कमीशन की चर्चाओं से सुलगी सियासत, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे तीखे सवाल
कानून के रखवाले या वसूली के खिलाड़ी?”
कमीशन का खेल या सिस्टम की चुप्पी?
गोरखपुर. जनपद के बड़हलगंज थाना क्षेत्र में तैनात थानेदार एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला सिर्फ कार्यशैली तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे-सीधे “चंदा वसूली” जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों और क्षेत्र में तेजी से फैल रही चर्चाओं के अनुसार, यह कथित खेल केवल थाने की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार ऊंचे स्तर तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि सत्ता में मजबूत पकड़ और ऊपरी संरक्षण के चलते थानेदार पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। यही वजह है कि आरोपों के बावजूद उनका मनोबल कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कानून का रक्षक ही कानून को अपने हिसाब से मोड़ रहा है?
क्षेत्र में चर्चा है कि ड्यूटी के दौरान ही कथित तौर पर चंदा वसूली का खेल चल रहा है, जो न केवल कानून व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि संविधान की मूल भावना को भी ठेस पहुंचाता है। एक लोक सेवक से अपेक्षा की जाती है कि वह निष्पक्ष और ईमानदार रहे, लेकिन अगर वही व्यवस्था को “कमाई का जरिया” बना ले, तो आम जनता का भरोसा कहां बचेगा?
कमीशन का खेल या सिस्टम की चुप्पी?
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि इस कथित वसूली का एक हिस्सा “कमीशन” के रूप में ऊपर तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन जिस तरह से यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, उसने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनप्रतिनिधियों की नाराजगी, लेकिन कार्रवाई नदारद
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने इस पूरे प्रकरण पर नाराजगी जताते हुए उच्च अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई हैं। बावजूद इसके, अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव साफ तौर पर नजर आ रहा है। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या कहीं न कहीं सिस्टम खुद इस खेल को नजरअंदाज कर रहा है?
जनता में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रवृत्ति और बढ़ेगी और कानून व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ जाएगी। जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है।
सबसे बड़ा सवाल……?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी “ऊपरी दबाव” के चलते फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल, बड़हलगंज की जनता की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं—देखना यह है कि “कानून का राज” कायम रहता है या फिर “संरक्षण का खेल” यूं ही चलता रहेगा।
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