Category: धर्म

  • श्री बालाजी दरबार में अखंड संकीर्तन के सातवें दिन आनंद नगर एवं देवरिया की टीम की भव्य प्रस्तुति

    श्री बालाजी दरबार में अखंड संकीर्तन के सातवें दिन आनंद नगर एवं देवरिया की टीम की भव्य प्रस्तुति

    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर में नौ दिवसीय अखंड संकीर्तन में सातवें दिन आनन्दनगर और देवरिया की टीम ने अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया। बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी ने सभी कलाकारो को अंग वस्त्र पहना कर स्वागत किया। अपार संख्या में भक्त गणों की उपस्थिति बालाजी सरकार दरबार में रहीं। बालाजी सेवा समिति के उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू ने बताया की 5 नवंबर को महाआयोजन के आखिरी दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर शुशील सिंह कामाख्या नारायण सिंह जयप्रकाश ओझा अजय तिवारी कन्हैया तिवारी बद्री नारायण उपाध्याय सुयश दूबे सक्षम दुबे उपस्थित रहें।

    बालाजी सरकार दरबार की जय हो।

  • श्री बालाजी मंदिर में नौ दिवसीय अखंड संकीर्तन का भक्तिमय माहौल, सातवें दिन आनंदनगर और देवरिया की टीम ने दी प्रस्तुति

    श्री बालाजी मंदिर में नौ दिवसीय अखंड संकीर्तन का भक्तिमय माहौल, सातवें दिन आनंदनगर और देवरिया की टीम ने दी प्रस्तुति

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    बालाजी सरकार के दरबार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, 5 नवंबर को होगा विशाल भंडारे का आयोजन


    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय अखंड संकीर्तन के सातवें दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर आनंदनगर और देवरिया से आई संकीर्तन टीमों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से भक्तों को भावविभोर कर दिया। पूरे मंदिर परिसर में भजनों और जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बालाजी सरकार के दरबार में हाजिरी लगाई और संकीर्तन का आनंद लिया।

    इस अवसर पर बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी ने सभी कलाकारों को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित एवं स्वागत किया।

    महत्वपूर्ण हाइलाइट्स :-

    —नौ दिवसीय अखंड संकीर्तन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

    –आनंदनगर और देवरिया की टीमों ने दी भजन-कीर्तन की प्रस्तुति।

    —अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी ने कलाकारों को अंगवस्त्र पहनाकर किया सम्मानित।

    —उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे ‘बबलू’ ने दी विशाल भंडारे की जानकारी।

    –5 नवंबर 2026 को होगा भव्य भंडारा।

    समिति के उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे ‘बबलू’ ने जानकारी देते हुए बताया कि नौ दिवसीय अखंड संकीर्तन के समापन अवसर पर 5 नवंबर 2026 को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी।

    कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति :-

    इस अवसर पर सुशील सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, जयप्रकाश ओझा, अजय तिवारी, कन्हैया तिवारी, बद्री नारायण उपाध्याय, सुयश दुबे एवं सक्षम दुबे सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

    नौ दिवसीय अखंड संकीर्तन के माध्यम से मंदिर परिसर लगातार भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है।

    जय श्री बालाजी सरकार!

  • श्री बालाजी दरबार में 9 दिवसीय अखंड संकीर्तन में आनंद नगर और बलिया की संगीत मंडली ने दी भव्य प्रस्तुति

    श्री बालाजी दरबार में 9 दिवसीय अखंड संकीर्तन में आनंद नगर और बलिया की संगीत मंडली ने दी भव्य प्रस्तुति

    गोरखपुर। श्री बालाजी मन्दिर में नौं दिवसीय अखंड सकीर्तन के पांचवें दिन बलिया और आनन्द नगर कि भजन मंडली ने अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया। अखंड सकीर्तन दिनांक 28 अक्टूबर से शुरू होकर दिनांक 5 नवंबर को समाप्त होगा। यह महाआयोजन बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट की तरफ से अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी के मार्गदर्शन में उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू की देख देख में सम्पन्न हो रहा है।

    पूरे मंदिर प्रांगण में भक्त जनों का तांता लगा हुआ है। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से सुनिल सिंह कामाख्या नारायण सिंह जयप्रकाश ओझा अजय तिवारी कन्हैया तिवारी रनंजय सिंह डा सिताराम पांडेय पंडित शुभम शास्त्री सक्षम दूबे तथा समस्त तारामंडल वासियों के सहयोग से सम्पन्न हो रहा है।

    जय बालाजी सरकार दरबार की जय हो।

  • श्री बालाजी दरबार में नौं दिवसीय अखंड कीर्तन कार्यक्रम के प्रथम दिन भजन गायक मंटू पाठक की शानदार प्रस्तुति

    श्री बालाजी दरबार में नौं दिवसीय अखंड कीर्तन कार्यक्रम के प्रथम दिन भजन गायक मंटू पाठक की शानदार प्रस्तुति

    श्री बालाजी मंदिर निकट सेल टैक्स ऑफिस तारामंडल गोरखपुर में नौ दिवसीय अखंड कीर्तन कार्यक्रम के प्रथम दिन कुशीनगर के मशहूर कीर्तन-भजन गायक मंटू पाठक की प्रस्तुति बालाजी दरबार में चल रही है। अपार संख्या में भक्त जनों का तांता लगा हुआ है। बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जितेंद्र मणि तिवारी के मार्गदर्शन में यह महायोजना उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू की देखरेख में चल रहा है। अनवरत 9 दिन तक चलता रहेगा आप सभी भक्तजनों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन है।

    जय बालाजी सरकार की।

  • श्री बालाजी मंदिर में नौं दिवसीय अखंड संकीर्तन का आयोजन

    श्री बालाजी मंदिर में नौं दिवसीय अखंड संकीर्तन का आयोजन

    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर निकट सेल टैक्स ऑफिस तारामंडल गोरखपुर में नौ दिवसीय अखंड सकीर्तन का महाआयोजन 28 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 5 नवंबर 2026 तक होगा।

    आप सभी श्रद्धालुओं से अधिक अधिक संख्या में उपस्थित होकर महा आयोजन के सहभागी बनें। श्री बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जितेंद्र मणि त्रिपाठी एवं उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे ने बताया कि इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश से सकीर्तन टीम का जमावड़ा बालाजी दरबार में होगा तथा 9 दिन तक अनवरत जारी रहेगा। श्री बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट आप सभी का इस‌ महाआयोजन में ‌ स्वागत एवं अभिनंदन करता है।

    जय श्री बालाजी सरकार की जय हो।

  • भव्य दुर्गा पूजा दीपोत्सव, प्रसाद वितरण से भक्तिमय हुआ पशुपतेश्वर महादेव मंदिर परिसर

    भव्य दुर्गा पूजा दीपोत्सव, प्रसाद वितरण से भक्तिमय हुआ पशुपतेश्वर महादेव मंदिर परिसर

    सिद्धार्थनगर ब्यूरो / अनुराग त्रिपाठी, निष्पक्ष टुडे

     ऐचनी में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का संगम — मां दुर्गा के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, भक्तों के बीच वितरित हुआ प्रसाद


    सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर के ग्राम ऐचनी स्थित ऐतिहासिक पशुपतेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और धार्मिक उल्लास का मनोहारी दृश्य देखने को मिला। भव्य रूप से सजे पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन, पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। धार्मिक आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण कर सेवा और समर्पण का संदेश भी दिया गया।

     

    मंदिर परिसर में सजी मां दुर्गा की प्रतिमाश्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। पूजा स्थल की सजावट, दीपों की रोशनी और भक्तों की श्रद्धा ने आयोजन को विशेष बना दिया। महिला, पुरुष और अन्य श्रद्धालु मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेते दिखाई दिए। वहीं, प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धा के साथ सेवा और सामाजिक सहभागिता की भावना भी नजर आई।

     

    आस्था की विरासत और नई पीढ़ी की भागीदारी:-

     ऐचनी का पशुपतेश्वर महादेव मंदिर त्रिपाठी परिवार की आस्था, परंपरा और धार्मिक विरासत से जुड़ा हुआ है। मंदिर से संबंधित उपलब्ध विवरण के अनुसार, यहां लगभग 166 वर्षों से अखंड ज्योति जलने की परंपरा चली आ रही है। पूर्वजों से मिली इस धार्मिक विरासत को आगे बढ़ाना और मंदिर की सेवा करना आज भी परिवार तथा श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है।

    ऐसे धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में आपसी सद्भाव, सहयोग, संस्कार और सेवा की भावना को भी मजबूत करते हैं। मां दुर्गा की आराधना और भक्तों के बीच प्रसाद वितरण इसी सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक प्रस्तुत करता है।

    प्रसाद वितरण से मिला सेवा और समर्पण का संदेश :-

    आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण ने कार्यक्रम की धार्मिक गरिमा को और बढ़ाया। भारतीय परंपरा में प्रसाद को केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि प्रेम, समानता और सामूहिक सहभागिता का माध्यम भी माना जाता है।

    निष्पक्ष टुडे की विशेष प्रस्तुति में देखिए — मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा, मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धा और प्रसाद वितरण के वे दृश्य, जो आस्था के साथ समाज में एकता और सद्भाव का संदेश देते हैं।

    हर हर पशुपतेश्वर महादेव जय माता दी ,🙏

  • रानोपाली सत्यनारायण मंदिर में दस दिवसीय गुरु पर्व महोत्सव शुरू, 5 अक्टूबर को राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ होंगे शामिल

    रानोपाली सत्यनारायण मंदिर में दस दिवसीय गुरु पर्व महोत्सव शुरू, 5 अक्टूबर को राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ होंगे शामिल

    ब्यूरो चीफ नीलम सिंह

    अयोध्या। रानोपाली स्थित उदासीन संगत ऋषि आश्रम यानी सत्यनारायण मंदिर में दस दिवसीय गुरु पर्व महोत्सव का भव्य शुभारंभ धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। दस दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
    महोत्सव के प्रथम दिन डॉ. स्वामी शिवचंद दास जी महाराज ने संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का वाचन प्रारंभ किया। कथा के दौरान भगवान की लीलाओं, भक्ति, धर्म और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। संगीतमय कथा ने आश्रम परिसर में भक्तिमय वातावरण बना दिया। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
    आयोजन समिति के अनुसार गुरु पर्व महोत्सव के अंतर्गत अलग-अलग दिनों में विविध धार्मिक कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। आगामी 3 अक्टूबर को संत भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें संत-महात्माओं के साथ श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद 4 अक्टूबर को रामचरितमानस अखंड पाठ का आयोजन होगा। अखंड पाठ के माध्यम से श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में रामचरितमानस का श्रवण और पाठ करेंगे।
    महोत्सव का प्रमुख आकर्षण 5 अक्टूबर को आयोजित होने वाला गुरु पर्व का मुख्य समारोह रहेगा। इस अवसर पर पूर्णाहुति तथा संत अर्चन-वंदन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। मुख्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने का कार्यक्रम बताया गया है। दोनों विशिष्ट अतिथियों के आगमन को लेकर आयोजन से जुड़े लोगों में उत्साह है।
    मुख्य समारोह के दौरान नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन भी किया जाएगा। इससे महाविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। संस्कृत शिक्षा और धार्मिक अध्ययन के क्षेत्र में महाविद्यालय की भूमिका को भी इस अवसर पर रेखांकित किया जाएगा।
    गुरु पर्व महोत्सव के आयोजन को लेकर आश्रम परिसर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। धार्मिक अनुष्ठानों, कथा, संत समागम और भंडारे सहित विभिन्न कार्यक्रमों को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। महोत्सव के दौरान संत-महात्माओं के प्रवचन और आध्यात्मिक कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
    उदासीन संगत ऋषि आश्रम यानी सत्यनारायण मंदिर अयोध्या के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। गुरु पर्व महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनने और संतों का सानिध्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
    दस दिवसीय महोत्सव के दौरान आश्रम परिसर में भक्ति, आध्यात्मिकता और धार्मिक आयोजनों की निरंतरता बनी रहेगी। आयोजन के मुख्य समारोह को लेकर श्रद्धालुओं और संत समाज में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। महोत्सव के माध्यम से धार्मिक परंपराओं, गुरु परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • SPECIAL REPORT SC/ST व्यक्ति का अन्य जाति से विवाह: सरकार क्यों देती है प्रोत्साहन राशि?

    SPECIAL REPORT SC/ST व्यक्ति का अन्य जाति से विवाह: सरकार क्यों देती है प्रोत्साहन राशि?

    निष्पक्ष टुडे /SPECIAL REPORT

    26,050 लाभार्थी… लाखों रुपये की सहायता… लेकिन सवाल—क्या सामाजिक एकीकरण के नाम पर सरकार विवाह के फैसलों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रही है?


    नई दिल्ली/लखनऊ।भारत में SC/ST समुदाय के व्यक्ति का अन्य जाति के व्यक्ति से विवाह होने पर केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से आर्थिक प्रोत्साहन की योजनाएं संचालित की जाती हैं।

    सरकार का घोषित उद्देश्य है—जातिगत भेदभाव कम करना, सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देना और ऐसे विवाह करने वाले पात्र दंपतियों को आर्थिक सहायता देना।

    लेकिन इस व्यवस्था के साथ कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक और नीतिगत सवाल भी उठते हैं।

     2024-25 में 26,050 लाभार्थी :-

    केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में इस योजना के तहत देशभर में 26,050 लाभार्थी दर्ज किए गए।

    पिछले वर्षों के आंकड़े—

    2020-21 — 20,237
    2021-22 — 24,062
    2022-23 — 14,225
    2023-24 — 21,083
    2024-25 — 26,050

     ध्यान रखें –

    ये भारत में हुए कुल SC/ST–अन्य जाति विवाहों की संख्या नहीं है।

    यह केवल सरकारी योजना के तहत दर्ज लाभार्थियों की संख्या है।

     महाराष्ट्र सबसे आगे –

    2024-25 में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार—

    महाराष्ट्र — 8,566
    कर्नाटक — 2,798
    तमिलनाडु — 2,476
    हरियाणा — 2,350
    ओडिशा — 2,039
    गुजरात — 1,775
    मध्य प्रदेश — 1,646
    पश्चिम बंगाल — 1,510
    कुल मिलाकर देशभर में 26,050 लाभार्थी दर्ज हुए।

           कितना मिलता है सरकारी मदद –

    केंद्रीय व्यवस्था में पात्र SC–अन्य जाति विवाह के लिए ₹2.50 लाख तक के प्रोत्साहन का प्रावधान है।

    योजना के दस्तावेज के अनुसार सहायता राशि दंपति के संयुक्त नाम से बैंक में रखने और तीन वर्ष की लॉक-इन अवधि का प्रावधान है।

    हालांकि वास्तविक लाभ राज्य की पात्रता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर कर सकता है।

     लेकिन सबसे बड़ा सवाल—सरकार विवाह पर पैसा क्यों देती है?

    यहीं से इस योजना को लेकर बहस शुरू होती है।
    अगर दो वयस्क अपनी इच्छा से विवाह करते हैं, तो—
    क्या सरकार को उनके विवाह के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन देना चाहिए?

    अगर सरकार का उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है, तो सवाल यह भी है—

    क्या सभी जातियों के बीच विवाह को समान रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, या केवल कुछ विशेष सामाजिक संयोजनों को?

    और सबसे अहम—
    क्या आर्थिक प्रोत्साहन किसी व्यक्ति के विवाह संबंधी निर्णय को प्रभावित कर सकता है?

    क्या इसे “सरकारी धर्मांतरण” कहा जा सकता है?

    यह सवाल भी सार्वजनिक बहस में उठाया जा रहा है, लेकिन यहां तथ्य और आरोप को अलग रखना जरूरी है।

    SC/ST–अन्य जाति विवाह को प्रोत्साहित करने वाली योजना स्वयं धर्म परिवर्तन की योजना नहीं है।

    सरकारी योजना का घोषित आधार जाति और सामाजिक एकीकरण है, धर्म परिवर्तन नहीं पर एक ही जाति पर विशेष मेहरबानी क्यों ?

    लेकिन आलोचनात्मक सवाल यह जरूर हो सकता है—

    “जब सरकार किसी खास सामाजिक संयोजन वाले विवाह पर आर्थिक प्रोत्साहन देती है, तो क्या यह केवल सामाजिक भेदभाव कम करने की नीति है, या इससे विवाह के निजी निर्णयों पर आर्थिक प्रभाव पड़ने की संभावना भी पैदा होती है ?”

    यही वह बिंदु है जिस पर नीति को लेकर सार्वजनिक बहस हो सकती है।

     एक और बड़ा सवाल –

    अगर उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है तो—
    क्या सरकार को जाति की पहचान को विवाह के लिए आर्थिक लाभ की पात्रता का आधार बनाना चाहिए?

    क्योंकि एक तरफ सरकार कहती है कि समाज को जाति से ऊपर उठना चाहिए।

    दूसरी तरफ योजना में पात्रता निर्धारित करने के लिए जाति प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाता है।

    सवाल यही है—
    जाति-मुक्त समाज बनाने के लिए क्या जाति आधारित प्रोत्साहन जरूरी है? या
    ऐसी योजनाओं से जाति की पहचान सरकारी रिकॉर्ड में और लंबे समय तक बनी रहती है?

    यह नीति का एक महत्वपूर्ण विमर्श है।

     दूसरी तरफ सरकार का तर्क क्या है?

    सरकार की ओर से ऐसी योजनाओं का मूल तर्क यह है कि समाज में जातिगत भेदभाव और सामाजिक बाधाएं अभी भी मौजूद हैं।

    इसलिए आर्थिक प्रोत्साहन को सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने वाले उपाय के रूप में देखा जाता है।

    यानी सरकारी दृष्टिकोण में यह किसी धर्म को बदलने की योजना नहीं, बल्कि जातिगत विभाजन कम करने की सामाजिक नीति है।

    लेकिन इस नीति का प्रभाव कितना है और क्या आर्थिक सहायता वास्तव में विवाह के निर्णयों को प्रभावित करती है—यह अलग प्रश्न है, जिसके लिए व्यापक सामाजिक अध्ययन और आंकड़ों की आवश्यकता होगी।

     SC और ST को एक साथ समझना भी जरूरी नहीं ?

    एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि केंद्र की जिस प्रमुख योजना के ये 26,050 आंकड़े हैं, उसकी पात्रता मुख्यतः SC से संबंधित अंतरजातीय विवाह से जुड़ी है।

    इसलिए—
    SC + अन्य जाति
    और
    ST + अन्य जाति
    को एक ही केंद्रीय आंकड़े में स्वतः जोड़ना उचित नहीं है।
    ST विवाह के लिए संबंधित राज्य की जनजातीय कल्याण योजनाओं और नियमों को अलग से देखना होगा।

     उत्तर प्रदेश: आंकड़ों का सवाल –

    केंद्र की राज्यवार तालिका में उत्तर प्रदेश के लिए 2021-22 से 2024-25 तक 0 दर्ज है।
    लेकिन बाद की केंद्रीय रिपोर्टिंग में यूपी के लाभार्थियों का उल्लेख मिलता है।
    इसलिए सवाल उठता है—

    क्या अलग-अलग वर्षों में योजना की reporting व्यवस्था बदली है?

    क्या केंद्र और राज्य के आंकड़ों में तालमेल है?

    और क्या आम लोगों को यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध है कि पात्र दंपति को वास्तव में कितना लाभ मिल सकता है?

    इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।

     निष्पक्ष टुडे के सवाल –

    सवाल नंबर 1
    अगर उद्देश्य जातिगत भेदभाव खत्म करना है, तो क्या आर्थिक प्रोत्साहन सही तरीका है?

    सवाल नंबर 2
    क्या विवाह के आधार पर सरकारी आर्थिक प्रोत्साहन देना व्यक्ति के निजी निर्णय को प्रभावित कर सकता है?

    सवाल नंबर 3
    जब सरकार जाति से ऊपर उठने की बात करती है, तो पात्रता के लिए जाति प्रमाणपत्र क्यों जरूरी है?

    सवाल नंबर 4
    क्या समान परिस्थितियों वाले सभी विवाहों के लिए समान आर्थिक प्रोत्साहन होना चाहिए?

    सवाल नंबर 5
    क्या इस योजना का वास्तविक सामाजिक प्रभाव मापने के लिए सरकार के पास कोई स्वतंत्र अध्ययन है?

    सवाल नंबर 6
    और सबसे बड़ा सवाल—

    क्या यह सिर्फ सामाजिक एकीकरण की सरकारी नीति है, या आर्थिक प्रोत्साहन के जरिए विवाह के सामाजिक स्वरूप को प्रभावित करने की कोशिश भी है?और “सरकारी धर्मांतरण” वाला सवाल?

    उसका जवाब तथ्यों से ही मिल सकता है।
    क्योंकि उपलब्ध सरकारी योजना के दस्तावेजों में इसका उद्देश्य धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव कम करना और सामाजिक एकीकरण बताया गया है।

    इसलिए निष्पक्ष सवाल यही होना चाहिए—
    “सरकार की नीति का घोषित उद्देश्य क्या है, जमीन पर उसका वास्तविक प्रभाव क्या है, और क्या इस आर्थिक प्रोत्साहन की जरूरत तथा समानता पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए?”

    अब सरकारी खर्च की –

     5 साल के आंकड़े: एक नजर में-

    केंद्र की योजना के तहत 2020-21 से 2024-25 तक कुल 1,05,657 लाभार्थी दर्ज हुए। इनमें 2024-25 में सबसे ज्यादा 26,050 लाभार्थी रहे।

    वर्षवार लाभार्थी:
    2020-21 — 20,237 | 2021-22 — 24,062 | 2022-23 — 14,225 | 2023-24 — 21,083 | 2024-25 — 26,050

    प्रमुख राज्य –

    (2024-25): महाराष्ट्र 8,566, कर्नाटक 2,798, तमिलनाडु 2,476, हरियाणा 2,350, ओडिशा 2,039 और गुजरात 1,775।

    नोट: ₹2.50 लाख प्रति लाभार्थी के आधार पर 5 वर्षों की राशि लगभग ₹2,641 करोड़ बैठती है, लेकिन यह अनुमानित गणना है, वास्तविक सरकारी खर्च नहीं।

    SPECIAL REPORT | निष्पक्ष टुडे
    सरकारी आंकड़े सामने हैं…
    सरकार का तर्क भी सामने है…
    अब सवाल नीति पर है—और जवाब तथ्यों से होना चाहिए।

  • बालाजी सरकार दरबार में धूमधाम से मना गणेश चतुर्दशी  एवं हरीतालिका तीज

    बालाजी सरकार दरबार में धूमधाम से मना गणेश चतुर्दशी एवं हरीतालिका तीज

    गोरखपुर। आज इस पावन अवसर पर श्री बालाजी मंदिर में प्रातः काल से मात्र शक्तियों का अपार संख्या में आकर भगवान नर्वदेश्वर को जल अच्छत दूध पुष्प के साथ पूजन अर्चन शुरू हुआ।

    पूरा दिन देर रात तक चलता रहा। बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जितेंद्र मणि तिवारी तथा उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे की देखरेख में तथा समिति के सभी सदस्यों के सहयोग से किसी भी भक्त को कोई दिक्कत नहीं होने पाया मुख्य रूप से पंडित शुभम शास्त्री कामाख्या नारायण सिंह रंजन बाबा राकेश राय सक्षम दुबे आदि का सहयोग रहा। “बालाजी की कृपा हम सब पर सदा बनी रहे।”

  • छठींयारे महोत्सव में झूमा बालाजी दरबार

    छठींयारे महोत्सव में झूमा बालाजी दरबार

    गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर में जन्माष्टमी पर्व के पश्चात छठींयारें का कार्यक्रम धूमधाम से मनाया गया।

    सायं काल से शुरू हुआ गीत संगीत एवं नृत्य का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। अपार संख्या में मात्र शक्तियों ने‌ अपना सहयोग दिया।

    समिति की तरफ से अध्यक्ष श्री जितेंद्र मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में एवं उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू की देखरेख में सारा कार्यक्रम संपन्न हुआ। तत्पश्चात छठींयारे के भोजन का प्रसाद वितरण किया गया। मुख्य रूप से कार्यक्रम को संपन्न कराने में पंडित शुभम शास्त्री कामाख्या नारायण सिंह जयप्रकाश ओझा आरके पांडे राकेश राय आदि का सहयोग रहा। समिति के उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू ने सभी भक्तों एवं मातृ शक्तियों का आभार एवं धन्यवाद प्रकट किया। “जय बालाजी सरकार।”