हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने आयोजित की गोष्ठी

गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

पत्रकारिता को अन्य स्तंभों से दूरी बनानी होगी: प्रो. अशोक

सोशल मीडिया के प्रभाव, विश्वसनीयता और पारंपरिक मीडिया की चुनौतियों पर हुई व्यापक चर्चा

डॉ. एसपी त्रिपाठी को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान सहित कई हस्तियां सम्मानित

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (गोजए) द्वारा आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, सोशल मीडिया की चुनौतियों और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर गंभीर मंथन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविख्यात विद्वान प्रो. डॉ. अशोक जाह्नवी प्रसाद ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का ऐसा स्तंभ है, जिसे अपनी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अन्य तीनों स्तंभों से आवश्यक दूरी बनाकर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि पत्रकार का सबसे बड़ा पुरस्कार जनता का विश्वास होता है और संविधान की रक्षा का दायित्व भी काफी हद तक पत्रकारिता पर ही निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक पत्रकारिता को आत्ममंथन के लिए बाध्य किया है। भय और दबाव के बीच सच्ची पत्रकारिता संभव नहीं है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रेस क्लब गोरखपुर के सदस्यों को कर्तव्यनिष्ठ पत्रकारिता की शपथ भी दिलाई।

‘पारंपरिक पत्रकारिता पर सोशल मीडिया का प्रभाव’ विषय पर भूमिका प्रस्तुत करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कुमार हर्ष ने कहा कि बदलाव प्रकृति का नियम है, लेकिन वह समाज के हित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आगमन के बाद पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हुई है। सोशल मीडिया के विस्तार ने पारंपरिक मीडिया के दायरे को सीमित किया है, हालांकि इससे खबरों की पहुंच और विविधता भी बढ़ी है।

मुख्य अतिथि प्रो. धर्मव्रत तिवारी ने कहा कि पारंपरिक पत्रकारिता में समाचार संपादकीय निगरानी और तथ्यपरक प्रक्रिया से गुजरते हैं, जबकि सोशल मीडिया पर हर स्मार्टफोन धारक स्वयं एक प्रसारण इकाई बन गया है। ऐसे में विश्वसनीयता का संकट लगातार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी चुनौती से निपटने के लिए पारंपरिक मीडिया संस्थान भी अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. एस.पी. त्रिपाठी ने कहा कि पारंपरिक पत्रकारिता में समाचार विशेषज्ञों और संपादकों की निगरानी में तैयार होते हैं, जिससे फेक न्यूज की संभावना काफी कम रहती है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सोशल मीडिया ने पत्रकारिता को गंभीर चुनौती दी है। आज व्यक्ति का लगभग हर डिजिटल गतिविधि किसी न किसी तकनीकी निगरानी के दायरे में है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
विशिष्ट वक्ता जगदीश लाल ने कहा कि यदि सोशल मीडिया चुनौती है तो पारंपरिक मीडिया को भी समय के अनुरूप स्वयं का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। वहीं दैनिक ‘आज’ के स्थानीय संपादक अखिलेश चंद्र ने कहा कि यदि सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक और जिम्मेदार तरीके से किया जाए तो यह पारंपरिक पत्रकारिता के लिए सहयोगी साबित हो सकता है।

कार्यक्रम में गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन की 41 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ पत्रकार शफी आदमी ने संगठन की उपलब्धियों का उल्लेख किया। अतिथियों का स्वागत गोजए अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी की उद्घोषिका नूतन मिश्रा ने किया।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पत्रकार आशीष श्रीवास्तव के पुत्र शुभम श्रीवास्तव तथा गोरखपुर क्लब के संचालक अतुल श्रीवास्तव के पुत्र अंबरीश श्रीवास्तव के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

सम्मान से नवाजी गईं विशिष्ट हस्तियां

कार्यक्रम में गोजए के प्रमुख संरक्षक डॉ. एस.पी. त्रिपाठी को बाबू हरिहर प्रसाद स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा समाजसेवी किन्नर प्रेमा मौसी को किन्नर विभूषण सम्मान, डॉ. बृजेंद्र नारायण को स्व. अरविंद शुक्ला स्मृति सम्मान, शैलेंद्र श्रीवास्तव को स्व. फूल नारायण धर द्विवेदी स्मृति सम्मान, विजय उपाध्याय को स्व. अशोक अज्ञात स्मृति सम्मान तथा मृत्युंजय नवल को स्व. अरुण गोरखपुरी स्मृति साहित्य सृजन सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही डॉ. सी.के. सुमन, डॉ. सौरभ पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार उमेश तिवारी तथा मोहम्मद अनीस खान को भी अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

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