कल रविवार को देश के सबसे बुजुर्ग फाइटर पायलट रह चुके स्क्वाड्रन लीडर दिलीप सिंह मजीठिया की प्रथम पुण्यतिथि सरदार नगर में उनके परिजनों (मजीठिया परिवार) के द्वारा उनकी याद में मनाई गई, इस अवसर पर मजीठिया परिवार से किरण संधू, गुरप्रीत संधू, इंदर प्रताप अकोई, गुरप्रीत कौर मजीठिया, मीरा अकोई, ईशा अकोई, रायदेव ओकाई, शिवजीत सिंह मजीठिया, सुखदेव सिंह मजीठिया, फतेह सिंह मजीठिया ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें याद किया।
इस अवसर तीन दिनों की प्रार्थना सभा के साथ ही लंगर का भी आयोजन किया गया था, जिसमें 1000 से ज्यादा लोगों ने भोजन किया।
मजीठिया साहब के चाहने वालों के साथ ही क्षेत्र की सम्मानित जनता ने सैकड़ो की तादाद में उपस्थित होकर उन्हें भावभिनी श्रद्धांजलि दी साथ ही उनके द्वारा किए गए जनकल्याणकारी कार्यों को भी याद किया, इनमें क्षेत्र के गांवों के ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, बीजेपी के नेता दीपक जायसवाल व गुड्डू जायसवाल एवं चौरी – चौरा के विधायक इंजीनियर सरवन निषाद भी शामिल थे।
स्वर्गीय दिलीप सिंह मजीठिया ने दूसरे विश्व युद्ध के अवसर पर न केवल अपनी बहादुरी का लोहा मनवा दिया बल्कि नेपाल के दुर्गम रन वे पर भी अपने हवाई कौशल को दिखलाते हुए अपने प्लेन को लैंड किया। आज उसी स्थान पर नेपाल में एयरपोर्ट बना हुआ है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी दिलीप सिंह मजीठिया न केवल एक बहादुर सैनिक थे बल्कि एक सजग और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता और प्रगतिशील उद्योगपति भी थे। वें अपनी मातृभूमि और वतन के लोगों से प्यार करते थे। इसीलिए उन्होंने एक पिछड़े हुए क्षेत्र में शिक्षा व उद्योग के महत्व को समझते हुए बहुत से स्कूल कॉलेजों की स्थापना की, जिसमें एलपीके स्कूल बांसडीला, बुद्ध इंटर कालेज व बुद्ध डिग्री कॉलेज का नाम अग्रणी है, जिससे हजारों को शिक्षा मिली और यह शिक्षण संस्थान आज भी क्षेत्र में बच्चों को अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवा रहे हैं।
इसके साथ ही इन्होंने सरदार नगर में कई उद्योगों, जिनमें सैराया इंजीनियरिंग वर्क्स और सैराया स्टील जैसे ख्याति प्राप्त उद्योग का नाम प्रमुख है, कि स्थापना की, जिससे क्षेत्र की बेरोजगारी दूर हुई और हजारों लोगों को रोजगार मिला।
मजीठिया साहब एक स्वस्थ और संयमित खान पान और जीवन शैली का पालन करते थे, यहां तक की 101 वर्ष की उम्र तक वह गोल्फ के खेल के अच्छे खिलाड़ी रहे, गोल्फ उनका प्रिय खेल था ,गोल्फ के खेल के प्रति उनकी दीवानगी जीवन के अंतिम समय तक रही और वें घुड़सवारी के भी बहुत ही शौकीन थे।
उनके 103 वें जन्मदिवस के अवसर पर एयर फोर्स के अधिकारियों ने उनके घर पहुंच कर उनका सम्मान किया था।
जीवन के अंतिम दिनों में वह अपनी बेटी किरण संधू के साथ उत्तराखंड के रुद्रपुर में रह रहे थे और पिछले वर्ष उन्होंने यहीं पर अपनी अंतिम सांस भी ली थी।
दिलीप सिंह मजीठिया एक ऐसे परिवार से संबंध रखते थे, जिसने देश और समाज की अप्रतिम सेवा की है। मजीठिया परिवार ने देश सेवा के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज व गोरखपुर एयरपोर्ट तथा और भी बहुत से सामाजिक कार्यों के लिए अपनी जमीनों का दान किया हैं एवं आवश्यकता होने पर आर्थिक सहायता भी की हैं।
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