डोहरिया कला पंचायत घोटाले की शिकायत पहुंची पीएमओ और सीवीसी तक

जांच प्रभावित करने और अभिलेख छुपाने के गंभीर आरोप, मनरेगा – विकास कार्यों में भ्रष्टाचार, दोषियों को बचाने का आरोप, शिकायतकर्ता ने स्वतंत्र सतर्कता जांच की उठाई मांग।

संवाददाता – एस.पी. सिंह

सहजनवा, (गोरखपुर)।

पाली विकास खंड की ग्राम पंचायत डोहरिया कला में कथित वित्तीय भ्रष्टाचार, फर्जी भुगतान और अभिलेखीय अनियमितताओं का मामला अब जिला प्रशासन की सीमाएं लांघते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने पंचायत स्तर पर हुए कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच न होने और जांच प्रक्रिया को जानबूझकर प्रभावित किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम पंचायत डोहरिया कला में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों में सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी भुगतान और अभिलेखों में हेराफेरी की गई। इस संबंध में पूर्व में जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी।

जांच में बाधा और अभिलेख छुपाने का आरोप।

दस्तावेज़ों के अनुसार जिलाधिकारी गोरखपुर द्वारा गठित जांच टीम ने 03 नवंबर 2025 को विकास खंड पाली को जांच हेतु सभी संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा जानबूझकर पूर्ण अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। 15 नवंबर 2025 को प्रस्तावित जांच से पूर्व अंतिम अवसर देते हुए 11 नवंबर 2025 को अभिलेखों सहित उपस्थित रहने का आदेश दिया गया, लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी अधूरे और अपूर्ण अभिलेख ही उपलब्ध कराए गए, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न करने पर सवाल।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी द्वारा तैयार की गई जांच आख्या/रिपोर्ट न तो उन्हें उपलब्ध कराई गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि दोषी अधिकारियों, पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान या प्रतिनिधियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई। बिना जांच रिपोर्ट साझा किए ही प्रकरण का निस्तारण कर दिया जाना विभागीय पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया गया है।

पीएमओ और सीवीसी से स्वतंत्र जांच की मांग।

मामले को गंभीर बताते हुए शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज शिकायत (पंजीकरण संख्या : पीएमओपीजी /ई / 2025 / 0200528) तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजे गए प्रार्थना पत्र में मांग की है कि, पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय सतर्कता जांच कराई जाए, जांच को प्रभावित करने वाले ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका की जांच हो, भ्रष्टाचार के माध्यम से दुरुपयोग की गई संपूर्ण सरकारी धनराशि की रिकवरी कराई जाए, अब तक की गई सभी जांच रिपोर्टों की सत्यापित प्रतिलिपि शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो पंचायत राज व्यवस्था में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग से हस्तक्षेप कर निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की है।

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