जुलाई 2023 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी की बहू की हुई थी मौत, मंडलायुक्त ने की थी जांच, रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
एमएलसी की बहू की मौत में गायनी की डॉ. रूमा दोषी, वेतन वृद्धि रुकी।
सात महीने की गर्मवती थीं चंदा त्रिपाठी, घबराहट और सांस लेने में हो रही थी तकलीफ
मेडिकल कॉलेज के विभाग में घूमते रहे तीमारदार, नहीं मिला था इलाज,
– सदन तक उठा था मामला, तब एक्शन में आई सरकार
– जांच में मिली लापरवाही
गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में *एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी की बहू की मौत* के मामले में मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट के बाद शासन ने गायनी की *प्रोफेसर डॉ. रूमा सरकार* को दोषी माना है।
उन्हें कर्तव्य में लापरवाही का दोषी मानते हुए दो वेतन वृद्धि रोक दी है।
डॉ. रूमा सरकार इस समय गायनी की विभागाध्यक्ष भी हैं। जांच में तत्कालीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर *डॉ. एके श्रीवास्तव* के अलावा *तीन रेजिडेंट* को भी दोषी माना गया है।
हालांकि इन रेजिडेंट के खिलाफ किसी भी कार्रवाई की सिफारिश नहीं हुई है।
मामला *22 जुलाई 2023* का है।
सिद्धार्थनगर के रहने वाले विधान परिषाद सदस्य ध्रुव त्रिपाठी की बहू चंदा त्रिपाठी शादी के 15 साल बाद आईवीएफ की मदद से सात महीने की गर्भवती थीं।गर्भमें जुड़वा बच्चे थे।
22 जुलाई की सुबह करीब सवा नौ बजे परिजन *चंदा त्रिपाठी* को गंभीर हालत में लेकर बीआरडी पहुंचे।
परिजन ट्रामा सेंटर गए तो कर्मचारियों ने सुपर स्पेशियलिटी में बने कार्डियोलॉजी में भेज दिया।
जहां हृदयरोग विशेषज्ञ ने जांच कर वापस ट्रामा सेंटर भेजा।एक बार फिर ट्रामा सेंटर से
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी भेजा गया। वहां से डॉक्टरों ने मेडिसिन विभाग में रेफर कर दिया गया।
करीब दो घंटे तक मरीज को लेकर परिजन एक विभाग से दूसरे विभाग दौड़ लगाते रहे। करीब सवा 11:00 बजे मरीज की मौत हो गई।
*सदन तक उठा था मामला, तब एक्शन में आई सरकार*
एमएलसी ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शासन से लेकर सदन तक में मामले को उठाया।
शासन ने इस मामले में तत्कालीन मंडलायुक्त को जांच सौंपी थी। इससे पहले तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने जांच की थी।
विशेषज्ञों ने माना था कि मरीज को *प्री एक्लेम्प्सिया* के लक्षण थे।यह गायनी विभाग का मामला होता है।
उस टीम के रिपोर्ट में भी डॉ. एके श्रीवास्तव और डॉ. रूमा सरकार को जिम्मेदार माना गया था।
*जांच में मिली लापरवाही*
शासन की ओर से जारी जांच रिपोर्ट में चंदा त्रिपाठी की मौत में डॉक्टरों की सीधी लापरवाही मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा लापरवाही डॉ. रूमा सरकार की रही।
मरीज को देखकर उन्होंने पर्चे पर लिख दिया कि गायनी इंटरवेंशन की जरूरत नहीं है। जबकि मरीज को प्री एक्लेम्प्सिया के स्पष्ट लक्षण थे।
रिपोर्ट में मेडिसिन के दो रेजिडेंट के पर भी सवाल उठाए गए हैं। तत्कालीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. एके श्रीवास्तव की भी लापरवाही मानी गई है।
वह घटना के दिन अवकाश पर चले गए थे। लेकिन किसी को रिलीवर नहीं नियुक्त किया।
“शासन से एक रिपोर्ट आई है। उसे देखा जा रहा है। जैसा शासन का निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा।” – डॉ. राम कुमार जायसवाल, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर।
Leave a Reply