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  • राष्ट्रीय एकता दिवस पर सरदार पटेल के योगदान को किया गया याद

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर सरदार पटेल के योगदान को किया गया याद

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-



    मदरसा नूरिया खरिया में संगोष्ठी आयोजित, युवाओं से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने की अपील


    खरिया, 31 अक्टूबर 2026।

    भारत के लौह पुरुष और देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर मदरसा नूरिया खरिया के परिसर में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था— “स्वतंत्रता प्राप्ति में सरदार पटेल की भूमिका, देश की एकता-अखंडता के लिए उनका योगदान एवं समकालीन चुनौतियां।” इस अवसर पर सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मदरसा नूरिया खरिया के प्रबंधक सैयद इज़हार अहमद ने कहा कि ‘आयरन मैन ऑफ इंडिया’ सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की स्वतंत्रता प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद 562 देशी रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण कर उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया। देश उनके इस राष्ट्रनिर्माण के कार्य को हमेशा याद रखेगा।

    उन्होंने कहा कि सरदार पटेल एक सच्चे राष्ट्रवादी, कुशल राजनीतिज्ञ और महान देशभक्त थे। भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश को एक मजबूत प्रशासनिक और राजनीतिक आधार प्रदान किया। भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा प्रशासनिक सेवाओं के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    प्रमुख हाईलाइट :-

    राष्ट्रीय एकता दिवस: सरदार पटेल की जयंती पर विशेष संगोष्ठी।

    562 रियासतों का एकीकरण: राष्ट्र निर्माण में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका को किया याद।

    खेड़ा सत्याग्रह: किसानों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष पर डाला प्रकाश।

    युवाओं से अपील: राष्ट्रवाद, भाईचारे और सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने का संदेश।

    मुस्लिम युवाओं और उलेमाओं से आह्वान: सरदार पटेल की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की अपील।

    एकता ही सच्ची श्रद्धांजलि: सामुदायिक सौहार्द और देश की तरक्की के लिए मिलकर काम करने का संकल्प।

    खेड़ा आंदोलन से स्वतंत्रता संग्राम तक रहा ऐतिहासिक योगदान :-

    सैयद इज़हार अहमद ने कहा कि वर्ष 1918 का खेड़ा सत्याग्रह सरदार पटेल के सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक था। गुजरात के खेड़ा क्षेत्र में सूखे और आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को लगान में राहत दिलाने के लिए उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व किया। किसानों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की एक मजबूत आवाज बना।

    उन्होंने बताया कि सरदार पटेल ने अपना सफल बैरिस्टर का पेशा छोड़कर महात्मा गांधी के विचारों और सिद्धांतों से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। भारत छोड़ो आंदोलन सहित विभिन्न आंदोलनों में उनकी भूमिका और त्याग देश के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।

    युवाओं और उलेमाओं से एकता का संदेश फैलाने की अपील

    संगोष्ठी में सैयद इज़हार अहमद ने विशेष रूप से मुस्लिम युवाओं और धार्मिक उलेमाओं से अपील की कि वे सरदार पटेल के संघर्षपूर्ण जीवन, राष्ट्रवाद और देश के प्रति समर्पण से प्रेरणा लें। उनकी विरासत और विचारों को आम जनमानस तक पहुंचाएं तथा अपने समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों में भी भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का प्रयास करें।

    उन्होंने कहा कि आज देश के सामने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सामुदायिक सौहार्द को बनाए रखने की महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश की तरक्की, शांति और एकता के लिए काम करें।

    सच्ची श्रद्धांजलि राष्ट्र की एकता को मजबूत करना है

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने त्याग, तपस्या, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना से देश की सेवा की।

    आज हमें उनके आदर्शों को केवल याद ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारना है। सभी समुदायों के बीच प्रेम, विश्वास और भाईचारा स्थापित करना तथा देश की उन्नति और अखंडता के लिए मिलकर काम करना ही लौह पुरुष सरदार पटेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

  • Pal singh

    Pal singh

    राष्ट्रीय टेक्नो फेस्टिवल 2026 में खगोलविद अमर पाल सिंह को मिला नेशनल कलाम यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड

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  • Disaster

    हजारों करोड़ का बजट, फिर भी आपदाओं के आगे बेबस सुरक्षा

    आपदा से पहले तैयारी या तबाही के बाद भरपाई? हजारों करोड़ के बजट के बावजूद सुरक्षा की चुनौती!
    भारत में आपदा प्रबंधन पर बढ़ता निवेश, जान-माल की क्षति, संसाधनों के उपयोग और जमीनी तैयारियों के बीच अंतर—अब योजनाओं से आगे बढ़कर परिणाम देने का समय।

    भारत आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएँ केवल मौसमी घटनाएँ नहीं रह गई हैं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय अवसंरचना के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, चक्रवात, बादल फटना, बिजली गिरना, लू, शहरी जलभराव और औद्योगिक दुर्घटनाएँ हर वर्ष हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित करती हैं। ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है—जब देश में आपदा प्रबंधन के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान है, तो क्या हमारी तैयारियाँ, मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन योजनाएँ वास्तविक जोखिमों के अनुरूप पर्याप्त प्रभावी हैं?

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट इस चुनौती की गंभीरता उजागर करती है। देश में विभिन्न चरम मौसमी घटनाओं से लगभग 2,760 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई। इनमें भारी वर्षा, बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से 1,370 से अधिक तथा आंधी-तूफान और बिजली गिरने से 1,310 से अधिक लोगों की जान गई। उत्तर प्रदेश में 410 से अधिक, मध्य प्रदेश में 350 से अधिक, महाराष्ट्र में 270 से अधिक और बिहार में 174 मौतें दर्ज हुईं। ये केवल आँकड़े नहीं, बल्कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी और स्थानीय तैयारियों को मजबूत बनाने की आवश्यकता के गंभीर संकेत हैं।

     

    सरकारी स्तर पर वित्तीय प्रतिबद्धता भी उल्लेखनीय है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2021–26 के लिए राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के अंतर्गत ₹1,60,153 करोड़ तथा राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए ₹68,463 करोड़ का प्रावधान अनुशंसित किया था। राज्य स्तरीय राशि का 80 प्रतिशत आपदा प्रतिक्रिया और 20 प्रतिशत जोखिम न्यूनीकरण के लिए निर्धारित किया गया। यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपदा के बाद राहत पहुँचाने के साथ-साथ आपदा से पहले जोखिम कम करने में निवेश करना भी आवश्यक है।

     

    आपदा प्रबंधन के प्रमुख वित्तीय प्रावधान | 2021–26
    राज्य जोखिम प्रबंधन कोष
    ₹1.60 लाख करोड़
    वित्त आयोग की अनुशंसा

    राष्ट्रीय जोखिम प्रबंधन कोष
    ₹68,463 करोड़
    वित्त आयोग की अनुशंसा

    ये बहुवर्षीय वित्तीय प्रावधान हैं, वास्तविक व्यय या उपयोगिता के आँकड़े नहीं। स्रोत: गृह मंत्रालय एवं 15वाँ वित्त आयोग।
    वित्तीय सहायता के वास्तविक प्रवाह पर भी ध्यान देना आवश्यक है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 13 मार्च 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में उस तिथि तक राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के अंतर्गत 28 राज्यों को ₹20,735.20 करोड़ और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से 21 राज्यों को ₹3,628.18 करोड़ जारी किए गए। इसके अतिरिक्त राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष से ₹5,373.20 करोड़ और राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष से ₹1,189.56 करोड़ जारी किए गए। स्पष्ट है कि सरकार राहत के साथ जोखिम न्यूनीकरण के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।

     

     

    लेकिन धनराशि का आवंटन, राज्यों को उसका जारी होना और धरातल पर उसका प्रभावी उपयोग—तीन अलग-अलग अवस्थाएँ हैं। जारी धनराशि को वास्तविक व्यय या सफल परिणाम मान लेना उचित नहीं होगा। इसके लिए परियोजनावार उपयोगिता प्रमाणपत्र, भौतिक प्रगति, स्वतंत्र मूल्यांकन और जोखिम में वास्तविक कमी के प्रमाण आवश्यक हैं।

    इस व्यवस्था में उपयोग और क्षमता निर्माण के बीच अंतर भी दिखाई देता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष की तैयारी एवं क्षमता निर्माण संबंधी वित्तीय व्यवस्था से ₹1,579.12 करोड़ जारी किए गए, जिनमें ₹994.05 करोड़ अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए थे। इसी अवधि में शहरी बाढ़ प्रबंधन के लिए तमिलनाडु और असम को ₹270.75 करोड़ तथा आर्द्रभूमि पुनर्जीवन के लिए असम को ₹155.71 करोड़ की सहायता जारी की गई। ये पहल दर्शाती हैं कि जोखिम न्यूनीकरण में निवेश का दायरा बढ़ रहा हैl
    फिर भी जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण कमियाँ मौजूद हैं। संसद की गृह संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 261वीं रिपोर्ट में राज्यों और जिलों की आपदा प्रबंधन योजनाओं की गुणवत्ता में असमानता, वित्तीय संसाधनों के उपयोग में देरी, संस्थागत क्षमता की कमी तथा विभागीय समन्वय की चुनौतियों को रेखांकित किया है। समिति ने आपदा प्रबंधन योजनाओं की कम-से-कम प्रत्येक दो वर्ष में समीक्षा तथा राज्य और जिला स्तर पर प्रतिवर्ष कम-से-कम दो बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित करने की सिफारिश की है। ये सिफारिशें हैं, सभी संस्थानों पर लागू एकसमान वैधानिक अनिवार्यता नहीं।

    यहाँ एक और गंभीर प्रश्न उठता है—क्या मॉक ड्रिल वास्तव में हमारी तैयारियों की परीक्षा ले रही हैं या केवल औपचारिक आयोजन बनकर रह गई हैं? किसी अस्पताल में अग्निकांड, विद्यालय में भूकंप, औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक रिसाव या शहर में अचानक आई बाढ़ की स्थिति में सबसे पहले कौन प्रतिक्रिया देगा, कितने समय में बचाव दल पहुँचेगा और संवेदनशील नागरिकों को कैसे सुरक्षित निकाला जाएगा—इन प्रश्नों का उत्तर वास्तविक अभ्यास से ही मिल सकता है।

    प्रत्येक मॉक ड्रिल में पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय निकायों और सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। अभ्यास के बाद प्रतिक्रिया समय, संचार व्यवस्था, उपकरणों की कार्यशीलता, सुरक्षित निकासी और प्राथमिक उपचार की क्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए। कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना और जवाबदेही निर्धारित करना भी उतना ही आवश्यक है।

    ग्रामीण भारत में ग्राम पंचायतों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 20 राज्यों के 81 आपदा-संवेदनशील जिलों में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से सामुदायिक आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत करने के लिए ₹507.37 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की। यह पहल स्थानीय संस्थाओं को केवल राहत वितरण तक सीमित रखने के बजाय जोखिम पहचान, जनजागरूकता, प्रशिक्षण और पूर्व तैयारी में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

     

    आने वाले वर्षों में वित्तीय प्रावधान और बढ़ने की संभावना है। सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026–31 के लिए राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष हेतु ₹2,04,401 करोड़ और राष्ट्रीय स्तर के कोष के लिए ₹79,406 करोड़ की अनुशंसा की है। लेकिन बढ़ता बजट तभी सार्थक होगा, जब उसका उपयोग वैज्ञानिक जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी, सुरक्षित अवसंरचना, स्थानीय प्रशिक्षण और नियमित मॉक ड्रिल जैसे परिणामोन्मुख कार्यों में दिखाई दे।

     

    भारत को अब ‘आवंटन से परिणाम’ और ‘राहत से जोखिम न्यूनीकरण’ की दिशा में निर्णायक परिवर्तन करना होगा। प्रत्येक जिले में अद्यतन बहु-आपदा प्रबंधन योजना, स्थानीय जोखिम मानचित्र, आपातकालीन संसाधनों की डिजिटल सूची, प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवक और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तैयारी संकेतक विकसित किए जाने चाहिए। विद्यालयों, अस्पतालों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और शहरी निकायों की तैयारियों का नियमित परीक्षण भी आवश्यक है।

    आपदा प्रबंधन पर होने वाले खर्च की सफलता केवल उपयोगिता प्रमाणपत्रों से नहीं, बल्कि बचाई गई जिंदगियों, कम हुई आर्थिक क्षति, घटे प्रतिक्रिया समय और मजबूत हुई सामुदायिक क्षमता से मापी जानी चाहिए।

    भारत को अब यह तय करना होगा कि आपदा प्रबंधन की सफलता का पैमाना तबाही के बाद बाँटी गई राहत राशि होगी या आपदा आने से पहले बचाई गई जिंदगियाँ। क्योंकि सच्चा आपदा प्रबंधन वही है, जिसमें राहत की आवश्यकता कम पड़े और नागरिकों की सुरक्षा अधिक सुनिश्चित हो।

    — डॉ. राकेश कुमार भट्ट
    आपदा जोखिम प्रबंधन, पर्यावरण एवं सामाजिक विकास विशेषज्ञ

  • लुधियाना में चिकित्सा निदान के क्षेत्र में नई पहल

    लुधियाना में चिकित्सा निदान के क्षेत्र में नई पहल

    लुधियाना / निष्पक्ष टुडे | विशेष स्वास्थ्य समाचार

    कूका डायग्नोस्टिक सेंटर में PET-CT और गामा कैमरा की अत्याधुनिक सुविधाओं का शुभारंभ


    लुधियाना, 11 अक्टूबर 2026।

    लुधियाना में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए कूका डायग्नोस्टिक सेंटर ने आधुनिक चिकित्सा निदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सेंटर में अब PET-CT स्कैन और गामा कैमरा जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं शुरू की गई हैं। सेंटर का उद्देश्य मरीजों को बेहतर तकनीक के साथ सटीक, समयबद्ध और किफायती जांच सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    प्रमुख आकर्षण: अब एक ही सेंटर पर उन्नत जांच सुविधाएं –

    कूका डायग्नोस्टिक सेंटर के अनुसार, यहां पहले से ही अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, मैमोग्राफी और विभिन्न प्रकार की लैबोरेटरी जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब PET-CT और गामा कैमरा की शुरुआत से सेंटर की जांच सेवाओं का दायरा और विस्तृत हुआ है।

    PET-CT स्कैन कैंप की विशेष दर ₹10,999

    इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण सीमित अवधि के लिए घोषित PET-CT स्कैन कैंप की विशेष दर ₹10,999 है। सेंटर का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को उन्नत जांच सुविधाएं अपेक्षाकृत किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। यह जांच चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार कराई जा सकती है।

    GE Healthcare, USA की आधुनिक मशीनें –

    सेंटर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, PET-CT और गामा कैमरा दोनों मशीनें GE Healthcare, USA की हैं और आधुनिक तकनीक से लैस हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से चिकित्सकों को विभिन्न बीमारियों के निदान, रोग की स्थिति के आकलन और मरीजों के चिकित्सकीय मूल्यांकन में सहायता मिल सकती है।

    25 वर्षों की सेवा के साथ आधुनिक तकनीक पर जोर –

    कूका डायग्नोस्टिक सेंटर गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाओं और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ लुधियाना एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। सेंटर के अनुसार, आम जनता को उचित एवं रियायती दरों पर जांच सुविधाएं देना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

    महत्वपूर्ण बिंदु एक नजर में

    • नई सुविधाएं: PET-CT स्कैन एवं गामा कैमरा।
    • विशेष कैंप दर: PET-CT स्कैन ₹10,999, सीमित अवधि के लिए।
    • मशीन निर्माता: GE Healthcare, USA — सेंटर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार।
    • अन्य सुविधाएं: अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, मैमोग्राफी एवं लैब जांच।
    • अनुभव: लगभग 25 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत।
    • उद्देश्य: आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण और किफायती जांच सेवाएं उपलब्ध कराना।

    कूका डायग्नोस्टिक सेंटर में PET-CT और गामा कैमरा की नई सुविधाओं की शुरुआत लुधियाना में उन्नत चिकित्सा निदान सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेष कैंप दर के माध्यम से मरीजों को किफायती जांच का विकल्प देने का प्रयास किया गया है। हालांकि, जांच कराने से पहले मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श, कैंप की वैधता, जांच में शामिल सेवाओं और अन्य संभावित शुल्कों की जानकारी सेंटर से अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।

    निष्पक्ष टुडे — स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें, जनहित के साथ।

  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल: छात्रों का प्रदर्शन हिंसक, आगजनी और लूटपाट के आरोप, आखिर किसने बिगाड़े हालात?

    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल: छात्रों का प्रदर्शन हिंसक, आगजनी और लूटपाट के आरोप, आखिर किसने बिगाड़े हालात?

    नेशनल डेस्क /पंजाब ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    छात्रा से कथित दुष्कर्म और आत्महत्या की वायरल खबर के बाद भड़का आक्रोश; पुलिस से झड़प, वाहनों में आगजनी और कैंपस में बाहरी लोगों की घुसपैठ के आरोप, SIT करेगी जांच


    पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। छात्रा से कथित दुष्कर्म और आत्महत्या की वायरल खबर के बाद शुरू हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पथराव, तोड़फोड़ और पुलिस वाहनों में आगजनी की घटनाओं ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं वहीं, परिसर में बाहरी लोगों के घुसने, हथियार लहराने और दुकानों में लूटपाट के आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

    सवाल उठ रहा है कि क्या छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में असामाजिक तत्वों ने हिंसा को अंजाम दिया?

    खबर की प्रमुख बातें –

    1. वायरल खबर से हंगामा: छात्रा से कथित दुष्कर्म और आत्महत्या के अपुष्ट संदेश के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन।

    2. पुलिस से हिंसक झड़प: पथराव, वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं।

    3. बाहरी लोगों की घुसपैठ के आरोप: कैंपस और गर्ल्स हॉस्टल के आसपास संदिग्ध गतिविधियों के वायरल वीडियो की जांच।

    4. मॉल में कथित लूटपाट: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य दुकानों से सामान लूटने के आरोप।

    5. 10 दिन कक्षाएं स्थगित: परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई, सात सदस्यीय SIT गठित।

    वायरल संदेश से शुरू हुआ विवाद, देखते ही देखते हिंसक हुआ प्रदर्शन-

    मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर प्रसारित एक संदेश से हुई, जिसमें विश्वविद्यालय की एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और उसके बाद आत्महत्या किए जाने का दावा किया गया था। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में छात्र विरोध प्रदर्शन करने लगे।

    पुलिस ने शुरुआत में ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं होने की बात कही। हालांकि, छात्रों का आक्रोश बढ़ने के बाद अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज की गई और मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया गया। वायरल दावों की सच्चाई अभी जांच का विषय है।

    पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव, गाड़ियों में लगाई आग-

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन हालात बिगड़ गए। पुलिस पर पथराव हुआ और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया। एक पुलिस जीप में आग लगाए जाने तथा अन्य वाहनों में तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं।

    पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। हिंसा में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर है।

    बाहरी लोगों ने किया प्रदर्शन को हाईजैक?

    वायरल वीडियो से उठे सवाल
    विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा के बीच बाहरी लोगों की कथित घुसपैठ का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोगों के हथियार लेकर परिसर में प्रवेश करने और तोड़फोड़ करने के दावे किए जा रहे ।

    छात्राओं के हॉस्टल के आसपास भी संदिग्ध गतिविधियों के आरोप हैं। पंजाब पुलिस इन वीडियो और बाहरी लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, वायरल वीडियो में दिखने वाले सभी लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

    यूनिवर्सिटी के मॉल में लूटपाट! मोबाइल और लैपटॉप की दुकानों को बनाया निशाना?
    हिंसा के बीच विश्वविद्यालय के मॉल में लूटपाट के आरोप भी सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि उपद्रवियों ने मोबाइल, लैपटॉप और अन्य सामान की दुकानों में तोड़फोड़ कर सामान लूट लिया।

    कथित लूटपाट के वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या छात्रों के प्रदर्शन की आड़ में कुछ लोगों ने आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया? फिलहाल लूटे गए सामान की कुल कीमत और आर्थिक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अशोक मित्तल की यूनिवर्सिटी में हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप –

    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

    मित्तल पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए।

    कुछ दावों में इस हिंसा को उनके राजनीतिक दल बदलने से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटना के पीछे राजनीतिक साजिश होने का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। पुलिस जांच के बाद ही हिंसा की वास्तविक वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

    10 दिनों के लिए कक्षाएं बंद, SIT करेगी जांच
    हिंसा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। मिड-टर्म परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं। पुलिस परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है।

  • SPECIAL REPORT SC/ST व्यक्ति का अन्य जाति से विवाह: सरकार क्यों देती है प्रोत्साहन राशि?

    SPECIAL REPORT SC/ST व्यक्ति का अन्य जाति से विवाह: सरकार क्यों देती है प्रोत्साहन राशि?

    निष्पक्ष टुडे /SPECIAL REPORT

    26,050 लाभार्थी… लाखों रुपये की सहायता… लेकिन सवाल—क्या सामाजिक एकीकरण के नाम पर सरकार विवाह के फैसलों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रही है?


    नई दिल्ली/लखनऊ।भारत में SC/ST समुदाय के व्यक्ति का अन्य जाति के व्यक्ति से विवाह होने पर केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से आर्थिक प्रोत्साहन की योजनाएं संचालित की जाती हैं।

    सरकार का घोषित उद्देश्य है—जातिगत भेदभाव कम करना, सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देना और ऐसे विवाह करने वाले पात्र दंपतियों को आर्थिक सहायता देना।

    लेकिन इस व्यवस्था के साथ कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक और नीतिगत सवाल भी उठते हैं।

     2024-25 में 26,050 लाभार्थी :-

    केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में इस योजना के तहत देशभर में 26,050 लाभार्थी दर्ज किए गए।

    पिछले वर्षों के आंकड़े—

    2020-21 — 20,237
    2021-22 — 24,062
    2022-23 — 14,225
    2023-24 — 21,083
    2024-25 — 26,050

     ध्यान रखें –

    ये भारत में हुए कुल SC/ST–अन्य जाति विवाहों की संख्या नहीं है।

    यह केवल सरकारी योजना के तहत दर्ज लाभार्थियों की संख्या है।

     महाराष्ट्र सबसे आगे –

    2024-25 में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार—

    महाराष्ट्र — 8,566
    कर्नाटक — 2,798
    तमिलनाडु — 2,476
    हरियाणा — 2,350
    ओडिशा — 2,039
    गुजरात — 1,775
    मध्य प्रदेश — 1,646
    पश्चिम बंगाल — 1,510
    कुल मिलाकर देशभर में 26,050 लाभार्थी दर्ज हुए।

           कितना मिलता है सरकारी मदद –

    केंद्रीय व्यवस्था में पात्र SC–अन्य जाति विवाह के लिए ₹2.50 लाख तक के प्रोत्साहन का प्रावधान है।

    योजना के दस्तावेज के अनुसार सहायता राशि दंपति के संयुक्त नाम से बैंक में रखने और तीन वर्ष की लॉक-इन अवधि का प्रावधान है।

    हालांकि वास्तविक लाभ राज्य की पात्रता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर कर सकता है।

     लेकिन सबसे बड़ा सवाल—सरकार विवाह पर पैसा क्यों देती है?

    यहीं से इस योजना को लेकर बहस शुरू होती है।
    अगर दो वयस्क अपनी इच्छा से विवाह करते हैं, तो—
    क्या सरकार को उनके विवाह के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन देना चाहिए?

    अगर सरकार का उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है, तो सवाल यह भी है—

    क्या सभी जातियों के बीच विवाह को समान रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, या केवल कुछ विशेष सामाजिक संयोजनों को?

    और सबसे अहम—
    क्या आर्थिक प्रोत्साहन किसी व्यक्ति के विवाह संबंधी निर्णय को प्रभावित कर सकता है?

    क्या इसे “सरकारी धर्मांतरण” कहा जा सकता है?

    यह सवाल भी सार्वजनिक बहस में उठाया जा रहा है, लेकिन यहां तथ्य और आरोप को अलग रखना जरूरी है।

    SC/ST–अन्य जाति विवाह को प्रोत्साहित करने वाली योजना स्वयं धर्म परिवर्तन की योजना नहीं है।

    सरकारी योजना का घोषित आधार जाति और सामाजिक एकीकरण है, धर्म परिवर्तन नहीं पर एक ही जाति पर विशेष मेहरबानी क्यों ?

    लेकिन आलोचनात्मक सवाल यह जरूर हो सकता है—

    “जब सरकार किसी खास सामाजिक संयोजन वाले विवाह पर आर्थिक प्रोत्साहन देती है, तो क्या यह केवल सामाजिक भेदभाव कम करने की नीति है, या इससे विवाह के निजी निर्णयों पर आर्थिक प्रभाव पड़ने की संभावना भी पैदा होती है ?”

    यही वह बिंदु है जिस पर नीति को लेकर सार्वजनिक बहस हो सकती है।

     एक और बड़ा सवाल –

    अगर उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है तो—
    क्या सरकार को जाति की पहचान को विवाह के लिए आर्थिक लाभ की पात्रता का आधार बनाना चाहिए?

    क्योंकि एक तरफ सरकार कहती है कि समाज को जाति से ऊपर उठना चाहिए।

    दूसरी तरफ योजना में पात्रता निर्धारित करने के लिए जाति प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाता है।

    सवाल यही है—
    जाति-मुक्त समाज बनाने के लिए क्या जाति आधारित प्रोत्साहन जरूरी है? या
    ऐसी योजनाओं से जाति की पहचान सरकारी रिकॉर्ड में और लंबे समय तक बनी रहती है?

    यह नीति का एक महत्वपूर्ण विमर्श है।

     दूसरी तरफ सरकार का तर्क क्या है?

    सरकार की ओर से ऐसी योजनाओं का मूल तर्क यह है कि समाज में जातिगत भेदभाव और सामाजिक बाधाएं अभी भी मौजूद हैं।

    इसलिए आर्थिक प्रोत्साहन को सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने वाले उपाय के रूप में देखा जाता है।

    यानी सरकारी दृष्टिकोण में यह किसी धर्म को बदलने की योजना नहीं, बल्कि जातिगत विभाजन कम करने की सामाजिक नीति है।

    लेकिन इस नीति का प्रभाव कितना है और क्या आर्थिक सहायता वास्तव में विवाह के निर्णयों को प्रभावित करती है—यह अलग प्रश्न है, जिसके लिए व्यापक सामाजिक अध्ययन और आंकड़ों की आवश्यकता होगी।

     SC और ST को एक साथ समझना भी जरूरी नहीं ?

    एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि केंद्र की जिस प्रमुख योजना के ये 26,050 आंकड़े हैं, उसकी पात्रता मुख्यतः SC से संबंधित अंतरजातीय विवाह से जुड़ी है।

    इसलिए—
    SC + अन्य जाति
    और
    ST + अन्य जाति
    को एक ही केंद्रीय आंकड़े में स्वतः जोड़ना उचित नहीं है।
    ST विवाह के लिए संबंधित राज्य की जनजातीय कल्याण योजनाओं और नियमों को अलग से देखना होगा।

     उत्तर प्रदेश: आंकड़ों का सवाल –

    केंद्र की राज्यवार तालिका में उत्तर प्रदेश के लिए 2021-22 से 2024-25 तक 0 दर्ज है।
    लेकिन बाद की केंद्रीय रिपोर्टिंग में यूपी के लाभार्थियों का उल्लेख मिलता है।
    इसलिए सवाल उठता है—

    क्या अलग-अलग वर्षों में योजना की reporting व्यवस्था बदली है?

    क्या केंद्र और राज्य के आंकड़ों में तालमेल है?

    और क्या आम लोगों को यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध है कि पात्र दंपति को वास्तव में कितना लाभ मिल सकता है?

    इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।

     निष्पक्ष टुडे के सवाल –

    सवाल नंबर 1
    अगर उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है, तो क्या आर्थिक प्रोत्साहन सही तरीका है?

    सवाल नंबर 2
    क्या विवाह के आधार पर सरकारी आर्थिक प्रोत्साहन देना व्यक्ति के निजी निर्णय को प्रभावित कर सकता है?

    सवाल नंबर 3
    जब सरकार जाति से ऊपर उठने की बात करती है, तो पात्रता के लिए जाति प्रमाणपत्र क्यों जरूरी है?

    सवाल नंबर 4
    क्या समान परिस्थितियों वाले सभी विवाहों के लिए समान आर्थिक प्रोत्साहन होना चाहिए?

    सवाल नंबर 5
    क्या इस योजना का वास्तविक सामाजिक प्रभाव मापने के लिए सरकार के पास कोई स्वतंत्र अध्ययन है?

    सवाल नंबर 6
    और सबसे बड़ा सवाल—

    क्या यह सिर्फ सामाजिक एकीकरण की सरकारी नीति है, या आर्थिक प्रोत्साहन के जरिए विवाह के सामाजिक स्वरूप को प्रभावित करने की कोशिश भी है?और “सरकारी धर्मांतरण” वाला सवाल?

    उसका जवाब तथ्यों से ही मिल सकता है।
    क्योंकि उपलब्ध सरकारी योजना के दस्तावेजों में इसका उद्देश्य धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव कम करना और सामाजिक एकीकरण बताया गया है।

    इसलिए निष्पक्ष सवाल यही होना चाहिए—
    “सरकार की नीति का घोषित उद्देश्य क्या है, जमीन पर उसका वास्तविक प्रभाव क्या है, और क्या इस आर्थिक प्रोत्साहन की जरूरत तथा समानता पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए?”

    अब सरकारी खर्च की –

     5 साल के आंकड़े: एक नजर में-

    केंद्र की योजना के तहत 2020-21 से 2024-25 तक कुल 1,05,657 लाभार्थी दर्ज हुए। इनमें 2024-25 में सबसे ज्यादा 26,050 लाभार्थी रहे।

    वर्षवार लाभार्थी:
    2020-21 — 20,237 | 2021-22 — 24,062 | 2022-23 — 14,225 | 2023-24 — 21,083 | 2024-25 — 26,050

    प्रमुख राज्य –

    (2024-25): महाराष्ट्र 8,566, कर्नाटक 2,798, तमिलनाडु 2,476, हरियाणा 2,350, ओडिशा 2,039 और गुजरात 1,775।

    नोट: ₹2.50 लाख प्रति लाभार्थी के आधार पर 5 वर्षों की राशि लगभग ₹2,641 करोड़ बैठती है, लेकिन यह अनुमानित गणना है, वास्तविक सरकारी खर्च नहीं।

    SPECIAL REPORT | निष्पक्ष टुडे
    सरकारी आंकड़े सामने हैं…
    सरकार का तर्क भी सामने है…
    अब सवाल नीति पर है—और जवाब तथ्यों से होना चाहिए।

  • भारत की बेटियों ने नकवी से ट्रॉफी लेने से किया इनकार, फिर छाया ट्रॉफी विवाद

    भारत की बेटियों ने नकवी से ट्रॉफी लेने से किया इनकार, फिर छाया ट्रॉफी विवाद

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    एशिया कप जीतने के बाद भारतीय महिला टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं ली; दो साल में दूसरी बार भारतीय टीम का ऐसा रुख चर्चा में


    दुबई। एशिया कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की शानदार जीत के बाद एक बार फिर ट्रॉफी से ज्यादा चर्चा ट्रॉफी सौंपने वाले शख्स को लेकर हो रही है।

    भारतीय महिला टीम ने खिताब जीतने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। टीम के इस फैसले ने क्रिकेट और भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    क्या हुआ?

    ● भारत ने जीता एशिया कप

    भारतीय महिला टीम ने फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।

    ● नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार

    खिताब जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की। यही तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गई।

    ● दो साल में दूसरी ऐसी घटना

    इससे पहले भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम से जुड़ा ऐसा ही विवाद सामने आया था, जब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से परहेज किया था।

    ● इस बार बदला हुआ सीन

    पिछली घटना में नकवी ट्रॉफी अपने साथ लेकर चले गए थे। इस बार ट्रॉफी भारतीय टीम तक पहुंची, लेकिन नकवी से उसे लेने का सवाल ही नहीं उठा।

    क्रिकेट से ज्यादा अब प्रोटोकॉल पर चर्चा

    भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबले अक्सर मैदान से बाहर भी राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसे में भारतीय महिला टीम का यह फैसला भी सिर्फ एक पुरस्कार समारोह तक सीमित नहीं रहा और सोशल मीडिया पर इसे अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

    सवाल यह है—

    क्या यह सिर्फ एक प्रोटोकॉल संबंधी फैसला था या भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव का असर क्रिकेट के मंच पर भी दिखाई दे रहा है?

    फिलहाल इतना जरूर है कि एशिया कप की ट्रॉफी जीतने के साथ भारतीय महिला टीम ने मैदान पर अपना दबदबा कायम किया, जबकि ट्रॉफी समारोह की तस्वीरों ने एक अलग ही कहानी को जन्म दे दिया।

  • 40 घंटे… दर्जनों मशीनें… तीन कोशिशें… फिर भी नहीं हिली हनुमान जी की प्रतिमा!

    40 घंटे… दर्जनों मशीनें… तीन कोशिशें… फिर भी नहीं हिली हनुमान जी की प्रतिमा!

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    मंदिर का ढांचा हटा, रास्ता चौड़ा करने की तैयारी पूरी… लेकिन प्रतिमा के सामने प्रशासन की मशीनें बेबस! अब स्कैनिंग से खुलेगा राज


    उज्जैन से बड़ी और हैरान कर देने वाली खबर…

    उज्जैन के सती गेट इलाके में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई।

    भक्तों ने भावुक होकर मंदिर को विदाई दी…
    महाआरती हुई…
    और इसके बाद शुरू हुआ प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का ऑपरेशन।

    लेकिन इसके बाद जो हुआ… उसने प्रशासन से लेकर श्रद्धालुओं तक—हर किसी को हैरान कर दिया!

    मशीनें गरजीं… लेकिन प्रतिमा टस से मस नहीं हुई!

    भारी मशीनरी लगाई गई।
    तकनीकी टीम ने पूरी ताकत झोंक दी।

    एक बार कोशिश हुई…
    फिर दूसरी बार…
    फिर तीसरी बार…

    लेकिन दावा है कि हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली!

    घंटों की मशक्कत के बाद भी जब प्रतिमा नहीं हिली तो प्रशासन के सामने सवाल खड़ा हो गया—

    आखिर प्रतिमा के नीचे ऐसा क्या है?

    क्या जमीन के भीतर कोई पुरानी संरचना मौजूद है?

    क्या प्रतिमा किसी बेहद मजबूत आधार में जड़ी हुई है?

    या फिर इसके पीछे कोई ऐसी तकनीकी वजह है, जिसका पता अभी तक नहीं चल पाया?

    मंदिर हट गया… लेकिन प्रतिमा वहीं रह गई!

    सबसे दिलचस्प तस्वीर यही है।

    सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का ढांचा हटाया जा रहा है, लेकिन मुख्य प्रतिमा को हटाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं।

    अब प्रशासन ने जल्दबाजी में प्रतिमा को खींचने के बजाय तकनीकी जांच और स्कैनिंग कराने की तैयारी की है।

    यानी अब मशीनों की ताकत के बाद बारी है—विज्ञान की जांच की।

    श्रद्धालुओं के बीच गूंज रहा है एक ही सवाल!

    भक्त इसे हनुमान जी की शक्ति और आस्था से जोड़कर देख रहे हैं।

    कई श्रद्धालुओं का मानना है कि—

    “हनुमान जी खुद अपनी जगह छोड़ना नहीं चाहते।”

    लेकिन पत्रकारिता का सवाल इससे आगे है।

    क्या सचमुच यह चमत्कार है?

    या फिर प्रतिमा के नीचे छिपी कोई ऐसी संरचनात्मक वजह है, जो उसे हटने नहीं दे रही?

    फिलहाल इसका जवाब किसी दावे से नहीं, बल्कि तकनीकी जांच से मिलेगा।

    अब खुलेगा प्रतिमा के नीचे छिपे रहस्य का राज!

    स्कैनिंग के बाद पता चल सकता है कि प्रतिमा किस तरह स्थापित है, उसका आधार कितना गहरा है और जमीन के भीतर कोई पुरानी संरचना मौजूद है या नहीं।

    यानी जिस प्रतिमा को हटाने के लिए मशीनें लगाई गईं…

    अब वही प्रतिमा वैज्ञानिक जांच का केंद्र बन गई है।

    और उज्जैन में हर किसी की नजर अब एक ही सवाल पर है—

    “क्या मशीनों से भी ताकतवर है आस्था… या जमीन के नीचे छिपा है कोई ऐसा राज, जो अभी तक सामने नहीं आया?”

    खड़े हनुमान जी की प्रतिमा क्यों नहीं हिली—इस सवाल का अंतिम जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

    निष्पक्ष टुडे—खबर वही, जो सवाल भी पूछे और सच भी तलाशे।

  • दिल्ली के सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, 3 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी

    दिल्ली के सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, 3 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    50 से ज्यादा छात्रों के दबे होने की आशंका—सूत्र; दो लोगों को मलबे से निकाला गया, फायर-पुलिस की टीमें रेस्क्यू में जुटीं


    नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई।

    हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे में कई लोगों, खासकर छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

    50 से ज्यादा स्टूडेंट्स के मलबे में दबे होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह संख्या अभी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हुई है। मौके पर जारी रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ही वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

    दो लोगों को सुरक्षित निकाला गया :-

    ताजा मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राहत-बचाव अभियान के दौरान कम से कम दो लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। बचाव दल लगातार मलबे के अंदर फंसे अन्य लोगों की तलाश कर रहे हैं।

    फायर विभाग की कई टीमें मौके पर :-

    हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। रिपोर्टों के अनुसार आठ फायर टेंडर मौके पर भेजे गए हैं। दिल्ली पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद हैं तथा रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी की जा रही है।

    आसपास की इमारतें भी खाली कराई गईं :-

    सुरक्षा को देखते हुए आसपास की कुछ इमारतों को खाली कराया गया है। इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा हैं, जबकि बचाव दल मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

    हॉस्टल में रहते थे छात्र?

    मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से छात्रों के बड़ी संख्या में मौजूद होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, हॉस्टल में हादसे के समय कितने लोग मौजूद थे, इसकी आधिकारिक संख्या अभी सामने नहीं आई है।

    बेसमेंट में निर्माण कार्य की बात भी सामने आई
    प्रारंभिक जानकारी में बेसमेंट में निर्माण कार्य चलने और इसी दौरान इमारत के ढहने की बात कही जा रही है। लेकिन अभी इसे हादसे की आधिकारिक वजह नहीं माना जा सकता। निर्माण कार्य और बिल्डिंग की संरचनात्मक स्थिति की जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

    बारिश के बीच हुआ हादसा :-

    दिल्ली में पिछले दो दिनों से बारिश का दौर जारी है। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने बारिश और हादसे की परिस्थितियों का जिक्र किया है, लेकिन बिल्डिंग गिरने की वास्तविक वजह अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

    पुलिस-प्रशासन की प्राथमिकता :-

    रेस्क्यू फिलहाल पुलिस, फायर विभाग और अन्य बचाव दलों का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या कितनी जनहानि हुई है, इसकी अंतिम आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

    बड़ी बात यह है...
    50 से ज्यादा छात्रों के दबे होने की आशंका वाली जानकारी फिलहाल सूत्रों के हवाले से है, जबकि मीडिया रिपोर्टों में कम से कम दो लोगों के रेस्क्यू की बात सामने आई है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि से पहले संख्या को अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।

    निष्पक्ष टुडे की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। रेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस-प्रशासन से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी के आधार पर खबर को लगातार अपडेट किया जाएगा।

    अभी की स्थिति में सबसे मजबूत पुष्टि: हादसा करीब 1:30 बजे हुआ, तीन मंजिला इमारत गिरी, फायर/पुलिस मौके पर हैं और रेस्क्यू जारी है; मीडिया रिपोर्टों में दो लोगों के बचाए जाने की जानकारी है।

  • मेरठ में UPSSF की भव्य तिरंगा यात्रा, गूंजा देशभक्ति का जयघोष

    मेरठ में UPSSF की भव्य तिरंगा यात्रा, गूंजा देशभक्ति का जयघोष

    मेरठ ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    स्वतंत्रता दिवस से पहले 05वीं वाहिनी UPSSF ने निकाली तिरंगा यात्रा, जवानों ने दिया राष्ट्रप्रेम, एकता और सुरक्षा का संदेश



    मेरठ | 13 अगस्त 2026 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत 05वीं वाहिनी उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (UPSSF), सहारनपुर द्वारा मेरठ में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई।

    🇮🇳 यात्रा में दिखा देशभक्ति का जोश

    तिरंगा यात्रा बेगमपुल RRTS स्टेशन से शुरू हुई। जवान हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के जयघोष करते हुए भैंसाली बस अड्डा और हापुड़ रोड से होते हुए दोबारा बेगमपुल स्टेशन पहुंचे, जहां यात्रा का समापन हुआ।

    🔴 यात्रा की खास बातें :-

    • बेगमपुल RRTS स्टेशन से हुई शुरुआत
    • भैंसाली बस अड्डा और हापुड़ रोड से होकर निकली यात्रा
    • जवानों ने हाथों में तिरंगा लेकर दिया राष्ट्रप्रेम का संदेश
    • यात्रा में UPSSF के अधिकारियों और कर्मचारियों ने लिया हिस्सा
    • RRTS प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ खंड और नोएडा मेट्रो में तैनात बल के जवान शामिल हुए
    • पूरी यात्रा में अनुशासन, एकता और देशभक्ति का प्रदर्शन

    👮 अधिकारियों के नेतृत्व में निकली यात्रा :-

    सेनानायक के निर्देशन में उप सेनानायक एवं सहायक सेनानायक के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा आयोजित की गई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरे उत्साह के साथ इसमें सहभागिता की।

    🇮🇳 UPSSF का संदेश :-

    UPSSF अधिकारियों के मुताबिक, यात्रा का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना, साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा और शांति का विश्वास कायम करना है।

    निष्पक्ष टुडे की खास रिपोर्ट — तिरंगे के साथ देशभक्ति का संदेश, सुरक्षा बलों ने मनाया स्वतंत्रता दिवस का उत्सव।

    जय हिंद! 🇮🇳