बांसगांव। बांसगांव तहसील क्षेत्र में लंबे समय से रह रहे बांग्लादेशी मूल के संदिग्ध परिवारों के सत्यापन को लेकर स्थानीय संगठन ने प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र मंगलवार को उपजिलाधिकारी बांसगांव को संबोधित किया गया। हालांकि एसडीएम उस समय मीटिंग में व्यस्त थे, जिसके चलते उनका स्टेनो ज्ञापन को रिसीव किया।
प्रार्थना पत्र सौंपने पहुंचे महेंद्र तिवारी और सुशील सिंह ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि तहसील क्षेत्र के आसपास कई गांवों में वर्षों से बंगाली मूल के परिवार ,जैसे डॉक्टर बंगाली, बंगाली मिष्ठान, आदित्य भौतिक आदि रह रहे हैं, लेकिन उनकी वास्तविक पहचान, दस्तावेज़ और नागरिकता स्थिति को लेकर संदेह बना हुआ है।
नगर पंचायत क्षेत्र में भी कई बंगाली महिलाएँ घर-घर जाकर साफ-सफाई और बर्तन धोने का काम करती हैं, जबकि सड़कों के किनारे चाऊमीन, बर्गर और अन्य फास्ट फूड की दुकानें लगाने वाले युवकों के बारे में भी स्थानीय लोगों को कोई स्पष्ट पहचान संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा कुछ लोग भिखारी, दवा बेचने वाले, अस्थायी मजदूर या टेंट लगाकर दवा वितरण करने वालों के रूप में क्षेत्र में सक्रिय दिखाई देते हैं, जिनके बारे में किसी को कोई उचित जानकारी नहीं है। कई ऐसे परिवार 10–20 वर्षों से निवासरत बताये जाते हैं, लेकिन उनके दस्तावेज़ और राष्ट्रीयता की पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
महेंद्र तिवारी और सुशील सिंह ने कहा कि प्रशासन द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों पर सतर्क रहने के विज्ञापन जारी किए जाते हैं, लेकिन क्षेत्र में रह रहे इन परिवारों का सत्यापन अब तक नहीं हुआ है, जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय है।
उन्होंने मांग की कि बांसगांव तहसील क्षेत्र में निवासरत सभी संदिग्ध बंगाली/बांग्लादेशी मूल के परिवारों, सड़क किनारे दुकान लगाने वालों, फेरी करने वालों और बाहरी व्यक्तियों का विधिवत सर्वेक्षण कर उनकी पहचान व दस्तावेज़ों का सत्यापन जल्द कराया जाए।
ज्ञापन स्वीकार किए जाने के बाद अब प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी, इसे लेकर क्षेत्रवासियों में उत्सुकता बनी हुई है।
Leave a Reply