महिला तस्कर खुसफुसाती हैं- “ऑर्डर दो…” ,फिर मंडी पहुंच जाती है चीन के लहसुन की बड़ी खेप

महिला तस्कर खुसफुसाती हैं- “ऑर्डर दो…” ,फिर मंडी पहुंच जाती है चीन के लहसुन की बड़ी खेप,

गोरखपुर: महानगर के साहबगंज मंडी में नेपाल से सटे इलाकों से चीन के लहसुन की सप्लाई हो रही है। महराजगंज बड़ा केंद्र है। सिद्धार्थनगर सीमा की ओर से भी तस्करी हो रही है। सोमवार को मंडी की करीब आधी दुकानों पर चीन का लहसुन बिक रहा था। दुकानों पर देसी और चीनी दोनों लहसुन रखा था। चीन का लहसुन बेचने वाले एक व्यापारी ने बताया कि यह साइज में बड़ा होता है और इसको छीलना भी आसान है।

मंडी में चीन वाला लहसुन धड़ल्ले से बिक रहा है। अपने फायदे के लिए धंधेबाज आपकी सेहत से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। नेपाल से होकर आ रहे इस लहसुन की धंधेबाजी के नेटवर्क में महिलाएं भी शामिल हैं। ये महिलाएं झोलों में सैंपल लेकर मंडी में पहुंच रही हैं। वे कहती हैं- बड़ी खेप का ऑर्डर दो..। ऑर्डर देते ही प्राइवेट गाड़ी से लहसुन पहुंच जाएगी।

साहबगंज मंडी में नेपाल से सटे इलाकों से चीन के लहसुन की सप्लाई हो रही है। महराजगंज बड़ा केंद्र है। सिद्धार्थनगर सीमा की ओर से भी तस्करी हो रही है। सोमवार को मंडी की करीब आधी दुकानों पर चीन का लहसुन बिक रहा था। दुकानों पर देसी और चीनी दोनों लहसुन रखा था। चीन के लहसुन को बेचने वाले एक व्यापारी ने बताया कि यह साइज में बड़ा होता है और इसको छीलना भी आसान है। देखने में यह साफ-सुथरा लगता है और सस्ता भी है, जिससे आसानी से बिक जाता है। चीन का लहसुन जल्दी खराब भी नहीं होता। वहीं, देसी लहसुन महंगा होने की वजह से जल्दी नहीं बिकता।

सूत्रों ने बताया कि चीन का लहसुन चोरी-छिपे मंडी में पहुंचाया जाता है। नेपाल बॉर्डर से सटे इलाकों की रहने वाली महिलाएं एक झोले में करीब 10 से 15 किलो लहसुन लेकर आती हैं। वे नकहा तक ट्रेन से आती हैं, उसके बाद ऑटो से मंडी में आती हैं। फिर उसे दुकानों पर बेच देती हैं। उनको यह भी पूछ लेती हैं कि यदि ज्यादा मात्रा में लहसुन चाहिए तो सप्लाई भी हो जाएगी।
जो भी व्यापारी ऑर्डर देता है, उसके लिए सुबह के समय एक बड़ी कार में बोरे में लहसुन रखकर पहुंचा दिया जाता है। कार में माल लाने की वजह से किसी को शक भी नहीं होता और बोरे उतर जाते हैं।

मंडी में रोजाना आ रहीं चार से पांच गाड़ियां,
साहबगंज मंडी के एक व्यापारी ने बताया कि सुबह के समय चीन का लहसुन लेकर चार से पांच गाड़ियां आ रही हैं। एक गाड़ी में करीब ढाई से तीन क्विंटल तक लहसुन रहता है। इसको ये चुपके से उतारकर चले जाते हैं। आम कार देखकर किसी को इन पर शक भी नहीं होता।

80 से 100 रुपये के अंतर के चलते चीन का लहसुन देसी पर हावी,

साहबगंज मंडी की करीब 50 प्रतिशत दुकानों में यह लहसुन बेचा जा रहा है। मंडी में रोजाना करीब 12 क्विंटल चीन के लहसुन की खपत हो रही है। साहबगंज मंडी में यह लहसुन 240 से 260 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। देसी लहसुन 320 रुपये से 400 रुपये तक बिक रहा है।
80 से 100 रुपये सस्ता और साफ-सुथरा दिखने की वजह से लोग इसे जमकर खरीद भी रहे हैं। साहबगंज मंडी में चीन का लहसुन 240 से लेकर 260 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। यदि किसी को ज्यादा मात्रा में लेनी है तो चीन के लहसुन की कीमत 220 रुपये तक भी लग जा रही है।

चीन के लहसुन से बिक्री प्रभावित,
बाजार में चीन का लहसुन काफी आम हो गया है। इससे वे व्यापारी परेशान हैं, जो देसी लहसुन बेचते हैं। लहसुन के थोक कारोबारी पवन सिंह ने बताया कि चीन के लहसुन की वजह से मंडी में काम खराब हो गया है। देसी लहसुन की बिक्री काफी प्रभावित हो गई है।

खुलेआम ठेलों और फुटकर दुकानों पर चीन का लहसुन बेचा जा रहा है। चूंकि यह देसी लहसुन से सस्ता है, इसकी वजह से आसानी से बिक जा रहा है। ऐसे में देसी लहसुन बेचने वाले दुकानदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। चीन के लहसुन की बिक्री पर रोक लगाना चाहिए।

महेवा सहित विभिन्न जगहों से चीन का लहसुन मंगवाकर व्यापारी बेच रहे हैं। इस पर कमेटी का कोई अधिकार नहीं है। चीन का लहसुन कैसे आ रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए: उमेश मद्धेशिया, अध्यक्ष, साहबगंज किराना कमेटी,

 

प्रवीण कुमार अवस्थी, सचिव, महेवा :- “चीन के लहसुन की बिक्री के बारे में जानकारी नहीं है।हम लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम के साथ छापा मारा था, जिसमें चीन का लहसुन नहीं मिला था। अगर चीन का लहसुन मंडी में बिक रहा है तो खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जांच करेगी। जांच में दोषी पाए जाने पर मंडी द्वारा फर्म का लाइसेंस निरस्त कर उसपर कार्रवाई की जाएगी। “

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