छठी मईया की आराधना का नया सुर, प्रियंका सिंह की सुरीली आवाज में रिलीज हुआ भक्तिमय गीत ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’
वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी की नई भक्तिमय प्रस्तुति ने छठ महापर्व की आस्था को दिया संगीत का नया स्वरूप, अभिनेत्री दामिनी यादव की खूबसूरत अदाकारी ने वीडियो में बिखेरी छटा
भोजपुरी संगीत जगत में अपनी अलग पहचान रखने वाली म्यूजिक कंपनी वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी एक बार फिर दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच छठ महापर्व की आस्था और भक्ति से जुड़ी एक नई संगीतमय प्रस्तुति लेकर आई है। छठी मईया की आराधना, सूर्यदेव के प्रति श्रद्धा और लोक परंपराओं की मधुर अनुभूति से सजा नया भक्तिमय गीत ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ रिलीज हो गया है। इस गीत को भोजपुरी संगीत जगत की लोकप्रिय गायिका प्रियंका सिंह ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से सजाया है। वहीं, गीत के वीडियो में अभिनेत्री दामिनी यादव अपनी आकर्षक प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं। निर्माता रत्नाकर कुमार की इस विशेष प्रस्तुति को छठ महापर्व की धार्मिक भावनाओं, पारंपरिक लोक संस्कृति और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
छठ महापर्व भारतीय संस्कृति और लोक आस्था का ऐसा पर्व है, जिसमें श्रद्धा, अनुशासन, पवित्रता और पारिवारिक मंगलकामना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। विशेष रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले भोजपुरी भाषी समाज के लिए छठ का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उत्सव है। इस पर्व के दौरान घर-घर में छठी मईया के गीत गूंजते हैं। व्रती महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की खुशहाली तथा समाज के कल्याण की कामना करती हैं। ऐसे पावन अवसर पर ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ जैसे भक्तिमय गीत का रिलीज होना भोजपुरी संगीत प्रेमियों के लिए एक खास संगीतमय सौगात है।
छठ महापर्व की परंपरा और लोक आस्था का संगीतमय संगम
छठ पूजा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारंपरिक लोक संस्कृति है। इस पर्व में लोकगीतों का विशेष महत्व होता है। छठ के गीतों के बिना पर्व का माहौल अधूरा सा महसूस होता है। पूजा की तैयारियों से लेकर घाटों पर अर्घ्य देने तक, हर अवसर पर छठी मईया के पारंपरिक गीत श्रद्धालुओं की भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं। इन गीतों में कहीं मां की आराधना होती है, कहीं सूर्यदेव से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है तो कहीं व्रती महिलाओं के कठिन व्रत, उनकी श्रद्धा और समर्पण का वर्णन मिलता है।
‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ इसी समृद्ध लोक परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। गीत का शीर्षक ही श्रोताओं के मन में छठ की पारंपरिक भक्ति और लोकगीतों की परिचित अनुभूति पैदा करता है। छठी मईया और दीनानाथ के प्रति समर्पित भाव इस गीत को पर्व की धार्मिक भावना से जोड़ता है। इसकी प्रस्तुति में भोजपुरी लोक संस्कृति की आत्मीयता और भक्तिभाव को प्रमुखता दी गई है।
छठ पर्व के दौरान जब घरों में पूजा की तैयारियां शुरू होती हैं, महिलाएं पारंपरिक तरीके से प्रसाद तैयार करती हैं, सूप और दउरा सजाए जाते हैं तथा परिवार के सदस्य घाटों की सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में जुटते हैं, तब छठी मईया के गीत वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। ऐसे में नए छठ गीतों का आगमन पर्व के सांस्कृतिक उत्साह को और बढ़ाता है। ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ भी इसी भावनात्मक वातावरण से जुड़ने वाली प्रस्तुति के रूप में सामने आया है।
प्रियंका सिंह की आवाज में दिखी भक्ति और भावनाओं की खूबसूरत अभिव्यक्ति
भोजपुरी संगीत जगत में गायिका प्रियंका सिंह अपनी सुरीली आवाज और भावपूर्ण गायकी के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने इस गीत को अपनी आवाज देकर इसके भक्तिमय भावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। छठ गीतों की गायकी में केवल सुर और ताल का महत्व नहीं होता, बल्कि गीत के भावों को समझना और उन्हें अपनी आवाज के माध्यम से श्रोताओं तक पहुंचाना भी बेहद जरूरी होता है। विशेष रूप से छठी मईया के गीतों में श्रद्धा, समर्पण और भावनात्मक जुड़ाव की अभिव्यक्ति प्रमुख होती है।
प्रियंका सिंह ने ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ को पूरी श्रद्धा और भावना के साथ गाया है। उनकी आवाज में गीत की भक्तिमय प्रकृति को प्रमुखता दी गई है। गीत के माध्यम से छठ पर्व की परंपराओं और दीनानाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को संगीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
गायिका प्रियंका सिंह ने इस गीत से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ को गाना उनके लिए बेहद भावुक और भक्तिमय अनुभव रहा। छठी मईया के गीतों से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी होती है। ऐसे गीतों को गाते समय कलाकार के लिए केवल गायन करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उस भावना और श्रद्धा को भी महसूस करना जरूरी होता है, जो छठ महापर्व से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा, “’निंदिया के मातल दीनानाथ’ को गाना मेरे लिए बेहद भावुक और भक्तिमय अनुभव रहा। छठी मईया के गीतों से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी होती है। मैंने इस गीत को पूरी श्रद्धा और भावना के साथ गाने की कोशिश की है। उम्मीद है कि श्रोता इसे खूब पसंद करेंगे और छठ के अवसर पर इसे अपने घरों और पूजा के माहौल में सुनेंगे।”
प्रियंका सिंह के इस बयान से स्पष्ट है कि गीत को लेकर उनकी भावनाएं केवल एक व्यावसायिक संगीत प्रस्तुति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह इसे छठ महापर्व की सांस्कृतिक और धार्मिक भावना से जुड़ा हुआ मानती हैं। भोजपुरी संगीत में छठ गीतों की अपनी एक विशिष्ट परंपरा रही है और इस परंपरा में गायिकाओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उनकी आवाज के माध्यम से लोक आस्था पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है।
दामिनी यादव की अदाकारी ने वीडियो को बनाया आकर्षक
गीत के ऑडियो के साथ-साथ इसका वीडियो भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसमें अभिनेत्री दामिनी यादव नजर आ रही हैं। उन्होंने गीत की भावनाओं और छठ महापर्व की आस्था को अपने अभिनय और अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया है। किसी भी भक्तिमय गीत के वीडियो में कलाकार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि गीत के भावों को दृश्य माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी कलाकारों पर होती है।
दामिनी यादव ने इस गीत का हिस्सा बनने को अपने लिए खास अनुभव बताया है। उनके अनुसार छठ पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज, परंपरा और आस्था से जुड़ा हुआ एक बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है। ऐसे पर्व से संबंधित गीत के वीडियो में काम करना कलाकार के लिए एक अलग तरह का अनुभव होता है।
अभिनेत्री दामिनी यादव ने कहा, “’निंदिया के मातल दीनानाथ’ जैसे भक्तिमय गीत का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत खास है। छठ पर्व की आस्था और भावनाओं को वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत करना एक सुंदर अनुभव रहा। पूरी टीम ने इस गीत को खास बनाने के लिए मेहनत की है। मुझे उम्मीद है कि दर्शक मेरी प्रस्तुति को पसंद करेंगे और गीत को भरपूर प्यार देंगे।”
दामिनी यादव की प्रस्तुति के माध्यम से गीत को दृश्यात्मक रूप देने का प्रयास किया गया है। भोजपुरी संगीत में वीडियो का महत्व लगातार बढ़ा है। आज दर्शक केवल गीत सुनना ही पसंद नहीं करते, बल्कि उसके वीडियो और उसमें दिखाई देने वाली कहानी से भी जुड़ते हैं। विशेष रूप से छठ गीतों में पारंपरिक परिधान, पूजा से जुड़े दृश्य, धार्मिक भावनाएं और पारिवारिक वातावरण दर्शकों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं।
रत्नाकर कुमार ने बताया छठी मईया की भक्ति को समर्पित है गीत
वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के निर्माता रत्नाकर कुमार भोजपुरी संगीत और मनोरंजन जगत में विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियों के माध्यम से सक्रिय हैं। उनकी ओर से समय-समय पर लोक संस्कृति, मनोरंजन और धार्मिक भावनाओं से जुड़े गीत दर्शकों के बीच प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ को भी छठ महापर्व की आस्था और श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
गीत के निर्माता रत्नाकर कुमार ने कहा कि छठ महापर्व हमारी संस्कृति, आस्था और परंपरा का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पर्व से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। छठी मईया की पूजा में श्रद्धालु पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ भाग लेते हैं। ऐसे में इस पर्व के लिए भक्तिमय गीत प्रस्तुत करना उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने कहा, “छठ महापर्व हमारी संस्कृति, आस्था और परंपरा का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ के जरिए हमने श्रद्धालुओं के लिए एक ऐसा भक्तिमय गीत प्रस्तुत करने की कोशिश की है, जो छठी मईया और दीनानाथ के प्रति उनकी श्रद्धा को संगीत के माध्यम से व्यक्त करे। प्रियंका सिंह ने इसे बहुत भावपूर्ण तरीके से गाया है और दामिनी यादव ने वीडियो में खूबसूरत प्रस्तुति दी है। हमें उम्मीद है कि यह गीत छठ के अवसर पर दर्शकों और श्रद्धालुओं को पसंद आएगा।”
रत्नाकर कुमार के इस बयान से गीत की मूल भावना और निर्माण के उद्देश्य को समझा जा सकता है। उनका प्रयास है कि भोजपुरी भाषा और संगीत के माध्यम से छठ महापर्व की परंपराओं तथा धार्मिक भावनाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। भोजपुरी गीतों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे स्थानीय भाषा में लोगों के दिलों की भावनाओं को सीधे अभिव्यक्त करते हैं। यही वजह है कि छठ के अवसर पर रिलीज होने वाले गीतों को देश-विदेश में रहने वाले भोजपुरी समाज के लोग भी विशेष रुचि से सुनते हैं।
अरुण बिहारी के बोल और छोटू रावत के संगीत ने तैयार किया भक्तिमय आधार
किसी भी गीत की सफलता में गायकी के साथ-साथ उसके बोल और संगीत की भूमिका भी अहम होती है। ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ के बोल अरुण बिहारी ने लिखे हैं, जबकि इसका संगीत छोटू रावत ने तैयार किया है। गीत के शब्दों के माध्यम से छठी मईया और दीनानाथ के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करने का प्रयास किया गया है।
भोजपुरी छठ गीतों की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी सरल और सहज भाषा है। ऐसे गीत आम जनजीवन से जुड़े होते हैं। इनमें प्रयुक्त शब्द, भाव और धुनें लोगों को अपनी मिट्टी और संस्कृति की याद दिलाती हैं। छठ के पारंपरिक गीतों में ग्रामीण जीवन, पारिवारिक संबंध, धार्मिक विश्वास और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना देखने को मिलती है।
अरुण बिहारी ने गीत के बोलों के माध्यम से भक्तिभाव को प्रमुखता दी है। वहीं छोटू रावत के संगीत संयोजन ने गीत को संगीतमय स्वरूप प्रदान किया है। छठ गीतों में संगीत का चयन इस तरह महत्वपूर्ण होता है कि उसमें आधुनिकता के साथ पारंपरिक लोकधुनों की आत्मीयता भी बनी रहे। श्रोताओं को गीत सुनते समय छठ के पारंपरिक वातावरण का एहसास हो, यही इस तरह की प्रस्तुतियों की खासियत होती है।
तकनीकी टीम ने संभाली गीत निर्माण की जिम्मेदार
‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ को बेहतर रूप देने के लिए अनुभवी तकनीकी टीम ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई है। इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी नवरत्न पांडे ने संभाली है। गीत का निर्देशन आशीष पार्क ने किया है। वीडियो की सिनेमैटोग्राफी यानी डीओपी की जिम्मेदारी रवि राठौर और राहुल रॉय ने निभाई है। वहीं कोरियोग्राफी विक्की डीएस ने की है।
गीत के संपादन का कार्य विक्की एस. राज ने किया है, जबकि डीआई यानी वीडियो के रंग संयोजन का काम रोहित सिंह ने संभाला है। किसी भी संगीत वीडियो को अंतिम रूप देने में इन सभी तकनीकी पक्षों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। निर्देशन से लेकर कैमरा वर्क, कोरियोग्राफी और संपादन तक प्रत्येक विभाग गीत की प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में अपनी भूमिका निभाता है।
वीडियो निर्माण में कैमरे के माध्यम से दृश्यों को आकर्षक बनाना, गीत के भावों के अनुरूप कलाकारों की प्रस्तुति को फिल्माना और संपादन के जरिए सभी दृश्यों को एक क्रम में जोड़ना आवश्यक होता है। वहीं डीआई के माध्यम से वीडियो के रंगों और दृश्यात्मक प्रभाव को बेहतर स्वरूप दिया जाता है। इस प्रकार पूरी टीम के सामूहिक प्रयास से गीत को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया है।
भोजपुरी छठ गीतों की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास
भोजपुरी संगीत जगत में छठ गीतों का स्थान हमेशा से विशेष रहा है। भोजपुरी भाषी समाज में छठ महापर्व की तैयारियां शुरू होते ही पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई देने लगती है। पहले गांवों और घरों में महिलाएं सामूहिक रूप से छठ के गीत गाया करती थीं। इन गीतों के माध्यम से धार्मिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और पारिवारिक भावनाओं को अभिव्यक्त किया जाता था। समय के साथ संगीत के माध्यम और प्रस्तुति के तरीके में बदलाव आया, लेकिन छठ गीतों के प्रति लोगों की आस्था आज भी कायम है।
अब म्यूजिक कंपनियां पारंपरिक छठ गीतों के साथ नए गीतों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचा रही हैं। इससे भोजपुरी संगीत को देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले भोजपुरी भाषी लोगों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इंटरनेट और वीडियो प्लेटफॉर्म के विस्तार ने लोकगीतों की पहुंच को भी व्यापक बनाया है।
वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी की यह नई प्रस्तुति भी इसी बदलते संगीत परिवेश का हिस्सा है। कंपनी ने ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ के माध्यम से छठ महापर्व के भक्तिमय वातावरण को संगीत के जरिए प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इस तरह के गीत उन लोगों के लिए भी विशेष महत्व रखते हैं, जो अपने गांव और घर से दूर रहकर पर्व मनाते हैं। गीतों के माध्यम से उन्हें अपनी मिट्टी, परिवार और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ाव महसूस होता है।
छठ पूजा में गीत-संगीत का विशेष महत्व
छठ महापर्व चार दिनों तक चलने वाला महत्वपूर्ण लोकपर्व है। इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इसके बाद खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। इस पूरे पर्व में व्रती महिलाएं और पुरुष नियम, संयम तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हैं। पूजा में सूर्यदेव और छठी मईया की आराधना की जाती है।
छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले गीतों में व्रतियों की श्रद्धा और उनके परिवार के प्रति मंगलकामना की भावना झलकती है। कई गीतों मे सूर्यदेव की महिमा का वर्णन होता है तो कई गीतों में छठी मईया से सुख-समृद्धि और खुशहाली क प्रार्थना की जाती है। इन गीतों में मां की ममता, परिवार का प्रेम और लोक जीवन की सरलता दिखाई देती है।
जब छठ व्रती महिलाएं पूजा की तैयारियों में जुटती हैं, तब घरों में पारंपरिक छठ गीतों का माहौल बन जाता है। बच्चे, बुजुर्ग और परिवार के अन्य सदस्य भी इन गीतों के माध्यम से पर्व की भावनाओं से जुड़ते हैं। घाटों पर भी अर्घ्य के समय भक्ति गीतों की गूंज वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है।
‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ भी इसी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ गीत है। इसका उद्देश्य श्रोताओं को छठी मईया की आराधना और दीनानाथ के प्रति श्रद्धा के भाव से जोड़ना है। ऐसे गीत पर्व के अवसर पर मनोरंजन के साथ-साथ लोक संस्कृति के संरक्षण का माध्यम भी बनते हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचेगी भोजपुरी भक्ति की आवाज
आज भोजपुरी संगीत का दायरा केवल बिहार और उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रह गया है। देश के महानगरों से लेकर विदेशों तक भोजपुरी भाषा और संगीत के श्रोताओं की बड़ी संख्या मौजूद है। रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के कारण दूसरे राज्यों तथा देशों में रहने वाले भोजपुरी भाषी लोग भी अपने त्योहारों और परंपराओं से जुड़े रहते हैं। छठ महापर्व के दौरान वे डिजिटल माध्यमों से अपने पसंदीदा छठ गीत सुनते हैं और परिवार के साथ पर्व की खुशियां साझा करते हैं।
यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भोजपुरी संगीत को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब किसी गीत को रिलीज करने के बाद उसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बैठे श्रोता आसानी से सुन सकते हैं। इससे कलाकारों, गायकों, गीतकारों और संगीतकारों को भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिलता है।
वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी ने ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ को अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया है। इस गीत को लेकर निर्माता रत्नाकर कुमार, गायिका प्रियंका सिंह और अभिनेत्री दामिनी यादव ने उम्मीद जताई है कि दर्शक और श्रद्धालु इसे पसंद करेंगे। छठ महापर्व के अवसर पर भक्तिमय गीतों की मांग बढ़ जाती है और ऐसे में यह नई प्रस्तुति श्रोताओं के लिए एक और विकल्प लेकर आई है।
लोक संस्कृति और नई पीढ़ी के बीच जुड़ाव का माध्यम हैं छठ गीत
किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान उसकी भाषा, परंपराओं, लोकगीतों और त्योहारों से बनती है। भोजपुरी समाज में छठ गीतों का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इनके माध्यम से नई पीढ़ी अपनी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से परिचित होती है। परिवारों में बुजुर्गों द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गीत बच्चों को छठ की महत्ता समझाने का माध्यम बनते हैं।
आज के समय में जब मनोरंजन के अनेक आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं, तब भी छठ गीतों की लोकप्रियता बनी हुई है। इसका कारण इन गीतों का भावनात्मक जुड़ाव है। छठ गीत सुनते ही लोगों को अपने गांव, घर, परिवार और पूजा की तैयारियों की याद आने लगती है। विशेष रूप से प्रवासी भोजपुरी समाज के लोगों के लिए ये गीत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का माध्यम बनते हैं।
‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ जैसी नई प्रस्तुतियां पारंपरिक भावनाओं को आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए आगे बढ़ाने का प्रयास करती हैं। इस तरह भोजपुरी संगीत जगत में धार्मिक और सांस्कृतिक गीतों का निर्माण लोक परंपराओं को जीवंत रखने में योगदान देता है।
पूरी टीम को है दर्शकों के प्यार और आशीर्वाद की उम्मी
वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी की ओर से प्रस्तुत ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ में गायिका प्रियंका सिंह की आवाज, अभिनेत्री दामिनी यादव की प्रस्तुति, अरुण बिहारी के गीत और छोटू रावत के संगीत का समन्वय देखने को मिलता है। निर्माता रत्नाकर कुमार के नेतृत्व में तैयार इस प्रोजेक्ट में नवरत्न पांडे, निर्देशक आशीष पार्क और पूरी तकनीकी टीम ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
गीत से जुड़ी पूरी टीम को उम्मीद है कि छठ महापर्व के अवसर पर श्रोता इस भक्तिमय प्रस्तुति को अपना प्यार और आशीर्वाद देंगे। छठी मईया की आराधना और दीनानाथ के प्रति श्रद्धा को समर्पित यह गीत भोजपुरी संगीत प्रेमियों के बीच पर्व के माहौल को और भक्तिमय बनाने का प्रयास है।
कुल मिलाकर ‘निंदिया के मातल दीनानाथ’ छठ महापर्व की लोक आस्था, धार्मिक भावनाओं और भोजपुरी संगीत परंपरा से जुड़ी एक नई प्रस्तुति है। प्रियंका सिंह की सुरीली आवाज और दामिनी यादव की अदाकारी के साथ यह गीत श्रद्धालुओं तक छठी मईया की भक्ति का संदेश पहुंचाने की कोशिश करता है। अब दर्शकों और श्रोताओं की प्रतिक्रिया इस प्रस्तुति की लोकप्रियता तय करेगी।
गीत सुनने के लिए यहां क्लिक करें:
गीत की प्रमुख टीम:
– प्रस्तुति: वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी
– निर्माता: रत्नाकर कुमार
– गायिका: प्रियंका सिंह
– अभिनेत्री: दामिनी यादव
– गीतकार: अरुण बिहारी
– संगीतकार: छोटू रावत
– प्रोजेक्ट: नवरत्न पांडे
– निर्देशक: आशीष पार्क
– डीओपी: रवि राठौर एवं राहुल रॉय
– कोरियोग्राफी: विक्की डीएस
– संपादन: विक्की एस. राज
– डीआई: रोहित सिंह
वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुआ यह गीत छठ महापर्व की आस्था और भक्ति को समर्पित है।

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