यू.पी. हेल्थ टेक कॉन्क्लेव 1.0 में बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज के एम.आर.यू. को मिली बड़ी वैश्विक पहचान; चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री ने सौंपा प्रतिष्ठित  प्रमाणपत्र

लखनऊ ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :..

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के होटल क्लार्क्स अवध में आयोजित ‘यू.पी. हेल्थ टेक कॉन्क्लेव 1.0’ के दौरान चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। प्रदेश के माननीय चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री, श्री मयंकेश्वर शरण सिंह द्वारा बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर की मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) के नोडल ऑफिसर डॉ. राज किशोर सिंह को ‘ICH ISO 14155:2020’ (मानव विषयों के लिए चिकित्सा उपकरणों की नैदानिक जांच) का मास्टरक्लास सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।

इस गरिमामयी अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आईएएस अवनीश अवस्थी, एसीएस अमित घोष, चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव एवं महानिदेशक डॉ. सारिका मोहन, यूपी प्रमोट फार्मा काउंसिल की एमडी एवं सीईओ आईएएस कृतिका शर्मा, तथा बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं डीन प्रो. (डॉ.) राम कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
वैश्विक मानकों पर खरा उतरेगा बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज
यह प्रमाणपत्र मिलने के बाद बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज की एम.आर.यू. अब विश्व स्तरीय नैदानिक परीक्षणों (World Standard Clinical Trials) के लिए सक्षम हो गई है। इसका सीधा लाभ प्रदेश के चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स को मिलेगा।

मुख्य लाभ:

• नवाचार को बढ़ावा: अब एम.आर.यू. में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चिकित्सा उपकरणों का परीक्षण हो सकेगा।

• पेटेंट और मार्केटिंग: यहाँ होने वाले परीक्षणों के आधार पर नए चिकित्सा उपकरणों को न केवल पेटेंट कराने में आसानी होगी, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार में बेचने (मार्केटिंग) के लिए जरूरी मान्यता भी प्राप्त होगी।

• आत्मनिर्भर भारत: यह कदम चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

इस अवसर पर माननीय राज्य मंत्री श्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति वैश्विक विश्वास को और मजबूत करेगी।

डॉ. राज किशोर सिंह ने इस उपलब्धि को पूरी टीम की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया और कहा कि इससे पूर्वांचल सहित पूरे प्रदेश में मेडिकल रिसर्च के नए द्वार खुलेंगे।

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