बजट विश्लेषण: विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने वाला है बजट : अमित तिवारी,
पीपीगंज।(सत्य प्रकाश त्रिपाठी की विशेष बातचीत)
केंद्र सरकार द्वारा जारी किए बजट 2025- 26 को लेकर जिस प्रकार मध्यम वर्गीय और टैक्स पेयर को विशेष सहूलियत दी गयी है उसको लेकर आये जानते है विशेषग्यों की राय।
अमित तिवारी बताते है कि कुल ₹47.16 लाख करोड़ का व्यय अनुमानित किया गया है, जिसमें ₹10.18 लाख करोड़ का पूंजीगत व्यय शामिल है। सरकार ने इस वर्ष के लिए ₹31.47 लाख करोड़ कुल प्राप्ति का अनुमान लगाया है, जिसमें ₹25.57 लाख करोड़ की टैक्स प्राप्ति है।
इस बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे को 4.8% करने का लक्ष्य रखा है, और अगले साल 4.4,% तक इसे कम करने का लक्ष्य रखा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार आर्थिक प्रगति के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के प्रतिबद्ध है।
यह बजट विकसित भारत के नींव की संकल्पना पर टिका है। सरकार ने इस मूल मंत्र के साथ कि “देश केवल वहां की मिट्टी से नहीं बल्कि वहां के लोगों से बनता है” यह बजट प्रस्तुत किया है।
यह बजट गरीब,युवा,अन्नदाता और नारी के विकास को ध्यान में रखकर कई प्रावधान लेकर आया है।
कृषि क्षेत्र के विकास के लिए प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना को प्रारंभ किया गया है जिसके माध्यम से देश के 100 जिलों और 1.7 करोड़ किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। किसान क्रेडिट कार्ड के तहत दी जाने वाली अल्पकालिक ऋण राशि को बढ़ाकर 5 लाख किया गया है जिसका लाभ 7.7 करोड़ किसानों, फिशरमैन तथा दुग्धोत्पादकों को मिलेगा। बिहार में मखाना बोर्ड बनाने सहित विभिन्न प्रावधान कृषि और कृषकों के सुधार हेतु किए गए है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र के विकास के लिए इस क्षेत्र में किए जाने वाले निवेश मापदंड को बदला गया है। अब तक 1 करोड़ तक निवेश वाले क्षेत्र को सुक्ष्म में रखा जाता था जिसे अब 2.5 करोड़ तथा लघु के लिए निर्धारित निवेश सीमा 10 करोड़ को बढ़ाकर 25 करोड़ तथा मध्यम उद्योग के लिए निवेश सीमा 50 से बढ़ाकर 125 करोड़ कर दिया गया है।
विनिर्माण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के निर्माण, कुशल श्रमिकों की व्यवस्था सहित भारत में व्यवसाय को आसान बनाने की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखा गया है।
लोगों की जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए देश के हर जिला अस्पताल में डे केयर कैंसर इकाई की स्थापना, आंगनवाडी केंद्रों के माध्यम से हर व्यक्ति तक पोषण पहुंचाने सहित विभिन्न प्रावधान किए गए है।
लोगों की आय को बढ़ाने के लिए सरकार ने अप्रत्यक्ष तथा प्रत्यक्ष करो में छूट का प्रावधान इस बजट में किया है।
अप्रत्यक्ष करो में शामिल 36 जरूरी दवा को टैक्स के दायरे से बाहर किया गया है।
7 प्रकार के लगने वाले अप्रत्यक्ष करो को हटाया गया है।
प्रत्यक्ष कर में नए टैक्स रिजिम में टैक्स स्लैब में बदलाव कर 4 लाख तक की आय को कर मुक्त तथा 4 से 8 लाख तक की आय पर 5% तथा 8 से 12 लाख तक की आय पर 10% , 12 से 16 लाख की आय पर 15%, 16 से 20 लाख आय पर 20% , 20 से 24 लाख आय पर 25% तथा 24 लाख से ऊपर की आय पर 30% टैक्स लगाने की बात की गई है।
इस बजट में क्रमशः विभिन्न क्षेत्रों पर व्यय इस प्रकार किया गया है – रक्षा पर (491732 करोड़), ग्रामीण विकास(266817 करोड़), गृह मामले(233211 करोड़), कृषि और संबंधित क्षेत्र(171437 करोड़), शिक्षा (128650 करोड़) इत्यादि पर किया गया है।
यह बजट विभिन्न प्रावधानो के साथ विभिन्न चुनौतियां साथ लेकर आया है। शिक्षा पर प्रावधानित व्यय को पिछले वर्ष की तुलना में 20 करोड़ कम किया गया है। सरकार ने इस बजट के माध्यम से लगभग सभी क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास किया है परन्तु क्या यह प्रावधानित राशि विकसित भारत के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु पर्याप्त है? यह सबसे बड़ी चुनौती इस बजट के समक्ष है। बजट 2025-26 भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ हर वर्ग के लिए राहत और अवसरों का विस्तार करने वाला है। गरीब, युवा और महिलाओं के लिए कई योजनाओं के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में यह बजट एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह बजट विशेष रूप से मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यवसाय और छात्रों के लिए आशा की किरण है, जो इसे अपनी उम्मीदों को पूरा करने का एक अवसर मान रहे हैं।
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