बड़हलगंज में राष्ट्र जागरण नारी सशक्तिकरण गायत्री महायज्ञ का चौथा दिन
गायत्री परिजनों ने चांदी का मुकुट पहना किया सम्मानित
ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
बडहलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज शान्तिकुंज हरिद्वार के महिला विंग की मुखिया शैफाली दीदी ने कहा कि परिवार बंधन नहीं एक ऐसी प्रयोगशाला है जहां हम हर दिन सीखते हैं कि छोटों को स्नेह और बड़ों को सम्मान कैसे दिया जाय, अहंकार को शांत कैसे किया जाय।
बुधवार को दीदी शैफाली ने उक्त उदगार बड़हलगंज के राष्ट्रीय कन्या इण्टर कालेज परिसर में शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन और गायत्री शक्तिपीठ बड़हलगंज के तत्वावधान में चल रहे राष्ट्र जागरण नारी सशक्तिकरण 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के चौथे दिन उमड़े जनसमूह को संबोधित करते हुये व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अहंकार जब बढ़ता है, तो व्यक्ति को सबसे आख़िर में पता चलता है, लेकिन परिवार इसे सबसे पहले पहचान लेता है। उन्होंने कहाकि गृहस्थ जीवन ही असली तपोवन है। यही वह स्थान है जहाँ हम स्वभाव की परीक्षा देते हैं, संयम सीखते हैं, मूल्य जीते हैं, और व्यक्तित्व निखारते हैं। गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के वाक्यों का संस्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि जहाँ सहयोग, संवेदना, साहस और समर्पण मिलते हैं, वहीँ शक्ति जन्म लेती है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गायत्री परिजन एक सूत्र में बंधे है, और वह सूत्र पूज्य गुरुदेव का निःस्वार्थ, अटूट और सर्वसमावेशी प्रेम है। यह प्रेम ही वह आध्यात्मिक आधार है, जिस पर यह संपूर्ण गायत्री परिवार खड़ा है। जो केवल एक संस्था नहीं एक ऐसा प्रेमपूर्ण परिवार है जो युग निर्माण के महान लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
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