Author: Anurag Tripathi

  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल: छात्रों का प्रदर्शन हिंसक, आगजनी और लूटपाट के आरोप, आखिर किसने बिगाड़े हालात?

    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल: छात्रों का प्रदर्शन हिंसक, आगजनी और लूटपाट के आरोप, आखिर किसने बिगाड़े हालात?

    नेशनल डेस्क /पंजाब ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    छात्रा से कथित दुष्कर्म और आत्महत्या की वायरल खबर के बाद भड़का आक्रोश; पुलिस से झड़प, वाहनों में आगजनी और कैंपस में बाहरी लोगों की घुसपैठ के आरोप, SIT करेगी जांच


    पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। छात्रा से कथित दुष्कर्म और आत्महत्या की वायरल खबर के बाद शुरू हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पथराव, तोड़फोड़ और पुलिस वाहनों में आगजनी की घटनाओं ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं वहीं, परिसर में बाहरी लोगों के घुसने, हथियार लहराने और दुकानों में लूटपाट के आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

    सवाल उठ रहा है कि क्या छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में असामाजिक तत्वों ने हिंसा को अंजाम दिया?

    खबर की प्रमुख बातें –

    1. वायरल खबर से हंगामा: छात्रा से कथित दुष्कर्म और आत्महत्या के अपुष्ट संदेश के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन।

    2. पुलिस से हिंसक झड़प: पथराव, वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं।

    3. बाहरी लोगों की घुसपैठ के आरोप: कैंपस और गर्ल्स हॉस्टल के आसपास संदिग्ध गतिविधियों के वायरल वीडियो की जांच।

    4. मॉल में कथित लूटपाट: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य दुकानों से सामान लूटने के आरोप।

    5. 10 दिन कक्षाएं स्थगित: परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई, सात सदस्यीय SIT गठित।

    वायरल संदेश से शुरू हुआ विवाद, देखते ही देखते हिंसक हुआ प्रदर्शन-

    मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर प्रसारित एक संदेश से हुई, जिसमें विश्वविद्यालय की एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और उसके बाद आत्महत्या किए जाने का दावा किया गया था। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में छात्र विरोध प्रदर्शन करने लगे।

    पुलिस ने शुरुआत में ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं होने की बात कही। हालांकि, छात्रों का आक्रोश बढ़ने के बाद अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज की गई और मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया गया। वायरल दावों की सच्चाई अभी जांच का विषय है।

    पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव, गाड़ियों में लगाई आग-

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन हालात बिगड़ गए। पुलिस पर पथराव हुआ और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया। एक पुलिस जीप में आग लगाए जाने तथा अन्य वाहनों में तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं।

    पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। हिंसा में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर है।

    बाहरी लोगों ने किया प्रदर्शन को हाईजैक?

    वायरल वीडियो से उठे सवाल
    विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा के बीच बाहरी लोगों की कथित घुसपैठ का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोगों के हथियार लेकर परिसर में प्रवेश करने और तोड़फोड़ करने के दावे किए जा रहे ।

    छात्राओं के हॉस्टल के आसपास भी संदिग्ध गतिविधियों के आरोप हैं। पंजाब पुलिस इन वीडियो और बाहरी लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, वायरल वीडियो में दिखने वाले सभी लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

    यूनिवर्सिटी के मॉल में लूटपाट! मोबाइल और लैपटॉप की दुकानों को बनाया निशाना?
    हिंसा के बीच विश्वविद्यालय के मॉल में लूटपाट के आरोप भी सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि उपद्रवियों ने मोबाइल, लैपटॉप और अन्य सामान की दुकानों में तोड़फोड़ कर सामान लूट लिया।

    कथित लूटपाट के वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या छात्रों के प्रदर्शन की आड़ में कुछ लोगों ने आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया? फिलहाल लूटे गए सामान की कुल कीमत और आर्थिक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अशोक मित्तल की यूनिवर्सिटी में हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप –

    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

    मित्तल पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए।

    कुछ दावों में इस हिंसा को उनके राजनीतिक दल बदलने से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटना के पीछे राजनीतिक साजिश होने का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। पुलिस जांच के बाद ही हिंसा की वास्तविक वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

    10 दिनों के लिए कक्षाएं बंद, SIT करेगी जांच
    हिंसा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। मिड-टर्म परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं। पुलिस परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है।

  • BIT गीडा में सेवा संकल्प अभियान: 128 लोगों ने किया रक्तदान, युवा शक्ति और नवाचार से विकसित भारत बनाने का संकल्प!

    BIT गीडा में सेवा संकल्प अभियान: 128 लोगों ने किया रक्तदान, युवा शक्ति और नवाचार से विकसित भारत बनाने का संकल्प!

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    युवा संवाद, स्टार्टअप और ग्रामीण विकास पर हुआ मंथन; विधायक प्रदीप शुक्ला बोले—युवा ही देश के कर्णधार, शिक्षा और सेवा से बदलेगी भारत की तस्वीर।

    बीआईटी, गीडा में सेवा संकल्प अभियान का आयोजन।

    गोरखपुर। क्या शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ डिग्री हासिल करना और अच्छी नौकरी पाना है, या फिर समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाना भी? इसी सवाल का जवाब देने और युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के उद्देश्य से बुद्धा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), गीडा में सेवा संकल्प अभियान का भव्य आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम में एक ओर युवाओं ने स्टार्टअप, नवाचार और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर संवाद किया, तो दूसरी ओर रक्तदान शिविर में 128 शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया।

    खबर की 6 बड़ी बातें
    128 लोगों ने किया रक्तदान: शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने दिखाई सामाजिक भागीदारी।

    1. 128 लोगों ने किया रक्तदान: शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने दिखाई सामाजिक भागीदारी।

    2. युवाओं के भविष्य पर मंथन: स्टार्टअप, नवाचार, युवा संवाद और ग्रामीण विकास पर विशेष चर्चा।

    3. विधायक प्रदीप शुक्ला का संदेश: युवाओं की शिक्षा, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण से बनेगा विकसित भारत।

    4. महेश दुबे की अपील: जरूरतमंदों की मदद और समाज निर्माण में आगे आएं विद्यार्थी।

    5. डॉ. तरन्नुम बानो ने कहा: उच्च शिक्षा का उद्देश्य डिग्री के साथ नैतिक मूल्यों और सेवा भावना का विकास करना भी है।

    6. डॉ. रजत अग्रवाल का जोर: किताबी ज्ञान के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी जरूरी।

    युवा ही देश के कर्णधार, शिक्षा और ज्ञान सबसे बड़ी पूंजी: प्रदीप शुक्ला-

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बुद्धा ग्रुप के सचिव डॉ. रजत अग्रवाल ने कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं है।
    शिक्षा के साथ मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना भी उतना ही जरूरी है।


    उन्होंने कहा कि सफल नागरिक वही है, जो अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझता है।
    रक्तदान शिविर बना आकर्षण का केंद्र, 128 लोगों ने किया रक्तदान

    उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है। यहां के युवाओं ने अपनी मेधा, ज्ञान और प्रतिभा से विश्व में ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिनकी कभी कल्पना भी नहीं की गई थी।

    विधायक प्रदीप शुक्ला का संदेश –

    “आपका ज्ञान, आपकी शिक्षा ही आपकी पूंजी है।”
    उन्होंने युवाओं से समाज सेवा, जनसेवा और राष्ट्र सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    विधायक ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा अपनी शिक्षा के साथ कर्तव्यनिष्ठा, सेवा और समर्पण को भी जीवन का हिस्सा बनाएंगे।

    स्टार्टअप, नवाचार और ग्रामीण विकास पर युवाओं का संवाद –

    सेवा संकल्प अभियान के दौरान युवाओं के भविष्य और समाज के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को कार्यक्रम में शामिल किया गया।

    टार्टअप और नवाचार-
    नए विचारों, तकनीक और उद्यमिता के माध्यम से युवाओं को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने पर जोर।

    ग्रामीण विकास-
    गांवों के विकास और समाज की जरूरतों में युवाओं की भूमिका को लेकर चर्चा।

    युवा संवाद –
    शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी, जनसेवा और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी पर जोर।

    सेवा ही धर्म, जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं युवा: महेश दुबे

    विशिष्ट अतिथि एवं नगर पंचायत उनवल के अध्यक्ष महेश दुबे ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान सामाजिक बदलाव का एक सशक्त माध्यम है। समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों की सहायता करना इस अभियान का मूल संकल्प है।

    उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे शिक्षा प्राप्त करने के साथ सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने क्षेत्र में चलाए जा रहे जनकल्याणकारी कार्यों और उनके दूरगामी लाभों पर भी प्रकाश डाला।

    महेश दुबे ने कहा कि सेवा ही धर्म है और निरंतर प्रयासों से ही सशक्त एवं आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है।

    सिर्फ डिग्री हासिल करना ही उच्च शिक्षा का उद्देश्य नहीं: डॉ. तरन्नुम बानो

    उच्च शिक्षा गोरखपुर की नोडल अधिकारी डॉ. तरन्नुम बानो ने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की भावना विकसित करने की आवश्यकता बताई।

    उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान या डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसा जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है, जो समाज की समस्याओं को समझे और उनके समाधान में अपनी भूमिका निभाए।

    उन्होंने सेवा संकल्प अभियान को युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

    शिक्षण संस्थान बनें सामाजिक बदलाव के केंद्र: डॉ. रजत अग्रवाल
    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बुद्धा ग्रुप के सचिव डॉ. रजत अग्रवाल ने कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं है।

    शिक्षा के साथ मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना भी उतना ही जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि सफल नागरिक वही है, जो अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझता है।
    रक्तदान शिविर बना आकर्षण का केंद्र, 128 लोगों ने किया रक्तदान

    कार्यक्रम में आयोजित रक्तदान शिविर विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। संस्थान के 128 शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने रक्तदान कर जरूरतमंदों की सहायता के लिए अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

    इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि समाज सेवा केवल विचारों और भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे अपने कार्यों में भी उतारना आवश्यक है।

    कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति –

    इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रशासन दीपक अग्रवाल, डॉ. गोविन्द पाण्डेय, विजय श्रीवास्तव, संतोष त्रिपाठी, डॉ. रूप रंजन, निदेशक फार्मेसी डॉ. आशीष सिंह, निदेशक डिग्री कॉलेज डॉ. अरुण पाण्डेय, निदेशक मैनेजमेंट डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक नवाचार अंकुर कुमार और प्रतिश कनौजिया सहित सभी विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता उपस्थित रहे।

    आखिर क्या संदेश दे गया सेवा संकल्प अभियान?

    बीआईटी गीडा में आयोजित कार्यक्रम ने शिक्षा, नवाचार और सामाजिक सेवा को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। युवाओं को संदेश दिया गया कि विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका केवल तकनीकी दक्षता या व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • अधिशासी अधिकारी के सामने सरकारी काम में बाधा, युवक पर हमला करने का आरोप

    अधिशासी अधिकारी के सामने सरकारी काम में बाधा, युवक पर हमला करने का आरोप

    गोरखपुर /गोला ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    जर्जर बिजली पोल के सर्वे के दौरान विवाद, ईंट से हमला करने के प्रयास का भी आरोप; युवक ने अब तक थाने में नहीं दी लिखित शिकायत


    गोरखपुर/गोला। गोला उपनगर के वार्ड संख्या-14 में जर्जर बिजली पोल और तारों को बदलने व स्थानांतरित करने के लिए किए जा रहे सर्वे के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। आरोप है कि 22 सितंबर को अधिकारियों की मौजूदगी में आवेदनकर्ता शिवम तिवारी के साथ मारपीट की गई और ईंट से हमला करने का प्रयास किया गया। घटना के दौरान बिजली विभाग के अधिकारी और जूनियर इंजीनियर भी मौके पर मौजूद बताए जा रहे हैं।

    अधिकारियों के सामने हमला करने का आरोप

    जानकारी के मुताबिक, सार्वजनिक सुविधा को देखते हुए क्षतिग्रस्त बिजली पोल को बदलने और स्थानांतरित करने के संबंध में सर्वे किया जा रहा था। इसी दौरान शिवम तिवारी पर अचानक हमला किए जाने का आरोप है। आरोप यह भी है कि उनके साथ मौजूद अधिकारियों के सामने ईंट से हमला करने का प्रयास किया गया।

    छह महीने में जान से मरवाने की धमकी का आरोप

    शिवम तिवारी की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, विवाद के दौरान उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई कि “छह महीने के अंदर जैसे तुम्हारे बाप को मरवाया है, वैसे तुम्हें भी मरवा दूंगा।” इसके अलावा सर्वेश तिवारी की ओर से युवक के आवागमन को बाधित करने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है।

    हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में पुलिस में अभी तक कोई लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    मौके पर मौजूद थे बिजली विभाग के अधिकारी

    बताया जा रहा है कि जिस समय विवाद हुआ, उस समय गोला के जूनियर इंजीनियर सहित विभागीय अधिकारी मौके पर मौजूद थे। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि सरकारी कार्य के लिए किए जा रहे सर्वे के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में विवाद और कथित हमले की स्थिति कैसे बनी।

    जर्जर पोल और खुले तार बने खतरा-

    मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू क्षतिग्रस्त बिजली पोल और भारी-भरकम तारों से जुड़ा है। आरोप है कि तारों की स्थिति ऐसी है कि तेज हवा या आंधी के दौरान इनके मकान पर गिरने का खतरा बना रहता है।

    यही वजह है कि आवेदनकर्ता की ओर से पोल को बदलने अथवा स्थानांतरित करने के लिए विभाग से कार्रवाई की मांग की गई थी।

    अब कार्रवाई पर टिकी नजर –

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग जर्जर पोल और ढीले/खुले तारों को समय रहते ठीक कराएगा? साथ ही, अधिकारियों की मौजूदगी में सरकारी कार्य में कथित बाधा और युवक पर हमले के आरोपों को लेकर विभाग और पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, यह भी देखना होगा।

    महत्वपूर्ण बिंदु:

    • 22 सितंबर को गोला वार्ड-14 में घटना का आरोप।
    • जर्जर बिजली पोल के सर्वे के दौरान विवाद।
    • अधिकारियों के सामने युवक से मारपीट का आरोप।
    • ईंट से हमला करने के प्रयास का भी आरोप।
    • जान से मरवाने और आवागमन बाधित करने की धमकी का आरोप।
    • मौके पर जूनियर इंजीनियर समेत अधिकारी मौजूद बताए गए।
    • आवेदनकर्ता ने अभी तक थाने में लिखित शिकायत नहीं दी है।
    • जर्जर पोल और तारों से दुर्घटना की आशंका का दावा।
  • सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित को समझने का सटीक अवसर

    सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित को समझने का सटीक अवसर

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    23 सितंबर की सुबह 5:35 बजे होगा सितंबर विषुव, जानिए क्यों दिन-रात की लंबाई, ऋतु परिवर्तन और पृथ्वी की धुरी से जुड़ी है यह महत्वपूर्ण खगोलीय घटना


    गोरखपुर। आसमान में होने वाली कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जो सिर्फ देखने भर की नहीं बल्कि पृथ्वी की गति, उसकी धुरी के झुकाव और ऋतु परिवर्तन के वैज्ञानिक गणित को समझने का अवसर देती हैं। ऐसी ही महत्वपूर्ण घटना है।

    सितंबर विषुव (September Equinox) 2026, जो 23 सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 5:35 बजे घटित होगा।

    खगोलविद अमर पाल सिंह, वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल), गोरखपुर के अनुसार, इस क्षण सूर्य पृथ्वी की आकाशीय विषुवत् रेखा को उत्तर से दक्षिण की ओर पार करता हुआ दिखाई देगा। इसके साथ ही उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है।

     सितंबर विषुव क्या है?

    विषुव वह खगोलीय क्षण है, जब सूर्य का आभासी वार्षिक मार्ग यानी क्रांतिवृत्त (Ecliptic), आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता है।

    आकाशीय विषुवत् रेखा पृथ्वी की भूमध्य रेखा का आकाश में किया गया काल्पनिक विस्तार है।

    सितंबर विषुव के दौरान पृथ्वी से देखने पर सूर्य उत्तर से दक्षिण की ओर जाते हुए आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता दिखाई देता है।

    यही कारण है कि उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत ऋतु शुरू होती है।

    23 सितंबर 2026 को होगा विषुव

    सितंबर विषुव 2026 का सटीक क्षण 00:05 UTC है, जो भारतीय समयानुसार 23 सितंबर की सुबह 5:35 बजे होगा।
    यह समझना जरूरी है कि विषुव कोई पूरे दिन चलने वाली घटना नहीं है, बल्कि पृथ्वी-सूर्य प्रणाली में घटित होने वाला एक निश्चित खगोलीय क्षण है।

    आमतौर पर सितंबर विषुव 22 या 23 सितंबर को आता है। पृथ्वी की कक्षीय अवधि और कैलेंडर वर्ष के अंतर के कारण कुछ वर्षों में इसकी तारीख 21 या 24 सितंबर भी हो सकती है।

    2026 में मार्च विषुव 20 मार्च को हुआ था, जबकि सितंबर विषुव 23 सितंबर को होगा।

    क्या विषुव के दिन सच में 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होती है?

    विषुव का अर्थ ही लगभग समान दिन और रात से जुड़ा है, लेकिन हर स्थान पर इस दिन ठीक 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होना जरूरी नहीं है।

    इसके पीछे दो प्रमुख वैज्ञानिक कारण हैं—

    1. सूर्य एक बिंदु नहीं, बल्कि लगभग आधा डिग्री कोणीय व्यास वाला डिस्क है।

    2. पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़ता है, जिसे वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं।

    इस कारण सूर्य वास्तव में ज्यामितीय रूप से क्षितिज के नीचे होने के बावजूद कुछ समय तक दिखाई देता है।

    नतीजा यह होता है कि अधिकांश स्थानों पर विषुव के दिन दिन की अवधि रात से कुछ मिनट अधिक हो सकती है।

    जिस दिन किसी विशेष स्थान पर दिन और रात की अवधि वास्तव में लगभग बराबर होती है, उसे इक्विलक्स (Equilux) कहा जाता है। इसकी तारीख अक्षांश और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विषुव से कुछ दिन पहले या बाद में हो सकती है।

     सूर्य लगभग ठीक पूर्व में उगेगा और पश्चिम में अस्त होगा –

    सितंबर विषुव की एक खास विशेषता यह है कि इस समय सूर्य लगभग ठीक पूर्व दिशा में उदय और पश्चिम दिशा में अस्त होता दिखाई देता है ।

    इसका कारण यह है कि विषुव के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है।

    हालांकि स्थानीय पहाड़, इमारतें, पेड़ और क्षितिज की स्थिति के कारण वास्तविक अवलोकन में कुछ अंतर दिखाई दे सकता है।

    विद्यार्थी और खगोल प्रेमी खुले स्थान से सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा को चिह्नित करके इस घटना का सरल अवलोकन कर सकते हैं।

     ऋतुएं क्यों बदलती हैं?

    ऋतु परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण पृथ्वी की धुरी का लगभग 23.5 डिग्री झुकाव है।

    पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते समय अपनी झुकी हुई धुरी के साथ आगे बढ़ती है। इसी कारण वर्ष के अलग-अलग समय में कभी उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अधिक झुका होता है और कभी दक्षिणी गोलार्ध।

    सितंबर विषुव के समय दोनों गोलार्धों को मिलने वाला सौर प्रकाश अपेक्षाकृत संतुलित होता है।

    इसके बाद—

    🔹 उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं।
    🔹 दक्षिणी गोलार्ध में दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
    यानी ऋतुओं का मूल कारण पृथ्वी और सूर्य के बीच दूरी में बदलाव नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा है।

     खगोलीय शरद ऋतु और मौसम-विज्ञान की शरद ऋतु में अंतर –

    शरद ऋतु को दो अलग-अलग तरीकों से परिभाषित किया जाता है।

    खगोलीय परिभाषा –

    उत्तरी गोलार्ध में सितंबर विषुव से दिसंबर संक्रांति तक का समय खगोलीय शरद ऋतु माना जाता है।

    मौसम-विज्ञानी परिभाषा –

    मौसम विज्ञान में वर्ष को तीन-तीन महीनों की ऋतुओं में बांटा जाता है। इस प्रणाली के अनुसार 1 सितंबर से 30 नवंबर तक का समय शरद ऋतु माना जाता है।

    इसलिए 1 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु मौसम-विज्ञान पर आधारित है, जबकि 23 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु खगोलीय गणना पर आधारित है।

     वर्ष के चार प्रमुख खगोलीय पड़ाव –

    एक वर्ष में चार प्रमुख मौसमी खगोलीय पड़ाव होते हैं—
    1. मार्च विषुव
    2. जून संक्रांति
    3. सितंबर विषुव
    4. दिसंबर संक्रांति
    विषुव के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है, जबकि संक्रांति के समय सूर्य इस रेखा के उत्तर या दक्षिण में अपनी अधिकतम आभासी स्थिति पर पहुंचता है।
    जून संक्रांति उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय ग्रीष्म ऋतु और दिसंबर संक्रांति खगोलीय शीत ऋतु की शुरुआत से जुड़ी है।

     विषुव का अवलोकन कैसे करें?

    सितंबर विषुव देखने के लिए किसी विशेष दूरबीन की आवश्यकता नहीं है।

    खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, लोग—

    सूर्योदय की दिशा का अवलोकन कर सकते हैं।
    सूर्यास्त की दिशा को चिह्नित कर सकते हैं।
    खुले स्थान पर छड़ी या डंडे की छाया को दिनभर अलग-अलग समय पर चिह्नित कर सकते हैं।
    इससे सूर्य की आभासी गति और पृथ्वी के घूर्णन को समझने में मदद मिलती है।

     सूर्य को सीधे न देखें –

    नंगी आंखों से सीधे सूर्य को देखना आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

    सूर्य का अवलोकन केवल प्रमाणित सौर फिल्टर, सुरक्षित सोलर व्यूअर या पिनहोल प्रोजेक्टर के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    सामान्य धूप का चश्मा, एक्स-रे फिल्म, काली कांच की प्लेट या बिना प्रमाणित फिल्टर वाली दूरबीन सुरक्षित विकल्प नहीं हैं।

     क्रांतिवृत्त, राशिचक्र और विषुव बिंदु –

    सूर्य तारों की पृष्ठभूमि के सामने वर्षभर जिस आभासी मार्ग पर चलता दिखाई देता है, उसे क्रांतिवृत्त या रविपथ कहा जाता है।

    पृथ्वी की धुरी के झुकाव के कारण क्रांतिवृत्त और आकाशीय विषुवत् रेखा के बीच लगभग 23.5 डिग्री का कोण होता है।

    सूर्य, चंद्रमा और अधिकांश ग्रह क्रांतिवृत्त के आसपास के एक क्षेत्र में दिखाई देते हैं, जिसे राशिचक्र (Zodiac) कहा जाता है।

    हालांकि सभी खगोलीय पिंड बिल्कुल इसी रेखा पर नहीं चलते। उदाहरण के लिए प्लूटो की कक्षा का झुकाव काफी अधिक है।

    करीब 26 हजार साल का खगोलीय चक्र –

    विषुव बिंदु स्थायी रूप से एक ही स्थान पर नहीं रहते।
    पृथ्वी की घूर्णन धुरी की दीर्घकालिक डगमगाहट को अयन-चलन या विषुवों का पूर्वगमन (Precession of the Equinoxes) कहा जाता है।

    इस प्रक्रिया के कारण तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष विषुव बिंदु धीरे-धीरे पश्चिम की ओर खिसकते हैं।

    पृथ्वी की धुरी को इस चक्र को पूरा करने में लगभग 26,000 वर्ष लगते हैं।

    इसी दीर्घकालिक गति के कारण हजारों वर्षों में आकाश में ध्रुव की दिशा और विषुव बिंदुओं की तारों के सापेक्ष स्थिति बदलती रहती है।

    🇮🇳 भारतीय खगोल परंपरा में विषुव का महत्व –

    प्राचीन भारतीय खगोल-विज्ञान में सूर्य की गति, अयन, नक्षत्र और ऋतु-चक्र का विस्तृत अध्ययन किया गया।

    भारतीय परंपरा में नक्षत्र शब्द का उपयोग तारों या तारक-समूहों के लिए तथा चंद्रमा के आकाशीय मार्ग के 27 भागों के संदर्भ में भी किया जाता है।

    चंद्रमा तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष लगभग 27.3 दिनों में एक चक्र पूरा करता है। इसी आधार पर प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में चंद्र-पथ को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया।

    अयन-चलन के कारण विषुव बिंदुओं और नक्षत्रों की आपसी स्थिति लंबे समय में बदलती रहती है। इसलिए विभिन्न ऐतिहासिक कालों में अलग-अलग नक्षत्रों को वर्ष अथवा नक्षत्र-क्रम की शुरुआत से जोड़े जाने के संदर्भ मिलते हैं।

    आकाशीय घटनाओं का अध्ययन प्राचीन समय में कृषि, ऋतु परिवर्तन और पंचांग निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण रहा।

    दुनिया की सभ्यताओं में भी विषुव का महत्व –

    विषुव केवल भारतीय खगोलीय परंपरा तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न सभ्यताओं ने सूर्य की गति और ऋतु परिवर्तन को अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं में स्थान दिया।

    मेक्सिको के चिचेन इत्ज़ा स्थित कुकुलकान पिरामिड पर विषुव के आसपास बनने वाली प्रकाश-छाया की आकृति विशेष रूप से चर्चित है, जिसे सांप जैसी आकृति से जोड़ा जाता है। हालांकि इसके मूल उद्देश्य और व्याख्या को लेकर पुरातत्वविदों में पूर्ण सहमति नहीं है।

    सितंबर विषुव 2026 क्यों खास है?

    23 सितंबर 2026 का सितंबर विषुव सिर्फ दिन और रात के लगभग बराबर होने की घटना नहीं है।

    यह एक ऐसा खगोलीय पड़ाव है, जो एक साथ—
    पृथ्वी की 23.5° झुकी धुरी,
    सूर्य की आभासी गति,
    ऋतु परिवर्तन,
    दिन-रात की अवधि,
    क्रांतिवृत्त,
    नक्षत्र-पद्धति,
    अयन-चलन और
    मानव सभ्यता की आकाश-अवलोकन परंपरा
    को समझने का अवसर देता है।
    खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 23 सितंबर की सुबह होने वाला यह विषुव हमें यह समझने का अवसर देता है कि पृथ्वी की गति और उसका अक्षीय झुकाव हमारे मौसम, दिन के उजाले, कृषि और जीवन की प्राकृतिक लय को लगातार प्रभावित करते हैं

    महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में –

    तारीख: 23 सितंबर 2026
    भारतीय समय: सुबह 5:35 बजे
    UTC: 00:05
    घटना: सूर्य का आकाशीय विषुवत् रेखा को उत्तर से दक्षिण पार करना
    उत्तरी गोलार्ध: खगोलीय शरद ऋतु की शुरुआत
    दक्षिणी गोलार्ध: खगोलीय वसंत ऋतु की शुरुआत
    दिन-रात: अधिकांश स्थानों पर लगभग बराबर, लेकिन जरूरी नहीं कि ठीक 12-12 घंटे
    पृथ्वी की धुरी का झुकाव: लगभग 23.5°
    अयन-चलन का चक्र: लगभग 26,000 वर्ष

  • सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सपनों का भारत’ थीम पर पेंटिंग व रंगोली प्रतियोगिता

    सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सपनों का भारत’ थीम पर पेंटिंग व रंगोली प्रतियोगिता

    गोरखपुर ब्यूरो (अनुराग त्रिपाठी) निष्पक्ष टुडे :-

    कैंपियरगंज के आभूराम तुर्कवलिया में आयोजित कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष जनार्दन तिवारी ने किया प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन, विजेता छात्र-छात्राओं को वितरित किए पुरस्कार


    गोरखपुर। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कैंपियरगंज विधानसभा के मंडल जंगल कौड़िया स्थित पं. त्रिलोकी नाथ त्रिपाठी इंटर कॉलेज, आभूराम तुर्कवलिया में ‘सपनों का भारत’ थीम पर पेंटिंग एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

    प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा –

    कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने पेंटिंग और रंगोली के माध्यम से भारत के भविष्य, राष्ट्रप्रेम और विकसित भारत की कल्पना को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों की कलाकृतियों का अतिथियों ने अवलोकन किया।

    जिला अध्यक्ष ने किया पेंटिंग और रंगोली का अवलोकन –

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला अध्यक्ष जनार्दन तिवारी ने प्रतियोगिता में शामिल छात्र-छात्राओं की पेंटिंग और रंगोली का अवलोकन किया। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार वितरित किए।

    ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान

    इस अवसर पर जनार्दन तिवारी ने कहा कि हमें सदैव राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य करना चाहिए और अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को देश के विकास और निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

    ये प्रमुख लोग रहे मौजूद –

    कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष डॉ. सदानंद शर्मा, प्रबंधक अखिलेश्वर नाथ त्रिपाठी, मंडल अध्यक्ष राघवेंद्र चतुर्वेदी, प्रधानाचार्य अशोक कुमार द्विवेदी, विवेकानंद शुक्ला, विकास साहनी, शंसाह आलम और अरुण सिंह समेत विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।

  • SPECIAL REPORT SC/ST व्यक्ति का अन्य जाति से विवाह: सरकार क्यों देती है प्रोत्साहन राशि?

    SPECIAL REPORT SC/ST व्यक्ति का अन्य जाति से विवाह: सरकार क्यों देती है प्रोत्साहन राशि?

    निष्पक्ष टुडे /SPECIAL REPORT

    26,050 लाभार्थी… लाखों रुपये की सहायता… लेकिन सवाल—क्या सामाजिक एकीकरण के नाम पर सरकार विवाह के फैसलों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रही है?


    नई दिल्ली/लखनऊ।भारत में SC/ST समुदाय के व्यक्ति का अन्य जाति के व्यक्ति से विवाह होने पर केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से आर्थिक प्रोत्साहन की योजनाएं संचालित की जाती हैं।

    सरकार का घोषित उद्देश्य है—जातिगत भेदभाव कम करना, सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देना और ऐसे विवाह करने वाले पात्र दंपतियों को आर्थिक सहायता देना।

    लेकिन इस व्यवस्था के साथ कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक और नीतिगत सवाल भी उठते हैं।

     2024-25 में 26,050 लाभार्थी :-

    केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में इस योजना के तहत देशभर में 26,050 लाभार्थी दर्ज किए गए।

    पिछले वर्षों के आंकड़े—

    2020-21 — 20,237
    2021-22 — 24,062
    2022-23 — 14,225
    2023-24 — 21,083
    2024-25 — 26,050

     ध्यान रखें –

    ये भारत में हुए कुल SC/ST–अन्य जाति विवाहों की संख्या नहीं है।

    यह केवल सरकारी योजना के तहत दर्ज लाभार्थियों की संख्या है।

     महाराष्ट्र सबसे आगे –

    2024-25 में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार—

    महाराष्ट्र — 8,566
    कर्नाटक — 2,798
    तमिलनाडु — 2,476
    हरियाणा — 2,350
    ओडिशा — 2,039
    गुजरात — 1,775
    मध्य प्रदेश — 1,646
    पश्चिम बंगाल — 1,510
    कुल मिलाकर देशभर में 26,050 लाभार्थी दर्ज हुए।

           कितना मिलता है सरकारी मदद –

    केंद्रीय व्यवस्था में पात्र SC–अन्य जाति विवाह के लिए ₹2.50 लाख तक के प्रोत्साहन का प्रावधान है।

    योजना के दस्तावेज के अनुसार सहायता राशि दंपति के संयुक्त नाम से बैंक में रखने और तीन वर्ष की लॉक-इन अवधि का प्रावधान है।

    हालांकि वास्तविक लाभ राज्य की पात्रता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर कर सकता है।

     लेकिन सबसे बड़ा सवाल—सरकार विवाह पर पैसा क्यों देती है?

    यहीं से इस योजना को लेकर बहस शुरू होती है।
    अगर दो वयस्क अपनी इच्छा से विवाह करते हैं, तो—
    क्या सरकार को उनके विवाह के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन देना चाहिए?

    अगर सरकार का उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है, तो सवाल यह भी है—

    क्या सभी जातियों के बीच विवाह को समान रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, या केवल कुछ विशेष सामाजिक संयोजनों को?

    और सबसे अहम—
    क्या आर्थिक प्रोत्साहन किसी व्यक्ति के विवाह संबंधी निर्णय को प्रभावित कर सकता है?

    क्या इसे “सरकारी धर्मांतरण” कहा जा सकता है?

    यह सवाल भी सार्वजनिक बहस में उठाया जा रहा है, लेकिन यहां तथ्य और आरोप को अलग रखना जरूरी है।

    SC/ST–अन्य जाति विवाह को प्रोत्साहित करने वाली योजना स्वयं धर्म परिवर्तन की योजना नहीं है।

    सरकारी योजना का घोषित आधार जाति और सामाजिक एकीकरण है, धर्म परिवर्तन नहीं पर एक ही जाति पर विशेष मेहरबानी क्यों ?

    लेकिन आलोचनात्मक सवाल यह जरूर हो सकता है—

    “जब सरकार किसी खास सामाजिक संयोजन वाले विवाह पर आर्थिक प्रोत्साहन देती है, तो क्या यह केवल सामाजिक भेदभाव कम करने की नीति है, या इससे विवाह के निजी निर्णयों पर आर्थिक प्रभाव पड़ने की संभावना भी पैदा होती है ?”

    यही वह बिंदु है जिस पर नीति को लेकर सार्वजनिक बहस हो सकती है।

     एक और बड़ा सवाल –

    अगर उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है तो—
    क्या सरकार को जाति की पहचान को विवाह के लिए आर्थिक लाभ की पात्रता का आधार बनाना चाहिए?

    क्योंकि एक तरफ सरकार कहती है कि समाज को जाति से ऊपर उठना चाहिए।

    दूसरी तरफ योजना में पात्रता निर्धारित करने के लिए जाति प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाता है।

    सवाल यही है—
    जाति-मुक्त समाज बनाने के लिए क्या जाति आधारित प्रोत्साहन जरूरी है? या
    ऐसी योजनाओं से जाति की पहचान सरकारी रिकॉर्ड में और लंबे समय तक बनी रहती है?

    यह नीति का एक महत्वपूर्ण विमर्श है।

     दूसरी तरफ सरकार का तर्क क्या है?

    सरकार की ओर से ऐसी योजनाओं का मूल तर्क यह है कि समाज में जातिगत भेदभाव और सामाजिक बाधाएं अभी भी मौजूद हैं।

    इसलिए आर्थिक प्रोत्साहन को सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने वाले उपाय के रूप में देखा जाता है।

    यानी सरकारी दृष्टिकोण में यह किसी धर्म को बदलने की योजना नहीं, बल्कि जातिगत विभाजन कम करने की सामाजिक नीति है।

    लेकिन इस नीति का प्रभाव कितना है और क्या आर्थिक सहायता वास्तव में विवाह के निर्णयों को प्रभावित करती है—यह अलग प्रश्न है, जिसके लिए व्यापक सामाजिक अध्ययन और आंकड़ों की आवश्यकता होगी।

     SC और ST को एक साथ समझना भी जरूरी नहीं ?

    एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि केंद्र की जिस प्रमुख योजना के ये 26,050 आंकड़े हैं, उसकी पात्रता मुख्यतः SC से संबंधित अंतरजातीय विवाह से जुड़ी है।

    इसलिए—
    SC + अन्य जाति
    और
    ST + अन्य जाति
    को एक ही केंद्रीय आंकड़े में स्वतः जोड़ना उचित नहीं है।
    ST विवाह के लिए संबंधित राज्य की जनजातीय कल्याण योजनाओं और नियमों को अलग से देखना होगा।

     उत्तर प्रदेश: आंकड़ों का सवाल –

    केंद्र की राज्यवार तालिका में उत्तर प्रदेश के लिए 2021-22 से 2024-25 तक 0 दर्ज है।
    लेकिन बाद की केंद्रीय रिपोर्टिंग में यूपी के लाभार्थियों का उल्लेख मिलता है।
    इसलिए सवाल उठता है—

    क्या अलग-अलग वर्षों में योजना की reporting व्यवस्था बदली है?

    क्या केंद्र और राज्य के आंकड़ों में तालमेल है?

    और क्या आम लोगों को यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध है कि पात्र दंपति को वास्तव में कितना लाभ मिल सकता है?

    इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।

     निष्पक्ष टुडे के सवाल –

    सवाल नंबर 1
    अगर उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है, तो क्या आर्थिक प्रोत्साहन सही तरीका है?

    सवाल नंबर 2
    क्या विवाह के आधार पर सरकारी आर्थिक प्रोत्साहन देना व्यक्ति के निजी निर्णय को प्रभावित कर सकता है?

    सवाल नंबर 3
    जब सरकार जाति से ऊपर उठने की बात करती है, तो पात्रता के लिए जाति प्रमाणपत्र क्यों जरूरी है?

    सवाल नंबर 4
    क्या समान परिस्थितियों वाले सभी विवाहों के लिए समान आर्थिक प्रोत्साहन होना चाहिए?

    सवाल नंबर 5
    क्या इस योजना का वास्तविक सामाजिक प्रभाव मापने के लिए सरकार के पास कोई स्वतंत्र अध्ययन है?

    सवाल नंबर 6
    और सबसे बड़ा सवाल—

    क्या यह सिर्फ सामाजिक एकीकरण की सरकारी नीति है, या आर्थिक प्रोत्साहन के जरिए विवाह के सामाजिक स्वरूप को प्रभावित करने की कोशिश भी है?और “सरकारी धर्मांतरण” वाला सवाल?

    उसका जवाब तथ्यों से ही मिल सकता है।
    क्योंकि उपलब्ध सरकारी योजना के दस्तावेजों में इसका उद्देश्य धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव कम करना और सामाजिक एकीकरण बताया गया है।

    इसलिए निष्पक्ष सवाल यही होना चाहिए—
    “सरकार की नीति का घोषित उद्देश्य क्या है, जमीन पर उसका वास्तविक प्रभाव क्या है, और क्या इस आर्थिक प्रोत्साहन की जरूरत तथा समानता पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए?”

    अब सरकारी खर्च की –

     5 साल के आंकड़े: एक नजर में-

    केंद्र की योजना के तहत 2020-21 से 2024-25 तक कुल 1,05,657 लाभार्थी दर्ज हुए। इनमें 2024-25 में सबसे ज्यादा 26,050 लाभार्थी रहे।

    वर्षवार लाभार्थी:
    2020-21 — 20,237 | 2021-22 — 24,062 | 2022-23 — 14,225 | 2023-24 — 21,083 | 2024-25 — 26,050

    प्रमुख राज्य –

    (2024-25): महाराष्ट्र 8,566, कर्नाटक 2,798, तमिलनाडु 2,476, हरियाणा 2,350, ओडिशा 2,039 और गुजरात 1,775।

    नोट: ₹2.50 लाख प्रति लाभार्थी के आधार पर 5 वर्षों की राशि लगभग ₹2,641 करोड़ बैठती है, लेकिन यह अनुमानित गणना है, वास्तविक सरकारी खर्च नहीं।

    SPECIAL REPORT | निष्पक्ष टुडे
    सरकारी आंकड़े सामने हैं…
    सरकार का तर्क भी सामने है…
    अब सवाल नीति पर है—और जवाब तथ्यों से होना चाहिए।

  • अलीगढ़ में करणी सेना जिलाध्यक्ष की पिटाई के बाद बवाल!

    अलीगढ़ में करणी सेना जिलाध्यक्ष की पिटाई के बाद बवाल!

    अलीगढ़ ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    ‘जय भीम’ के नारे लगवाने का आरोप… FIR के बाद थाने का घेराव, सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन


    अलीगढ़ में करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव से मारपीट का मामला अब सड़क से थाने तक पहुंच गया है।

    🔴 पहले सड़क पर मारपीट, फिर थाने का घेराव

    अलीगढ़ के सिविल लाइन क्षेत्र में क्षत्रिय युवा करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।

    वीडियो में सचिन राघव को भीड़ के बीच घिरा हुआ और उनके साथ मारपीट होती दिखाई देती है। रिपोर्टों में उनके साथ माफी मंगवाने और ‘जय भीम’ के नारे लगवाने की बात भी सामने आई है।

    🔴 ‘जय भीम’ का नारा लगाने से इनकार पर मारपीट का आरोप

    सबसे गंभीर आरोप यह है कि सचिन राघव को कथित तौर पर जबरन ‘जय भीम’ के नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया।

    आरोप है कि नारा लगाने से इनकार करने पर उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें खींचते हुए अंबेडकर पार्क की तरफ ले जाया गया।

    वायरल वीडियो में उनसे माफी मंगवाने और नारे लगवाने का दृश्य होने की रिपोर्ट है। इन आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर होनी है।

    🔴 FIR हुई तो अब थाने के बाहर दूसरा प्रदर्शन

    पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और आरोपियों की पहचान के लिए CCTV फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की।

    इसके बाद गुरुवार को वाल्मीकि समाज से जुड़े लोगों और सफाई कर्मचारियों ने सिविल लाइन थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया।

    रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दूसरे पक्ष के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाए और पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए युवकों को छोड़ा जाए। इस विरोध के दौरान सफाई व्यवस्था भी प्रभावित होने की खबर है।

    🔴 थाने के बाहर खड़ी रहीं कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां

    रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कूड़ा उठाने वाले वाहनों को भी थाने के बाहर खड़ा किया गया और सफाई कर्मचारियों के काम प्रभावित होने की बात सामने आई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और स्थिति पर नजर रखी।

    ⚠️ अब मामला सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं रहा

    एक तरफ आरोप है कि सचिन राघव ने समाज को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

    दूसरी तरफ आरोप है कि उस टिप्पणी के विरोध में उन्हें भीड़ ने घेरकर पीटा, जबरन नारे लगवाए और माफी मांगने के लिए मजबूर किया।

    और अब FIR के बाद दूसरा पक्ष भी थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहा है।

    ❓सबसे बड़ा सवाल—कानून किसके लिए?

    अगर किसी व्यक्ति पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप है तो शिकायत, जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

    लेकिन अगर किसी व्यक्ति को भीड़ पकड़ती है, पीटती है और कथित तौर पर जबरन नारा लगवाती है, तो उस पर भी कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

    नारा ‘जय भीम’ हो या कोई दूसरा—किसी व्यक्ति को जबरन नारा लगवाने के लिए हिंसा का सहारा लेने का सवाल गंभीर है।

    🔴 अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती

    एक तरफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की जांच।

    दूसरी तरफ मारपीट, जबरन नारे लगवाने और कानून हाथ में लेने के आरोपों की जांच।

    और इसके बाद—

    किसने क्या किया?
    किसके खिलाफ क्या सबूत है?
    और किस पर कौन-सी कानूनी कार्रवाई बनती है?

    इन सभी सवालों का जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया से निकलना चाहिए।

    ❓क्योंकि सवाल सिर्फ सचिन राघव का नहीं है…

    सवाल यह है कि—

    क्या किसी विचार से असहमति का जवाब हिंसा हो सकता है?

    क्या भीड़ किसी व्यक्ति को जबरन कोई नारा बुलवा सकती है?

    क्या FIR के बाद भीड़ का दबाव कानून की दिशा तय करेगा?

    जाति कोई भी हो।
    संगठन कोई भी हो।
    विचारधारा कोई भी हो।

    कानून का रास्ता सबके लिए एक होना चाहिए।

    अलीगढ़ की घटना में अब नजर पुलिस की जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है।

  • गोरखपुर को ₹40 करोड़ की सौगात, 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

    गोरखपुर को ₹40 करोड़ की सौगात, 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    कल्याण मंडपम का उद्घाटन, नगर निगम के 115 कार्यों का शिलान्यास; CM योगी ने कानून-व्यवस्था, रोजगार और पेंशन को लेकर गिनाईं सरकार की उपलब्धियां


    गोरखपुर, 16 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर को करीब ₹40 करोड़ की 119 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम का लोकार्पण करने के साथ कई विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया।

    🔴 मुख्य Highlights

    🏗️ ₹40 करोड़ की 119 परियोजनाएं
    करीब ₹40 करोड़ की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास।
    इनमें नगर निगम, जीडीए और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के कार्य शामिल।
    नगर निगम के 115 विकास कार्यों का शिलान्यास।

    🏛️ ₹3.09 करोड़ में तैयार हुआ कल्याण मंडपम

    जंगल नकहा नंबर-2 में 2461 वर्गमीटर भूमि पर दो मंजिला कल्याण मंडपम बनाया गया है।

    खास सुविधाएं:

    👥 300 लोगों की क्षमता

    बड़ा आयोजन हॉल
    किचन और स्टोर
    ऑफिस और चेंज रूम
    महिला एवं पुरुषों के लिए अलग टॉयलेट
    पर्याप्त पार्किंग
    लॉन और फव्वारा
    यहां रियायती दर पर मांगलिक और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।

    ⚖️ कानून-व्यवस्था पर CM योगी का बड़ा दाव :-

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षित वातावरण जरूरी है।
    उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद यूपी में कानून-व्यवस्था में बदलाव आया है।

    माफिया को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में माफिया “या तो जेल में हैं या फिर दूसरे लोक की यात्रा पर जा चुके हैं।”

    📈 ‘यूपी अब बीमारू राज्य नहीं’

    CM योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन रहा है।
    उन्होंने इसके पीछे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और कनेक्टिविटी को प्रमुख कारणों के रूप में बताया।

    🦟 इंसेफेलाइटिस से लेकर एम्स तक का जिक्र :-

    मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इंसेफेलाइटिस, मच्छर और माफिया जैसी चुनौतियों पर काम किया।

    उन्होंने गोरखपुर में—

    खाद कारखाने का पुनः संचालन → फोरलेन कनेक्टिविटी → फ्लाईओवर/ओवरब्रिज → रामगढ़ताल का पर्यटन विकास → बीआरडी मेडिकल कॉलेज → एम्स
    जैसे विकास कार्यों का जिक्र किया।

    👨‍💼 6 महीने में 1 लाख सरकारी नौकरियों का दावा :-

    CM योगी के मुताबिक उनकी सरकार अब तक साढ़े 9 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है।
    उन्होंने कहा कि अगले 6 महीने में 1 लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
    गीडा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां करीब 500 कारखाने लगे हैं और लगभग 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है।

    💰 1.10 करोड़ लोगों को पेंशन :-

    मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार करीब 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को सालाना ₹12 हजार पेंशन दे रही है।

    उन्होंने कहा कि जल्द ही पेंशन की राशि और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

    🏠 वंचित पात्र लोगों के लिए विशेष शिविर :-

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास, शौचालय, राशन, रसोई गैस और बेटियों की पढ़ाई-विवाह जैसी योजनाओं से पात्र लोगों को लाभ दिया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि जो पात्र लोग अभी भी किसी कारण से लाभ से वंचित हैं, उन्हें योजनाओं से जोड़ने के लिए 7 अक्टूबर से एक सप्ताह का विशेष शिविर लगाया जाएगा।

    🌱 कल्याण मंडपम में पौधरोपधन :-

    लोकार्पण से पहले मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर कल्याण मंडपम का उद्घाटन किया।
    निरीक्षण के बाद उन्होंने परिसर में मौलश्री का पौधा लगाया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    📌 एक नजर में बड़े आंकड़ा :-

    मुद्दा
    आंकड़ा
    कुल परियोजनाएं
    119
    कुल लागत
    करीब ₹40 करोड़
    नगर निगम के कार्य
    115
    नगर निगम कार्यों की लागत
    ₹28.91 करोड़
    कल्याण मंडपम की लागत
    ₹3.09 करोड़
    मंडपम की क्षमता
    300 लोग
    अब तक सरकारी नौकरी का दावा
    9.5 लाख
    अगले 6 महीने का नौकरी लक्ष्य
    1 लाख
    पेंशन लाभार्थी
    1.10 करोड़
    वार्षिक पेंशन
    ₹12,000

    निष्पक्ष टुडे की नजर :-

    गोरखपुर में विकास परियोजनाओं के साथ मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, रोजगार, पेंशन और सरकारी योजनाओं को लेकर सरकार का पक्ष रखा। रोजगार और अन्य उपलब्धियों के आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम में बताए गए हैं।

  • लखनऊ में रिश्तों का विवाद बना सड़क पर बवाल, युवती को कार से कुचलने की कोशिश

    लखनऊ में रिश्तों का विवाद बना सड़क पर बवाल, युवती को कार से कुचलने की कोशिश

    लखनऊ ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नंबर-4 के सामने हुआ विवाद, CCTV में कैद घटनाक्रम; कार की पहचान के बाद


    शाहनवाज हिरासत में

    लखनऊ: गोमतीनगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नंबर-4 के सामने एक युवती को कार से टक्कर मारने और बोनट पर घसीटने का मामला सामने आया है। घटना का CCTV वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।

    🔴 क्या है पूरा मामला?

    • 📍 जगह: जनेश्वर मिश्र पार्क, गेट नंबर-4, गोमतीनगर
    • 👩 युवती: अनामिका सिंह
    • 👨 युवक: शाहनवाज
    • ❤️ रिश्ता: दोनों के करीब एक साल से रिलेशनशिप में होने की बात सामने आई है।
    • ⚠️ विवाद: आरोप है कि अनामिका ने शाहनवाज को दूसरी युवती के साथ देख लिया था।

    🔥 दूसरी युवती को लेकर बढ़ा विवाद

    बताया जा रहा है कि दूसरी युवती को लेकर अनामिका और शाहनवाज के बीच जनेश्वर मिश्र पार्क के पास विवाद हुआ।

    कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि शाहनवाज ने अनामिका को अपना नाम “यश ठाकुर” बताया था। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच के स्तर पर स्पष्ट होना बाकी है।

    🎥 CCTV में क्या दिखा?

    CCTV फुटेज में युवती कार के सामने आती दिखाई देती है।

    इसके बाद कार आगे बढ़ती है और युवती बोनट पर गिर जाती है।

    कार कुछ दूरी तक आगे जाती दिखाई देती है और युवती बोनट पर घिसटती नजर आती है।

    घटना के बाद चालक के मौके से निकल जाने की बात सामने आई।

    🚔 पुलिस की कार्रवाई

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    कार के नंबर और पहचान के आधार पर पुलिस ने शाहनवाज को हिरासत में लिया है।

    अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और घटना की पूरी परिस्थितियों को जांच रही है।

    🎙️ पुलिस की बाइट

     

    ❓ अब जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी

    1️⃣ विवाद की असली वजह क्या थी?

    2️⃣ कार किस परिस्थिति में आगे बढ़ी?

    3️⃣ क्या युवती को जानबूझकर टक्कर मारी गई या घटना की परिस्थितियां अलग थीं?

    4️⃣ “यश ठाकुर” नाम से पहचान बताने का दावा सही है या नहीं?

    5️⃣ CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर पुलिस की जांच में क्या सामने आता है?

    ⚖️ पुलिस जांच पर टिकी नजर

    फिलहाल घटना से जुड़े कई दावे मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आ रहे हैं। इनमें से जिन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें आरोप या दावा ही माना जाना चाहिए।

    CCTV फुटेज, वाहन की पहचान, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस पूछताछ से अब इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    निष्पक्ष टुडे — खबर वही, जिसमें सवाल भी हों और तथ्यों की पड़ताल भी।

  • UPI पर MDR: क्या अब QR से भुगतान करना महंगा होगा?

    UPI पर MDR: क्या अब QR से भुगतान करना महंगा होगा?

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    ₹2,000 तक के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं, बड़े लेन-देन पर व्यापारी देगा MDR; आम ग्राहक की जेब पर सीधा असर नहीं


    नई दिल्ली।
    UPI से भुगतान करने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। 15 सितंबर 2026 को जारी FAQ के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा UPI Person-to-Merchant यानी P2M लेन-देन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किया जाएगा।

    लेकिन सबसे बड़ा सवाल—क्या अब UPI से पैसे भेजने पर ग्राहक की जेब कटेगी?

    दस्तावेज के मुताबिक, नहीं। ग्राहक के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

    🔴 सबसे पहले समझिए ₹2,000 का नियम

    सामान्य P2M यानी दुकान, कारोबारी या व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान में—

    👉 ₹2,000 तक — कोई MDR नहीं।

    👉 ₹2,000 से ज्यादा — 0.4% MDR।

    👉 ₹75,000 या उससे ज्यादा — अधिकतम ₹300 MDR।

    यानी अगर कोई ग्राहक ₹3,000 की खरीदारी करता है तो 0.4% के हिसाब से ₹12 MDR बनेगा। ₹50,000 के भुगतान पर यह ₹200 होगा। लेकिन ₹1 लाख के भुगतान पर 0.4% यानी ₹400 की जगह अधिकतम ₹300 ही MDR होगा।

    🟢 ग्राहक को नहीं देना होगा MDR

    FAQ में साफ कहा गया है कि UPI से भुगतान करने वाले उपभोक्ता से कोई transaction charge नहीं लिया जाएगा।

    यानी QR कोड स्कैन करके भुगतान करने पर ग्राहक को अलग से MDR नहीं देना होगा।

    इसके अलावा—

    • P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान मुफ्त रहेगा।
    • UPI ऐप Platform Fee नहीं लगा सकेंगे।
    • QR कोड से भुगतान करने पर ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
    • ग्राहक के लिए कोई मासिक MDR/फीस सीमा नहीं होगी।

    🟡 छोटे दुकानदारों को राहत

    यह नियम हर दुकानदार पर एक जैसा लागू नहीं होगा।

    P2PM यानी छोटे व्यापारियों की श्रेणी को Zero MDR का प्रावधान दिया गया है।

    FAQ के अनुसार, जिन छोटे विक्रेताओं की UPI के जरिए प्राप्तियां ₹1 लाख प्रति माह तक हैं, वे P2PM श्रेणी में Zero MDR के पात्र हो सकते हैं।

    खास बात यह है कि अगर ऐसे छोटे व्यापारी को एक बार ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान मिल भी जाता है, तो केवल उस भुगतान के कारण MDR नहीं लगेगा, बशर्ते व्यापारी exempted P2PM श्रेणी में हो।

    ⚠️ ₹1 लाख की सीमा पर नजर जरूरी

    P2PM व्यापारी की UPI प्राप्तियां अगर लगातार तीन महीने ₹1 लाख प्रति माह से ज्यादा रहती हैं, तो FAQ के अनुसार उसे P2M श्रेणी में ट्रांसफर किया जा सकता है।

    ⛽ कुछ सेवाओं में 0.4% नहीं, सिर्फ ₹5

    कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है।

    ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर बीमा, फ्यूल, बिजली-पानी जैसी कुछ सेवाओं में ₹5 का flat MDR बताया गया है।

    यानी हर जगह 0.4% MDR लागू नहीं होगा।

    📈 Mutual Fund और शेयर बाजार के भुगतान की अलग दर

    Capital Market transactions के लिए अलग MDR रखा गया है।

    Mutual Fund, Securities, Stockbroker और Dealer जैसे लेन-देन पर 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 बताया गया है।

    ❓ MDR लगाया ही क्यों जा रहा है?

    FAQ में इसका मुख्य कारण UPI के बढ़ते पैमाने और उसके संचालन की लागत को बताया गया है।

    दस्तावेज के मुताबिक UPI के server, bandwidth, fraud prevention, cybersecurity और बैंक/fintech तकनीकी सपोर्ट पर उद्योग का अनुमानित खर्च करीब ₹20,000 करोड़ सालाना है।

    MDR से मिलने वाले राजस्व को UPI infrastructure, cybersecurity, innovation और customer service में लगाने की बात कही गई है।

    📊 UPI का कारोबार कितना बड़ा हो चुका है?

    FAQ के अनुसार अगस्त 2026 में UPI ने 2,451 करोड़ transactions किए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹29.9 लाख करोड़ बताई गई है।

    दस्तावेज का तर्क है कि इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को लंबे समय तक चलाने के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था जरूरी है।

    🔍 तो आम आदमी को क्या समझना चाहिए?

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR ग्राहक से नहीं, संबंधित व्यापारी से लिया जाना है।

    ₹2,000 तक का सामान्य P2M UPI भुगतान — FREE

    ₹2,000 से ऊपर — सामान्य P2M में 0.4% MDR

    ₹75,000+ — अधिकतम ₹300

    P2P भुगतान — FREE

    छोटे पात्र P2PM व्यापारी — Zero MDR

    कुछ विशेष सेवाएं — ₹5 flat MDR

    और FAQ के मुताबिक व्यापारी इस MDR को ग्राहक से अलग से वसूल नहीं कर सकता।

    निष्पक्ष सवाल

    अब असली सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था UPI के लंबे समय के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, या MDR का असर अंततः व्यापारियों की लागत और बाजार की कीमतों पर पड़ेगा?

    FAQ में दावा है कि ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और व्यापारियों को लागत को अपनी सामान्य operational cost के रूप में absorb करना होगा। लेकिन वास्तविक असर 15 अक्टूबर 2026 से व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

    निष्पक्ष टुडे की नजर में—

    फिलहाल सबसे जरूरी बात है नियम को सही समझना: UPI बंद या महंगा नहीं हुआ है; नया MDR चुनिंदा व्यापारी लेन-देन पर लागू होने वाला शुल्क है, जिसका भुगतान ग्राहक के बजाय व्यापारी पक्ष से होना है।