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एम्स गोरखपुर में “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” का शुभारंभ
डुमरी खास
रक्तचाप (बी.पी.) की जाँच
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग
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उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन द्वारा “ऑर्थोएज 2025” सम्मेलन का आयोजन
उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन द्वारा “ऑर्थोएज 2025” सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन 13-14 सितंबर, 2025 को कोर्टयार्ड मैरियट होटल, गोरखपुर में किया गया। इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न हिस्सों से लगभग 450 डॉक्टरों ने भाग लिया, जो 12 राज्यों से आए थे। सम्मेलन का मुख्य केन्द्रबिंदु हिप आर्थ्रोप्लास्टी और जटिल आघात प्रबंधन पर था, और इसमें ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र के कई प्रमुख विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और ज्ञान साझा किया।
सम्मेलन के प्रमुख वक्ताओं में डॉ. ए. एस. प्रसाद, डॉ. प्रोफेसर अजय भारती, डॉ. एस. एस. मोहंती, संजय श्रीवास्तव जैसे प्रतिष्ठित ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ शामिल थे। इन डॉक्टरों ने ऑर्थोपेडिक्स में नवीनतम प्रगति , सर्जरी के नए दृष्टिकोण और जटिल उपचार पद्धतियों पर चर्चा की।
डॉ. कुमार केशव, जो हिप रिप्लेसमेंट में एक अग्रणी विशेषज्ञ हैं, ने डायरेक्ट एंटीयर एप्रोच (DAA) पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। इस विधि के लाभों में न्यूनतम चोट, त्वरित रिकवरी, और बेहतर सर्जिकल परिणाम शामिल हैं। उनके द्वारा दी गई जानकारी ने सम्मेलन में उपस्थित चिकित्सकों को हिप रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
इसके अलावा, आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), गोरखपुर के डॉ. प्रोफेसर अजय भारती ने “ऑर्थोपेडिक्स में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इसके उपयोग” पर एक बेहद रुचिकर और जानकारीपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऑर्थोपेडिक उपचार में सटीकता और प्रभावशीलता को बढ़ा सकती है, विशेषकर हिप आर्थ्रोप्लास्टी और आघात प्रबंधन में।
सम्मेलन के दौरान डॉ. ज्ञानेंद्र (ऑर्थोपेडिक्स विभाग, AIIMS गोरखपुर) को पीजी गोल्ड मेडल सत्र में सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुति के लिए स्वर्ण पदक से नवाजा गया, जो उनके उच्च गुणवत्ता वाले शोध को मान्यता प्रदान करने का एक प्रमाण था।
उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन ने इस सम्मेलन के आयोजन से यह साबित कर दिया कि गोरखपुर ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र के रूप में उभर रहा है। आयोजकों ने इस सफलता के लिए सभी उपस्थित चिकित्सकों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में इस प्रकार के और भी बड़े आयोजनों के आयोजन की योजना बनाई है।
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रक्तदान महाअभियान का गोरखपुर के दुसरे दिन एम्म गोरखपुर में 42 यूनिट ब्लड एकत्रित किया गया
“ब्रह्माकुमारीज की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 18वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में रक्तदान अभियान का आयोजन”

एम्स की ई०डी० डॉ विभा दत्ता, विधायक सहजनवां प्रदीप शुक्ला, पूर्व महापौर गोरखपुर, सत्या पाण्डेय डी०आई०जी०, अर.पी.एस.एफ, रजही सहायक कमाण्डेन्ट सुरेंद्र शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर रक्तदान अभियान का एम्स में किया शुभारंभ।
ब्रह्माकुमारीज द्वारा भारत एवं नेपाल में रक्तदान अभियान का हो रहा आयोजन।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के समाज सेवा प्रभाग के अन्तर्गत देशव्यापी रक्तदान अभियान में गोरखपुर में दूसरे दिन तक 136 यूनिट ब्लड एकत्रित हुए।
गोरखपुर। ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 18वीं पुण्यतिथि (25 अगस्त 2025), जिसे विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है, के उपलक्ष्य में संस्थान द्वारा भारत एवं नेपाल में एक विशाल रक्तदान महाअभियान चलाया जा रहा है, जिसके क्रम में आज यहाँ गोरखपुर में दूसरे दिन, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स, गोरखपुर में रक्त दान शिविर का आयोजन किया गया।
ब्रह्माकुमारी मोहद्दीपुर केन्द्र प्रभारी बी०के० पुष्पा, एम्स की ई०डी० डॉ विभा दत्ता, विधायक सहजनवां प्रदीप शुक्ला, पूर्व महापौर गोरखपुर, सत्या पाण्डेय डी०आई०जी०, अर.पी. एस.एफ, रजही सहायक कमाण्डेन्ट सुरेंद्र शर्मा ने एम्म में शिविर का शुभारंभ दादी प्रकाशमणि जी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्जवलित कर किया ।
एम्स में चले रक्त दान अभियान में ब्रह्मामुमारीज संस्थान के भाई-बहनों ने रोडवेज से आये कर्मियों ने आर०पी०एस०एफ० के जवानों ने, एम्स के डाक्टरों एवं अन्य स्थानों से आये हुए लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान अभियान में हिस्सा लिया। ब्रह्माकुमारी संस्थान की समर्पित बहनों ने आज विशेष रूप से रक्तदान अभियान में हिस्सा लिया। बी० के० पारूल, बी०के०अंजू बी० के०अंकिता सहित कई बहनों ने आज रक्त दान किया। आज कार्यक्रम में बी०के० बहादुर, अनुज, अजीत, नारायण, सोनी बहन, सहित, एम्स के डाक्टर्स एवं नसें मौजूद रहे।
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एम्स गोरखपुर में मनाया गया “राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस”
“बुजुर्गों की 360° देखभाल थी इस वर्ष की थीम”

गोरखपुर, 4 अगस्त 2025: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में हड्डी रोग विभाग द्वारा “राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस” (National Bone and Joint Day) पर एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हर वर्ष 4 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिवस मस्कुलोस्केलेटल (हड्डियों एवं मांसपेशियों से जुड़ी) बीमारियों, उनके निदान, रोकथाम और प्रबंधन को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
इस वर्ष की थीम “पुराना ही सोना है” , बुजुर्गों की 360° देखभाल: गतिशीलता, सम्मान और दीर्घायु सुनिश्चित करना* थी, जो वरिष्ठ नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य और उनके सम्मानजनक जीवन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
कार्यक्रम का आयोजन कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) के मार्गदर्शन में हड्डी रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अजय भारती एवं उनकी टीम द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभाग द्वारा ओपीडी परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के लिए निःशुल्क अस्थि घनत्व जांच (Bone Mineral Density Test) की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस, जोड़ों के विकार, पीठ दर्द और बुजुर्गों में हड्डी कमजोर होने जैसी समस्याओं से बचाव के उपायों के बारे में भी परामर्श एवं जानकारी दी गई।
डॉ. अजय भारती ने जानकारी दी कि भारत में 4 अगस्त को राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस मनाने की परंपरा भारतीय अस्थि रोग संघ (Indian Orthopaedic Association) द्वारा आरंभ की गई थी। यह दिन न केवल हड्डियों के स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि गठिया, फ्रैक्चर, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से जनमानस को सतर्क करने का भी अवसर है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जीवनशैली गतिहीन होती जा रही है और खानपान में असंतुलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हड्डियों और जोड़ों की बीमारियाँ युवाओं को भी प्रभावित कर रही हैं। इसलिए आवश्यक है कि उपचार से अधिक बल निवारक देखभाल पर दिया जाए, जिससे एक स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन सुनिश्चित हो सकें ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मरीजों, परिजनों व स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सलाह लेकर लाभान्वित हुए।
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उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर प्रगति करता AIIMS गोरखपुर
संवाददाता: शिशिर श्रीवास्तव
गोरखपुर, 14 मई 2025। आज पत्रकारों से वार्ता करते हुए एम्स की निदेशक और सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने बताया कि AIIMS गोरखपुर को प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत 2016 में प्रस्तावित किया गया था, और चौथे चरण AIIMS के तहत 22 जुलाई 2016 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा इसकी नींव रखी गई थी। तब से यह संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर प्रयासरत है। यह संस्थान 112 एकड़ भूमि पर स्थित है, जिसमे ओपीडी सेवाओं की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई , और पहला MBBS बैच 50 छात्रों के साथ AIIMS जोधपुर के मार्गदर्शन में शुरू हुआ।
अस्पताल और रोगी देखभाल:
संस्थान में 750 बिस्तरों वाला अस्पताल है, जिसमें 500 सामान्य विशेषज्ञता और 250 सुपर-स्पेशलिटी बेड्स हैं। वर्तमान में 550 बिस्तर और 12 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OTs) पूरी तरह से कार्यात्मक हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 2019 में कुछ सौं से बढ़कर अब लगभग 3500-4000 प्रतिदिन हो गई है, जो 1st फेज के AIIMS में सबसे बेहतरीन है और यह न केवल पूर्वी यूपी बल्कि बिहार और नेपाल के लोगों को भी सेवा प्रदान करता है।
गंभीर मामलों के लिए डायलिसिस यूनिट, NICU, PICU, MICU, SICU, ACCU और ट्रॉमा ICU जैसी सुविधाएं पूरी तरह से कार्यात्मक हो चुकी हैं।
कैंसर सर्जरी, जोड़ प्रतिस्थापन (हिप/ घुटना), कोक्लियर इम्प्लांट, फाको, और मैक्सिलो-फेशियल सर्जरी जैसे उन्नत सर्जरी नियमित रूप से की जा रही हैं।हाल ही में 4 नए सुपर-स्पेशलिटी ओपीडी शुरू किए गए हैं –
1. कार्डियोलॉजी,
2. गैस्ट्रोएंटरोलॉजी,
3. पेन मेडिसिन,
4. न्यूरोलॉजी।शैक्षिक उपलब्धियां:
• MBBS पाठ्यक्रम 2019 में 50 सीटों के साथ शुरू हुआ, जिसे अब 125 सीटों तक बढ़ा दिया गया है। पहले बैच (2019) ने मार्च 2025 में अपनी इंटर्नशिप पूरी की। – अगले महीने में उनका दीक्षांत समारोह प्रस्तावित है।
• 2023 में क्लिनिकल ब्रॉड स्पेशलिटी में पोस्ट-ग्रेजुएट (MD/MS) पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई, और वर्तमान में 120 अकादमिक जूनियर रेजिडेंट्स विभिन्न विभागों में काम कर रहे हैं।
• सुपर स्पेशलिटी DM पाठ्यक्रम 2024 में 4 विषयों में शुरू किए गए हैं:
o 1. न्यूनाटोलॉजी,
o 2. पल्मोनरी मेडिसिन,
o 3. साइकीयाट्री और
o 4. पेन मेडिसिन।
• B.Sc. नर्सिंग (60 सीटें/वर्ष) और M.Sc. नर्सिंग (10 सीटें/वर्ष) कार्यक्रम अच्छे से चल रहे हैं।
• Allied Health Sciences के तहत OT, लैब, रेडियोलॉजी तकनीशियनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को 30 सीटों के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, और यह 2025 से शुरू होंगे।
• कुछ विभागों द्वारा संक्षिप्त प्रमाणपत्र और फैलोशिप पाठ्यक्रमों को Standing Academic Committee द्वारा स्वीकृति मिल चुकी है।
वर्तमान में कुल 725 मेडिकल छात्र, 120 पोस्ट-ग्रेजुएट रेजिडेंट्स, 212 नर्सिंग छात्र, 86 सीनियर रेजिडेंट्स और 60 नॉन-अकादमिक जूनियर रेजिडेंट्स AIIMS गोरखपुर में किसी न किसी रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
उन्नत चिकित्सा सेवाओं और प्रशिक्षण विधियों के जोड़ने के साथ, संस्थान में NEET (MBBS और MD/MS के प्रवेश परीक्षा) का ओपनिंग रैंक स्तर अब क्रमशः 1000 और 150 के भीतर आ चुका है।
संस्थान में 29 कार्यात्मक विभाग हैं, जिनमें 115 चिकित्सा और 20 नर्सिंग फैकल्टी सदस्य नियुक्त हैं, जो पूरे भारत से आकर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
आज, रोग रोकथाम और तकनीकी शिक्षा के अलावा, AIIMS बहुत से लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है।अनुसंधान और नवाचार:
• 42 बाहरी वित्त पोषित अनुसंधान परियोजनाएं (ICMR, UNICEF, BMGF आदि) चल रही हैं।
• एक अच्छी तरह से सुसज्जित मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) कार्यात्मक है, जो आणविक जीवविज्ञान पर ध्यान केंद्रित करता है।
सामुदायिक सेवाएं:
• नियमित स्वास्थ्य कैंप और गांवों में ओपीडी सेवाएं, विशेष रूप से वंचित और जनजातीय क्षेत्रों में, जैसे वंतंगिया समुदायों, शिवपुर और डुमरी खास PHC में आयोजित की जा रही हैं।
• महिलाओं के स्वास्थ्य कैंप फरवरी 2025 से प्रति शनिवार को आकांक्षी जिलों की विभिन्न PHCs में शुरू किए गए हैं, जिसका उद्देश्य चिकित्सा सेवा प्रदान करना, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर स्क्रीनिंग और उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान करना है।
• जिला स्वास्थ्य प्रणाली को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे परिवार कल्याण, टीकाकरण और U-win पोर्टल, हेपेटाइटिस B और C, तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम, अंधता नियंत्रण कार्यक्रम, एनीमिया मुक्त भारत, नशा मुक्ति, जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रियों के उच्च जोखिम मामलों को रेफर करना आदि के माध्यम से समर्थन प्रदान किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के बाद पांच रेजिडेंट्स को उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा चिकित्सा स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए भेजा गया है।अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं:
• आयुष्मान भारत योजना सक्रिय है और 5000 से अधिक लोगों ने AIIMS गोरखपुर से मुफ्त सेवाएं प्राप्त की हैं।
• पंजीकरण, बिलिंग, फार्मेसी और स्टोर के लिए डिजिटल सिस्टम लागू किया गया है।
• AMRIT और जन औषधि की दवाइयों के लिए कैंपस में फार्मेसियां।हाल की महत्वपूर्ण घटनाएं:
• Electro-convulsive therapy (ECT) 12 फरवरी 2025 से शुरू की गई।
• 500-बिस्तरों वाला रात्रि विश्राम स्थल, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की CSR पहल के तहत भर्ती मरीजों के रिश्तेदारों के लिए शुरू किया गया है, और 18 अप्रैल 2025 को इसका भूमि पूजन माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किया गया। इसे दो वर्षों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
• 18 मार्च 2025 को येलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया—अब यात्रियों को वैक्सीन के लिए लखनऊ जाने की आवश्यकता नहीं है।
• डेंटल X-ray (OPG) यूनिट 6 मई 2025 को उद्घाटित की गई।
• एयरफोर्स अस्पताल के साथ MoU (साझेदारी समझौता) हुआ है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का आपसी आदान-प्रदान किया जा सके।
• कैंसर पर चूहों और कोशिका मॉडल पर उन्नत अनुसंधान और ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आयुर्वेद मंदिरों’ की शुरुआत।
• 30 नए फैकल्टी पदों को स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही विज्ञापन जारी किया जाएगा।
• 19 फरवरी 2025 को पहला प्लाज्मा एक्सचेंज किया गया।
• 3 अप्रैल 2025 को पहला कोक्लियर इम्प्लांट किया गया।• 1-2 मार्च 2025 को AIIMS में भारतीय सोसाइटी ऑफ प्रिसीजन मेडिसिन एंड मॉलिक्यूलर मेडिसिन (ISPMMMCON) की पहली राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें भारत भर के कई AIIMS और प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और जीनोमिक्स, प्रिसीजन मेडिसिन, माइक्रोबायोम, स्टेम सेल, नैनो टेक्नोलॉजी और बायोमार्कर्स पर अपने अनुभव साझा किए।
• सभी सर्जिकल विभागों द्वारा Anatomy विभाग के सहयोग से Cadaveric Workshop Series का आयोजन (अप्रैल – मई)।
• 2025 में मेडिकल एजुकेशन यूनिट द्वारा फैकल्टी डेवलपमेंट के लिए चार कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिसमें नजदीकी मेडिकल कॉलेजों BRD, कुशीनगर, देववोरिया के फैकल्टी सदस्य भी शामिल हुए:
1. ग्रांट लेखन कार्यशाला,
2. ह्यूमैनिटीज कार्यशाला,
3. फैकल्टी, नर्सिंग और पोस्ट-ग्रेजुएट्स के लिए मैटरनिटी सिमुलेशन कार्यशाला,
4. मेडिकल शिक्षा में डिजिटल इंटीग्रेशन कार्यशाला आदि।
संस्थान ने अप्रैल 2025 में स्वच्छता पखवाड़ा मनाया और न केवल कर्मचारियों और छात्रों में, बल्कि जनता और स्कूलों में भी इस संबंध में जागरूकता फैलायी।
अंतर-बैच खेल सप्ताह अप्रैल में मनाया गया, जिसमें MBBS और नर्सिंग छात्रों ने विभिन्न बाहरी और आंतरिक खेलों में भाग लिया।
विश्व टीकाकरण सप्ताह (24 से 30 अप्रैल) मनाया गया और जनता, स्कूलों और शिविरों में विभिन्न तरीकों से जागरूकता पैदा की गई।जल्द ही शुरू होने वाली सेवाएं:
1. रेडिएशन थेरेपी: टेली और ब्रैकीथेरेपी यूनिट और CT सिम्युलेटर 2025 में कार्यशील हो जाएंगे।
2. DBT द्वारा समर्थित “निदान केंद्र” जनेटिक स्क्रीनिंग और काउंसलिंग के लिए स्वीकृत किया गया है और 2025 में अपनी सेवाएं शुरू करेगा।
3. इंट्रा-यूटराइन इनसेमिनेशन (IUI) – बांझपन सेवाएं, प्रसूति और स्त्री रोग विभाग द्वारा शुरू की जाएंगी।
4. सीनियर रेजिडेंट और अकादमिक जूनियर रेजिडेंट (150) पदों को स्वीकृति ।
5. अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीद प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसे स्थापित किया जाएगा, ताकि लंबी बुकिंग तिथियों को कम किया जा सके।
6. संस्थान ने सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं को शीघ्र शुरू करने का संकल्प लिया है, जैसे नेफ्रोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, और इनके लिए सुपर-स्पेशलिस्ट नियुक्त कर उन्हें विभागों की स्थापना में सहयोग दिया जाएगा।भविष्य की दृष्टि:
AIIMS गोरखपुर सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सुधार और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह संस्थान केवल एक अस्पताल नहीं है, बल्कि सेवा, विज्ञान और मानवता का संगम है। संस्थान का लक्ष्य एक स्वस्थ भारत निर्माण के लिए काम करना है, ताकि प्रत्येक नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें। -

एम्स गोरखपुर में दो घंटे की जटिल सर्जरी से नवजात को मिली रोशनी, सफल ऑपरेशन के बाद अब देख पा रहा है बच्चा
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के दंत शल्य चिकित्सा विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार और उनकी टीम ने दो घंटे की जटिल सर्जरी कर एक दो वर्षीय बच्चे को फिर से देखने की रोशनी दी। यह बच्चा बिहार के सिवान जिले के खुर्द दरोगा हाता गांव से है, जो एक किसान का पुत्र है।
बच्चे की परेशानी छह महीने की उम्र में शुरू हुई थी, जब बिस्तर से गिरने के बाद उसकी दाहिनी आंख के पास सूजन और हेमेटोमा बन गया। धीरे-धीरे आंख के चारों ओर हड्डी का असामान्य विकास (बोनी एक्सोस्टोसिस) होता गया, जिससे उसकी आंखें बंद होने लगीं और दृष्टि पर असर पड़ा। परिजनों ने कई डॉक्टरों और होम्योपैथिक चिकित्सकों से इलाज करवाया, लेकिन राहत नहीं मिली।
अंततः बच्चा एम्स गोरखपुर की डेंटल ओपीडी में लाया गया, जहां जांच के बाद उसे भर्ती कर लिया गया। डॉ. शैलेश कुमार, जो ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन और सहायक प्राध्यापक हैं, ने अपनी टीम के साथ दो घंटे की सर्जरी कर आंख के पास बढ़ चुकी हड्डी को सफलतापूर्वक निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद बच्चा अब सामान्य रूप से देख पा रहा है और पूरी तरह स्वस्थ है।
इस सर्जरी में डॉ. शैलेश कुमार के साथ सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रवीण सिंह, जूनियर रेजीडेंट डॉ. प्रियंका त्रिपाठी और डॉ. सौरभ सिंह शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग से प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम वर्धन और एकेडमिक जूनियर रेजीडेंट डॉ. अरुंधति ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक प्रो. विभा दत्ता ने इस सफलता पर टीम को बधाई दी और कहा कि अब ऐसे जटिल मामलों के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली या लखनऊ जैसे बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि चेहरे पर किसी भी प्रकार की चोट या असामान्य सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत किसी ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन से संपर्क करना चाहिए। ये विशेषज्ञ चेहरे, जबड़े और मुंह से संबंधित जटिल सर्जरी के लिए प्रशिक्षित होते हैं।
यह सर्जरी न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एम्स गोरखपुर की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्रीय मरीजों के लिए भी आशा की किरण है।







