Category: टेक्नोलॉजी

  • विशेष उपलब्धि: डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन भारत, की मेधा इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 में चमकी

    विशेष उपलब्धि: डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन भारत, की मेधा इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 में चमकी

    “डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन द्वारा इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 में किया कमाल”

    गोरखपुर। डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन की समस्त टीम द्वारा इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 में प्रतिभाग करके अपनी प्रतिभा से सभी को आश्चर्य चकित कर दिया और इस दौरान समस्त प्रतिभागियों ने तमाम क्षेत्रों से जुड़े वैज्ञानिकों एवं इसरो के वर्तमान अध्यक्ष श्री वी ० नारायणन से भी मुलाकात करके अपने द्वारा किए गए कार्यों को बताया। इस पर श्री वी ० नारायणन द्वारा हर्ष व्यक्त किया गया और समस्त टीम डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन गोरखपुर की सराहना की, इसी दौरान डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन गोरखपुर की टीम द्वारा अपनी स्टॉल्स पर उपस्थित प्रतिभागियों ने रॉकेट्स मॉडल्स के माध्यम से आने वाले आगंतुकों को विस्तार पूर्वक जानकारियों से अवगत कराया एवं चांद, तारों एवं मंदाकिनी को पहचानने की साधारण तरकीबों से भी रूबरू करवाते हुए नक्षत्रों एवं तारामंडलों के बारे में भी बनाए गए मानचित्रों से परिचय प्राप्त करवाया एवं साथ ही एक विशेष प्रकार का 180 अंश का ऑटोमेटीक रॉकेट लॉन्चर जो आने वाले भविष्य में बॉर्डर सुरक्षा में एक अति महत्वपूर्ण योगदान देगा उसका भी प्रदर्शन किया गया, जिससे दर्शकों ने जाना कि कैसे एक विशेष ए ०आई० आधारित रॉकेट लॉन्चर को प्रयोग करके नो मेन लैंड बॉर्डर एरिया में युद्ध या अन्य अवांछित गतिविधियों के घटित होने पर छड़ भर में सामने आने वाले किसी भी टार्गेट को पिन पॉइंटेड वार किया जाता है। साथ ही हाइड्रा रॉकेट्स लॉन्चर के माध्यम से दिखाया की पानी की सहायता से रॉकेट्स में थ्रस्ट कैसे उत्पन्न किया जाता है।

    अन्य मॉडल्स में एस० एस० एल० वी ० रॉकेट एवं अन्य रॉकेट्स मॉडल्स से यह भी प्रदर्शित किया की विभिन्न प्रकार के रॉकेट्स की कार्य प्रणालियां कैसे कार्य करती हैं और किसी भी सैटेलाइट्स एवं पेलोड्स को कैसे अपनी इच्छित कक्षाओं में प्रक्षेपित किया जाता है।

    उसी दौरान स्टॉल पर आए इसरो के पूर्व अध्यक्ष श्री एस० सोमनाथ जी ने स्टॉल पर आकर के मौजूद डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन की टीम के प्रतिभागियों से रॉकेट्स मोटर्स और किसी अंतरिक्ष यात्री को चन्द्रमा एवं आई० एस ० एस० पर मौजूद लगभग ज़ीरो ग्रैविटी में अंतरिक्ष में कैसे पहुंचाया जाता है जैसे आदि प्रश्नोत्तरों के माध्यम से विशेष हौसला अफजाई करते हुए भविष्य के वैज्ञानिकों को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन जैसी और भी संस्थाओं की देश को बहुत जरूरत है जिस से भविष्य के आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त ,वराहमिहिर, सुश्रुत, चरक, विक्रम अंबालाल साराभाई एवम् डॉ०ए० पी० जे० अब्दुल कलाम साहब, सतीश धवन जैसे दूरदर्शी वैज्ञानियों की सकारात्मक एवं उच्च सोच से ओत प्रोत महान वैज्ञानिकों के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए नवीन क्षितिजों के साथ अग्रिम भविष्य में नई वैज्ञानिक पीढ़ी तैयार की जा सके,जो भारत को संपूर्ण समर्पित हो और देश को वैज्ञानिक शिक्षा एवं तकनीकी नवाचारों को सतत बढ़ाने में पूर्ववर्ती वैज्ञानिकों की तरह ही देश में अग्रिम सहयोग करें। इस दौरान डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन की फाउंडर श्री प्रिया यादव ने कहा कि हम डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन के माध्यम से प्रतिभाओं को तलाश कर तराशने के लिए दिन, रात लगे हुए हैं जिस से हमारा देश विज्ञान में नए नए अंतरिक्षिय योगदानों के साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधानों की अग्रिम पंक्ति में रहे और प्रायोगिक ज्ञान का दीप अनवरत जलता रहे। एवं डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन की को० फाउंडर श्रीमती सरोज ने कहा कि विज्ञान से ही अशिक्षा का अंधियारा मिटाया जा सकता है और नए ज्ञान का सूरज चमकाया जा सकता है जिसकी आज हमारे देश को महती आवश्यकता है, साथ ही डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन के सी०ई० ओ० श्री राहुल व्यास ने कहा कि छोटे छोटे वैज्ञानिक आधारित मॉडल्स से शिक्षा में सुधार एवं नवाचार को प्रेरित करके समाज में अंतरिक्ष विज्ञान को जन जन की भाषा में पहुंचाया जा सकता है जो भविष्य में भारत देश को वैज्ञानिकता के निश्चित परिणाम दे सकते हैं। एवं इसी दौरान डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन के मेंटर खगोलविद, श्री अमर पाल सिंह ने कहा कि, सही ज्ञान,सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान और इस दिशा में डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन निश्चित तौर पर लगातार प्रयासरत एवं कार्यरत भी है, जो सामाजिक ताने बाने के लिये अति आवश्यक तत्वों में से एक महत्वपूर्ण पहलू है। एवं डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन के अलग अलग विषयों के विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमौली, डॉ दिलीप भट्ट (इसरो), डॉ.जयंत जोशी(इसरो), प्रोफेसर मोहर लाल सोलंकी,डॉ. राजेश ठाकुर, डॉ अनूप कुमार सिंह, प्रोफेसर बृजेश दीक्षित आदि ने कहा कि डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन गोरखपुर, एक ऐसा अनूठा फाउंडेशन है जो छोटे छोटे सतत प्रयासों से सभी को जोड़कर के समस्त विधार्थियों एवं आम जनमानस को नित नए अवसर देकर समाज में बड़े- बड़े बदलाब लेकर आ रहा है, इसीलिए इस से जुड़कर कोई भी व्यक्ति वैज्ञानिक दृष्टिकोण को धरातल पर पहुंचा सकता है जो निकट एवं दूर भविष्य की जरूरत है। इस बार के इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 जो पंचकूला में आयोजित किया गया इस दौरान डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन के प्रयासों से 35 से अधिकत विबिन्न विधार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने प्रतिभाग करके विज्ञान के प्रति गोरखपुर के साथ ही पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में एक नई अलख जगाने के साथ ही विज्ञान के क्षेत्र में नए द्वार खोले हैं इस कार्यक्रम के दौरान डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन के सिद्धार्थनगर जिला समन्वयक श्री राज नारायण, आदर्श मणि त्रिपाठी, , तनु उपाध्याय, अंजली व गोरखपुर से अवनीश पाठक आदित्य, अंशिका, आदि द्वारा प्रतिभाग किया गया।

    News Courtesy : प्रिया यादव। फाउंडर डे एंड नाईट स्पेस फाउंडेशन गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।

  • आईटीएम गीडा के इनोवेशन सेल की टीम ने विकसित किया अत्याधुनिक ऑनलाइन उपकरण

    आईटीएम गीडा के इनोवेशन सेल की टीम ने विकसित किया अत्याधुनिक ऑनलाइन उपकरण

    “शिवलिंग पर वर्चुअल जल अर्पण की तकनीक विकसित, आस्था और तकनीक का समन्वय।”

    संवाददाता– एस.पी. सिंह
    सहजनवा, (गोरखपुर)।

    आईटीएम गीडा के बीसीए तृतीय वर्ष के पांच छात्र खुशी, अंचल यादव, आयुषी कुमारी, गोपाल शर्मा और विवेक शर्मा – ने कॉलेज के इनॉवेशन सेल टीम के साथ मिलकर एक अत्याधुनिक ऑनलाइन उपकरण विकसित किया है, जो आध्यात्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा समन्वय प्रस्तुत करता है।
    इस उपकरण की विशेषता यह है कि सिर्फ एक मैसेज कमांड भेजकर शिवलिंग पर चारों धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का पवित्र जल आभासी रूप में अर्पित किया जा सकता है।
    संस्थान के निदेशक डॉ. एन. के. सिंह ने बताया, “जिस प्रकार हम मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों के लाइव दर्शन करते हैं, उसी प्रकार अब सोशल मीडिया के माध्यम से कहीं से भी भगवान शिव की मूर्ति पर लाइव जुड़कर जल अर्पित किया जा सकेगा।”
    छात्र विवेक शर्मा और गोपाल शर्मा ने बताया कि इस पूरे उपकरण को बनाने में छह दिन का समय लगा और इसमें लगभग 25 से 30 हजार रुपये का खर्च आया। इसे बनाने में एंड्रॉइड मोबाइल, गियर मोटर, कैमरा, डीसी वॉटर पंप आदि तकनीकों का उपयोग किया गया है।
    संस्थान की यह पहल तकनीकी शिक्षा को नवाचार से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।

  • ड्रोन कार्यशाला और प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाया अद्भुत हुनर

    ड्रोन कार्यशाला और प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाया अद्भुत हुनर

    गोरखपुर। TYNXROBO द्वारा लिटिल फ्लावर स्कूल, राप्तीनगर में 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए 7-दिवसीय मिनी ड्रोन कार्यशाला का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को ड्रोन तकनीक की बुनियादी जानकारी देना और उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।

    इस कार्यशाला में छात्रों ने ड्रोन की बनावट, उड़ान के सिद्धांत, सेफ़्टी प्रोटोकॉल, और असेंबलिंग से लेकर उड़ान तक के हर पहलू को सीखा। अंतिम दिन एक रोमांचक ड्रोन फ्लाइंग चैलेंज और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने अपनी सीखी हुई जानकारी और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।

     क्विज प्रतियोगिता विजेता :
    आर्या गुप्ता
    तेजस
    शंतनु

     ड्रोन फ्लाइंग चैलेंज विजेता :
    मोहम्मद उमैर अली
    आदित्य मिश्रा
    अलीशा सिद्दीकी

    कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए और विजेताओं को ट्रॉफी व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में टेक्नोलॉजी के प्रति रुचि, टीमवर्क और नवाचार की भावना का विकास हुआ।

    TYNXROBO और Day & Night Space Foundation द्वारा आयोजित यह कार्यशाला एक सराहनीय पहल रही, जो छात्रों को भविष्य की तकनीकों से रूबरू कराने की दिशा में एक अहम कदम है।

     

  • एलन मस्क की टेस्ला भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए तैयार, हायरिंग प्रक्रिया शुरू

    एलन मस्क की टेस्ला भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए तैयार, हायरिंग प्रक्रिया शुरू

    अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने भारत में हायरिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे संकेत मिल रहा है कि कंपनी जल्द ही भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार में प्रवेश कर सकती है। यह कदम तब उठाया गया जब टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने में रुचि जताई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेस्ला ने कस्टमर सपोर्ट, सेल्स, बिजनेस ऑपरेशंस और वेयरहाउस मैनेजमेंट सहित विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए जॉब लिस्टिंग पोस्ट की है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि कंपनी भारत में अपने ऑपरेशंस शुरू करने की तैयारी कर रही है।

    पिछले साल, मस्क ने भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जिसमें टेस्ला की निवेश योजनाओं और विस्तार रणनीति पर चर्चा हुई थी। भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में तेजी से उभरता बाजार बन रहा है, और ऐसे में टेस्ला की एंट्री देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में क्रांति ला सकती है। कंपनी यहां स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना बना रही है।

    टेस्ला का यह विस्तार भारत सरकार की ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ला की मौजूदगी से बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर टेक्नोलॉजी और किफायती दामों पर ईवी वाहन मिल सकेंगे। जैसे-जैसे टेस्ला भारतीय बाजार में कदम रखने के लिए तैयार हो रही है, सभी की निगाहें इसके अगले रणनीतिक कदम पर टिकी हुई हैं।

  • भारत ने रचा इतिहास ,पूरे विश्व में बजा डंका

    भारत ने रचा इतिहास ,पूरे विश्व में बजा डंका

    भारत ने रचा इतिहास ,पूरे विश्व में बजा डंका,
    PM मोदी ने दी टीम इसरो को बधाई,

    ISRO के Spadex मिशन ने डॉकिंग सफलता हासिल कर ली है। इसी के साथ ही अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला भारत चौथा देश बन गया है !!

    इसरो ने सफलतापूर्वक स्पैडेक्स उपग्रहों स्पैडेक्स 01 और स्पैडेक्स 02 को डॉक किया

    भारत सफल अंतरिक्ष डॉकिंग हासिल करने वाला चौथा देश बन गया

    बधाई हो सभी भारतवासियों को जो भारत का नवनिर्माण होता देख रहे हैं।

  • अंतरिक्ष विज्ञानी वी. नारायणन बनेंगे इसरो के नए प्रमुख, सरकार ने जारी किए नियुक्ति के आदेश

    अंतरिक्ष विज्ञानी वी. नारायणन बनेंगे इसरो के नए प्रमुख, सरकार ने जारी किए नियुक्ति के आदेश

    ISRO: अंतरिक्ष विज्ञानी वी. नारायणन बनेंगे इसरो के नए प्रमुख, सरकार ने जारी किए नियुक्ति के आदेश

     वरिष्ठ अंतरिक्ष विज्ञानी और क्रायोजनिक इंजन के विशेषज्ञ वी नारायणन इसरो के नए प्रमुख होंगे।

     नारायणन इसरो के मौजूदा प्रमुख एस सोमनाथ का स्थान लेंगे। सोमनाथ 14 जनवरी को दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

      सोमनाथ ने 14 जनवरी 2022 को इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव का पदभार संभाला था। नारायणन अभी तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में स्थित इसरो के एलपीएससी के निदेशक हैं।

  • ISRO ने कर दिखाया कमाल; अंतरिक्ष में अंकुरित कराए बीज, पत्ते निकलने की भी उम्मीद

    ISRO ने कर दिखाया कमाल; अंतरिक्ष में अंकुरित कराए बीज, पत्ते निकलने की भी उम्मीद

    ISRO ने कर दिखाया कमाल; अंतरिक्ष में अंकुरित कराए बीज, पत्ते निकलने की भी उम्मीद

    इसरो को अंतरिक्ष में बीज अंकुरित कराने में बड़ी कामयाबी मिली है। इसरो ने शनिवार को एक्स पर बताया कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों में चार दिन में अंतरिक्ष यान पीएसएलवी-सी 60 के पीओईएम-4 प्लेटफॉर्म पर काऊसीड में बीज फूटे हैं,


    जल्द ही पत्ते निकलने की उम्मीद है। काऊसीड लोबिया के बीज जैसा दिखता है जो पोषक तत्वों से भरा होता है,

    इसरो ने बताया कि इस परीक्षण के लिए कुल आठ बीज कॉम्पैक्ट रिसर्च मॉड्यूल फॉर ऑर्बिटल प्लांट स्टडीज (क्रॉप्स) के तहत अंतरिक्ष में भेजे गए थे। विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर ने इस परीक्षण को किया है।

  • पूर्वोत्तर रेलवे ने शुरू की स्वचलित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) की कवायद, हादसों के खतरे में कमी आएगी

    पूर्वोत्तर रेलवे ने शुरू की स्वचलित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) की कवायद, हादसों के खतरे में कमी आएगी

    गोरखपुर, 2 जनवरी: पूर्वोत्तर रेलवे ने स्वचलित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। बाराबंकी से छपरा तक 438 किमी लंबे ट्रैक पर कवच लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस तकनीकी प्रणाली के लागू होने से ट्रेन हादसों का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा,

    कवच प्रणाली का मुख्य उद्देश्य एक ही ट्रैक पर आगे-पीछे दौड़ने वाली ट्रेनों के बीच टक्कर को रोकना है। इसके लिए जीपीएस और रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग किया जाएगा। यदि किसी ट्रेन के टकराने की स्थिति उत्पन्न होती है, तो दोनों ट्रेनों में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगा और पांच किलोमीटर के दायरे में सभी ट्रेनों का संचालन भी तुरंत बंद हो जाएगा,

    रेलवे ने इस प्रणाली पर दो साल पहले आरडीएसओ के साथ मिलकर काम करना शुरू किया था और अब स्वदेशी स्वचलित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) का सफलतापूर्वक विकास किया है। कवच प्रणाली ड्राइवर की चूक को रोकने में मदद करेगी, क्योंकि यह ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की निगरानी करती है और ड्राइवर से किसी भी गलती पर पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट करेगी। इसके अलावा, रेड सिग्नल पार होते ही ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाएगा और पांच किलोमीटर के दायरे में सभी ट्रेनें बंद हो जाएंगी।

  • दुनिया की सबसे तेज बुलेट ट्रेन

    दुनिया की सबसे तेज बुलेट ट्रेन

    चीन में आ गई दुनिया की सबसे तेज बुलेट ट्रेन

    भारत में होती तो लखनऊ से दिल्ली सिर्फ एक घंटे में। रफ्तार है 450 किलोमीटर प्रति घंटा।नाम है CR 450,भारत में सबसे तेज रफ्तार ट्रेन का नाम वंदे भारत है।

  • पार्कर सोलर’ ने कायम किया नया इतिहास

    पार्कर सोलर’ ने कायम किया नया इतिहास

    नासा के अंतरिक्ष यान ‘पार्कर सोलर’ ने नया इतिहास कायम किया है। सूर्य के प्रचंड तेज को सहन करते हुए पार्कर ने उसके सबसे करीब से गुज़रा है। कोई भी मानव निर्मित वस्तु कभी भी सूर्य के इतने करीब से नहीं गुजरी जितना करीब पार्कर पहुंचा है। इसकी जानकारी नासा ने शुक्रवार को दी और पार्कर सोलर प्रोब ”सुरक्षित” होने और अभी भी ठीक तरीके से काम करने की बात बताई। नासा का यह अंतरिक्ष यान 24 दिसंबर को सूर्य की सतह से 61 लाख किमी की दूरी से गुजरा और सूर्य के बाहरी वातावरण कोरोना क्षेत्र में उड़ान भरी। इस मिशन से वैज्ञानिकों को सूर्य के बारे में और अधिक जानने में मदद मिलेगी।