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  • श्री बालाजी मंदिर मे शनि जयंती के अवसर पर हवन एवं ब्राह्मण भोज

    श्री बालाजी मंदिर मे शनि जयंती के अवसर पर हवन एवं ब्राह्मण भोज

    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर, निकट सेल टैक्स ऑफिस तारामंडल गोरखपुर, पर आज बट सावित्री पूजा एवं शनि जयंती के अवसर पर बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी के मार्गदर्शन में हवन एवं ब्राह्मण भोज का आयोजन उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू की देखरेख में संपन्न हुआ।

    जितेंद्र मणि तिवारी जी एवं अमितेशवर दुबे जी ने ने बताया ब्राह्मण भोज में शहर के सभी मंदिरों को निमंत्रण दिया गया था। सभी मंदिरों से अपार संतों का आगमन बालाजी दरबार में हुआ और प्रसाद ग्रहण किये। इनको अंग वस्त्र और दक्षिण प्रदान करके आशीर्वाद लिया गया।

    हवन करने वालों में निखिल श्रीवास्तव सुशील सिंह मनीष मिश्रा अजय तिवारी कामाख्या नारायण सिंह अवनीश पांडे विश्वास सिंह सक्षम दुबे अन्य सभी लोगों ने सहयोग देकर इस महायोजना को सफल बनाया। बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के तरफ से सभी लोगों का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद।

    “जय बालाजी सरकार की जय शनि देव।”

  • श्री बालाजी मंदिर दरबार में श्री परशुराम जन्मोत्सव का विशाल आयोजन

    श्री बालाजी मंदिर दरबार में श्री परशुराम जन्मोत्सव का विशाल आयोजन

    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर (निकट सेल टैक्स ऑफिस) तारामंडल, गोरखपुर में आज भगवान श्री परशुराम जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में सुंदरकांड एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। अपार संख्या में भक्तगणों ने देर रात्रि तक प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के सभी सदस्यगण और सभी तारामंडल वासीयों के सहयोग से यह महा आयोजन सफल हुआ। ब्राह्मण परिवार की तरफ से मुख्य रूप से बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के उपाध्याय अमितेश्वर कुमार दूबे ‘बबलू’, संयुक्त सचिव कृष्णकांत त्रिपाठी, सभापति पांडे, अनिरुद्ध पांडे, दुर्गा प्रसाद मिश्रा, शक्ति दुबे, तारकेश्वर पांडे, संतोष त्रिपाठी, आशीष तिवारी, अमित शुक्ला उपस्थित रहें। भगवान परशुराम की कृपा हम सब पर सदा बनी रहें।

  • बालाजी मंदिर में प्रत्येक माह की भांति इस माह भी मनाया गया स्थापना दिवस

    बालाजी मंदिर में प्रत्येक माह की भांति इस माह भी मनाया गया स्थापना दिवस

    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर तारामंडल गोरखपुर में हर माह की भांति इस माह भी बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी तिवारी के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए स्थापना दिवस मनाया गया। उपाध्यक्ष अमीतेश्वर कुमार दुबे सचिव आशुतोष कुमार सिंह एवं बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के सभी सम्मानित सदस्यों के सहयोग से यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। अपार संख्या में भक्तगणों ने आकर प्रसाद ग्रहण किया। उपाध्याय अमितेश्वर कुमार दुबे कुमार दुबे बबलू ने बताया निरंतर स्थापना दिवस मनाने की श्रृंखला जारी रहेगी।

    सभापति पांडे, के के त्रिपाठी, कामाख्या नारायण सिंह, रितेश त्रिपाठी छोटू, विनय पांडे का मुख्य योगदान रहा। बालाजी की कृपा सभी भक्तों पर सदा बनी रहे।

    “जय हो बालाजी सरकार की।”

  • श्री बालाजी जी मंदिर में अष्टम मास पूर्ण होने पर विशाल भंडारे का आयोजन

    श्री बालाजी जी मंदिर में अष्टम मास पूर्ण होने पर विशाल भंडारे का आयोजन

    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर, निकट सेल टैक्स ऑफिस विद्युत उपकेंद्र तारामंडल गोरखपुर, में मंदिर स्थापना के अष्टम मास पूर्ण होने पर हर माह की भांति इस माह भी 9 जनवरी को श्री बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जितेंद्र मणि त्रिपाठी के द्वारा उठाये गये संकल्प को अनवरत जारी रखते हुए बालाजी सरकार दरबार में सुंदरकांड एवं विशाल भंडारे का आयोजन श्री बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट की तरफ से किया गया है। समिति के उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे, बबलू एवं सचिव आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि हर माह की 9 तारीख को स्थापना दिवस मनाया जाएगा। कार्यक्रम में अपार संख्या में भक्तों का तांता बालाजी सरकार दरबार में लगा रहा। इस कार्यक्रम में तारामंडल वासियों की भी सहभागिता रही।

    इस शुभ अवसर पर बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य भाई अवनीश पांडे जी का आज के कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। रंजन बाबा, रितेश त्रिपाठी, छोटू, प्रदीप साहनी, के एन सिंह एवं समिति के सभी सदस्यों एवं तारामंडल वासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

    श्री बालाजी की कृपा हम सब पर सदा बनी रहें। जय श्री बालाजी सरकार की जय हो।

  • श्रद्धा, मनोरंजन व रोजगार का संगम है गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला

    श्रद्धा, मनोरंजन व रोजगार का संगम है गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला

    “मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी”

    “त्रेतायुगीन है महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा”

    गोरखपुर, 6 जनवरी। मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में लगने और इससे पखवारा पूर्व शुरू होकर माह भर से अधिक समय तक चलने वाला खिचड़ी मेला श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का संगम है। पूरी प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी के रूप में चढ़ाए जाने वाला अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है। मंदिर के अन्न क्षेत्र में कभी भी कोई जरूरतमंद पहुंचा, खाली हाथ नहीं लौटा। ठीक वैसे ही, जैसे बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। मंदिर में खिचड़ी का यह पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनेगा।

    गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है। मान्यता है कि तत्समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार मे पहुंचे। मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया। कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं। उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए। भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए। उनका तेज देख लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल) दान करते रहे। मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई। तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर अहर्निश जारी है। कहा जाता है कि उधर ज्वाला देवी के दरबार मे बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है।

    मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर नाथ पंथ की विशिष्ट परंपरानुसार गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख समृद्धि की मंगलकामना करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु शिवावतारी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के दिन भोर में सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करते हैं। तत्पश्चात नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी बाबा को चढ़ाई जाती है। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाती है। खिचड़ी महापर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर तैयार है। प्रशासन के साथ ही मंदिर प्रबंधन की तरफ से श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं का पूरा इंतज़ाम किया गया है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी अब तक तीन बार खिचड़ी मेला की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं।

    “सामाजिक समरसता का केंद्र है गोरखनाथ मंदिर”

    गोरखनाथ मंदिर सामाजिक समरसता का ऐसा केंद्र है जहां जाति, पंथ, महजब की बेड़ियां टूटती नजर आती हैं। इसके परिसर में क्या हिंदू, क्या मुसलमान, सबकी दुकानें हैं। यानी बिना भेदभाव सबकी रोजी रोटी का इंतजाम है। यही नहीं, मंदिर परिसर में लगने वाला खिचड़ी मेला भी जाति-धर्म के बंटवारे से इतर हजारों लोगों की आजीविका का माध्यम बनता है। मंदिर परिसर में नियमित रोजगार करने वालों से लेकर मेला में दुकान लगाने वालों तक, बड़ी भागीदारी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की होती है। उन्होंने कभी कोई भेदभाव महसूस नहीं किया बल्कि अपनेपन के भाव से विभोर होते रहते हैं। मेले में खरीदारी से लेकर मनोरंजन के साधनों तक का भरपूर इंतजाम हैं।

  • आम आदमी का जीवन दर्शन है रामचरितमानस : प्रीती रामानुज

    आम आदमी का जीवन दर्शन है रामचरितमानस : प्रीती रामानुज

    गोला । रामचरितमानस देश के जनजीवन में रचबस गया है। इसका संबंध जनजीवन से दीपक तेल और बाती की तरह है। सगुण ब्रह्म की इतनी नजदीक उपासना कहीं और देखने को नहीं मिलती। यह आम आदमी का जीवन दर्शन है।

      उक्त बातें कथावाचक प्रीती रामानुजम ने कही। वे गोला क्षेत्र के रामपुर बघौरा में चल रही रामकथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि राम कथा में प्रभु के आदर्श चरित्र व कृत्य को जानने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इसे सुनकर हम अपने जीवन में उनके गुणों को आत्मसात कर सकते हैं। जिससे हमारा जीवन भी मर्यादित हो सके। उन्होंने कहा कि अंधेरे को भगाने के लिए हम दीपक जलाते हैं। दीपक जलाने से अंधेरा दूर होता है और प्रत्येक वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। प्रकाश को बनाए रखने के लिए दीपक की लौ को बरकरार रखना पड़ता है और यह तभी संभव है, जब दीपक में बाती और तेल लगातार बना रहे। इसी तरह जीवन के अंधेरे को दूर करना है, परेशानी से बचते हुए जीवन को सुख शांति और वैभव से आगे बढ़ाना है तथा जीवन को प्रकाशवान बनाए रखना है तो हमें मर्यादा पुरूषोत्तम की तरह आचरण करना होगा और उनके नाम का हर क्षण निरंतरता बनाए रखनी होगी। उन्होंने कहा कि वेदों में निर्गुण उपासना और सद्गुण उपासना की व्यवस्था दी गई है। इसके अनुसार निर्गुण उपासक निराकार ब्रह्म की आराधना प्रतीकों के आधार पर करता है। जैसे अग्नि और वायु जो दृश्यमान नहीं होते। जिसका कोई आकार नहीं होता। ऐसे निराकार निर्गुण उपासना करने वालों की भी संख्या बहुत है। दूसरी उपासना सद्गुण उपासना है। जिसमें स्वरूप का आधार होता है। जिसे हम देख सकते हैं और उसके रूप गुण की प्रशंसा कर सकते हैं। इस उपासना में श्रीराम कथा को लिया जा सकता है। इस अवसर पर कथा के संयोजक पूर्व ग्राम प्रधान संजय श्रीवास्तव अमित शुक्ल विवेक श्रीवास्तव हनुमान शुक्ल संगम गुप्त सिद्धार्थ शुक्ल आदित्य शुक्ल अमन यादव सहित क्षेत्र के श्रोतागण उपस्थित होकर कथा का रसपान किया।

  • तीज पर मुक्तेश्वर नाथ शिव मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सागर

    तीज पर मुक्तेश्वर नाथ शिव मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सागर

    ‘व्रती महिलाओं ने किया भोलेनाथ का रुद्राभिषेक, गूंजे “हर-हर महादेव” के जयकारे’

    रिपोर्ट – रोहित श्रीवास्तव

    गोरखपुर। तीज के पावन अवसर पर सोमवार को मुक्तेश्वर नाथ शिव मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर गया। पारंपरिक परिधान में सजी बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया और तीज व्रत कथा श्रद्धा भाव से सुनी।

    महिलाओं ने शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना की। इस दौरान पूरे मंदिर में भक्ति गीत और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया।

    श्रद्धालुओं का कहना था कि तीज व्रत माता पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन का प्रतीक है, जो दांपत्य जीवन में प्रेम, सौभाग्य और शांति प्रदान करता है।

    मुक्तेश्वर नाथ शिव मंदिर में तीज का पर्व श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया, जहां हर ओर शिवभक्ति का रंग छाया रहा।

  • नवाब फारूख अशरफ ने कछौछा शरीफ दरगाह पर चलाया लंगर

    नवाब फारूख अशरफ ने कछौछा शरीफ दरगाह पर चलाया लंगर

    “समाज सेवा का एक ऐसा जुनून जिसे देखकर हर कोई हो जाता है कायल”

    “जब बाबा बुलाते हैं तो चला जाता हूं कछौछा शरीफ- नवाब फारूख अशरफ”

    गोरखपुर। समाज में ऐसे युवा है जिनके सिर पर समाज सेवा का ऐसा जुनून सवार है कि वह हर किसी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं मदद करने वाले उसका जात धर्म नहीं पूछते बल्कि इंसानियत का पैगाम देते हुए।

    अंबेडकर जिले में स्थित सूफी संत हजरत ख्वाजा सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी(र.अ) की दरगाह से हमेशा मोहब्बत, भाईचारा और इंसानियत का पैगाम मिलता है, सच्चे मन से यहां आने वाले लोगों की मन्नत मुरादे पूरी होती है यही वजह है कि यहां पर सभी धर्म संप्रदाय के लोग अपनी जायज मुरादों को लेकर आते हैं कोई बीमारी से निजात पाने, नौकरी पाने, शादी विवाह या औलाद के लिए लोग मन्नत को लेकर आते हैं और बाबा उनकी जायज़ मुरादों को पूरा करते है।

    गोरखपुर जिले का युवा समाजसेवी नवाब फारूख अशरफ भी हमेशा कछौछा शरीफ जाते हैं और वहां पर वह गरीब बेसहारा लोगों के लिए लंगर का आयोजन करते हैं इस लंगर में सैकड़ो की संख्या में लोग एक कतार में खड़े होकर लंगर लेते हैं लंगर लेने वालों से उनका धर्म या मजहब नहीं पूछा जाता है बल्कि देखा जाता है कि वह इंसान असल में भूखा है और उसे खाने की जरूरत है तो उसे खाना मुहैय्या(उपलब्ध) कराया जाता है। मजहब कोई भी हो ,इंसान एक ही है हर दुखी परेशान इंसान यहाँ उम्मीद लेकर आता है ।

    नवाब फारूख अशरफ ने कहा कि मेरे वालिद पूर्व पार्षद अशरफ अली ने मुझे हमेशा यही सिखाया है कि इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता है और एक इंसान को दूसरे इंसान की मदद जरूर करनी चाहिए। अगर अल्लाह ने आपको दौलत दी है तो खूब दिल खोल कर खर्च करें जितना खर्च करेंगे अल्लाह आपको उससे अधिक दौलत देगा क्योंकि यह दौलत उन गरीबों पर खर्च करने से अल्लाह बहुत खुश होता है।
    समाज में बहुत से बड़े पैसे वाले लोग हैं मगर अफसोस है कि उनके पास दिल नहीं है क्योंकि किसी को देने के लिए बड़ा दिल करना पड़ता है कोरोना काल के दौरान हम लोगों ने देखा कि किस तरीके से लोगों ने दिल खोलकर एक दूसरे की मदद की चाहे वह आम इंसान हो ,पुलिस अधिकारी या बड़ा उद्योगपति हो सबने अपना खजाना खोल दिया था। लेकिन जैसे ही कोरोना काल समाप्त हुआ लोगों का दिल भी छोटा हो गया अब लोग किसी की मदद करने से हिचकते हैं अगर आप किसी एक की मदद करेंगे और उसका परिवार मजबूत होगा तो वह चार लोगों को नई जिंदगी देगा क्योंकि अभी भी अपने देश में बहुत से लोग जो एक-एक दाने-दाने के लिए तरसते हैं उनका परिवार एक टाइम भोजन करता है । छोटे से घर में लोग रहते हैं आधा परिवार सोता है तो आधा परिवार जाता है । कछौछा शरीफ दरगाह पर जब भी आता हूं तो यहां पर लंगर का आयोजन करता हूं क्योंकि मेरे मां-बाप ने मुझे सिखाया है कि जरूरतमंदों की मदद करो अल्लाह तुम्हें और देगा। न जाने किस फकीर की कब दुआ लग जाए और आपका रुका हुआ काम आसान हो जाए।

  • वनस्पति माता मंदिर पर अवैध कब्जा, एसडीएम से मिले वार्डवासी

    वनस्पति माता मंदिर पर अवैध कब्जा, एसडीएम से मिले वार्डवासी

    ब्यूरो प्रभारी संतोष कुमार त्रिपाठी खजनी गोरखपुर

    खजनी तहसील क्षेत्र के नगर पंचायत कस्बा संग्रामपुर उनवल के वार्ड नंबर 4 में स्थित वर्षों पुराने वनस्पति माता मंदिर पर अवैध कब्जा और असामाजिक गतिविधियों को लेकर वार्ड वासियों में गहरा रोष फैल गया है। मामले को लेकर वार्ड के लोग उप जिलाधिकारी खजनी से मिलकर मंदिर पर कब्जा करने वाले के खिलाफ प्रार्थना पत्र सौंप कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उप जिलाधिकारी ने खजनी थाना प्रभारी को मंदिर से अवैध कब्जा हटाने का निर्देश दिया है।

    इस संबंध में सभासद राजन पासवान ने सौंपे गए एक प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि मंदिर की देखभाल स्वर्गीय रामबृक्ष पासवान के परिजन और गांव के लोग करते आ रहे हैं। लेकिन कुछ समय से गांव के ही सुग्रीम पुत्र स्वर्गीय श्यामसुंदर ने मंदिर परिसर में साधु का भेष धारण कर असामाजिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। सुग्रीम ने वहां टिनशेड डालकर गाय, भैंस और बकरियां रखने के साथ-साथ अपनी पत्नी के साथ वहां रहने का सिलसिला भी शुरू कर दिया।

    प्रार्थना पत्र में आरोप है कि सुग्रीम ने मंदिर परिसर में अनैतिक गतिविधियां शुरू कर दीं, जिसमें जुआ खेलना, शराब और गांजा सेवन करना, तथा पूजा करने वाली और गुजरने वाली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करना शामिल है। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो सुग्रीम ने मारपीट और गाली-गलौज का सहारा लिया, जिससे गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

    सभासद राजन पासवान ने बताया कि इस मामले की सूचना प्रशासन को दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और मामला उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया है। इस प्रार्थना पत्र पर कई ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें उमानाथ पासवान, सनी पासवान, यहाष चौधन, सुरज पासवान, और अन्य शामिल हैं।

    ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि सुग्रीम को मंदिर परिसर से तत्काल हटाया जाए, ताकि मंदिर की पवित्रता बनी रहे और गांव में शांति स्थापित हो सके। हालांकि, इस मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • आत्मबोध महायज्ञ की दिव्य ‘मनोकामना कलश यात्रा’ में सम्मिलित हुए सैकड़ों श्रद्धालु

    आत्मबोध महायज्ञ की दिव्य ‘मनोकामना कलश यात्रा’ में सम्मिलित हुए सैकड़ों श्रद्धालु

    गोरखपुर। आत्मबोध महायज्ञ की मनोकामना कलश यात्रा कल शाम महिलाओं एव पुरुषों ने भारी संख्या में भाग लिया।

    कलश यात्रा, वेद मंत्रों की ध्वनि, घंटा घड़ियाल, शंख ध्वनि एवं भक्ति गीतों के साथ ऑक्सफोर्ड इंटर कॉलेज, भगत चौराहा से होते हुए ऑक्सफोर्ड इंटर कॉलेज पर आई जहां इसका समापन हुआ। कलश में जल के लिए लसाड़ी स्थित राप्ती नदी तट पर हजारों की संख्या में महिलाओं ने कलश यात्रा, जल भरकर प्रारंभ किया। बहुत ही अनुशासित तरीके से कलश यात्रा एवं भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। विश्व कल्याण एवं सनातन की रक्षा हेतु यह कलश यात्रा गोरखपुर में एक ऐतिहासिक कलश यात्रा थी। सनातन धर्म की जय हो, गंगा मैया की जय हो, आत्मबोध महायज्ञ की जय हो के ध्वनि के साथ पूरा वातावरण भक्ति में से गुंजायमान मान हो गया।

    गंगा मैया की जय, लक्ष्मी नारायण की जय, वंदे मातरम, भारत माता की जय।