे खुले में शौच लगभग 11 प्रतिशत रह गया। लेकिन कचरा प्रबंधन अभी भी चुनौती है। मिशन के आंकड़ों के मुताबिक, 86284 वार्डों में से लगभग 17 प्रतिशत में द्वार-द्वार कचरा संग्रहण हो रहा है, लेकिन स्रोत पृथक्करण केवल लगभग 78 प्रतिशत है। नाले इसी असंगठित कचरे से अवरुद्ध हो जाते हैं। अमृत 2.0 मिशन, जो अक्टूबर 2021 से चल रहा है, ने 500 अमृत शहरों में सार्वजनिक सीवरेज को प्राथमिकता दी है। इसके तहत 3571 जल आपूर्ति, परियोजनाओं को 118421 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली, जिसमें 178 लाख नई टैप कनेक्शन शामिल हैं। फिर भी, नालों का पुनरुद्धार पिछड़ रहा है, जिससे मानसून में बाढ़ आम हो गई है।

    जल जीवन मिशन (जेजेएम) के ‘नल से जल’ अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में 19.22 करोड़ घरों में से लगभग 45.10 प्रतिशत को नल जल दिया है, लेकिन शहरी नालों का प्रबंधन इससे जुड़ा है। मिशन की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीणों की आय में वृद्धि के साथ जल संरक्षण की मांग बढ़ी है, जो शहरी नालों के प्रदूषण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार, अमृत 2.0 ने जल पुनर्चक्रण, हरित पार्क और जलाशय पुनरुद्धार पर जोर दिया है। फिर भी, 2025-26 के आंकड़े चिंताजनक हैं, देश की 4000 से अधिक शहरों में नालों से निकलने वाला लगभग 30 प्रतिशत जल अनुपचारित नदियों में मिलता है। मुंबई में, ब्रिम्सटन नाला और दिल्ली के नजफगढ़ ड्रेन जैसे उदाहरण एनजीटी में हैं, जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई है।

    नाला प्रबंधन की आवश्कता इसलिए अनिवार्य हो गई है क्योंकि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। प्रदूषित नाले जलजनित रोगों का कारण बनते हैं इझ कोविड के बाद 2025 में डेंगू मलेरिया के 10 लाख मामले नालों से जुड़े पाए गए। आर्थिक नुकसान अरबों में है; 2023 की मुंबई बाढ़ से 5000 करोड़ का नुकसान हुआ। सरकार ने 2026 तक सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को जल सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा है। अमृत मित्र और जल ही अमृत जैसे कार्यक्रम मौजूदा नालों को पुनः उपयोगी बनाने पर केंद्रित हैं। स्वच्छ भारत 2.0 में नाला सफाई को प्राथमिकता दी गई, जिसमें 83435 वार्डों में कचरा संग्रहण 17 प्रतिशत पहुंचा। हैं।

    समाधान के उपाय सरकारी योजनाओं से, आगे बढ़कर तकनीकी नवाचारों पर निर्भर हैं। इन-सीटू उपचार प्रणालियां, जैसे पारिस्थितिक इकाइयों से नाला पुनर्स्थापन (आरईएनईयू), प्रदूषण को स्रोत पर ही रोकती हैं। सीएसआईआर-एनईईआरआई जैसी संस्थाओं ने सिद्ध किया कि ये शून्य ऊर्जा वाली प्रणालियां लगभग 70-85 प्रतिशत प्रदूषण कम करती हैं। नगर निगमों को जीआईएस मैपिंग से नालों की निगरानी करनी चाहिए। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल अमृत 2.0 में सफल रहा, जहां 118000 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत हुई। जन जागरूकता अभियान, जैसे जल शक्ति अभियान, स्रोत पृथक्करण को 90 प्रतिशत तक ले गए।

    हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। अवैध कनेक्शन, औद्योगिक अपशिष्ट और मानसून की अनियमितता नालों को जाम कर देते हैं। एनजीटी ने 2024-25 में 546 ओए में सीपीसीबी को नाला प्रदूषण पर रिपोर्ट मांगी। पंजाब में बुद्धा नाला के लिए उच्च स्तरीय समिति बनी, जिसमें आईआईटी रोपड़ शामिल है। है। केंद्र सरकार ने 2026 तक आय वितरण सर्वेक्षण के साथ जल प्रबंधन को जोड़ा, ताकि गरीब इलाकों में नाले सुधरें।

    नाला प्रबंधन केवल सफाई नहीं, बल्कि समग्र शहरी योजना है। स्वच्छ भारत, अमृत और जेजेएम जैसे मिशनों ने आधार दिया है अब अमल की जरूरत। नगर निगम, पीएसयू और नागरिक मिलकर इसे अनिवार्य बनाएं। स्वच्छ नाले स्वच्छ शहर बनाएंगे, जो वर्तमान सरकार के ‘स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ विजन को साकार करेंगे। यदि नाले सुधरे, तो बाढ़-प्रदूषण की मार कम होगी और जल सुरक्षा सुनिश्चित। समय आ गया है कार्रवाई का, क्योंकि नाला प्रबंधन अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।

  • शिक्षा विभाग के अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर शिक्षक ने की खुदकुशी

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर शिक्षक ने की खुदकुशी

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    चार पेज का लिखा सुसाइड नोट, जांच में जुटी पुलिस

    खुदकुशी से पहले बनाया वीडियो,कहा मेरा 16 लाख रुपए डूब गया मैं मरना नहीं चाहता था, बच्चे पत्नी के लिए जीना चाहता था, मुझे मरने के लिए मजबूर कर दिया गया।

    पत्नी के गहने और बैंक से कर्ज लेकर दिए थे शिक्षा विभाग में नौकरी के लिए रुपये

    पादरी बाजार (गोरखपुर)।

    गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड निवासी एक शिक्षक ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के प्रताड़ना से तंग आकर खुदकुशी कर ली। शिक्षक खुदकुशी के पहले चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो बनाया था, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर रुपये को लेकर गंभीर आरोप लगाया है।

    जानकारी के मुताबिक, कुशीनगर जनपद के कुबेर स्थान स्थित हरैया निवासी कृष्ण मोहन सिंह (37) अपने बड़े भाई गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड निवासी अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। वह तीन भाइयों में बीच के थे। उनके बड़े भाई विदेश में रहते हैं जबकि छोटा भाई घर रहता हैं। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह के दो मासूम बच्चे हैं। शिक्षक ने देवरिया शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए चार पेज की सुसाइड नोट लिखा एक वीडियो बनाया था। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने रुपये के लिए शिक्षक को बुलाकर काफी जलील और अपमानित किया था। जिसे बर्दाश्त नहीं कर पाया और आहत होकर शनिवार की सुबह 6:30 बजे करीब शिक्षक कमरे मे फंदे से लटक कर खुदकुशी कर ली। परिजनों को जानकारी होते ही शोर मचाते हुए दरवाजा तोड़ा और पुलिस की सूचना दी। पुलिस मौके पहुंची और फंदे से उतार कर एंबुलेंस जिला अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों ने देखते ही मृत्यु घोषित कर दी। घटना के बाद पत्नी और मासूम बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है। पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी।

  • होली, रमजान व ईद को लेकर नखास चौकी पर शांति समिति की बैठक

    होली, रमजान व ईद को लेकर नखास चौकी पर शांति समिति की बैठक

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे ;-

    अतिक्रमण न करने व यातायात व्यवस्था सुचारू रखने की अपील

    गोरखपुर। आगामी होली, रमजान और ईद पर्व को सकुशल एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से नखास चौकी परिसर में प्रभारी निरीक्षक अवधेश तिवारी की अध्यक्षता में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों समुदायों के संभ्रांत नागरिकों व जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    बैठक के दौरान त्योहारों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था, आपसी सौहार्द एवं यातायात संचालन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रभारी निरीक्षक ने उपस्थित लोगों से संभावित समस्याओं और सुझावों की जानकारी ली। इस दौरान किसी प्रकार के विवाद की सूचना प्रकाश में नहीं आई। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पर्वों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

    विरासत गलियारा के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्य के कारण आवागमन प्रभावित होने की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए गली-मोहल्लों के मोड़ों पर अतिक्रमण न करने तथा यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की गई।

    बैठक में नखास चौकी इंचार्ज दुर्गेश कुमार वैश्य, एसएसआई शिवराज सिंह, उपनिरीक्षक भावेश कुमार सिंह, कांस्टेबल मुकेश, कांस्टेबल अजय, पार्षद जियाउल इस्लाम, पार्षद समद गुफरान, पार्षद दिलशाद अहमद सहित दोनों समुदायों के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • 12 साल के मासूम को सरिया के घुसने से मौत ,लापरवाही करने वालो पर गिरी गाज

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    सिस्टम की लापरवाही:

    खुले निर्माणाधीन नाले में साइकिल लेकर गिरा 12 साल का मासूम, पेट में सरिया घुसने से तड़पकर दम तोड़ा, लापरवाहों पर गिरी गाज

    यूपी के गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद भी अधिकारियों की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है. निर्माणाधीन सड़क और नाले के साथ खुले मेनहोल में गिरने से लगातार हो रही।मौतों से लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों की तन्द्रा नहीं टूट रही है, ताजा मामला यूपी के गोरखपुर का है. जहां दो दिन पहले साइकिल सीख रहें 12 साल का एक मासूम खुले नाले के केबिल ट्रंच में साइकिल समेत गिर गया. केबल ट्रंच (तार को रोकने के लिए बनाया गया लोहे का एंगल/छड़/सरिया) पेट में घुसने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया. स्थानीय लोगों ने उसके पिता को सूचना दी. इसके बाद आनन-फानन में उसे लोहे के सरिया से निकाल कर  बीआरडी मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया गया ,जहां डेढ़ घंटे के बाद उसकी मौत हो गई। इस लापरवाही में जीडीए (गोरखपुर विकास प्राधिकरण) के टेक्निकल सुपरवाईजर आदित्य श्रीवास्तव की सेवा समाप्त करते हुए संबंधित अवर अभियन्ता संजय गुप्ता के निलंबन की संस्तुति की गई है। इसके साथ ही मण्डलायुक्त द्वारा इस मामले की जाँच हेतु अपर जिलाधिकारी नगर व मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी के नेतृत्व में एक जाँच कमेटी गठित किया है जो पूरे मामले की जाँच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

    गोरखपुर के चिलुआताल थानाक्षेत्र में 18 फरवरी बुधवार को शाम निर्माणाधीन नाले में 12 साल का मासूम कन्हैया चौरसिया साइकिल सीखते समय गिर गया। खुले निर्माणाधीन नाले में निकला सरिया उसके पेट में घुस गया, जिसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. जहां डेढ़ घंटे बाद उसने तड़पकर दम तोड़ दिया. वह 5वीं क्लास में पढ़ता था. 4 दिन पहले पिता ने उसे साइकिल गिफ्ट की थी. वो साइकिल चलाकर दोस्तों के साथ अपने घर वापस आ रहा था. तभी अचानक साइकिल अनियंत्रित हो गई. वह साइकिल समेत नाले में गिरा, तब नाले (केबिल ट्रंच) में निकला सरिया सीधे उसके पेट में धंस गया. वह सरिया में फंसकर चिल्लाने लगा. आवाज सुनकर आस-पास के लोग आए. लोगाें ने हिम्मत करके सरिया में फंसे बच्चे को किसी तरह बाहर निकालकर सड़क पर लेटा दिया।

    बच्चा सड़क पर ही खून से लथपथ हालत में दर्द से तड़प रहा था. इस दौरान लोग बच्चे से बोल रहे थे कि घबराओ मत ठीक हो जाओगे. फिर आपस में बातें करने लगे. तभी बच्चे के पिता श्याम सुंदर चौरसिया कुछ लोगों के साथ वहां पहुंचे. पिता बच्चे को बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर गए. जहां पर इमरजेंसी में करीब 1 घंटा 30 मिनट तक उसका इलाज चला।

    डॉक्टरों ने काफी कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान कन्हैया की मौत हो गई. जैसे ही बाहर खड़े मां-बाप को खबर मिली, वहां चीख पुकार मच गई. चिलुआताल थाना क्षेत्र के मुड़ीला उर्फ मुंडेरा निवासी श्याम सुंदर चौरसिया के 3 बेटों में कन्हैया सबसे बड़ा है। इससे छोटे भाई 6 साल का शिवा और 8 साल का किशन है. श्याम चौरसिया सब्जी बेचते हैं. उनकी पत्नी साधना हाउस वाइफ हैं. श्याम सुंदर ने बताया कि कन्हैया को साइकिल चलाने का शौक था. वह दूसरे बच्चों से साइकिल मांगता था. तब उसे डांट फटकार सुननी पड़ती थी. यह देखकर अच्छा नहीं लगता था।

    श्याम सुंदर चौरसिया, मृतक का पिता का बयान

    14 फरवरी वेलेंटाइन डे को 2600 रुपए की एक साइकिल खरीदकर कन्हैया को गिफ्ट किया था. श्याम सुंदर चौरसिया ने बताया कि कन्हैया चौरसिया दोस्तों के साथ साइकिल सीख रहा था. 18 फरवरी की शाम करीब 5 बजे दोस्तों के साथ साइकिल चलाने वार्ड नंबर 5 मनबेला, राप्ती नगर विस्तार कॉलोनी के पास गया था. वापस आते समय शाम करीब 5 बजे साइकिल लेकर वह निर्माणधीन नाले में गिर गया. नाले में गिरते समय खड़ी सरिया उसके शरीर में घुस गई. उस समय वो बाजार में सब्जी बेच रहा था. तभी उसे घटना की जानकारी दी गई. घटनास्थल से घर की दूरी भी करीब 1 किमी है, इसलिए वो बाजार से भागते हुए वहां पहुंचा. श्याम सुंदर ने बताया कि कन्हैया सड़क पर दर्द से तड़प रहा था. वहां लोगों ने उसे नाले से बाहर निकाला था. बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर गया, लेकिन वहां उसकी मौत हो गई. श्याम सुंदर ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार ने एक्स्ट्रा लोहे की छड़ नहीं हटाई. साथ ही नाले का ढक्कन भी खुला छोड़ दिया था. इस वजह से ही बच्चे की मौत हो गई।

    GDA  का बयान.

    इस घटना के संबंध में जीडीए (गोरखपुर विकास प्राधिकरण) के उपाध्यक्ष (वीसी) आनंद वर्धन ने बताया कि 18 फरवरी को एक बच्चे के खुले केबिल ट्रंच में गिरने के कारण दु:खद मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई है. गोरखपुर विकास प्राधिकरण के राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के 24 मीटर सड़क के दोनों तरफ भूमिगत केबिल ट्रंच का कार्य कराया गया है, जिसे दिनांक 3 अप्रैल 2023 से प्रारम्भ कराया गया था. 25 जून 2025 को इसे पूरा कर लिया गया. ट्रंच को पूरी तरह से तैयार कर ऊपर से आरसीसी स्लैब ढका गया था. स्लैब हट जाने की वजह से हुए हादसे में 12 साल के बच्चे के गिरने और सरिया पेट में घुसने से मौत हो गई. इस घटना की जांच कराई जा रही है. प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के कारण गोरखपुर विकास प्राधिकरण के टेक्निकल सुपरवाईजर आदित्य श्रीवास्तव की सेवा समाप्त करते हुए संबंधित अवर अभियन्ता संजय गुप्ता के निलंबन की संस्तुति की गई है. परिजनों को हर संभव शासकीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. मण्डलायुक्त द्वारा इस मामले की जाँच हेतु अपर जिलाधिकारी नगर व मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी के नेतृत्व में एक जाँच कमेटी गठित किया है. जो पूरे मामले की जाँच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

  • पार्टी के बहाने बुलाकर युवक की हत्या, गीडा पुलिस ने किया खुलासा

    पार्टी के बहाने बुलाकर युवक की हत्या, गीडा पुलिस ने किया खुलासा

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे ;-

    दो आरोपी गिरफ्तार, वारदात में प्रयुक्त बाइक बरामद; एक अब भी फरार

    गोरखपुर।जनपद में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गीडा थाना पुलिस और एसओजी/स्वाट टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए युवक की हत्या के मामले का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की है, जबकि एक अन्य आरोपी अब भी फरार है।
    पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक उत्तरी ज्ञानेंद्र ने पूरे मामले की जानकारी दी। इस अवसर पर एसपी अपराध सुधीर जायसवाल तथा सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी गीडा अरुण कुमार भी मौजूद रहे।

    पुलिस के अनुसार, वादी ने तहरीर देकर बताया था कि उसका बेटा 6 फरवरी 2026 की शाम घर से निकला था। देर रात तक वापस न आने पर परिजनों ने उसके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन बंद मिला। अगले दिन युवक का शव बरामद हुआ, जिस पर चाकू से वार किए गए थे। घटना के संबंध में थाना गीडा पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

    विवेचना के दौरान पुलिस को आपसी रंजिश की बात सामने आई। साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर पवन कुमार और विजय का नाम प्रकाश में आया। पूछताछ में दोनों अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि पुराने विवाद के चलते उन्होंने मृतक को पार्टी करने के बहाने बुलाया और चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी।

    पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है। मामले में शामिल तीसरा अभियुक्त निखिल कुमार गौड़ उर्फ गोलू उर्फ रितिक फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

    एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनपद में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और फरार आरोपी को भी शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा