बिहार में बिजली का नया खेल! दिन में सस्ती, शाम को महंगी—क्या जनता पर पड़ेगा नया बोझ?

स्मार्ट मीटर के नाम पर नया नियम लागू—क्या यह राहत है या आम आदमी की जेब पर वार?

बिहार में बिजली बिल को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है।
बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सीधे आम जनता की जेब से जुड़ा है।

पटना, संवाददाता अनुनय कुमार उपाध्याय

बिहार में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग (बीईआरसी) ने बिजली कंपनियों की याचिका को मंजूरी देते हुए 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए ‘टाइम ऑफ डे’ (टीओडी) टैरिफ लागू करने का निर्णय लिया है।

अब 1 अप्रैल 2026 से

स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए टाइम ऑफ डे टैरिफ लागू होगा।
यानि अब बिजली का बिल इस बात पर तय होगा कि आपने बिजली कब इस्तेमाल की।

नई व्यवस्था के तहत अब बिजली का बिल इस आधार पर तय होगा कि उपभोक्ता किस समय बिजली का उपयोग करते हैं। आयोग के अनुसार, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली की दर सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम होगी। वहीं, शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक के पीक आवर में घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 10 प्रतिशत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत तक अधिक दर चुकानी होगी। रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दर ही लागू रहेगी।

सरकार कह रही है कि

👉 सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली सस्ती होगी (करीब 20% कम)
लेकिन…
👉 शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक, जब लोग घर पर होते हैं,
👉 तब बिजली 10% से 20% तक महंगी कर दी जाएगी!

यह व्यवस्था फिलहाल स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं और 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं पर लागू होगी, जबकि कृषि कनेक्शन को इससे बाहर रखा गया है। राज्य में करीब 87 लाख से अधिक उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

आयोग और ऊर्जा विभाग का तर्क है कि दिन के समय सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक होने के कारण बिजली उत्पादन सस्ता होता है, इसलिए उस अवधि में दरें कम रखी गई हैं। वहीं, शाम के समय मांग बढ़ने के कारण दरों में वृद्धि की गई है, ताकि उपभोक्ता अपने उपयोग के समय में बदलाव कर सकें और बिजली लोड को संतुलित किया जा सके।

सवाल जो उठ रहे हैं:

क्या मजदूर, कर्मचारी और छात्र अपने काम का समय बदल सकते हैं?
क्या घर के जरूरी काम अब घड़ी देखकर होंगे?
क्या यह नीति गरीब और मध्यम वर्ग के खिलाफ नहीं है?

हालांकि, इस नई व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आम उपभोक्ता, विशेषकर नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोग, दिन के समय बिजली का अधिक उपयोग नहीं कर पाते हैं। ऐसे में शाम के समय महंगी बिजली का सीधा असर उनकी जेब पर पड़ सकता है।

इसके अलावा, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या सभी उपभोक्ताओं के लिए अपने दैनिक जीवन की दिनचर्या को इस नई व्यवस्था के अनुसार बदलना संभव होगा। खासकर शहरी क्षेत्रों में, जहां शाम के समय बिजली की खपत सबसे अधिक होती है, वहां यह नियम आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।

कुल मिलाकर, बिहार में लागू की जा रही यह नई बिजली व्यवस्था उपभोक्ताओं की आदतों में बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए राहत साबित होता है या अतिरिक्त बोझ बनता है।

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