Author: Anurag Tripathi

  • राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति

    राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति

    अयोध्या ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मिली जिम्मेदारी, तीन नए न्यासी भी बनाए गए


    अयोध्या, 2 सितंबर 2026।श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बुधवार को महत्वपूर्ण बदलाव किए गए।

    अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया गया। इसके साथ ही तीन नए न्यासियों की नियुक्ति भी की गई।

    1. कौन हैं जितेंद्र मिश्रा

    ट्रस्ट के प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्ष सेवा की है। उन्हें नेतृत्व और प्रशासन का लंबा अनुभव रहा है तथा उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया है।

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह पश्चिमी वायु कमान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के नेतृत्व से भी उनका नाम जोड़ा गया है।

    अब CEO के रूप में उनकी जिम्मेदारी राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन संबंधी कामकाज को व्यवस्थित करने की होगी।

    2. ट्रस्ट में तीन नए न्यासी

    बैठक में तीन रिक्त पदों पर भी नियुक्तियां की गईं। नए न्यासी हैं—

    • महेश भागचंदका — दिल्ली
    • मदन मोहन पांडेय — अयोध्या
    • निर्मला यादव — शिकोहाबाद

    इन तीनों नामों की पुष्टि बैठक के बाद सामने आई कई मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    मदन मोहन पांडेय

    मदन मोहन पांडेय वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और राम जन्मभूमि मामले में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाली टीम से जुड़े रहे हैं।

    महेश भागचंदका

    महेश भागचंदका दिल्ली के कारोबारी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका राम मंदिर आंदोलन से पुराना जुड़ाव रहा है और 2020 के भूमि पूजन कार्यक्रम में भी वे यजमानों में शामिल थे।

    निर्मला यादव

    निर्मला यादव शिकोहाबाद से हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया है और वे ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य हैं। हालांकि उनके विस्तृत परिचय की आधिकारिक जानकारी अभी सीमित है।

    3. तीन पद क्यों हुए खाली?

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट में तीन पद खाली हुए थे। इनमें एक पद ट्रस्ट सदस्य विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली हुआ था।

    इसके अलावा 2026 में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दो और पद रिक्त हुए। इन्हीं रिक्तियों को अब नई नियुक्तियों से भरा गया है।

    4. चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी चर्चा

    बैठक में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रेस विज्ञप्ति में न्यायालय में विचाराधीन वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित मामले और विशेष जांच दल की जांच का उल्लेख किया गया है।

    ट्रस्ट के अनुसार, जांच से तथ्यों के सामने आने और जनमानस में किसी भी भ्रम को दूर करने में मदद मिल सकती है।

    5. नकदी गिनने की प्रक्रिया में तकनीक पर जोर

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चढ़ावे की नकद राशि की गणना की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और तकनीक के इस्तेमाल पर भी विचार किया गया है।

    बैंकों और आईटी क्षेत्र से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन करने की बात कही गई है, ताकि इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके।

    6. ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति कितनी है?

    आपके उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखों का भी उल्लेख है।

    इसके अनुसार—-

    कुल आय — करीब 237 करोड़ रुपये
    कुल व्यय — करीब 91 करोड़ रुपये
    निर्माण आदि पर पूंजीगत व्यय — करीब 425 करोड़ रुपये
    31 मार्च 2026 को उपलब्ध कुल राशि — करीब 1,882 करोड़ रुपये

    इन आंकड़ों को ट्रस्ट की प्रेस विज्ञप्ति में प्रस्तुत वार्षिक लेखों के आधार पर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    7. पदाधिकारियों में भी बदलाव

    बैठक में पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई।
    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार स्वामी गोविंददेव गिरि महामंत्री के पद पर बने रहेंगे, जबकि महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

    निष्पक्ष टुडे का निष्कर्ष 


    राम मंदिर ट्रस्ट में यह बदलाव केवल नए चेहरों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति, तीन नए न्यासियों का शामिल होना, वित्तीय प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर विचार और चढ़ावे से जुड़े मामलों में जांच—ये सभी फैसले ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    हालांकि, वित्तीय अनियमितताओं या चढ़ावे से जुड़े किसी भी आरोप को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि संबंधित जांच/कानूनी प्रक्रिया का परिणाम अलग विषय है।

  • SPECIAL REPORT | टोल वसूली पर उठे गंभीर सवाल

    SPECIAL REPORT | टोल वसूली पर उठे गंभीर सवाल

    गोरखपुर /लखनऊ ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    NHAI के अधिकृत सिस्टम के समानांतर सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की जांच, ED की 14 ठिकानों पर कार्रवाई


    सरकारी टोल व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की पड़ताल

    देश के हाईवे पर सफर करने वाले लाखों वाहन रोजाना टोल टैक्स का भुगतान करते हैं।

    टोल वसूली की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए FASTag और NHAI के अधिकृत सॉफ्टवेयर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।लेकिन अब इसी व्यवस्था से जुड़ी कथित अनियमितताओं ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    NHAI के अधिकृत टोल सिस्टम के समानांतर एक अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के आरोपों की जांच चल रही है।

    इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 14 ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई की है।

    हमारी इस विशेष रिपोर्ट में समझिए—

    आरोप क्या हैं, सरकारी रिकॉर्ड में क्या सामने आया है और जांच एजेंसियां किन सवालों के जवाब तलाश रही हैं।

    1. ED की कार्रवाई से फिर चर्चा में आया मामला :-

    टोल वसूली से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में ED की कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

    जांच एजेंसी कथित तौर पर टोल वसूली से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

    ED की तलाशी को जांच की कार्रवाई के तौर पर देखा जाना चाहिए; इससे किसी व्यक्ति या संस्था का अपराध सिद्ध नहीं होता।

    2. समानांतर सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का आरोप

    मामले की जांच में यह आरोप सामने आया है कि कुछ टोल प्लाजा पर NHAI के अधिकृत सिस्टम के अलावा एक समानांतर या अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया।

    जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस व्यवस्था के जरिए कुछ टोल लेनदेन का रिकॉर्ड अधिकृत सिस्टम से अलग रखा जा सकता था।

    अगर जांच में यह आरोप प्रमाणित होता है, तो इससे टोल वसूली की निगरानी और राजस्व मिलान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।

    3. 5% और 95% वाला दावा—क्या है सच्चाई?

    जांच के दौरान सामने आए कुछ बयानों में यह दावा किया गया कि कुछ परिस्थितियों में वसूली गई रकम का एक छोटा हिस्सा ही NHAI के अधिकृत सिस्टम में दर्ज किया जाता था और शेष रकम अलग व्यवस्था में रहती थी।

    इसी संदर्भ में 5 प्रतिशत और 95 प्रतिशत के आंकड़े का उल्लेख किया गया है।

    लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है—

    यह आंकड़ा अभी देशभर के सभी टोल प्लाजा पर लागू कोई अंतिम सरकारी निष्कर्ष नहीं है।
    इसलिए इसे जांच में सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितता कितने टोल प्लाजा पर हुई, कितनी रकम प्रभावित हुई और वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना था।

    4. जांच की शुरुआत उत्तर प्रदेश से :-

    मामले की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश STF की कार्रवाई से जुड़ा है।

    जनवरी 2025 में मिर्जापुर के अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर कार्रवाई के बाद टोल वसूली और कथित समानांतर सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच आगे बढ़ी।
    जांच में सामने आए आरोपों के आधार पर यह सवाल भी उठा कि क्या ऐसी व्यवस्था किसी एक टोल प्लाजा तक सीमित थी या दूसरे स्थानों पर भी इसकी जांच जरूरी है।

    5. 200 से अधिक टोल प्लाजा की जांच की बात

    मीडिया रिपोर्टों में जांच का दायरा 200 से अधिक टोल प्लाजा तक पहुंचने की बात कही गई है।

    इनमें लगभग 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं।
    हालांकि, यहां अंतर समझना जरूरी है—

    जांच के दायरे में शामिल होना अनियमितता या अपराध साबित होने के बराबर नहीं है।
    अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

    6. संसद में सरकार ने क्या बताया?

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने संसद में दिए एक जवाब में टोल वसूली से संबंधित अनियमितता की शिकायत का उल्लेख किया था।सरकार के अनुसार मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी।

    यह सरकारी जवाब इस बात की पुष्टि करता है कि टोल वसूली की प्रक्रिया को लेकर शिकायतें जांच के स्तर तक पहुंची थीं। हालांकि, किसी विशेष टोल प्लाजा या संस्था की जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित जांच के अंतिम निष्कर्ष देखना जरूरी होगा।

    7. NHAI की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण :-

    टोल वसूली में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में NHAI की ओर से भी कार्रवाई की गई।
    सरकारी जानकारी के अनुसार 14 User Fee Collection Agencies को डिबार किया गया और 100 करोड़ रुपये से अधिक की Performance Security से संबंधित कार्रवाई की गई।

    यह कार्रवाई टोल संचालन में नियमों के अनुपालन को लेकर NHAI की सख्ती को दर्शाती है।

    8. लालानगर टोल प्लाजा का अलग मामला :-

    वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के लालानगर टोल प्लाजा से जुड़ा ₹62.87 करोड़ का स्टांप ड्यूटी विवाद भी सामने आया है।

    रिपोर्टों के अनुसार टोल संचालन के एक बड़े अनुबंध को लेकर स्टांप शुल्क की देनदारी पर विवाद हुआ।लेकिन यहां सावधानी जरूरी है।

    यह मामला स्टांप ड्यूटी/राजस्व विवाद से संबंधित है और इसे सीधे कथित समानांतर टोल सॉफ्टवेयर मामले की रकम के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।दोनों मामलों की प्रकृति अलग है।

    9. सबसे बड़ा सवाल—निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?

    इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल संभावित राजस्व नुकसान का नहीं है।

    सवाल यह भी है कि—

    क्या अधिकृत टोल सिस्टम के बाहर किसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल संभव था?

    अगर ऐसा हुआ, तो इसकी जानकारी निगरानी तंत्र को कितने समय बाद मिली?

    क्या डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक टोल वसूली के बीच अंतर की नियमित जांच होती थी?

    और अगर कोई वित्तीय अंतर पाया गया, तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?

    10. जांच के नतीजे का इंतजार :-

    फिलहाल ED और अन्य एजेंसियों की जांच जारी है।

    जांच के दौरान बरामद दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, सॉफ्टवेयर डेटा और वित्तीय लेनदेन से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित अनियमितता वास्तव में हुई या नहीं और यदि हुई तो उसका दायरा कितना था।

    इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात है—

    आरोप और प्रमाण के बीच अंतर बनाए रखना।
    टोल वसूली में अनियमितता के आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

    SPECIAL REPORT | 
    टोल प्लाजा से जुड़ी यह जांच एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करती है—

    जब सरकारी राजस्व की निगरानी डिजिटल सिस्टम से हो रही हो, तो क्या उस सिस्टम के समानांतर किसी अनधिकृत व्यवस्था की गुंजाइश रह सकती है?

    अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ टोल संचालन का मामला नहीं होगा, बल्कि डिजिटल मॉनिटरिंग, ठेकेदारों की जवाबदेही और सरकारी राजस्व की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला होगा,और अगर आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो जांच के जरिए उन संस्थाओं और व्यक्तियों को भी स्पष्ट रूप से अलग किया जाना जरूरी होगा जिन पर केवल संदेह या जांच के आधार पर सवाल उठे हैं।

    फिलहाल जांच जारी है—और अंतिम सच जांच रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

  • SPECIAL STORY | NISPAKSH TODAY प्रकृति की चेतावनी से प्रचंड आपदा तक

    SPECIAL STORY | NISPAKSH TODAY प्रकृति की चेतावनी से प्रचंड आपदा तक

    गोरखपुर/काठमांडु ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    नेपाल की तबाही ने हिमालय के भविष्य पर खड़े किए बड़े सवाल


    नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने पूरे हिमालयी क्षेत्र की आपदा तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पानी, बर्फ, चट्टान और मलबे की तेज धारा ने कुछ ही समय में गांवों, सड़कों, पुलों और मानवीय जीवन को भारी नुकसान पहुंचाया।

    तबाही के आंकड़े डराने वाले :-

    नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में हुई इस आपदा में 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2 हजार से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। वहीं करीब 93 हजार लोगों को तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत बताई जा रही है।

    नेपाल में पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर 4 से 5 अरब डॉलर तक खर्च होने का अनुमान है।

    बच्चों पर भी गहरा असर :-

    आपदा के बाद हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं। कई स्कूल क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हुए हैं।
    रिपोर्टों के अनुसार करीब 17 हजार बच्चों को तत्काल सहायता की जरूरत है। ऐसे में संकट सिर्फ जान-माल तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर भी लंबे समय तक असर डाल सकता है।

    आखिर कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?

    प्रारंभिक आकलनों के अनुसार हिमालय के ऊपरी क्षेत्र में बर्फ, हिमनद या चट्टानी हिस्से के खिसकने से बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नदी तंत्र में पहुंचा।इसके बाद एक के बाद एक संकट सामने आते गए।

    पहाड़ खिसका, पानी बढ़ा, मलबा आया, बाढ़ आई, सड़कें और पुल टूटे और गांवों का संपर्क कट गया।

    यानी एक प्राकृतिक घटना देखते ही देखते श्रृंखलाबद्ध आपदा में बदल गई।

    क्या सिर्फ प्रकृति जिम्मेदार है?

    यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हर आपदा को सिर्फ प्रकृति का प्रकोप कहकर इंसान अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है?

    प्राकृतिक घटनाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनका नुकसान कम किया जा सकता है।
    अनियंत्रित निर्माण, ढलानों की कटाई, नदी क्षेत्रों में अतिक्रमण और कमजोर पर्यावरणीय नियोजन जोखिम को और बढ़ा सकते हैं।

    अब राहत से ज्यादा जरूरी है तैयारी :-

    आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है आपदा आने से पहले खतरे को पहचानना।इसके लिए हिमनदों की निगरानी, उपग्रह आधारित सिस्टम, नदी जलस्तर सेंसर, भूस्खलन चेतावनी और रियल टाइम मौसम डेटा को एक साथ जोड़ना होगा।

    और सबसे जरूरी—चेतावनी सिर्फ कंट्रोल रूम तक नहीं, बल्कि अंतिम गांव तक पहुंचनी चाहिए।
    स्थानीय लोग बनें पहला सुरक्षा कवच
    संवेदनशील पर्वतीय गांवों में आपदा प्रबंधन समितियां, प्रशिक्षित स्वयंसेवक, सुरक्षित स्थान और स्पष्ट निकासी मार्ग तैयार किए जाने चाहिए।
    स्थानीय लोगों को भी बाढ़, भूस्खलन और पहाड़ों में होने वाले असामान्य बदलावों के शुरुआती संकेतों की पहचान के लिए प्रशिक्षित करना होगा।

    हिमालय की सुरक्षा के लिए साझा प्रयास जरूरी :-

    हिमालय किसी एक देश तक सीमित नहीं है।
    नेपाल, भारत, चीन और पूरा दक्षिण एशिया इसकी पारिस्थितिकी से जुड़ा हुआ है। हिमनद और नदियां राजनीतिक सीमाओं को नहीं पहचानते।

    इसलिए जरूरत है साझा वैज्ञानिक अध्ययन, सैटेलाइट डेटा, जोखिम मानचित्र और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने की।

    विकास जरूरी, लेकिन सुरक्षित विकास :-

    सड़कें, बिजली और जलविद्युत परियोजनाएं विकास के लिए जरूरी हैं।

    लेकिन सवाल यह है—

    क्या विकास प्रकृति को समझकर होगा या प्रकृति की कीमत पर?

    हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विकास का मतलब सिर्फ निर्माण नहीं, बल्कि सुरक्षित निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य के जोखिम की तैयारी भी होना चाहिए।

    THE BIG QUESTION

    नेपाल की इस त्रासदी से सबसे बड़ा सवाल यही निकलता है—

    क्या हम प्रकृति की चेतावनियों को समय रहते समझ रहे हैं?

    अगर चेतावनी को नजरअंदाज किया गया, तो अगली आपदा और बड़ी हो सकती है।

    लेकिन अगर वैज्ञानिक निगरानी, बेहतर योजना और स्थानीय तैयारी पर अभी से जोर दिया जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

    NISPAKSH TODAY | SPECIAL CONCLUSION

    नेपाल की यह त्रासदी सिर्फ नेपाल की कहानी नहीं है।

    यह हिमालय की चेतावनी है।
    यह दक्षिण एशिया की चेतावनी है।
    और यह पूरी मानवता के लिए संदेश है।
    प्रकृति लगातार संकेत दे रही है। जरूरत है उन संकेतों को समझने और समय रहते तैयारी करने की।
    क्योंकि प्रकृति की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया, तो वही चेतावनी प्रचंड आपदा बन सकती है।

  • BREAKING NEWS: गोरखपुर में CM योगी का बड़ा बयान

    BREAKING NEWS: गोरखपुर में CM योगी का बड़ा बयान

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    🟡 170 विकास परियोजनाओं से बदलेगा गोरखपुर का स्वरूप


    गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 170 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का उल्लेख करते हुए महानगरवासियों को बधाई दी।

    🟢 गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए कल्याण मंडपम

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में कल्याण मंडपम विकसित किए जा रहे हैं।


    इनका इस्तेमाल शादी-विवाह, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बैठक और सम्मेलन के लिए किया जा सकेगा।

    उन्होंने बताया कि इसके लिए विधायक निधि से करीब ढाई करोड़ रुपये दिए गए हैं।

    🔴 इंसेफेलाइटिस पर CM योगी का बड़ा दावा

    मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की लंबे समय से चली आ रही इंसेफेलाइटिस की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों से अब इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है।

    🔥 CM योगी का चर्चित बयान
    “मच्छर नहीं है, माफिया नहीं है!”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बीमारी और अपराध दोनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की है।

    🟠 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा –

    रक्षाबंधन के दौरान महिलाओं को दी गई मुफ्त बस यात्रा का मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया।
    उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को भी रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी।

    🟣 50 हजार मेधावी बेटियों को स्कूटी –

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्नातक के अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की योजना पर सरकार काम कर रही है।

    🔵 युवाओं के लिए रोजगार और स्किलिंग जोन –

    युवाओं के रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री ने रोजगार एवं स्किलिंग जोन विकसित करने की बात कही।

    यहां युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

     

    मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को जर्मनी और इजरायल जैसे देशों में रोजगार के लिए भी तैयार किया जाएगा।

    🚨 कानून-व्यवस्था पर CM योगी का सख्त संदेश –

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून मानने वालों का सम्मान होगा, लेकिन कानून तोड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।

    उन्होंने कहा कि पर्व और त्योहारों के दौरान प्रदेश में सुरक्षित और भयमुक्त माहौल बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

    🏗️ सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा में विकास –

    मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, एम्स, मेडिकल कॉलेज और पर्यटन के क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया।

    रामगढ़ताल के विकास और शहर में बढ़ती सुविधाओं का भी उन्होंने जिक्र किया।

    📹 CCTV और कमांड सेंटर से शहर की निगरानी –

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीसीटीवी कैमरों और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से ट्रैफिक, सफाई और शहर की अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।

    🟤 विपक्ष पर भी साधा निशाना –

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाया।
    उन्होंने जनता से विकास और जनकल्याण के मुद्दे पर सतर्क रहने की अपील की।

    🔥 CM योगी का बड़ा संदेश –

    “मच्छर नहीं है, माफिया नहीं है!”

    मुख्यमंत्री के मुताबिक, गोरखपुर अब बीमारी, अपराध और पिछड़ेपन की पुरानी पहचान से निकलकर विकास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए दौर में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री ने आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को उत्साह और उल्लास के साथ मनाने की अपील करते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

    निष्पक्ष टुडे | विशेष रिपोर्ट

  • रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार, अर्पित हुई राखी; सवा लाख लड्डुओं का लगा भोग

    रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार, अर्पित हुई राखी; सवा लाख लड्डुओं का लगा भोग

    उज्जैन ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    भस्म आरती में दिखा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर


    उज्जैन। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दरबार में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया। इसके बाद बाबा को राखी अर्पित कर रक्षाबंधन उत्सव मनाया गया।
    ॥ ॐ नमः शिवाय ॥

    🕉️ भस्म आरती में हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

    सुबह भस्म आरती के समय मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    ॥ कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
    सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥ ॥

    मंदिर परिसर में शंखध्वनि और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।

    🎀 बाबा महाकाल को अर्पित की गई राखी

    रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा महाकाल को राखी अर्पित की गई। भगवान को राखी अर्पित करने का यह दृश्य श्रद्धा और भक्ति से भर देने वाला रहा।

    रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व है। इसी पावन भावना को बाबा महाकाल के चरणों में समर्पित करते हुए रक्षाबंधन उत्सव मनाया गया।

    ॥ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॥

    🍬 सवा लाख लड्डुओं का भव्य भोग

    रक्षाबंधन के इस विशेष आयोजन में बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया। भोग के इस विशेष आयोजन ने पर्व की भव्यता को और बढ़ा दिया।

    ॥ अन्नं ब्रह्म रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः॥ ॥

    भक्तों ने बाबा महाकाल से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और रक्षा की कामना की।

    🔱 जयघोष से गूंजा महाकाल का दरबार

    भस्म आरती और विशेष श्रृंगार के दौरान पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा नजर आया। श्रद्धालुओं के बीच ‘हर हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष गूंजते रहे।

    ॥ शिवं शान्तं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम्।
    नमामि देवदेवेशं महाकालं महेश्वरम्॥ ॥

    रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बाबा महाकाल को राखी अर्पण, दिव्य श्रृंगार और सवा लाख लड्डुओं का भोग—यह पूरा आयोजन श्रद्धा, परंपरा और भक्ति का ऐसा संगम बना, जिसने महाकाल की नगरी को एक बार फिर शिवमय कर दिया।

    हर-हर महादेव! 🔱
    जय श्री महाकाल! 🙏

  • श्री बालाजी सरकार दरबार में गूंजा कीर्तन, भंडारे में उमड़ा भक्तों का सैलाब

    श्री बालाजी सरकार दरबार में गूंजा कीर्तन, भंडारे में उमड़ा भक्तों का सैलाब

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    हर बृहस्पतिवार की परंपरा के तहत हुआ आयोजन, भक्तों ने ग्रहण किया प्रसाद


    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर, निकट सेल टैक्स ऑफिस, तारामंडल गोरखपुर में हर बृहस्पतिवार की भांति इस सप्ताह भी कीर्तन एवं भंडारे का भव्य आयोजन किया गया।

    धार्मिक माहौल और भक्ति गीतों से पूरा मंदिर प्रांगण भक्तिमय नजर आया।


    🔴 मुख्य बिंदु

    • हर बृहस्पतिवार की परंपरा के तहत कीर्तन का आयोजन।
    • भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
    • भक्तों की भारी मौजूदगी से पूरा मंदिर परिसर भक्तों से भरा रहा।
    • आयोजन की व्यवस्था बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट की देखरेख में संपन्न हुई।
    • अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी एवं उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे ‘बबलू’ ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • पंडित शुभम शास्त्री, मनीष मिश्रा, कामाख्या नारायण सिंह, राणा सिंह एवं डॉ. सीताराम पांडे का आयोजन में विशेष योगदान रहा।

    🎙️ आयोजन को सफल बनाने वालों का सम्मान –

    बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी ने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों का आभार और धन्यवाद व्यक्त किया

     

    कीर्तन और भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने भक्ति भाव से कीर्तन में सहभागिता की और बाद में भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

    जय बालाजी सरकार! जय श्री बालाजी महाराज!

  • सावन के अंतिम सोमवार पर बालाजी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन के अंतिम सोमवार पर बालाजी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :


    दिनभर चला जलाभिषेक, “ॐ नमः शिवाय” के जयकारों से गूंजता रहा तारामंड

    गोरखपुर। पवित्र सावन मास के चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार को श्री बालाजी मंदिर, सेल टैक्स ऑफिस के निकट, तारामंडल में श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिली।

    सुबह से ही मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और विशेष पूजन शुरू हो गया, जो पूरे दिन चलता रहा।


    🔱 जलाभिषेक में शामिल हुए श्रद्धालु

    श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जल, दूध, अक्षत, दही और गन्ने के रस से अभिषेक किया।

    इस दौरान मंदिर परिसर लगातार “ॐ नमः शिवाय” और भगवान भोलेनाथ के जयकारों से गूंजता रहा।

     

    सावन के अंतिम सोमवार के चलते पूरे तारामंडल क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना रहा।


    ⭐ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ कार्यक्रम

    बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी एवं उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे ‘बबलू’ की देखरेख में पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया।

    🙏 व्यवस्था में इनका रहा महत्वपूर्ण योगदान

    कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में समिति के पंडित शुभम शास्त्री, कामाख्या नारायण सिंह, सक्षम दुबे, डॉ. सीताराम पांडे, राणा सिंह और गोरख पांडेय सहित अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


    🕉️ अंतिम सोमवार पर विशेष आस्था

    सावन के अंतिम सोमवार को दिनभर चले जलाभिषेक ने बालाजी मंदिर को भक्ति और श्रद्धा के केंद्र में बदल दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से सर्वजन के सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना की।


    जय भोलेनाथ… हर हर महादेव!
    निष्पक्ष टुडे के लिए विशेष रिपोर्ट

  • अजीत भारती पर SC/ST Act FIR: क्या आरक्षण सुधार आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश?

    अजीत भारती पर SC/ST Act FIR: क्या आरक्षण सुधार आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश?

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े सक्रिय सदस्य और RHA के संस्थापक सदस्यों में शामिल बताए जा रहे अजीत भारती पर केस |

    समर्थकों का आरोप—आंदोलन की आवाज दबाने की कोशिश

    नई दिल्ली।दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे Reservation Reform आंदोलन के बीच अजीत भारती के खिलाफ FIR दर्ज होने से विवाद और गहरा गया है।

    मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो और कथित टिप्पणी तक सीमित नहीं है। आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि—
    क्या FIR के पीछे सिर्फ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी है, या फिर इसका असर जंतर-मंतर के आंदोलन पर भी पड़ सकता है?

     अजीत भारती की आंदोलन में क्या भूमिका है?

    आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, अजीत भारती दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे Reservation Reform आंदोलन के सक्रिय सदस्यों में शामिल हैं।
    उन्हें RHA Page के संस्थापक सदस्यों में से एक भी बताया जा रहा है।

     

    यानी FIR ऐसे समय सामने आई है, जब जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है।

     

    यही वजह है कि FIR को लेकर आंदोलन के समर्थकों में राजनीतिक और आंदोलनात्मक दोनों तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    ⚡ आंदोलन समर्थकों का बड़ा आरोप

    आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों का आरोप है कि—
    अजीत भारती के खिलाफ FIR का इस्तेमाल आंदोलन की सक्रिय आवाज को कमजोर करने के लिए किया जा सकता है।

    उनका तर्क है कि यदि आंदोलन के प्रमुख सक्रिय सदस्यों में से किसी एक को कानूनी मामले में उलझाया जाता है, तो इससे आंदोलन की गतिविधियों, नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ सकता है।

    लेकिन क्या वाकई FIR का मकसद आंदोलन को कमजोर करना था?

    इसका कोई निर्णायक प्रमाण अभी सामने नहीं आया है।
    यही वह सवाल है, जिसका जवाब पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट हो सकता है।

    🔥 FIR और आंदोलन—टाइमिंग ने बढ़ाए सवाल

    उपलब्ध FIR के मुताबिक मामला नॉर्थ एवेन्यू थाना, नई दिल्ली में 23 अगस्त 2026 को दर्ज हुआ है।
    FIR में SC/ST Act, Information Technology Act और भारतीय न्याय संहिता की कुछ धाराओं का उल्लेख है। घटना का स्थान सोशल मीडिया दर्ज है।

    अब आंदोलन से जुड़े लोग सवाल उठा रहे हैं

    “अगर अजीत भारती आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े हैं, तो क्या FIR का असर आंदोलन पर पड़ेगा?”

    और दूसरा सवाल—

    “क्या इस मामले की टाइमिंग महज संयोग है?”

    🗣️ अजीत भारती का क्या कहना है?

    अजीत भारती ने अपने पक्ष में कहा है कि उन्हें एक ऐसी टिप्पणी का जवाब देना पड़ा जिसमें उनकी बहन की शादी सांसद चंद्रशेखर आजाद से कराने की बात कही गई थी।
    उनका दावा है कि उन्होंने जवाब में कोई

    जातिसूचक शब्द नहीं बोला। �

    उन्होंने यह भी कहा है कि वे कानून का सम्मान करेंगे और दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग करेंगे।

    ⚖️ FIR दर्ज होना और अपराध साबित होना अलग-अलग बातें हैं

    यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य समझना जरूरी है।
    FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता।

    अब जांच में यह देखा जाएगा कि वायरल वीडियो में वास्तव में क्या कहा गया, उसका पूरा संदर्भ क्या था और लगाए गए आरोप कानूनी रूप से कितने सही साबित होते हैं।

    इसलिए अभी किसी भी पक्ष को अंतिम रूप से दोषी या निर्दोष बताना उचित नहीं होगा

    🎯 लेकिन आंदोलन के लिए असली चिंता क्या है?

    आंदोलन के समर्थकों की चिंता यह है कि—
    अगर आंदोलन से जुड़े सक्रिय लोगों पर लगातार कानूनी मामले सामने आते हैं, तो क्या इससे आंदोलन की एकजुटता, नेतृत्व और

    जनभागीदारी प्रभावित हो सकती है?

    क्या कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर होगा?
    क्या आंदोलन की आवाज मीडिया और सोशल मीडिया की दूसरी बहसों में दब जाएगी?

    यही वजह है कि अजीत भारती पर FIR को आंदोलन के समर्थक सिर्फ एक व्यक्तिगत कानूनी मामला नहीं मान रहे हैं।

    ❓ सबसे बड़ा सवाल

    क्या यह केवल एक वायरल वीडियो पर हुई कानूनी कार्रवाई है?

    या आंदोलन के समर्थकों का आरोप सही है कि FIR का राजनीतिक/आंदोलनात्मक प्रभाव Reservation Reform आंदोलन को कमजोर कर सकता है?

    फिलहाल इसका जवाब साफ नहीं है।
    लेकिन एक बात निश्चित है—
    अजीत भारती पर FIR के बाद जंतर-मंतर के आंदोलन में इस मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

    📰 NISPAKSH TODAY की नजर में
    आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में है और कानून अपना काम करना भी जरूरी है।
    अगर किसी बयान में अपराध हुआ है तो निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

    लेकिन अगर आंदोलन से जुड़े किसी सक्रिय सदस्य पर कार्रवाई होती है, तो उसके पीछे आंदोलन को कमजोर करने का उद्देश्य था या नहीं, इस सवाल को भी तथ्य और सबूत के आधार पर जांचना जरूरी है।

    क्योंकि FIR का सच पुलिस जांच बताएगी…
    लेकिन FIR का असर आंदोलन पर कितना पड़ता है, यह आने वाला वक्त बताएगा।

    NISPAKSH TODAY
    “खबर वही—जो सवाल भी पूछे और हर पक्ष की बात भी सामने रखे।”

  • जंतर-मंतर पर सवर्ण आंदोलन: SC/ST और UGC Reform की मांग पर जुटा जनसैलाब

    जंतर-मंतर पर सवर्ण आंदोलन: SC/ST और UGC Reform की मांग पर जुटा जनसैलाब

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे ;-

    “मांगें सुने बिना नहीं हटेंगे” — प्रदर्शनकारियों का ऐलान | मीडिया कवरेज पर भी उठे सवाल

    नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर SC/ST और UGC Reform समेत आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। मंच से वक्ताओं ने इसे किसी एक व्यक्ति या संगठन का आंदोलन न बताते हुए अपने मुद्दों और मांगों को लेकर जुटे लोगों का आंदोलन बताया।

    प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे पुलिस-प्रशासन के साथ टकराव नहीं चाहते। हालांकि, मंच से यह भी कहा गया कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।


    🔴 जंतर-मंतर पर क्या गूंजा?

    मंच से प्रदर्शनकारियों से अनुशासन बनाए रखने और अपनी व्यवस्था खुद संभालने की अपील की गई।

    वक्ताओं ने कहा कि यहां कोई सेलिब्रिटी या व्यक्तिगत प्रचार के लिए नहीं आया है। हर व्यक्ति अपने मुद्दे और अपनी आवाज लेकर पहुंचा है।

    मंच से सम्मानित लोगों के जमीन पर बैठने का उदाहरण देते हुए प्रदर्शनकारियों से भी जमीन पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में भाग लेने की अपील की गई।


    🔥 सबसे बड़ा मुद्दा—SC/ST और UGC Reform

    प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा SC/ST व्यवस्था और UGC से जुड़े सुधार बताए गए।

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और कथित विसंगतियों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए तथा सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

    हालांकि, आंदोलनकारियों की मांगों और उनके दावों पर सरकार अथवा संबंधित संस्थाओं का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।


    🎥 मीडिया कवरेज पर प्रदर्शनकारियों ने उठाए सवाल

    मंच से मीडिया कवरेज को लेकर भी नाराजगी जताई गई।

    प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बावजूद आंदोलन को अपेक्षित मीडिया कवरेज नहीं मिल रहा।

    इसी वजह से मंच से लोगों से अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की गई।

    आंदोलन के प्रमुख हैशटैग

    #ReservationReform
    #Satyagraha


    🚨 “मांगें नहीं मानीं तो नहीं हटेंगे”

    प्रदर्शन के दौरान मंच से आंदोलन जारी रखने का स्पष्ट संदेश दिया गया।

    वक्ताओं ने कहा कि पानी और अन्य व्यवस्थाओं में परेशानी होने के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटेंगे।

    “भूखे बैठेंगे, लेकिन अपनी मांगों और स्वाभिमान के मुद्दे से पीछे नहीं हटेंगे।”

    हालांकि, इसी के साथ पुलिस और प्रशासन के साथ टकराव से बचने तथा आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील भी की गई।


    ⚠️ परमिशन को लेकर क्या दावा किया गया?

    मंच से प्रदर्शन की अनुमति को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।

    वक्ता ने दावा किया कि अनुमति के लिए कई अधिकारियों से संपर्क करना पड़ा और कई घंटे इंतजार करना पड़ा। इसके बाद सीमित अवधि की अनुमति दिए जाने की बात भी मंच से कही गई।

    निष्पक्ष टुडे इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।


    🤝 “पुलिस से टकराव नहीं, आंदोलन जारी रहेगा”

    प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का सम्मान किया जाएगा और किसी अधिकारी के साथ टकराव नहीं किया जाएगा।

    मंच से संदेश दिया गया कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे।


    👥 “यह किसी चेहरे का नहीं, मुद्दे का आंदोलन है”

    वक्ताओं ने बार-बार कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति की लोकप्रियता या प्रचार के लिए नहीं है।

    मंच से प्रदर्शनकारियों को एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा गया कि जो लोग वास्तविक मुद्दे को लेकर आए हैं, वे आंदोलन में टिके रहेंगे।


    📌 आंदोलन की 5 बड़ी बातें

    1️⃣ जंतर-मंतर पर बड़ा जमावड़ा
    SC/ST और UGC Reform समेत आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग।

    2️⃣ शांतिपूर्ण आंदोलन का दावा
    पुलिस-प्रशासन से टकराव नहीं करने की अपील।

    3️⃣ मीडिया कवरेज पर सवाल
    प्रदर्शनकारियों ने अपेक्षित मीडिया कवरेज नहीं मिलने का आरोप लगाया।

    4️⃣ सोशल मीडिया पर अभियान
    #ReservationReform और #Satyagraha के साथ वीडियो साझा करने की अपील।

    5️⃣ मांगें सुने जाने तक डटे रहने का ऐलान
    प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार द्वारा मुद्दों पर गंभीर सुनवाई तक आंदोलन जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।


    🔥 सबसे बड़ा सवाल—अब आगे क्या?

    जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन कई महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया है।

    क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत करेगी?

    क्या SC/ST और UGC Reform को लेकर व्यापक नीति-स्तरीय चर्चा शुरू होगी?

    क्या आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग पर सरकार कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया देगी?

    और सबसे अहम—

    क्या जंतर-मंतर से उठी यह आवाज आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन बनेगी?

    फिलहाल प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों पर डटे रहने की बात कह रहे हैं।

    उनका संदेश साफ है—

    “मुद्दे सुने जाएंगे, तभी आंदोलन के अगले कदम पर फैसला होगा।”

    NISPAKSH TODAY | निष्पक्ष टुडे

    अच्छी खबर • सच्ची खबर

  • SPECIAL STORY | राम मंदिर निर्माण पर चंपत राय के बयान से क्यों मचा विवाद?

    SPECIAL STORY | राम मंदिर निर्माण पर चंपत राय के बयान से क्यों मचा विवाद?

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-


    9 पन्नों का बयान… 33 बिंदु… और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल!


    अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने मंदिर निर्माण से लेकर उसकी व्यवस्था तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने 9 पन्नों का विस्तृत बयान जारी किया है।

    इस बयान में 33 बिंदुओं के जरिए मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    लेकिन सवाल है—
    आखिर चंपत राय ने ऐसा क्या कहा, जिससे राम मंदिर निर्माण के फैसलों को लेकर नई बहस छिड़ गई?

    🔴 पहला बड़ा सवाल — बड़े फैसलों की कमान किसके हाथ में थी?

    चंपत राय के बयान के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका बेहद प्रभावशाली रही।

    राय का दावा है कि—
    निर्माण एजेंसी के चयन से लेकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और दूसरे निर्माण कार्यों तक कई महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की पसंद को प्राथमिकता दी गई।
    यानी सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं…
    सवाल फैसले लेने की प्रक्रिया का भी है।

    🔴 L&T और TCE का चयन — कैसे हुआ फैसला?

    चंपत राय के मुताबिक,
    राम मंदिर निर्माण के लिए L&T यानी लार्सन एंड टुब्रो को चुना गया।
    वहीं,
    प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर TCE यानी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का चयन किया गया।
    चंपत राय के बयान में इन फैसलों के संदर्भ में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका का विशेष उल्लेख किया गया है।

    🔴 वास्तुकार को लेकर चंपत राय ने क्या स्पष्ट किया?

    यहां चंपत राय ने अपने बयान में एक महत्वपूर्ण तथ्य रखा है।
    उनके मुताबिक—

    राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा का चयन वर्ष 1986 में स्वर्गीय अशोक सिंघल ने किया था।

    इसका मतलब यह है कि मुख्य मंदिर के वास्तुकार के चयन को लेकर राय ने नृपेंद्र मिश्रा को जिम्मेदार नहीं बताया।

    हालांकि, उनके बयान के मुताबिक अन्य भवनों के डिजाइन से जुड़ी फर्म के चयन में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका रही।

    🔴 बैठक में फैसले होते थे… या फैसले पहले तय हो जाते थे?

    चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति की बैठकों का भी जिक्र किया है।
    उनके मुताबिक—

    समिति की बैठकें नियमित रूप से होती थीं और निर्माण से जुड़े फैसले इन्हीं बैठकों में लिए जाते थे।
    राय का दावा है—
    “समिति के निर्णय के बिना कोई काम नहीं हुआ।”
    लेकिन यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—
    क्या राम मंदिर निर्माण के सभी फैसले सामूहिक प्रक्रिया से लिए गए?
    या फिर—
    किसी एक व्यक्ति की भूमिका सबसे प्रभावशाली थी?

    🔴 अनूप मित्तल का भी आया नाम

    चंपत राय के बयान में पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल का भी उल्लेख है।

    राय का दावा है कि—
    अनूप मित्तल मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में नृपेंद्र मिश्रा के साथ शामिल होते थे।
    यह दावा भी अब चर्चा का विषय बन गया है।

    ⚠️ अब मामला पहुंचता है चढ़ावे की कथित चोरी तक

    चंपत राय का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर विवाद चल रहा है।

     

    इसी मामले पर नृपेंद्र मिश्रा ने भी मीडिया से बातचीत में मंदिर की व्यवस्था पर सवाल उठाए ।

    उन्होंने मंदिर संचालन और व्यवस्था में सुधार के लिए—
    CEO जैसी प्रणाली की जरूरत की बात कही थी।
    यानी एक तरफ चढ़ावे और व्यवस्था को लेकर सवाल…
    और दूसरी तरफ निर्माण से जुड़े फैसलों पर चंपत राय का बयान।

    ❓ SPECIAL STORY का सबसे बड़ा सवाल

    अब सवाल सिर्फ चढ़ावे की कथित चोरी का नहीं है।
    सवाल इससे कहीं बड़ा है—
    राम मंदिर निर्माण के बड़े फैसले आखिर किस प्रक्रिया से लिए गए?

    नृपेंद्र मिश्रा की वास्तविक भूमिका कितनी थी?
    चंपत राय के 33 बिंदुओं वाले बयान पर ट्रस्ट की क्या प्रतिक्रिया होगी?
    क्या नृपेंद्र मिश्रा इन दावों पर अपना पक्ष रखेंगे?
    और सबसे बड़ा सवाल—

    🔥 क्या यह विवाद राम मंदिर की व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बनेगा?

    इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तस्वीर को और स्पष्ट कर सकते हैं।

    ⚖️ एक जरूरी बात

    चंपत राय द्वारा लगाए गए आरोप और दावे उनके 9 पन्नों के बयान पर आधारित हैं।
    इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है और संबंधित पक्ष—विशेषकर नृपेंद्र मिश्रा तथा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट—का जवाब सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
    क्योंकि…
    राम मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है।
    इसलिए हर आरोप की पड़ताल और हर पक्ष की बात सामने आना जरूरी है।

    🎙️ निष्पक्ष टुडे SPECIAL STORY
    “खबर सिर्फ खबर नहीं… सवाल भी जरूरी हैं।”
    पढ़ते रहिए — निष्पक्ष टुडे।